16/06/2026
पानी दे दो मैं मर जाऊंगा… ये केतन के आखिरी शब्द थे। लेकिन केतन को पानी नहीं दिया, उसने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। केतन उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र के रहने वाले थे। केतन दलित समुदाय से थे। उनसे एक ‘अपराध’ हो गया। वो तथाकथित सवर्ण जाति की युवती से प्रेम कर बैठे, वह युवती भी टिहरी गढ़वाल क्षेत्र के खोलगढ़ की रहने वाली है। केतन मुंबई से लौटे और अपने घर पर आराम कर रहे थे, तभी उनकी प्रेमिका का फोन आ गया, उसने केतन को मिलने के लिए बुलाया। केतन अपने एक दोस्त को साथ लेकर प्रेमिका से मिलने जा पहुंचे, लेकिन ‘पकड़े’ गए।
युवती के परिजनों ने केतन और उनके दोस्त को रात भर जानवरों की तरह पीटा, केतन की जान चली गई, उनका दोस्त अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा है। केतन के पिता का कहना है कि उनके पास सुबह फोन आया कि अपने बेटे के ले जाओ, जब वो वहां पहुंचे तो केतन मर चुके थे। केतन के पिता बताते हैं कि केतन के साथ दरिंदिगी तमाम हदें पार की गईं हैं, उसके नाखून तक उखाड़ लिए गए।
केतन के परिवार को उत्तराखंड सरकार ने आठ लाख रुपये का मुआवज़ा देने का एलान किया है। लेकिन उत्तराखंड सरकार में इतनी हिम्मत नहीं है कि केतन के हत्यारों के घरों पर बुलडोज़र चला पाए? उत्तराखंड की पुलिस में भी इतनी हिम्मत नहीं है कि केतन के हत्यारों का जुलूस निकाल पाए या एनकाउंटर कर पाए? केतन पानी मांगते मांगते दुनिया से चला गए, लेकिन दरिंदों ने ज़रा भी तरस नहीं खाया। Brut ने केतन पर जो स्टोरी की है, उसकी शुरूआत ही केतन के इन शब्दों से होती है “पानी दे दो मैं मर जाऊंगा” केतन के हत्यारों का मक़सद सिर्फ उसे मारना नहीं था, बल्कि उसके साथ क्रूरता करके ‘दूसरों’ को यह ‘मैसेज’ भी देना था कि ‘प्रेम व्रेम, मोहब्बत वोहब्बत’ ये सब ‘अपने’ ही समाज में करो, कथित सवर्णों में नहीं। इस देश में सदियों से यही चला आ रहा है। यही कारण है कि 21वीं सदि में भी दलितों पर होने वाला अत्याचार थम नहीं पाया है। NCRB के 2023 के आंकड़े बताते हैं कि दलितों पर अत्याचार के 57 हज़ार से भी अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। मानवता को शर्मसार करने वाली इन गाथाओं से देश किस दिशा मे जा रहा है!