Shreeramvanyatra

Shreeramvanyatra भगवान राम के वनगमन तीर्थो के बारे में संपूर्ण जानकारी I

24/02/2026
महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ।भगवान शिव माता पार्वती आप पर अपनी कृपा सदैव बनाए रखें।
15/02/2026

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ।
भगवान शिव माता पार्वती आप पर अपनी कृपा सदैव बनाए रखें।

प्राचीन समय में चित्रभानु नाम का एक शिकारी रहता था। वह जंगल में शिकार करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। कर्ज न चुका...
15/02/2026

प्राचीन समय में चित्रभानु नाम का एक शिकारी रहता था। वह जंगल में शिकार करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। कर्ज न चुका पाने के कारण एक साहूकार ने उसे शिव-मठ में बंदी बना लिया। संयोग से उसी दिन शिवरात्रि थी। मठ में बंद रहते हुए उसने शिव भक्ति से जुड़ी बातें सुनीं और व्रत कथा भी उसके कानों में पड़ी। संध्या के समय में साहूकार ने उसे बुलाकर कर्ज चुकाने को कहा। शिकारी ने अगले दिन पूरा ऋण लौटाने का वचन दिया। साहूकार ने उसे छोड़ दिया। भूख और प्यास से व्याकुल शिकारी शिकार की तलाश में जंगल की ओर निकल पड़ा।
सूर्यास्त के समय वह एक जलाशय के पास पहुंचा। वहीं बेल के पेड़ पर चढ़कर उसने मचान बना ली। उसे नहीं पता था कि उसी पेड़ के नीचे शिवलिंग स्थित है, जो सूखे बेलपत्रों से ढका हुआ था। मचान बनाते समय उससे जो टहनियां टूटीं, वे नीचे शिवलिंग पर गिर पड़ीं। अनजाने में ही सही उसका शिवरात्रि का व्रत और उसकी पहले प्रहर की पूजा संपन्न हो गई।
रात्रि का पहला पहर बीतने पर एक गर्भिणी हिरणी वहां पानी पीने आई। शिकारी ने धनुष उठाया, लेकिन तभी उसके हाथ से कुछ पत्ते और जल की बूंदें फिर से नीचे शिवलिंग पर गिर पड़ीं। हिरणी ने दया की याचना करते हुए कहा कि वह प्रसव के बाद लौट आएगी। शिकारी का मन पिघल गया और उसने उसे जाने दिया। कुछ समय बाद दूसरी हिरणी आई। शिकारी ने फिर तीर साधा। इस बार भी बेलपत्र शिवलिंग पर गिर पड़े और दूसरे पहर की पूजा भी अनजाने में पूरी हो गई। हिरणी ने अपने प्रिय से मिलकर लौटने का वचन दिया। शिकारी ने उसे भी जीवनदान दे दिया।
रात्रि के अंतिम भाग में तीसरी हिरणी अपने बच्चों के साथ आई। शिकारी ने उसे भी मारने का विचार किया, लेकिन मृगी बोली मैं इन बच्चों को इनके पिता के हवाले करके लौट आऊंगी। इस समय मुझे मत मारो। मां की ममता देखकर उसका हृदय द्रवित हो उठा। उसने तीसरी हिरणी को भी जाने दिया। इस दौरान बेलपत्र गिरते रहे और तीसरे पहर की पूजा भी अपने आप संपन्न हो गई।
भोर होने को थी कि एक हृष्ट-पुष्ट हिरण वहां आया। उसने विनम्र स्वर में कहा कि यदि शिकारी ने उसकी पत्नी और बच्चों को जीवित छोड़ा है, तो वह उसे भी कुछ समय के लिए जीवनदान दे दे। हिरण की सच्चाई और वचनबद्धता देखकर शिकारी का हृदय पूरी तरह बदल गया। उसने धनुष-बाण त्याग दिए। कुछ ही देर बाद वह हिरण वादे के अनुसार अपने पूरे परिवार के साथ लौट आया। उनकी सत्यनिष्ठा और आपसी प्रेम देखकर शिकारी की आंखों से आंसू बह निकले। उसने प्रण लिया कि वह जीवन में अब कभी हिंसा नहीं करेगा। उसी क्षण देवताओं ने उसकी परीक्षा को सफल माना।
तभी भगवान शिव प्रकट हुए और शिकारी को आशीर्वाद दिया। उसकी करुणा से प्रसन्न होकर उसे नया जीवन पथ अपनाने का वरदान मिला और उसे 'गुह' नाम प्रदान हुआ। यही गुह आगे चलकर भगवान श्रीराम का सखा बना। इस प्रकार महाशिवरात्रि के व्रत, रात्रि जागरण और अनजाने में हुई पूजा ने एक कठोर हृदय वाले शिकारी को दयालु और धर्मपरायण बना दिया। ॐ नमः पार्वती पतये हर हर महादेव!

