Vedic Dharm वैदिक धर्म

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हिन्दी भाषा शर्म की नहीं गर्व की भाषा है।वेदों में तीन देवियों का वर्णन आता है उनमें एक मातृभाषा भी है।हर हर महादेव 🚩🙏🚩
14/09/2023

हिन्दी भाषा शर्म की नहीं गर्व की भाषा है।
वेदों में तीन देवियों का वर्णन आता है उनमें एक मातृभाषा भी है।
हर हर महादेव 🚩🙏🚩

14/09/2023

बाल दयानंद और बाल गमपात्री का कथा - भाग १४

बाल दयानंद और बाल गमपात्री दोनों सम्राट युधिष्ठिर के पास आये, जो अश्वमेध कर रहे थे।

बाल दयानंदने अश्वमेध का महात्म्य समझाया जिसे सुनकर सम्राट युधिष्ठिरने कहां की कलियुग में तुम क्षत्रियो के मार्गदर्शक बनोगे।

बाल गमपात्रीने कहां की अश्वमेधयज्ञ में आपकी पत्नी द्रोपदी के घोडे के साथ सुलाईये और घोडे का लिंग उनकी योनिमें डलवाईये।

अपनी पत्नी के विषयमें यह अभद्र बात सुनकर सम्राट युधिष्ठिरने बाल गमपात्री को गेंद की तरह उछाला और भीम की तरफ फेंका।

भीमजी ने अपनी गदा से बाल गमपात्री को सीमारेखा के पार कर दिया।

बाल गमपात्री की इसी लीला से प्रेरणा लेकर कलियुगमें एक खेल का आविष्कार हुआ। जिसका नाम… खेर छोडो - हमे क्या लेनादेना।

अच्छा हुआ   में मोदी जी ने  "वसुधैव कुटुंबकम" का नारा दिया था अगर गलती से "कृणवन्तो विश्वमार्यम्" नारा दे देते तो अब तक ...
13/09/2023

अच्छा हुआ में मोदी जी ने "वसुधैव कुटुंबकम" का नारा दिया था अगर गलती से "कृणवन्तो विश्वमार्यम्" नारा दे देते तो अब तक तो सनातन विरोधी तेल छिड़क आग लेते।
हर हर महादेव 🚩🙏🚩

12/09/2023

बाल दयानंद और बाल गमपात्री कथा - भाग १३

बलरामजी का हल खाने के बाद भी बाल गमपात्रीने अपनी हरकते नहीं सुधारी।

वह रुक्मणिजी के पास जाकर कहने लगा की आपके पति की तो १६००० पत्नीया है। इन सब से इन्हें लाखो बच्चे है।

यह सुनकर माता रुक्मणि नाराज हो गयी और श्रीकृष्ण को बारबार कहने लगी की “आप तो मुझ से प्यार ही नहीं करते। आपने मुझे धोका दिया”।

यह सुनकर श्रीकृष्ण को बाल गमपात्री पर बहुत क्रोध आ गया। उन्होंने तुरंत अपना सुदर्शन निकाला और बाल गमपात्री को उपर बिठाके गोल गोल घुमाने लगे।

श्रीकृष्ण ने सोचा की इस प्रकार गोल गोल घुमाने से बाल गमपात्री की मन की गंदकी दूर हो जायेगी।

बाल गमपात्री की यह स्थिति से प्रेरणा लेकर भविष्यमें वैज्ञानिकोने यंत्र बनाया जिसमें गोलगोल घुमाकर कपडे धोये जाते है।

बाल गमपात्री की जय हो!

09/09/2023

पहले श्रीकृष्ण को चोर बनाया, फिर छलिया बनाया, लम्पट बनाया, रसिया बनाया, भोगी बनाया और अब कुत्ता बना दिया।
ऐसी भी क्या भक्तिभाव जो एक कुत्ते को श्रीकृष्ण बनाकर पेश कर रहे हो? कुछ तो शर्म करो अपने कर्मों पर पौराणिकों। अपने महापुरुषों पर रहम खाओ

घिन्न आने लगी है अब तो पौराणिकों से😡

08/09/2023

बाल दयानंद और बाल गमपात्री का कथा - भाग १२

बाल दयानंदने वेदोमें रहे विज्ञान को जानकर समययात्रायंत्र बनाया। उसमें बेठकर वह द्वापरयुगमें श्रीकृष्ण से मिलने आया।

