रामायण संदेश

रामायण संदेश रामायण हमें बहुत कुछ सिखाती है और इस पेज के माध्यम से हम आपको बताते हैं आपको रामायण की सीख...
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यह पृष्ठ भगवान राम और गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरित मानस में दिए गए उपदेशों को समर्पित है।

रामचरित मानस के बालकाण्ड में गोस्वामी तुलसीदास जी लिखते हैं

रामचरितमानस एहि नामा। सुनत श्रवन पाइअ बिश्रामा॥
मन करि बिषय अनल बन जरई। होई सुखी जौं एहिं सर परई॥

भावार्थ-इसका नाम रामचरितमानस है, जिसके सुनते ही कानों को शांति मिलती है। मनरूपी हाथी विषय रूपी दावानल में जल रहा है, वह यदि इस रामचरितमा

नस रूपी सरोवर में आ पड़े तो सुखी हो जाए।

जीवनी : अवध क्षेत्र के ब्राह्मण परिवार में जन्म होने से
बालकाल्य से ही रामचरित मानस की अमिट छाप मन पर रही।

सुनील कुमार मिश्रा एक कार्यकारी पेशेवर हैं, जिन्होंने विभिन्न बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ काम किया है, अपने करियर की शुरूआत उन्होने एक कंप्यूटर शिक्षक के रूप में की और रूचि न होने के कारण प्रबंधन क्षेत्र में अपने व्यवसायिक जीवन की नई शुरुआत की।

एक सामाजिक संचारक के रूप में वह जमीन से जुड़े हुए हैं और सामाजिक मुद्दों और आधुनिक जीवन शैली सहित आधुनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं पर लिखते हैं।

जीवन परिचय
सुनील कुमार मिश्रा
जन्म: 25 अगस्त
जन्म स्थान: मनकापुर, गोंडा, उत्तर प्रदेश (भारत)

इस पृष्ठ को बनाने का अभिप्राय हिंदू धर्म में निहित मिथकों को दूर करना है और जन-मानस को रामचरित मानस के बारे में जागरूक करना है ।

आज का वैदिक पंचांग संस्कृति, श्रद्धा और सनातन ज्योति से ओतप्रोत यह पंचांग आपको दिन के शुभ-अशुभ संकेत प्रदान करता है।01 म...
29/04/2026

आज का वैदिक पंचांग

संस्कृति, श्रद्धा और सनातन ज्योति से ओतप्रोत यह पंचांग आपको दिन के शुभ-अशुभ संकेत प्रदान करता है।

01 मई 2026 शुक्रवार को रात्रि 09:13 से 02 मई, शनिवार को रात्रि 09:45 तक व्यतिपात योग है।

व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है। वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।

सुख – सम्पदा और श्रेय की प्राप्ति - वैशाखी पूर्णिमा

01 मई 2026 शुक्रवार को वैशाखी पूर्णिमा है ।

वैशाखी पूर्णिमा को ‘धर्मराज व्रत’ कहा गया है | यह पूर्णिमा दान-धर्मादि के अनेक कार्य करने के लिए बड़ी ही पवित्र तिथि है | इस दिन गरीबों में अन्न, वस्त्र, टोपियाँ, जूते-चप्पल, छाते, छाछ या शर्बत , सत्संग के सत्साहित्य आदि का वितरण करना चाहिए | अपने स्नेहियों, मित्रों को सत्साहित्य, सत्संग की वीसीडी, डीवीडी, मेमोरी कार्ड आदि भेंट में दे सकते हैं |

इस दिन यदि तिलमिश्रित जल से स्नान कर घी, शर्करा और तिल से भरा हुआ पात्र भगवान विष्णु को निवेदन करें और उन्हीं से अग्नि में आहुति दें अथवा तिल और शहद का दान करें, तिल के तेल के दीपक जलाये, जल और तिल से तर्पण करें अथवा गंगादि में स्नान करें तो सब पापों से निवृत्त हो जाते हैं | यदि उस दिन एक समय भोजन करके पूर्ण-व्रत करें तो सब प्रकार की सुख-सम्पदाएँ और श्रेय की प्राप्ति होती है |

वैशाख मास की पूर्णिमा की कितनी महिमा है !! इस पूर्णिमा को जो गंगा में स्नान करता है , भगवत गीता और विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ करता है उसको जो पुण्य होता है उसका वर्णन इस भूलोक और स्वर्गलोक में कोई नहीं कर सकता उतना पुण्य होता है | ये बात स्कन्द पुराण में लिखी हुई है | अगर कोई विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ न कर सके तो गुरु मंत्र की १० माला जादा कर ले अपने नियम से |

आज के दिन को धर्ममय और सफल बनाने हेतु पंचांग अवश्य देखें। राम नाम स्मरण और श्रीहरि भक्ति में दिन का आरंभ करें।