08/02/2026

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में यमुना जी के तट पर अवस्थित मुरका धाम में तापस हनुमान की एक विलक्षण प्रतिमा है । नृत्य मुद्रा में विराजमान हनुमान जी के ये विग्रह अत्यंत जागृत माने जाते हैं । पूजन में नियम निष्ठा में कोई चूक हो जाये तो पुजारी को कठोर दंड भुगतना पड़ता है । ऐसे में कोई पुजारी लंबे समय तक यहां टिक नहीं पाता है ।

हनुमान जी की इस प्रतिमा के बारे में रहस्यात्मक विवरण ये प्राप्त हुआ है कि यहां गुप्त रूप से भगवान राम और हनुमान जी का प्रथम मिलन हुआ था ।इस धाम का मुरका नाम भी विशिष्ट है ।

मुरकाना का अर्थ है वापस भेजना। भरद्वाज ऋषि ने चार शिष्य श्रीराम को मार्ग बताने के लिए साथ भेजे थे। श्रीराम ने वे चारों शिष्य यहाँ से वापस मुरकाये थे। हनुमान जी की नृत्य मुद्रा में एकमात्र मूर्ति यहाँ देखी गयी है जो मानस में बताये एक तापस के स्वरूप से पूर्णतः मेल खाती है।

ग्रंथ उल्लेख

मानस 2/108/2 2/109/4 से 2/210/3 तक।

आगे का मार्ग

तापस हनुमान से दशरथ घाट नेउर कुमारद्वयः- मुरका-छिऔलहा-मऊ- जठवारा-नेउर-दशरथ घाट- राम नगर कुमारद्वय। 44 कि.मी.

https://www.shriramvanyatra.org/2-25-tapas-hanuman-murkadham-chitrakoot/

कहा जाता है कि एक बार नीमकरौली महाराज जी सरयू नदी के तट से होकर यात्रा कर रहे थे।उस समय सरयू का प्रवाह तेज था और ठंड भी ...
02/02/2026

कहा जाता है कि एक बार नीमकरौली महाराज जी सरयू नदी के तट से होकर यात्रा कर रहे थे।

उस समय सरयू का प्रवाह तेज था और ठंड भी काफी थी। नदी के किनारे एक गरीब वृद्ध बैठा काँप रहा था उसके पास न वस्त्र थे, न भोजन। लोग उसे देखकर भी आगे बढ़ जाते थे।

महाराज जी ने जैसे ही उस वृद्ध को देखा, तुरंत रुक गए। उन्होंने अपने साथ चल रहे शिष्यों से कहा, देखो,भगवान यहाँ ठिठुर रहे हैं।

शिष्य असमंजस में पड़ गए। किसी ने कहा, महाराज, यह तो साधारण व्यक्ति है।

महाराज जी मुस्कुराए और बोले, जो हर प्राणी में राम को नहीं देखता, वह राम को कैसे पाएगा महाराज जी ने अपने ही कंबल उस वृद्ध को ओढ़ा दिए और शिष्यों से भोजन मँगवाकर उसे खिलाया।

कहते हैं, जैसे ही वृद्ध ने भोजन किया और कंबल ओढ़ा,उसके चेहरे पर अद्भुत तेज़ आ गया। कुछ ही क्षणों में वह व्यक्ति अदृश्य हो गया।