श्रीकृष्ण उस समय बलरामजी के साथ थे। वह दोनों इस खोज से बहुत प्रसन्न हुए और बाल दयानंद को बहुत आशीर्वाद दिये।

जैसे रसोईमें कोकरोच घुसता है वैसे ही बाल गमपात्री भी चोरीछूपे वह यंत्रमें घुस गया था।

श्रीकृष्ण को देखकर वह कहनो लगा की आप वृंदावनमें राधाजी के साथ रासलीला करते थे। आधीरात को एक दूसरे के आलिंगनमें रहते थे, वस्त्र खींचते थे - आदि बहुत बकवास करने लगा।

अपनी राधामामी के बारेमें यह सब सुनकर बलरामजी को क्रोध आ गया और अपना हल उठाकर गमपात्री के एक विशेष स्थानमें डाल कर पटक दिया। तत्पश्चात् जैसे धोबी कपडे धोता है, वैसे ही बाल गमपात्री के धोने लगे।

इस धुलाई के बाद लोग बाल गमपात्री को धुलाईसम्राट भी कहने लगे।

योगेश्वर कृष्ण की जय हो। बाल दयानंद की जय हो। धुलाईसम्राट बाल गमपात्री की जय हो।

08/09/2023

बाल दयानंद और बाल गमपात्री की कथा - भाग ११

एक दिन महर्षि वशिष्ठने अपने दोनों शिष्य को बुलाकर पूछा की यजुर्वेद १३.५३ में जो “ये समुद्रान्निरखनन्देवास्तीक्ष्णाभिरभ्रिभिः” पद है, उसका क्या अर्थ है।

तब बाल गमपात्रीने कहां की “देवताओने तिक्ष्ण कुदाल द्वारा समुद्र को खोद डाला”।

बाल दयानंदने कहां की शतपथ ब्राह्मण अनुसार समुद्र मन है और वाणी कुदाल। विद्वानोने मनरूपी समुद्र से वाणीरूपी कुदाल द्वारा वेदविद्या खोज कर नीकाली है - यह अर्थ होगा।

बाल दयानंद का उत्तर सुनकर महर्षि वशिष्ठ बहुत प्रसन्न हुए और आशीर्वाद दिया की विश्व तुम्हे महर्षि मानेगा।

और बाल गमपात्री को शाप देते हुए कहा की भविष्यमें बच्चे तेरे पे ‘तु कुदाल से समुद्र खोद रहा हो’ - वैसे मीम बनाये जायेंगे।

08/09/2023

शतपथ ब्राह्मण ७.५.१.२१ अनुसार अन्न को विष्णु कहां गया है।

“अन्नमेष स विष्णुर्देवता” यह जो अन्न है वह विष्णु देवता है।

इस लिए अन्न का कभी निरादर नहीं करना चाहीए।

08/09/2023

हम बार बार कहते है की सारी प्रजा कश्यप की है। शतपथकारने इसका अर्थ समझाते हुए कहानी बतायी की प्रजापतिने कूर्मरूप धारण करके सारी प्रजा की रचना करी।

“यदसृजताकरोत्तद्यदकरोत्तस्मात्कूर्मः” अर्थात् प्रजापति सृष्टि अकरोत् (करी) इसी लिए कूर्म कहलाया। यह कूर्म ही कश्यप है। इसी लिए सारी प्रजा काश्यपी है।

अब प्रश्न यह होता है की यह कूर्म क्या है? इसका उत्तर देते हुए शतपथकार कहते है की “स यः कूर्मोऽसौ स आदित्यः” अर्थात् यह जो आदित्य सूर्य है, वही कूर्म है।

वही प्रजा का पालन करता है, इस लिए प्रजापति कहलाता है। और इस सूर्य के द्वारा पोषित होने के कारण प्रजा को काश्यपी कहते है।

08/09/2023

बाल दयानंद और बाल गमपात्री की कथा - भाग १०

एक दिन महर्षि वशिष्ठ के आश्रममें महर्षि विश्वामित्र आये। बाल दयानंदने उनहें प्रणाम किया और कर्म के द्वारा ब्राह्मणत्व प्राप्त करने पर बढाई दी।