यदि यह जानकारी ज्ञानवर्धक लगे, तो इसे अपने मित्रों और अन्य समूहों में अवश्य साझा करें।

श्रीहरि चरणों का दास - सुनील मिश्रा

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आज का वैदिक पंचांग संस्कृति, श्रद्धा और सनातन ज्योति से ओतप्रोत यह पंचांग आपको दिन के शुभ-अशुभ संकेत प्रदान करता है।वैशा...
29/04/2026

आज का वैदिक पंचांग

संस्कृति, श्रद्धा और सनातन ज्योति से ओतप्रोत यह पंचांग आपको दिन के शुभ-अशुभ संकेत प्रदान करता है।

वैशाख मास की अंतिम तीन तिथि का महत्व (29, 30 अप्रैल एवं 01 मई 2026)

स्कन्दपुराण के वैष्णव खण्ड के अनुसार
यास्तिस्रस्तिथयः पुण्या अंतिमाः शुक्लपक्षके ।।
वैशाखमासि राजेंद्र पूर्णिमांताः शुभावहाः ।।
अन्त्याः पुष्करिणीसंज्ञाः सर्वपापक्षयावहाः ।।
माधवे मासि यः पूर्णं स्नानं कर्त्तुं न च क्षमः ।।
तिथिष्वेतासु स स्नायात्पूर्ण मेव फलं लभेत् ।।
सर्वे देवास्त्रयोदश्यां स्थित्वा जंतून्पुनंति हि ।।
पूर्णायाः पर्वतीर्थैश्च विष्णुना सह संस्थिताः ।।
चतुर्दश्यां सयज्ञाश्च देवा एतान्पुनंति हि ।।

वैशाख मास की अंतिम तीन तिथि (त्रियोदशी, चतुर्दशी, पूर्णिमा) बहुत पवित्र और शुभकारक हैं उनका नाम "पुष्करिणी" है। ये सब पापों का क्षय करनेवाली हैं | जो सम्पूर्ण वैशाख मास में ब्राम्हमुहूर्त में पुण्यस्नान, व्रत, नियम आदि करने में असमर्थ हों, वह यदि इन ३ तिथियों में भी उसे करें तो वैशाख मास का पूरा फल पा लेता है |

ब्रह्मघ्नं वा सुरापं वा सर्वानेतान्पुनंति हि ।।
एकादश्यां पुरा जज्ञे वैशाख्याममृतं शुभम् ।।
द्वादश्यां पालितं तच्च विष्णुना प्रभविष्णुना ।।
त्रयोदश्यां सुधां देवान्पाययामास वै हरिः ।।
जघान च चतुर्दश्यां दैत्यान्देवविरोधिनः ।।
पूर्णायां सर्वदेवानां साम्राज्याऽऽप्तिर्बभूव ह ।।
ततो देवाः सुसंतुष्टा एतासां च वरं ददुः ।।
तिसृणां च तिथीनां वै प्रीत्योत्फुल्लविलोचनाः ।।
एता वैशाख मासस्य तिस्रश्च तिथयः शुभाः ।।
पुत्रपौत्रादिफलदा नराणां पापहानिदाः ।।
योऽस्मिन्मासे च संपूर्णे न स्नातो मनुजाधमः ।।
तिथित्रये तु स स्नात्वा पूर्णमेव फलं लभेत् ।।
तिथित्रयेप्यकुर्वाणः स्नानदानादिकं नरः ।।
चांडालीं योनिमासाद्य पश्चाद्रौरवमश्नुते ।।

पूर्वकाल में वैशाख शुक्ल एकादशी को शुभ अमृत प्रकट हुआ। द्वादशी को भगवान विष्णु ने उसकी रक्षा की। त्रयोदशी को उन श्री हरि ने देवताओं को सुधापान कराया। चतुर्दशी को देवविरोधी दैत्यों का संहार किया और पूर्णिमा के दिन समस्त देवताओं को उनका साम्राज्य प्राप्त हो गया। इसलिए देवताओं ने संतुष्ट होकर इन तीन तिथियों को वर दिया - “वैशाख की ये तीन शुभ तिथियाँ मनुष्यों के पापों का नाश करने वाली तथा उन्हें पुत्र-पौत्रादि फल देनेवाली हों। जो सम्पूर्ण वैशाख में प्रात: पुण्य स्नान न कर सका हो, वह इन तिथियों में उसे कर लेने पर पूर्ण फल को ही पाता है। वैशाख में लौकिक कामनाओं को नियंत्रित करने पर मनुष्य निश्चय ही भगवान विष्णु का सायुज्य प्राप्त कर लेता है।”

गीतापाठं तु यः कुर्यादंतिमे च दिनत्रये ।।
दिनेदिनेऽश्वमेधानां फलमेति न संशयः ।।

जो वैशाख मास में अंतिम ३ दिन ‘गीता’ का पाठ करता है, उसे प्रतिदिन अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है |