शिष्य घबरा गए। तब महाराज जी ने शांत स्वर में कहा, सरयू के तट पर राम की लीला सदा चलती रहती है।

करुणा ही सबसे बड़ा चमत्कार है। उस दिन के बाद शिष्यों ने देखा कि सरयू तट पर ध्यान करने से महाराज जी की भक्ति और भी गहरी हो जाती थी।

वे कहा करते थे, सरयू माँ के जल में राम नाम बहता है।

महाराज जी यह कहते थे कि सेवा, करुणा और प्रेम यही सच्ची साधना है। तीर्थ स्थानों का महत्व तभी है जब वहाँ जाकर हमारा हृदय कोमल हो

प्रभु श्रीराम नाम के उच्चारण से जीवन में सकारात्क ऊर्जा का संचार होता है। जो लोग ध्वनि विज्ञान से परिचित हैं वे जानते है...
25/01/2026

प्रभु श्रीराम नाम के उच्चारण से जीवन में सकारात्क ऊर्जा का संचार होता है। जो लोग ध्वनि विज्ञान से परिचित हैं वे जानते हैं कि 'राम' शब्द की महिमा अपरम्पार है। जब हम 'राम' कहते हैं तो हवा या रेत पर एक विशेष आकृति का निर्माण होता है। उसी तरह चित्त में भी विशेष लय आने लगती है। जब व्यक्ति लगातार 'राम' जप करता रहता है तो रोम-रोम में प्रभु श्रीराम बस जाते हैं। उसके आसपास सुरक्षा का एक मंडल बनना तय समझो। प्रभु श्रीराम के नाम का असर जबरदस्त होता है।

महिमा जासु जान गनराऊ। प्रथम पूजिअत नाम प्रभाऊ॥2॥भावार्थ:- जो महामंत्र है, जिसे महेश्वर श्री शिवजी जपते हैं और उनके द्वार...
24/01/2026

महिमा जासु जान गनराऊ। प्रथम पूजिअत नाम प्रभाऊ॥2॥
भावार्थ:- जो महामंत्र है, जिसे महेश्वर श्री शिवजी जपते हैं और उनके द्वारा जिसका उपदेश काशी में मुक्ति का कारण है तथा जिसकी महिमा को गणेशजी जानते हैं, जो इस 'राम' नाम के प्रभाव से ही सबसे पहले पूजे जाते हैं॥

रामसेतु के निर्माण के समय हर पत्थर पर राम नाम लिखा जा रहा था और हर कोई राम नाम का जयघोष कर रहा था जिसके चलते राम का काम ...
22/01/2026

रामसेतु के निर्माण के समय हर पत्थर पर राम नाम लिखा जा रहा था और हर कोई राम नाम का जयघोष कर रहा था जिसके चलते राम का काम बहुत ही आसान हो गया। राम के नाम लिखे पत्‍थर जब तेरने लगे तो प्रभु श्रीराम भी आश्चर्य में पड़कर सोचने लगे।

उन्होंने सोचा की जब मेरे नाम लिखे पत्‍थर तैरने लगे है तो यदि मैं कोई पत्‍थर फेंकता हूं समुद्र में तो उसे तेरना चाहिए। मन में यही विचार करके उन्होंने भी एक पत्थर उठा लिया जिस पर राम का नाम नहीं लिथा था और उसे समुद्र में फेंक दिया, लेकिन वह पत्‍थर डूब गया। भगवान श्री राम आश्चर्य में पड़ गए कि आखिर ऐसा क्यों हुआ?

दूर खड़े हनुमान ने यह सब देख रहे थे और तब उन्होंने प्रभु श्रीराम के मान की बात जानकर उनके पास पहुंचे और कहने लगे कि हे प्रभु! आप किस दुविधा में हैं?

