Real god is kabir

Real god is kabir Sant rampal ji maharaj ke mangal pravachan sastro ke adhar pr avshiy sune .

02/03/2024
28/12/2023

एक समय दिल्ली का सम्राट सिकंदर लोदी काशी नगर में आये हुए थे। पांच दस हजार मुसलमान मिलकर सिकंदर लोदी के पास विश्राम गृह में गए। और झूठी शिकायत कर दी कि जुलाहे कबीर ने हमारे धर्म की तो बेज्जती कर दी हम तो कहीं के नहीं छोड़े, वह हमारे धर्म के धार्मिक कर्मों को नीच कर्म बताता है। अपने को सातवें आसमान वाला अदृश्य परमात्मा कहता है। सिकंदर लोदी ने अपने सैनिकों को कबीर जी को गिरफ्तार करने और उन्हें पेश करने का आदेश दिया। सिकंदर लोदी ने कबीर जी से पूछा, “तुम कौन हो? आप क्यों नहीं बोलते? आप खुद को अल्लाह कहते हैं”। कबीर जी ने उत्तर दिया कि “हम ही अलख अल्लाह हैं, कुतुब गौस और पीर। गरीब दास खालिक धनी, हमारा नाम कबीर।।” पढ़िये यह पूरा लेख और जानिये कबीर परमेश्वर ने सिकंदर लोदी को अपनी शरण में किस तरह लिया? https://bit.ly/46ZK8mP

हरि आये हरियाणे नू"Hari (हरि)" means 'The Destroyer of All Sufferings'. The Incarnation of God for whom everyone has bee...
24/12/2023

हरि आये हरियाणे नू
"Hari (हरि)" means 'The Destroyer of All Sufferings'. The Incarnation of God for whom everyone has been waiting for ages has descended to Haryana. The Prophecies of all the Foretellers of the World e.g. Prahlad Bhagat in Janm Sakhi Bhai Bale Wali, Jaigurudev of Mathura, Nostradamus, Lady Florence of New Jersey America, Prof. Cheiro of England, Hungary's astrologer Boriska Silvigar, Dr. Zulvoron of France, American Charles Clark, Mr. Gerard Crise of Holland, American futurist Anderson, Jean Dixon of America, G. Vegilatin, talk about a "Greatman" (Mahapurush) who has taken birth in a Rural area in Northern Part of India and will bring a Spiritual Revolution in the Whole World. Supreme God Kabir states in Kabir Sagar that I will myself descend on earth when 5505 years of Kalyug would have passed. That "Hari", "Greatman", "Mahapurush", The Incarnation of Supreme God Kabir is Jagatguru Tatvdarshi Sant Rampal Ji Maharaj. He has come to remove all the sufferings of His Children and to take everyone back to our original Home, Satlok.

23/11/2023
22/08/2023
Comming Soon 😊 💕🔜🔜जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के सानिध्य में विशाल भंडारा6/7/8 सितंबर 2023इस विशाल भंडारे ...
22/08/2023

Comming Soon 😊 💕🔜🔜

जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के सानिध्य में विशाल भंडारा

6/7/8 सितंबर 2023

इस विशाल भंडारे आप सभी सह परिवार आमंत्रित हैं

Gurmeet Dass

27/10/2021
   पुण्य आत्माओ सतयुग में कर्विदेव(कबीर साहेब) का “”सतसुकृत”” नाम से प्राकट्य हुआ था , त्रेता युग में कर्विदेव(कबीर साहे...
16/08/2020


पुण्य आत्माओ सतयुग में कर्विदेव(कबीर साहेब) का “”सतसुकृत”” नाम से प्राकट्य हुआ था ,
त्रेता युग में कर्विदेव(कबीर साहेब) का “”मुनिन्द्र”” नाम से प्राकट्य हुआ था,

द्वापरयुग में कर्विदेव(कबीर साहेब) का करूणामय नाम से प्राकट्य हुआ था,

कबीर साहेब (कर्विदेव) का कलयुग में प्राकाट्य हो चूका है |

जिसका प्रमाण खुद कबीर परमेश्वर ने अपनी वाणी में अपने शिष्य धर्मदास जी को दिया था ... सर्व संगत से प्रार्थना है कि वे इस वाणी को इस लेख में अवश्य पढ़े |
|| सत साहेब ||
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जो भी जीव आत्मा पूर्ण परमात्मा का संग अर्थात् भक्ति त्याग कर अन्य त्रिगुणी देवताओं की पूजा (मजदूरी) करते हैं तो वे देवता उन साधकों को केवल किए कर्म का फल ही प्रदान करते हैं। अन्य देवताओं की साधना (मजदूरी) से साधक को बहुत ही कम लाभ होता है तथा दोनों कर्मों (पाप तथा पुण्य) का फल प्राप्त होता है।
**** कबीर साहेब चारो युगों में आये है ****