सहस्रनामपठनं यः कुर्य्याच्च दिनत्रये ।।
तस्य पुण्यफलं वक्तुं कः शक्तो दिवि वा भुवि ।।

जो इन तीनों दिन ‘श्रीविष्णुसहस्रनाम’ का पाठ करता है, उसके पुण्यफल का वर्णन करने में तो इस भूलोक व स्वर्गलोक में कौन समर्थ है | जो इन तीन दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करता है उसके पुण्यफल की व्याख्या करने में पृथ्वीलोक तथा स्वर्गलोक में कोई समर्थ नहीं।

सहस्रनामभिर्देवं पूर्णायां मधुसूदनम् ।।
पयसा स्नाप्य वै याति विष्णुलोकमकल्मषम् ।।

जो वैशाख पूर्णिमा को सहस्रनामों के द्वारा भगवान् मधुसूदन को दूध से स्नान कराता है वो वैकुण्ठ धाम को जाता है।

यो वै भागवतं शास्त्रं शृणोत्येतद्दिनत्रये ।।
न पापैर्लिप्यते क्वाऽपि पद्मपत्रमिवांभसा ।।

जो वैशाख के अंतिम ३ दिनों में ‘भागवत’ शास्त्र का श्रवण करता है, वह जल में कमल के पत्तों की भांति कभी पापों में लिप्त नहीं होता |

देवत्वं मनुजैः प्राप्तं कैश्चित्सिद्धत्वमेव च ।।
कैश्चित्प्राप्तो ब्रह्मभावो दिनत्रयनिषेवणात् ।।

इन अंतिम ३ दिनों में शास्त्र-पठन व पुन्य्कर्मों से कितने ही मनुष्यों ने देवत्व प्राप्त कर लिया और कितने ही सिद्ध हो गये | अत: वैशाख के अंतिम दिनों में स्नान, दान, पूजन अवश्य करना चाहिए |

आज के दिन को धर्ममय और सफल बनाने हेतु पंचांग अवश्य देखें। राम नाम स्मरण और श्रीहरि भक्ति में दिन का आरंभ करें।

यदि यह जानकारी ज्ञानवर्धक लगे, तो इसे अपने मित्रों और अन्य समूहों में अवश्य साझा करें।

श्रीहरि चरणों का दास - सुनील मिश्रा

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भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै।
28/04/2026

भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै।

आज का वैदिक पंचांग संस्कृति, श्रद्धा और सनातन ज्योति से ओतप्रोत यह पंचांग आपको दिन के शुभ-अशुभ संकेत प्रदान करता है।28 अ...
28/04/2026

आज का वैदिक पंचांग

संस्कृति, श्रद्धा और सनातन ज्योति से ओतप्रोत यह पंचांग आपको दिन के शुभ-अशुभ संकेत प्रदान करता है।

28 अप्रैल 2026 मंगलवार को भौम प्रदोष योग है । किसी को आर्थिक परेशानी या कर्जा हो तो भौम प्रदोष योग हो, उस दिन शाम को सूर्य अस्त के समय घर के आसपास कोई शिवजी का मंदिर हो तो जाए और ५ बत्ती वाला दीपक जलाये और थोड़ी देर जप करें :
ये मंत्र बोले :–
ॐ भौमाय नमः
ॐ मंगलाय नमः
ॐ भुजाय नमः
ॐ रुन्ह्र्ताय नमः
ॐ भूमिपुत्राय नमः
ॐ अंगारकाय नमः

और हर मंगलवार को ये मंगल की स्तुति करें:-
धरणी गर्भ संभूतं विद्युत् कांति समप्रभम |
कुमारं शक्ति हस्तं तं मंगलम प्रणमाम्यहम ||

29,30 अप्रैल व 01 मई को सत्कर्म सबका पुण्य देवता,तीर्थ यज्ञ व भगवान विष्णुजी अक्षय फल देगे।

श्रुकदेवजी राजा जनक से कहते हैं : ‘‘राजेन्द्र ! वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में जो अंतिम तीन पुण्यमयी तिथियाँ हैं – (29 अप्रैल से 01 मई तक) त्रयोदशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा । ये बडी पवित्र व शुभकारक हैं । इनका नाम ‘पुष्करिणी है, ये सब पापों का क्षय करनेवाली हैं । पूर्वकाल में वैशाख शुक्ल एकादशी को शुभ अमृत प्रकट हुआ । द्वादशी को भगवान विष्णु ने उसकी रक्षा की । त्रयोदशी को उन श्रीहरि ने देवताओं को सुधा-पान कराया । चतुर्दशी को देवविरोधी दैत्यों का संहार किया और पूर्णिमा के दिन समस्त देवताओं को उनका साम्राज्य प्राप्त हो गया ।