इस पर श्री राम जी कहने लगे कि हे हनुमान! मेरे नाम के पत्थर तैर रहे हैं लेकिन जब मैंने अपने हाथ से वह पत्थर फेंका तो वह डूब गया।

प्रभु की इस भोलेपन से कही गई बात पर बल बुद्धि के दाता हनुमानजी ने कहा कि हे प्रभु! आपके नाम को धारण कर तो सभी अपने जीवन को पार लगा सकते हैं, परंतु जिसे आपन स्वयं त्याग रहे हैं, उसे डूबने से कोई कैसे बचा सकता है?

रामचरित मानस में तुलसीदासजी ने राम नाम की महिमा का कई जगहों पर वर्णन किया है-  ''रामनाम कि औषधि खरी नियत से खाय,अंगरोग व...
22/01/2026

रामचरित मानस में तुलसीदासजी ने राम नाम की महिमा का कई जगहों पर वर्णन किया है-

''रामनाम कि औषधि खरी नियत से खाय,
अंगरोग व्यापे नहीं महारोग मिट जाये।''

अर्थात: राम नाम का जप एक ऐसी औषधि के समान है, जिसे अगर सच्चे हृदय से जपा जाए तो सभी आदि-व्याधि दूर हो जाती हैं, मन को परम शांति मिलती है।

वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस, जबलपुर में पूजनीय डॉ. राम अवतार जी की गरिमामयी सहभागिता हम सभी के लिए अत्यंत गौरव का विषय रही।...
21/01/2026

वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस, जबलपुर में पूजनीय डॉ. राम अवतार जी की गरिमामयी सहभागिता हम सभी के लिए अत्यंत गौरव का विषय रही।
इस पावन आयोजन में उन्हें विशेष आमंत्रण पर आमंत्रित किया गया था, जहाँ उन्होंने श्रीराम के आदर्शों, रामायण के वैश्विक प्रभाव और मानवीय मूल्यों पर अपने अमूल्य विचार साझा किए।

उनकी उपस्थिति ने सम्मेलन को आध्यात्मिक ऊर्जा, ज्ञान और प्रेरणा से भर दिया। ऐसे विद्वान और संत पुरुष का सान्निध्य मिलना वास्तव में सौभाग्य की बात है।

राम नाम का इन दो अक्षर में ही पूरी रामायण है और पूरा शास्त्र है। पुराणों में लिखा है कि ज्ञान, कर्म, ध्यान, योग, तप आदि ...
21/01/2026

राम नाम का इन दो अक्षर में ही पूरी रामायण है और पूरा शास्त्र है। पुराणों में लिखा है कि ज्ञान, कर्म, ध्यान, योग, तप आदि सभी कलयुग में व्यर्थ सिद्ध होंगे परंतु राम नाम का जप ही लोगों को भवसागर से पार ले जाने वाला सिद्ध होगा। वेद, पुराण और अन्य शास्त्रों से भी बढ़कर है दो अक्षरों वाला राम का नाम। राम नाम के दो सुंदर अक्षर सावन-भादो के महीने हैं। इस नाम की ही महिमा है कि जिसे सभी देवी और देवता जपते रहते हैं।

राम नाम —जब मन अशांत हो,जब रास्ते धुंधले लगें,जब भीतर की शक्ति कमजोर महसूस हो—बस एक नाम जपिए… राम 🙏राम जाप केवल शब्द नही...
20/01/2026

राम नाम —जब मन अशांत हो,
जब रास्ते धुंधले लगें,
जब भीतर की शक्ति कमजोर महसूस हो—
बस एक नाम जपिए… राम 🙏

राम जाप केवल शब्द नहीं,
यह मन की सफ़ाई है,
कर्मों का शुद्धिकरण है,
और आत्मा का जागरण है।

हर “राम” के साथ
डर पिघलता है,
विश्वास गहरा होता है,
और जीवन में संतुलन लौट आता है।

आज कुछ पल निकालिए…
आँखें बंद कीजिए…
गहरी साँस लीजिए…
और मन ही मन कहिए —
राम… राम… राम…

✨ शांति भी मिलेगी शक्ति भीऔर मार्गदर्शन भी

जय श्री राम 🚩

Address

Delhi

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Shreeramvanyatra posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share