21/04/2022
21 अप्रैल, 2022
केवल परमेश्वर ही हमें दर्द के रसातल से बचा सकते हैं। क्या आप कहते हैं आमीन?
यदि आप आमीन कहते हैं, तो कृपया हमारी ऑनलाइन फेलोशिप में शामिल होने के लिए "मैसेज भेजें" बटन और फिर "Get started" बटन पर क्लिक करें ताकि आप ,बचने का रास्ता खोज सकें।
आप कह सकते हैं:
जीवन का तनाव मुझे बेदम कर देता है।
बीमारी की पीड़ा मुझे असहनीय दर्द का एहसास कराती है।
मेरे प्रियजनों की मृत्यु मुझे गमगीन कर देती है।
……………
हम कहना चाहते हैं: कृपया दुखी न हों, क्योंकि हमारे पास ईश्वर है। जीवन के कष्टों से छुटकारा पाने के लिए केवल परमेश्वर ही हमें नेतृत्व कर सकते हैं।
यहाँ हम परमेश्वर के वचनों का एक अंश साझा करना चाहते हैं, "क्योंकि परमेश्वर का सार पवित्र है; इसका मतलब है कि केवल परमेश्वर के माध्यम से ही तुम जीवन के आर पार उज्जवल, एवं सही मार्ग पर चल सकते हो; केवल परमेश्वर के माध्यम से ही तुम जीवन के अर्थ को जान सकते हो, केवल परमेश्वर के माध्यम से ही तुम वास्तविक जीवन को जी सकते हो, सच्चाई को धारण कर सकते हो, सच्चाई को जान सकते हो, और केवल परमेश्वर के माध्यम से ही तुम सच्चाई से जीवन प्राप्त कर सकते हो। केवल स्वयं परमेश्वर ही तुम्हें बुराई से दूर रहने में सहायता कर सकता है और शैतान की हानि एवं नियन्त्रण से छुटकारा दे सकता है। परमेश्वर के अलावा, कोई भी व्यक्ति एवं कोई भी चीज़ तुम्हें कष्ट के सागर से नहीं बचा सकती है ताकि तुम आगे से कष्ट न सहो: इसे परमेश्वर के सार के द्वारा निर्धारित किया जाता है। केवल स्वयं परमेश्वर ही इतने निःस्वार्थ रूप से तुम्हें बचाता है, केवल परमेश्वर ही अंततः तुम्हारे भविष्य के लिए, तुम्हारी नियति के लिए और तुम्हारे जीवन के लिए ज़िम्मेदार है, और वह तुम्हारे लिए सभी हालातों को व्यवस्थित करता है। यह कुछ ऐसा है जिसे कोई सृजा गया या न सृजा गया प्राणी हासिल नहीं कर सकता है। क्योंकि परमेश्वर का सार पवित्र है; इसका मतलब है कि केवल परमेश्वर के माध्यम से ही तुम जीवन के आर पार उज्जवल, एवं सही मार्ग पर चल सकते हो; केवल परमेश्वर के माध्यम से ही तुम जीवन के अर्थ को जान सकते हो, केवल परमेश्वर के माध्यम से ही तुम वास्तविक जीवन को जी सकते हो, सच्चाई को धारण कर सकते हो, सच्चाई को जान सकते हो, और केवल परमेश्वर के माध्यम से ही तुम सच्चाई से जीवन प्राप्त कर सकते हो। केवल स्वयं परमेश्वर ही तुम्हें बुराई से दूर रहने में सहायता कर सकता है और शैतान की हानि एवं नियन्त्रण से छुटकारा दे सकता है। परमेश्वर के अलावा, कोई भी व्यक्ति एवं कोई भी चीज़ तुम्हें कष्ट के सागर से नहीं बचा सकती है ताकि तुम आगे से कष्ट न सहो: इसे परमेश्वर के सार के द्वारा निर्धारित किया जाता है। केवल स्वयं परमेश्वर ही इतने निःस्वार्थ रूप से तुम्हें बचाता है, केवल परमेश्वर ही अंततः तुम्हारे भविष्य के लिए, तुम्हारी नियति के लिए और तुम्हारे जीवन के लिए ज़िम्मेदार है, और वह तुम्हारे लिए सभी हालातों को व्यवस्थित करता है। यह कुछ ऐसा है जिसे कोई सृजा गया या न सृजा गया प्राणी हासिल नहीं कर सकता है।