इसलिए देवताओं ने संतुष्ट होकर इन तीन तिथियों को वर दिया : ‘वैशाख की ये तीन शुभ तिथियाँ मनुष्यों के पापों का नाश करनेवाली तथा उन्हें पुत्र-पौत्रादि फल देनेवाली हों ।

जो संम्पूर्ण वैशाख में प्रातः पुण्यस्नान न कर सका हो, वह इन तिथियों में उसे कर लेने पर पूर्ण फल को ही पाता है । वैशाख में लौकिक कामनाओं को नियंत्रित करने पर मनुष्य निश्चय ही भगवान विष्णु का सायुज्य प्राप्त कर लेता है ।

आज के दिन को धर्ममय और सफल बनाने हेतु पंचांग अवश्य देखें। राम नाम स्मरण और श्रीहरि भक्ति में दिन का आरंभ करें।

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श्रीहरि चरणों का दास - सुनील मिश्रा

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आज का वैदिक पंचांग संस्कृति, श्रद्धा और सनातन ज्योति से ओतप्रोत यह पंचांग आपको दिन के शुभ-अशुभ संकेत प्रदान करता है।हर ए...
27/04/2026

आज का वैदिक पंचांग

संस्कृति, श्रद्धा और सनातन ज्योति से ओतप्रोत यह पंचांग आपको दिन के शुभ-अशुभ संकेत प्रदान करता है।

हर एकादशी पर श्री विष्णु सहस्रनाम या “राम रामेति…” मंत्र का पाठ करने से पुण्य मिलता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। एकादशी के दिन कुछ नियम बताए गए हैं जैसे बाल न कटवाना, चावल, साबूदाना और सेम का सेवन न करना, तथा आँवले के रस से स्नान करना पुण्यकारी माना गया है।

27 अप्रैल 2026 को मोहिनी एकादशी है, जिसका व्रत करने से बड़े-बड़े पापों का नाश होता है। 28 अप्रैल 2026 को भौम प्रदोष व्रत है, जो कर्ज मुक्ति के लिए विशेष माना गया है। इस दिन नमक और मिर्च का त्याग कर संध्या समय भगवान शिव की पूजा करने से लाभ मिलता है।

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष के अंतिम तीन दिन (29 अप्रैल से 1 मई) अत्यंत पुण्यदायक माने गए हैं। इन दिनों स्नान, व्रत, दान, गीता पाठ, विष्णु सहस्रनाम जप और भागवत श्रवण करने से पूरे वैशाख मास के बराबर फल मिलता है और व्यक्ति पापों से मुक्त होकर पुण्य का लाभ प्राप्त करता है।

आज के दिन को धर्ममय और सफल बनाने हेतु पंचांग अवश्य देखें। राम नाम स्मरण और श्रीहरि भक्ति में दिन का आरंभ करें।

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श्रीहरि चरणों का दास - सुनील मिश्रा

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आज का वैदिक पंचांग संस्कृति, श्रद्धा और सनातन ज्योति से ओतप्रोत यह पंचांग आपको दिन के शुभ-अशुभ संकेत प्रदान करता है। आज ...
23/04/2026

आज का वैदिक पंचांग

संस्कृति, श्रद्धा और सनातन ज्योति से ओतप्रोत यह पंचांग आपको दिन के शुभ-अशुभ संकेत प्रदान करता है।

आज के दिन को धर्ममय और सफल बनाने हेतु पंचांग अवश्य देखें। राम नाम स्मरण और श्रीहरि भक्ति में दिन का आरंभ करें।

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रामायण संदेश परिवार की ओर से आप सभी पाठकों को श्री गंगा सप्तमी की पावन पर्व की बधाई।आज 23 अप्रैल को गंगा सप्तमी का पावन ...
23/04/2026

रामायण संदेश परिवार की ओर से आप सभी पाठकों को श्री गंगा सप्तमी की पावन पर्व की बधाई।

आज 23 अप्रैल को गंगा सप्तमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। सनातन धर्म में गंगा स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के जाने-अनजाने में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का आगमन होता है। श्रद्धालु इस दिन माँ गंगा के साथ-साथ सूर्य देव, भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा कर पुण्य अर्जित करते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को माँ गंगा का प्राकट्य हुआ था। इसी कारण इस दिन को “जाह्नवी जयंती” के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि माँ गंगा ने ऋषि जाह्नु के कान से पुनः जन्म लिया था। यह दिन पूरी तरह से माँ गंगा को समर्पित होता है और श्रद्धालु इस अवसर पर स्नान, पूजा और दान करते हैं।

पंचांग के अनुसार इस वर्ष सप्तमी तिथि 22 अप्रैल की रात 10 बजकर 48 मिनट से प्रारंभ होकर 23 अप्रैल की रात 8 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर गंगा सप्तमी 23 अप्रैल को ही मनाई जा रही है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है, जबकि मध्यान्ह में पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

