श्री विशाल दुर्गा मन्दिर

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30/01/2026

बच्चे की नाभि कौन काटता था मतलब पिता से भी पहले कौन सी जाति बच्चे को स्पर्श करती थी ?

आपका मुंडन करते वक्त कौन स्पर्श करता था ?

शादी के मंडप में नाईं और धोबन भी होती थी। लड़की का पिता लड़के के पिता से इन दोनों के लिए साड़ी की मांग करता था।

वाल्मीकियनो के बनाये हुए सूप से ही छठ व्रत होता हैं ।

आपके घर में कुँए से पानी कौन लाता था?

भोज के लिए पत्तल कौन सी जाति बनाती थी?

किसने आपके कपडे धोये?

डोली अपने कंधे पर कौन मीलो मीलो दूर से लाता था और उनके जिन्दा रहते किसी की मजाल न थी की आपकी बिटिया को छू भी दे।

किसके हाथो से बनाये मिटटी की सुराही से जेठ में आपकी आत्मा तृप्त हो जाती थी ?

कौन आपकी झोपड़ियां बनाता था?

कौन फसल लाता था?

कौन आपकी चिता जलाने में सहायक सिद्ध होता हैं?

जीवन से लेकर मरण तक सब सबको कभी न कभी स्पर्श करते थे। और कहते है की छुआछूत था ??

यह छुआ छूत की बीमारी मुघलो और अंग्रेजों ने सनातन धर्म को तोड़ने के लिए एक षड्यंत्र के रूप में डाली थी।

जातियाँ थी, पर उनके मध्य एक प्रेम की धारा भी बहती थी, जिसका कभी कोई उल्लेख नहीं करता।

अगर जातिवाद होता तो राम कभी सबरी के झूठे बेर ना खाते, निषादराज, केवट, आदिवासी, वनवासी उनके सहायक न होते

जाति में मत टूटीये, धर्म से जुड़िये . . . देश जोड़िये। सभी को अवगत कराएं

सभी जातियाँ सम्माननीय हैं।

🙏🚩सत्य सनातन धर्म की जय🚩🙏

26/01/2026
बड़ी ख़बर : जगतगुरु शंकराचार्य को ऐतिहासिक समर्थन, सनातन परंपरा के पक्ष में पुरी पीठ का स्पष्ट संदेशसनातन परंपरा के लिए ...
22/01/2026

बड़ी ख़बर : जगतगुरु शंकराचार्य को ऐतिहासिक समर्थन, सनातन परंपरा के पक्ष में पुरी पीठ का स्पष्ट संदेश
सनातन परंपरा के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक क्षण है।
ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी को अब देश के सबसे प्रतिष्ठित मठों में से एक गोवर्धन मठ, पुरी का खुला और सशक्त समर्थन मिल गया है।
पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने स्पष्ट शब्दों में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अपना “लाडला” बताते हुए उनके निर्णयों को अकाट्य और सर्वमान्य करार दिया है।
पुरी पीठाधीश्वर ने कहा कि “शंकराचार्य के निर्णयों को सर्वोच्च न्यायालय तक ने मान्यता दी है” — यह बयान अपने आप में इस समर्थन की गंभीरता और महत्व को दर्शाता है।
सत्ता बनाम सनातन?
इस पूरे घटनाक्रम को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शंकराचार्य जैसे सर्वोच्च धर्मपद के विषय को किसी स्थानीय ज़मीन विवाद की तरह समझ लिया हो, जिसे पुलिस की लाठी और प्रशासनिक दबाव से सुलझाया जा सकता है।
यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि
जगतगुरु शंकराचार्य कोई साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि सनातन धर्म की नींव, वेदों के रक्षक और समाज की आत्मा हैं।
दोहरा मापदंड क्यों?
आज स्थिति यह है कि
कथा वाचकों और स्वयंभू धर्माचार्यों के लिए सत्ता का रवैया अलग दिखाई देता है
लेकिन जगतगुरु शंकराचार्य, जो सनातन परंपरा के सर्वोच्च स्तंभ हैं, उनके साथ व्यवहार बिल्कुल विपरीत नजर आता है
यह न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि सनातन धर्म के लिए घातक संकेत भी है।
बीजेपी के लिए चेतावनी की घंटी
सनातन परंपरा को मानने वाला एक बड़ा वर्ग अब यह सवाल पूछ रहा है कि—
क्या सत्ता का घमंड धर्म से बड़ा हो गया है?
यदि यही रवैया जारी रहा, तो आने वाले समय में वे लोग,
जो शंकराचार्य की परंपरा, उनके अस्तित्व और सनातन मूल्यों में आस्था रखते हैं,
बीजेपी से दूरी बनाते हुए नजर आ सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों और स्वयं बीजेपी के भीतर के जानकारों की यह चेतावनी पहले भी सामने आ चुकी है “जिस दिन बीजेपी कमजोर होगी, वह अपने ही लोगों और अपनी नीतियों के कारण होगी।”
आस्था बनाम अहंकार
जगतगुरु शंकराचार्य—
केवल संत नहीं
केवल धर्मगुरु नहीं
बल्कि धर्म, समाज और राष्ट्र की आत्मा के संरक्षक हैं
सत्ता में बैठे कुछ लोग यह भूल जाते हैं कि—
आप सत्ता में अस्थायी हैं, लेकिन जगतगुरु की परंपरा शाश्वत है।
यह प्रश्न अब पूरे देश के सनातन समाज के सामने है— जगतगुरु शंकराचार्य क्या हैं और सत्ता में बैठे लोग क्या हैं?

18/01/2026

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13/01/2026

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