सत युग का प्रमाण ::-

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सतयुग में सत्सुकृत अवतारा,त्रेता नाम मुनिन्द्र मेरा ।
द्वापर में करूणामय कहाया, कलयुग में कबीर कह टेरा ।।

चारों युग में हम पुकारे, कूक कहा हम हेल रे।
हीरे माणिक मोती बर्षें, यह जग चुगता ढेल रे।।

सतयुग में मनु समझाया,काल वश रहा मार्ग नहीं पाया।
उल्टा दोष मोही पर लगाया, वामदेव मेरा नाम धराया।।

त्रेता युग का प्रमाण ::-
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त्रेता में नल नील चेताया,लंका में चन्द्र विजय समझाया।
सीख मन्दोदरी रानी मानी, समझा नहीं रावण अभिमानी।।

विभिषण किन्ही सेव हमारी, तातें हुआ लंका छत्तरधारी।
हार गए थे जब त्रिभुवन राया, समुद्र पर सेतु मैं ही बनवाया।।

तीन दिवश राम अर्ज लगाई, समुद्र प्रकट्या युक्ति बताई।
नल नील की शक्ति बताई, नल नील में मस्ती छाई।।

उन नहीं किन्हा याद गुरूदेव, तातें हम शक्ति छीन लेव।
नल नील को लगी अंघाई, तातें पत्थर तिरे नहीं भाई।।

मैं किन्हें हल्के वे पत्थर भारी, सेतु बांध रघुवर सेना तारी।
लीन्हें चरण राम जब मोरे, लक्ष्मण ने दोहों कर जोरे।।

दोनों बोले एक बिचार, ऋषिवर तुम्हरी शक्ति अपार।
हनुमान नत मस्तक होया, अंगद सुग्रीव ने माना लोहा।।

सेतु बन्ध का भेद न जाने भाई, सुकी दीन्हीं राम बड़ाई।
रामचन्द्र कह कोई शक्ति न्यारी, जिन्ह यह रचि सृष्टी सारी।।

अज्ञानी कहें रामचन्द्र रचनेहारा, जिने दशरथ घर लीन्हा अवतारा।
ऐसी भूल पड़ी धर्मदासा, यथार्थ ज्ञान न किस ही पासा।।

द्वापर युग का प्रमाण ::-
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ऊवाबाई बकें ब्रह्मज्ञानी, तत्वज्ञान की सार न जानी।
द्वापर पाण्डव यज्ञ पूर्ण किन्हीं, हो गई थी सबन की हीनि।।

संहस अठासी बैठे ऋषि जन, सब ही खा लिया था भोजन।
तेतीस कोटि देवता सारे,संख नहीं बजा रहे सब हारे।।

द्वादश करोड़ ब्राह्मण आए। बैठे सबी मुंह लटकाए।
ब्रह्मा, विष्णु, शिव गुप्त यज्ञ मांहे, बजा न संख भोजन खाऐं।

छपन करोड़ यादव आरे, देख रहे तमासा सारे।
कृष्ण चन्द्र पर लगी आशा भारी, नहीं बजा सके शंख बाल बिहारी।।

एक बाल्मीक साधक म्हारा, उन समझा ज्ञान तत् सारा।
श्री कृष्ण जब ध्यान लगाया, निरंजन ने गुप्त भेद बताया।।

कृष्ण चन्द्र पाण्डव समझाया, एक सुदर्शन भक्त बताया।
वह यज्ञ में आवै भाई, तब यह संख आवाज कराही।।

बाल्मीकी है साधक पूरा, पूर्ण प्रभु के चरण हजुरा।
पांचों पाण्डव चले सुदर्शन पासा, मैं किन्हा एक अजब तमासा।।

भेज दिया सुदर्शन केही ठोरा,सुदर्शन रूपधरि बन बैठा में भोरा(भोला)।
छः जनों मोहे साष्टांग लगाई, तब में वाकेसंग यज्ञ महि आई।।

मोहे देख मन में सबन हंसी आई,यह शुद्र कैसे शंख बजाई।
द्रोपदी भोजन धर लाई थारी, खीरसब्जी ओर हलवापुरी न्यारी न्यारी।।

मैं किन्ही सब एकम्-एका, द्रोपदी ने यह सब देखा।
अन्दर रोष किया द्रोपदी रानी, यह शुद्र महा अज्ञानी।।