इस पावन अवसर पर कई शुभ योगों का भी निर्माण हो रहा है, जैसे गुरु पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग, जो इस दिन के महत्व को और अधिक बढ़ाते हैं। मान्यता है कि इन योगों में गंगा स्नान और पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सौभाग्य की वृद्धि होती है।

पौराणिक कथा के अनुसार राजा सगर के पुत्रों के उद्धार के लिए माँ गंगा का अवतरण हुआ था। गंगा के प्रचंड वेग को नियंत्रित करने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया और फिर पृथ्वी पर अवतरित किया। यही कारण है कि गंगा स्नान और भगवान शिव की पूजा इस दिन विशेष फलदायी मानी जाती है।

इस शुभ अवसर पर आप भी माँ गंगा का स्मरण करें, श्रद्धा से स्नान एवं पूजन करें और अपने जीवन को पवित्र बनाएं।

जय गंगा मैया।।🚩

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श्रीहरि चरणों का दास - सुनील मिश्रा

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आज का वैदिक पंचांग संस्कृति, श्रद्धा और सनातन ज्योति से ओतप्रोत यह पंचांग आपको दिन के शुभ-अशुभ संकेत प्रदान करता है।23 अ...
23/04/2026

आज का वैदिक पंचांग

संस्कृति, श्रद्धा और सनातन ज्योति से ओतप्रोत यह पंचांग आपको दिन के शुभ-अशुभ संकेत प्रदान करता है।

23 अप्रैल 2026 गुरुवार को वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के पावन अवसर पर गंगा सप्तमी, जिसे गंगा जयंती भी कहा जाता है, मनाई जाएगी। यह हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, क्योंकि इसी दिन मां गंगा की उत्पत्ति मानी जाती है। श्रद्धालु इस तिथि को बड़ी आस्था और भक्ति के साथ मनाते हैं।

गंगा जयंती के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा जी में स्नान करने से सात्त्विकता की प्राप्ति होती है और मनुष्य को पुण्य फल मिलता है। यह दिन पूरे भारत में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। अनेक धार्मिक ग्रंथों जैसे स्कन्दपुराण और वाल्मीकि रामायण में गंगा जी की उत्पत्ति और महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है।

भारतीय संस्कृति में गंगा नदी को केवल एक नदी नहीं, बल्कि देवी के रूप में पूजनीय माना गया है। गंगा के तट पर अनेक पवित्र तीर्थस्थल स्थित हैं और इसे भारत की सबसे पवित्र नदी के रूप में सम्मान दिया जाता है। ऐसी मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। लोग अपने जीवन के अंतिम समय में गंगा के तट पर रहना और मृत्यु के पश्चात अपनी अस्थियों का गंगा में विसर्जन करना मोक्ष प्राप्ति का मार्ग मानते हैं। गंगा घाटों पर पूजा, अर्चना और ध्यान का विशेष महत्व है।

गंगाजल को अत्यंत पवित्र और अमृत के समान माना गया है। प्रत्येक धार्मिक संस्कार में गंगाजल का होना शुभ और आवश्यक माना जाता है। मकर संक्रांति, कुंभ और गंगा दशहरा जैसे अनेक पर्व गंगा से जुड़े हुए हैं, जिनमें गंगा स्नान, दान और दर्शन का विशेष महत्व होता है। गंगा के तटों पर अनेक प्रसिद्ध मेलों का आयोजन भी होता है, जो भारत की सांस्कृतिक एकता को दर्शाते हैं। गंगा जी की महिमा में अनेक भक्ति ग्रंथों की रचना की गई है, जिनमें श्रीगंगासहस्रनामस्तोत्र और गंगा आरती अत्यंत लोकप्रिय हैं।

गंगा जी के जन्म से संबंधित कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार गंगा का उद्भव भगवान विष्णु के चरणों से हुआ, जब उनके चरणों को ब्रह्मा जी ने धोकर उस जल को अपने कमंडल में धारण किया। एक अन्य कथा के अनुसार भगवान शिव के संगीत से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु के शरीर से निकला पसीना ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल में संग्रह किया और उसी से गंगा का प्राकट्य हुआ। इन कथाओं से गंगा की दिव्यता और महिमा का बोध होता है।

शास्त्रों के अनुसार वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन ही गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओं में विराजमान हुईं, इसलिए इस दिन को गंगा जयंती या गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। वहीं, जिस दिन गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुईं, उसे ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। गंगा जयंती के दिन विधिपूर्वक पूजा और स्नान करने से रिद्धि-सिद्धि, यश और सम्मान की प्राप्ति होती है तथा पापों का नाश होता है। ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन गंगा पूजन करने से मांगलिक दोष से पीड़ित व्यक्तियों को विशेष लाभ मिलता है।