ऋषि विश्वामित्र बहुत प्रसन्न हुए और आशीर्वाद दिया की तुम कलियुग में वैदिक कर्मनावर्णव्यवस्था का पुनरोद्धार करोगे।

तभी बाल गमपात्री वहां आ गया। वह बोलने लगा की ब्राह्मण का बेटा ही ब्राह्मण होता है। वर्ण जन्म से होता है, कर्म से नहीं।

यह सुनकर ऋषि विश्वामित्र को क्रोध आ गया और बाल गमपात्री को शाप देते हुआ कहां की भविष्य का तेरा गुरु वर्णसंकर होगा और उसका नाम संकराचार्य होगा।

यजुर्वेद के १३वे अध्याय के ५४ मन्त्र और आगे के मन्त्रमें वशिष्ठ ऋषि, भरद्वाज ऋषि, जमदग्निर्ऋषि, विश्वामित्रऋषि, विश्वकर्...
08/09/2023

यजुर्वेद के १३वे अध्याय के ५४ मन्त्र और आगे के मन्त्रमें वशिष्ठ ऋषि, भरद्वाज ऋषि, जमदग्निर्ऋषि, विश्वामित्रऋषि, विश्वकर्मऋषि आदि नाम आये है।

प्रथम दृष्टि से देखने पर लगता है की यह नाम किसी ऐतिहासिक व्यक्ति के है। इनके साथ जो ऋषि शब्द जोडा गया है, वह इस बात की पुष्टि करता है।

लेकिन वेद नित्य है और उसमें लौकिक मनुष्य का इतिहास नहीं - यह वैदिक सिद्धान्त है।

इन शब्दों का वास्तविक अर्थ शतपथकारने किया है।

१. “प्राणो वै वसिष्ठ ऋषिः” अर्थात् प्राण ही वशिष्ठ ऋषि है। शतपथकार आगे कहते है की सब से श्रेष्ठ होने के कारण भी उसे वशिष्ठ कहां जाता है।

२. “मनो वै भरद्वाज ऋषिः” अर्थात् मन ही भरद्वाज ऋषि है। वाज कहते है अन्न को। और जिसका अन्न है, उसका मन है। इस लिए भरद्वाज है।

३. “चक्षुर्वै जमदग्निर्ऋषिः” अर्थात् हमारे नेत्र ही जमदग्नि ऋषि है। इसी के द्वारा जगत् देखते है और मनन करते है। इस लिए जमदग्नि नाम मिला।

४. “श्रोत्रं वै विश्वामित्र ऋषिः” अर्थात् हमारे कान ही विश्वामित्र ऋषि है। इसी के द्वारा हम सब सुनते है और सब मित्र मिल जाते है।

५. “वाग्वै विश्वकर्मऋषिः” अर्थात् वाणी ही विश्वकर्म ऋषि है। इसी के द्वारा सारे कर्म होते है।

इस प्रकार शतपथकारने भी इन सारे नामों का योगिक अर्थ किया है। जो सिद्ध करता है की वेदोमें इतिहास नहीं है।

06/09/2023

बाल दयानंद और बाल गमपात्री की कथा - भाग ९

एक दिन महर्षि वशिष्ठने बाल गमपात्री और बाल दयानंद से प्रश्न पूछा की सर्प शब्द का वैदिक अर्थ क्या है?

बाल गमपात्रीने बोला की सर्प का अर्थ सांप होता है। और वेदोमें सांप को नमस्कार करने को कहां गया है।

बाल दयानंदने कहां की शतपथ ब्राह्मण ७.४.१.२५ अनुसार “इमे वै लोकाः सर्पाः” अर्थात् यह जो पृथ्वी आदि लोक है, वही सर्प है। वह अपने पास रही सारी वस्तुओं के साथ निरंतर चलते रहते है। “सर्वेण सर्पन्ति” इसी कारण से सर्प कहलाते है।

बाल दयानंद का उत्तर सुनकर महर्षि वशिष्ठ बहुत प्रसन्न हुए और बाल दयानंद को आशीर्वाद दिया की भविष्यमें तेरा वेदभाष्य सारा विश्व पढेगा।

और बाल गमपात्री को…. खेर आपको तो पता ही है उसका क्या हुआ होगा….

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