जिने नहीं भोजन खाना आय, कैसे दे यह संख बजाय।
घुवें आंख फुटि भोजन बनाया, अनाड़ी ने सर्व मिलाया।।

फूट गये हैं भाग हमारे, ऐसे मूर्ख घर पधारे।
द्रोपदी के दिल की बातां, जान गए हम फिर खाई भातां।।

पांच ग्रास भोजन खाया,पांच बार की आवाज संख राया।
कृष्ण को मैं प्रेरणा दिन्हीं,तब वह जाना मेरी माया झिनी।।

कृष्ण कहा यह पूर्ण करतारा, इनसे बाजे संख तुम्हारा।
कृष्ण चन्द्र ने द्रोपदी को समझाया, तब मेरे चरण धोए चरणामृत बनाया।।

पीया द्रोपदी हो आधीन अपारा, शेष पिया श्री कृष्ण सारा।
बाजा संख अखण्ड धुन लाई, पूरी पृथ्वी पर आवाज सुनाई।।

तीनों लोकों में सुनि संख आवाज, तुम सुदर्शन सन्तन सिर ताज।
ताको सतभक्ति समझाई, अपनी महिमा आप बताई।।

मेरे गुरू करूणामय तत्वज्ञानी, ये सब ऋषि देव है अभिमानी।
उनसे दिक्षा लो चल सब भाई, तातें तुमरा कल्याण ह्नजाई।।

माने नहीं मती के हीना, कृष्ण बोले बचन अधिना।
हम पर कृपा तुम बहु किन्ही, हमरी लज्जा रख तुम लिन्हीं।।

कृष्ण कह तुझे स्थान पहुँचाऊँ, रथ-घोड़े जोड़ शिघ्र मंगाऊं।
एता कष्ट ना करो सुजाना, तब हम हुए अन्तर्धाना।।

कलियुग का प्रमाण ::-
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
अब मैं कलयुग में लीन्हा अवतारा,काशी नगर है अस्थान हमारा।
कबीर नाम है मेरा भाई,ऋषि रामानन्द से दिक्षा पाई।।

मात-पिता मेरे नहीं बालक रूप प्रकटाया,
लहरतारा तालाब कमल पर तहाँ जुलाहे ने पाया।।

आया जगत् भव सागर तारण, साचि कहूं जग लागै मारन।
जो कोई माने कहा हमारा, फिर नहीं होवे जन्म दुबारा।।

ऐसा ज्ञान सुना जब दोई(धर्मदास जी और उनकी पत्नी आमिनी ), चरण पकड़ दम्पत्ति रोई।
हमें ज्ञान सुनाओ जिन्दा(कबीर साहेब), काटो जन्म मरण गल फंदा।।

++++ बंदी छोड़ कबीर साहेब की जय ++++

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 #दहेज_मुक्त_विवाह ोखी_पहल #शाहपुरा के गाँव खोरा लाडखानी में बुधवार को  #सन्त_रामपाल_जी_महाराज के शिष्यों ने    का पालन ...
15/08/2020

#दहेज_मुक्त_विवाह
ोखी_पहल

#शाहपुरा के गाँव खोरा लाडखानी में बुधवार को #सन्त_रामपाल_जी_महाराज के शिष्यों ने का पालन करते हुए एक अनोखी #रमैनी(शादी) सम्पन्न कराई।

#शादी में #कोरोना नियमो का तो विशेष ध्यान रखा ही गया साथ ही खास बात यह रही कि यह शादी #बिना_दहेज औऱ #बिना_फेरों के संपन्न हुई।

#वर और #वधु दोनो पक्ष संत रामपाल जी महाराज जी के शिष्य है ।
इस रमैनी(शादी) में खोरा लाडखानी निवासी उमराव दास की पुत्री उगन्ता दासी का #विवाह मुरारी दास से सम्पन्न हुआ।
वर मुरारी दास #स्नातक है और #महिंद्रा_कम्पनी में कार्यरत हैं तथा वधु उगन्ता जयपुर के #दुर्लभजी_हॉस्पिटल में #नर्सिंगकर्मी के रूप के अपनी सेवाएं दे रही है।
रमैनी(शादी) में बिल्कुल भी #धार्मिक_पाखण्डवाद देखने को नही मिला।
इस प्रकार की शादी #समाज के लिए एक #प्रेरणा_स्त्रोत है।

उस समर्थ शक्ति को अपने चंद लफ्जो में बयां कर पाना बहुत मुश्किल है
14/08/2020

उस समर्थ शक्ति को अपने चंद लफ्जो में बयां कर पाना बहुत मुश्किल है

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