पुराणों के अनुसार गंगा का पृथ्वी पर अवतरण राजा सगर के साठ हजार पुत्रों के उद्धार के लिए हुआ था, जिन्हें कपिल मुनि के श्राप से भस्म होना पड़ा था। उनके उद्धार के लिए राजा भगीरथ ने कठोर तपस्या कर मां गंगा को प्रसन्न किया और उन्हें पृथ्वी पर लाकर अपने पूर्वजों का उद्धार कराया। इसी कारण गंगा को भागीरथी भी कहा जाता है।

आज के दिन को धर्ममय और सफल बनाने हेतु पंचांग अवश्य देखें। राम नाम स्मरण और श्रीहरि भक्ति में दिन का आरंभ करें।

यदि यह जानकारी ज्ञानवर्धक लगे, तो इसे अपने मित्रों और अन्य समूहों में अवश्य साझा करें।

श्रीहरि चरणों का दास - सुनील मिश्रा

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आज का वैदिक पंचांग संस्कृति, श्रद्धा और सनातन ज्योति से ओतप्रोत यह पंचांग आपको दिन के शुभ-अशुभ संकेत प्रदान करता है।23 अ...
22/04/2026

आज का वैदिक पंचांग

संस्कृति, श्रद्धा और सनातन ज्योति से ओतप्रोत यह पंचांग आपको दिन के शुभ-अशुभ संकेत प्रदान करता है।

23 अप्रैल 2026 को वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी का पावन दिन है, जिसे गंगा सप्तमी, शर्करा सप्तमी, कमल सप्तमी और निम्ब सप्तमी के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन को अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। इस वर्ष 23 अप्रैल को रात्रि 08:57 बजे से लेकर 24 अप्रैल के सूर्योदय तक गुरुपुष्यामृत योग भी रहेगा, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है।

इस शुभ अवसर पर प्रातः स्नान के समय जल में सफेद तिल मिलाकर भगवान का स्मरण करते हुए स्नान करना चाहिए। इसके बाद सूर्य भगवान की ओर मुख करके उन्हें और माँ गायत्री को प्रणाम करें। श्रद्धा भाव से “ॐ नमः सवित्रे” मंत्र का जप करें और सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करें। यह साधना जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और सकारात्मकता का संचार करती है।

वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन विशेष रूप से दीपक जलाते समय उसमें थोड़ी सी हल्दी अवश्य डालनी चाहिए। ऐसा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है। साथ ही, यदि संभव हो तो बरगद के पत्ते पर हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर में स्थापित करें, यह शुभता और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।

पद्म पुराण में वर्णित है कि इस दिन किया गया एक विशेष उपाय जीवन में धन और स्वास्थ्य दोनों की वृद्धि करता है। अगले दिन अपने हाथों से दूध और चावल की खीर बनाकर उसमें थोड़ा घी मिलाएं और श्रद्धा से किसी ब्राह्मण, साधु या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं। यदि ऐसा संभव न हो तो छोटी कन्याओं को भोजन कराना भी अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। यह सेवा भाव जीवन में ऐश्वर्य और आरोग्य प्रदान करता है।

इस दिन यदि कमल का फूल उपलब्ध हो तो जल से भरे पात्र में कमल डालकर सूर्य भगवान को अर्घ्य देना चाहिए। यदि कमल का फूल न मिले तो उसकी जगह अक्षत का प्रयोग किया जा सकता है। यह वैदिक परंपरा का एक सरल और प्रभावी विधान है।

भविष्योत्तर पुराण में इस दिन को निम्ब सप्तमी भी कहा गया है। इस दिन सूर्य भगवान को अर्घ्य देने के बाद नीम के कोमल पत्ते सेवन करने का विशेष महत्व बताया गया है। इससे शरीर के रोगों में राहत मिलती है और स्वास्थ्य में सुधार होता है। जो लोग लंबे समय से किसी रोग से परेशान हैं, वे श्रद्धा और विश्वास के साथ यह उपाय करें।

इस पावन दिन पर गुरु मंत्र का जप करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। श्रद्धा, विश्वास और सरल भाव से किए गए ये छोटे-छोटे उपाय जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।

आज के दिन को धर्ममय और सफल बनाने हेतु पंचांग अवश्य देखें। राम नाम स्मरण और श्रीहरि भक्ति में दिन का आरंभ करें।

यदि यह जानकारी ज्ञानवर्धक लगे, तो इसे अपने मित्रों और अन्य समूहों में अवश्य साझा करें।

श्रीहरि चरणों का दास - सुनील मिश्रा

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आज का वैदिक पंचांग संस्कृति, श्रद्धा और सनातन ज्योति से ओतप्रोत यह पंचांग आपको दिन के शुभ-अशुभ संकेत प्रदान करता है।23 अ...
21/04/2026

आज का वैदिक पंचांग

संस्कृति, श्रद्धा और सनातन ज्योति से ओतप्रोत यह पंचांग आपको दिन के शुभ-अशुभ संकेत प्रदान करता है।

23 अप्रैल 2026 गुरूवार को श्री गंगा सप्तमी (गंगा जयंती) है ।

जैसे मंत्रों में ॐकार, स्त्रियों में गौरीदेवी, तत्त्वों में गुरुतत्त्व और विद्याओं में आत्मविद्या उत्तम है, उसी प्रकार सम्पूर्ण तीर्थों में गंगातीर्थ विशेष माना गया है। गंगाजी की वंदना करते हुए कहा गया हैः

संसारविषनाशिन्यै जीवनायै नमोऽस्तु ते।
तापत्रितयसंहन्त्र्यै प्राणेश्यै ते नमो नमः।।

'देवी गंगे ! आप संसाररूपी विष का नाश करने वाली हैं । आप जीवनरूपा है। आप आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक तीनों प्रकार के तापों का संहार करने वाली तथा प्राणों की स्वामिनी हैं । आपको बार-बार नमस्कार है।'(स्कंद पुराण, काशी खं.पू. 27.160)

जिस दिन गंगा जी की उत्पत्ति हुई वह दिन गंगा जयंती (वैशाख शुक्ल सप्तमी) और जिस दिन गंगाजी पृथ्वी पर अवतरित हुई वह दिन 'गंगा दशहरा' (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी) के नाम से जाना जाता है। इन दिनों में गंगा जी में गोता मारने से विशेष सात्त्विकता, प्रसन्नता और पुण्यलाभ होता है। वैशाख, कार्तिक और माघ मास की पूर्णिमा, माघ मास की अमावस्या तथा कृष्णपक्षीय अष्टमी तिथि को गंगास्नान करने से भी विशेष पुण्यलाभ होता है।

माना गया है कि जो मनुष्य आँवले के फल और तुलसीदल से मिश्रित जल से स्नान करता है, उसे गंगा स्नान का फल मिलता है । (पद्म पुराण , उत्तर खंड)

आज के दिन को धर्ममय और सफल बनाने हेतु पंचांग अवश्य देखें। राम नाम स्मरण और श्रीहरि भक्ति में दिन का आरंभ करें।

यदि यह जानकारी ज्ञानवर्धक लगे, तो इसे अपने मित्रों और अन्य समूहों में अवश्य साझा करें।

श्रीहरि चरणों का दास - सुनील मिश्रा

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आज का वैदिक पंचांग संस्कृति, श्रद्धा और सनातन ज्योति से ओतप्रोत यह पंचांग आपको दिन के शुभ-अशुभ संकेत प्रदान करता है।20 अ...
20/04/2026

आज का वैदिक पंचांग

संस्कृति, श्रद्धा और सनातन ज्योति से ओतप्रोत यह पंचांग आपको दिन के शुभ-अशुभ संकेत प्रदान करता है।

20 अप्रैल 2026 सोमवार से ग्रीष्म ऋतु प्रारंभ ।

ग्रीष्म ऋतु में शरीर का जलीय व स्निग्ध अंश घटने लगता है । जठराग्नि व रोगप्रतिकारक क्षमता भी घटने लगती है । इससे उत्पन्न शारीरिक समस्याओं से सुरक्षा हेतु नीचे दी गयी बातों का ध्यान रखें–

१] ग्रीष्म ऋतु में जलन, गर्मी, चक्कर आना, अपच, दस्त, नेत्रविकार ( आँख आना / Conjunctivitis ) आदि समस्याएँ अधिक होती हैं । अत: गर्मियों में घर में बाहर निकलते समय लू से बचने के लिए सिर पर कपड़ा बाँधे अथवा टोपी पहने तथा एक गिलास पानी पीकर निकलें । जिन्हें दोपहिया वाहन पर बहुत लम्बी मुसाफिरी करनी हो वे जेब में एक प्याज रख सकते हैं ।

२] उष्ण से ठंडे वातावरण में आने पर १० – १५ मिनट तक पानी न पियें । धूप में से आने पर तुंरत पूरे कपड़े न निकालें, कूलर आदि के सामने भी न बैठें । रात को पंखे, एयर – कंडिशनर अथवा कूलर की हवा में सोने की अपेक्षा हो सके तो छत पर अथवा खुले आँगन में सोयें । यह सम्भव न हो तो पंखे, कूलर आदि की सीधी हवा न लगे इसका ध्यान रखें ।

३] इस मौसम में दिन में कम – से – कम ८ – १० गिलास पानी पियें । प्रात: पानी – प्रयोग ( रात का रखा हुआ आधा से डेढ़ गिलास पानी सुबह सूर्योदय से पूर्व पीये ) भी । पानी शरीर के जहरी पदार्थों(toxins) को बाहर निकालकर त्वचा को ताजगी देने में मदद करता है ।

४] मौसमी फल या उनका रस व ठंड़ाई, नींबू की शिकंजी, पुदीने का शर्बत , गन्ने का रस, गुड का पानी आदि का सेवन लाभदायी है । गर्मियों में दही लेना मना है और दूध, मक्खन, खीर विशेष सेवनीय हैं ।

५] आहार ताजा व सुपाच्य लें । भोजन में मिर्च, तेल, गर्म मसाले आदि का उपयोग कम करें । खमीरीकृत(fermented) पदार्थ, बासी व्यंजन बिल्कुल न लें । कपड़े सूती, सफेद या हल्के रंग के तथा ढीले – ढाले हों । सोते समय मच्छरदानी आदि का प्रयोग अवश्य करें ।

६] गर्मियों में फ्रीज का ठंडा पानी पीने से गले, दाँत, आमाशय व आँतो पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है । मटके या सुराही का पानी पीना निरापद है ( किंतु बिनजरूरी या प्यास से अधिक ठंडा पानी पीने से जठराग्नि मंद होती है ) ।

७] इन दिनों में छाछ का सेवन निषिद्ध है । अगर लेनी ही हो तो ताज़ी छाछ में मिश्री, जीरा, पुदीना, धनिया मिलाकर लें ।

८] रात को देर तक जागना, सुबह देर तक सोना, अधिक व्यायाम, अधिक परिश्रम, अधिक उपवास तथा स्त्री – सहवास - ये सभी इस ऋतु में वर्जित हैं ।

आज के दिन को धर्ममय और सफल बनाने हेतु पंचांग अवश्य देखें। राम नाम स्मरण और श्रीहरि भक्ति में दिन का आरंभ करें।

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श्रीहरि चरणों का दास - सुनील मिश्रा

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क्या आप जानते हैं—एक ऐसा दिन भी है, जब किया गया हर पुण्य कभी समाप्त नहीं होता और स्वयं भगवान विष्णु के पराक्रमी अवतार का...
19/04/2026

क्या आप जानते हैं—एक ऐसा दिन भी है, जब किया गया हर पुण्य कभी समाप्त नहीं होता और स्वयं भगवान विष्णु के पराक्रमी अवतार का पृथ्वी पर आगमन हुआ था?

सनातन धर्म में वैशाख मास का अत्यंत पवित्र और दिव्य महत्व माना गया है। इसी मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया का महान पर्व मनाया जाता है, और इसी पावन दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार, भगवान परशुराम जी का अवतरण हुआ था।

भगवान परशुराम केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि ब्रह्मतेज और क्षात्रबल का अद्भुत संगम हैं। उनके जीवन से हमें धर्म की रक्षा, अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और सत्य के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा मिलती है।

अग्रतः चतुरो वेदाः, पृष्ठतः सशरः धनुः।
इदं ब्राह्मं, इदं क्षात्रं, शास्त्रादपि शरादपि॥

अर्थात—परशुराम जी के समक्ष वेदों का ज्ञान और पीछे धनुष-बाण की शक्ति दोनों विद्यमान हैं। वे शास्त्र और शस्त्र, दोनों में निपुण हैं।

भगवान परशुराम जयंती का दिन हमें यह सिखाता है कि केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि साहस और धर्म के लिए संघर्ष भी आवश्यक है। जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब ईश्वर किसी न किसी रूप में धरती पर अवतरित होकर धर्म की स्थापना करते हैं।

मान्यता है कि इस दिन किया गया जप, तप, दान और पुण्य अक्षय होता है, यानी उसका फल कभी समाप्त नहीं होता। इसलिए आज के दिन जरूरतमंदों की सहायता, अन्न दान, जल दान और मधुर व्यवहार करना विशेष फलदायी माना गया है।

साथ ही, माता अन्नपूर्णा की कृपा से घर में अन्न और समृद्धि बनी रहती है, और भगवान विष्णु की उपासना से जीवन में सुख-शांति का वास होता है।

आज के इस पावन अवसर पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने जीवन में धर्म, सत्य और सेवा के मार्ग पर चलेंगे और समाज में सकारात्मकता फैलाएंगे।

भगवान परशुराम जी का आशीर्वाद आप सभी के जीवन में साहस, शक्ति और सफलता लेकर आए।
माता अन्नपूर्णा आपके घर को अन्न-धन से परिपूर्ण रखें।
भगवान श्री हरि आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें।

रामायण संदेश परिवार की ओर से आप सभी को अक्षय तृतीया एवं परशुराम जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।

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जय श्री परशुराम भगवान 🚩

श्रीहरि चरणों का दास - सुनील मिश्रा

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