गणपति बप्पा मोरियाKing Is Coming

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जय सिद्धी विनायक जीॐ गं गणेशाय नमः
01/03/2023

जय सिद्धी विनायक जी
ॐ गं गणेशाय नमः

ओम नमः शिवायहर हर महादेव
17/02/2023

ओम नमः शिवाय
हर हर महादेव


















09/09/2020

#श्रीगणेशचतुर्थी #गणपति #पूजा #तुलसी
गणपति बप्पा मौर्या
ॐ श्री गणेशाय नमः गं गणपतये नम: ॐ श्री गणेशाय नमः गं गणपतये नम:

🙏🌹🙏शुभ प्रातः वंदना 🙏🌹🙏ऊँ गं गणपतये नमःऊँ नव ग्रहाय नमःऊँ सुर्याय नमः.ॐ सोमाय नमःॐ मंगलाय नमःॐ बुद्धाय नमःॐ गुरुवे नमःॐ ...
04/09/2020

🙏🌹🙏शुभ प्रातः वंदना 🙏🌹🙏

ऊँ गं गणपतये नमः
ऊँ नव ग्रहाय नमः
ऊँ सुर्याय नमः.
ॐ सोमाय नमः
ॐ मंगलाय नमः
ॐ बुद्धाय नमः
ॐ गुरुवे नमः
ॐ शुक्राय नमः
ऊँ शं शनिश्चराय नमः
ॐ राहवे नमः
ॐ केतवे नमः
ॐ बुद्धं शरणं गच्छामि धम्मं शरणं गच्छामि
ॐ हं हनुमते नमः
ऊँ श्री संकटमोचनाय नमः
ऊँ जय श्री राम
ऊँ श्री कृष्णाय नमः
ऊँ खांटूश्यामाय नमः
ऊँ राधे राधे
ऊँ हर हर गंगे
ऊँ महासरस्वत्यै नमः
ऊँ नमो नारायणाय नमः
ऊँ महालक्ष्म्यै नमः
ऊँ तनोट देव्यै नमः
ॐ अष्ट भैरवाय नमः
ॐ बटुक भैरवाय नमः
ॐ काल भैरवाय नचमः
ॐ कुल भैरवाय नमः
ॐ आनन्द भैरवाय नमः
ॐ लाट भैरवाय नमः
ऊँ ह्लीं बगलामुखियै नमः
ऊँ क्रीं कालिकाये नमः
ऊँ दुं दुर्गायै नमः
ऊँ नमः शिवाय
ऊँ हर हर महादेव
ॐ अर्धनारीश्वराय नमः
ऊँ पशुपतिनाथाय नमः
ऊँ सोमनाथाय नमः
ऊँ केदारनाथाय नमः
ऊँ वैद्यनाथाय नमः
ऊँ श्री विश्वनाथाय नमः
ऊँ श्री महाकालाय नमः
ऊँ ऊँकारेश्वराय नमः
ऊँ नागेश्वरायनमः
ऊँ त्रयंबकेश्वराय नमः
ऊँ घृणेश्वराय नमः
ऊँ भीमाशंकराय नमः
ऊँ मल्लिकार्जुनाय नमः
ऊँ श्री रामेश्वराय नमः
🌷 गणपति स्तोत्र 🌷
गजाननं भूतगणादि सेवितं कपित्थ जम्बूफलचारु भक्षणम्।
उमासुतं शोक विनाशकारकं नमामि विग्घनेश्वर पादपंकजं।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।
शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजं।
प्रसन्नवदनं ध्यायेतसर्वविघ्नोपशान्तये॥
🙏ऊँ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ऊँ🙏
🌹शिव ध्यानं🌹
कर्पूरगौरम् करुणावतारम् संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तम् हृदयारबिन्दे भवम् भवानीसहितम् नमामि।

🙏🌹🙏॥ शम्भुस्तुति॥🙏🌹🙏

नमामि शम्भो नमामि शम्भो
नमामि शम्भो नमामि शम्भो
नमामि शम्भुं पुरुषं पुराणं नमामि सर्वज्ञमपारभावम् ।
नमामि रुद्रं प्रभुमक्षयं तं नमामि शर्वं शिरसा नमामि ॥१॥
नमामि देवं परमव्ययंतं उमापतिं लोकगुरुं नमामि ।
नमामि दारिद्रविदारणं तं नमामि रोगापहरं नमामि ॥२॥
नमामि कल्याणमचिन्त्यरूपं नमामि विश्वोद्ध्वबीजरूपम् ।
नमामि विश्वस्थितिकारणं तं नमामि संहारकरं नमामि ॥३॥
नमामि गौरीप्रियमव्ययं तं नमामि नित्यं क्षरमक्षरं तम् ।
नमामि चिद्रूपममेयभावं त्रिलोचनं तं शिरसा नमामि ॥४॥
नमामि कारुण्यकरं भवस्या भयंकरं वापि सदा नमामि ।
नमामि दातारमभीप्सितानां नमामि सोमेशमुमेशमादौ ॥५॥
नमामि वेदत्रयलोचनं तं नमामि मूर्तित्रयवर्जितं तम् ।
नमामि पुण्यं सदसद्व्यतीतं नमामि तं पापहरं नमामि ॥६॥
नमामि विश्वस्य हिते रतं तं नमामि रूपाणि बहूनि धत्ते ।
यो विश्वगोप्ता सदसत्प्रणेता नमामि तं विश्वपतिं नमामि ॥७॥
यज्ञेश्वरं सम्प्रति हव्यकव्यं तथागतिं लोकसदाशिवो यः ।
आराधितो यश्च ददाति सर्वं नमामि दानप्रियमिष्टदेवम् ॥८॥
नमामि सोमेश्वरंस्वतन्त्रं उमापतिं तं विजयं नमामि ।
नमामि विघ्नेश्वरनन्दिनाथं पुत्रप्रियं तं शिरसा नमामि ॥९॥
नमामि देवं भवदुःखशोकविनाशनं चन्द्रधरं नमामि ।
नमामि गंगाधरमीशमीड्यम् उमाधवं देववरं नमामि ॥१०॥
नमाम्यजादीशपुरन्दरादिसुरासुरैरर्चितपादपद्मम ।
नमामि देवीमुखवादनाना मिक्षार्थमक्षित्रितयं य ऐच्छत ॥११॥
पंचामृतैर्गन्धसुधूपदीपैर्विचित्रपुष्पैर्विविधैश्च मन्त्रैः ।
अन्नप्रकारैः सकलोपचारैः सम्पूजितं सोममहं नमामि ॥१२॥
।। इति शम्भुस्तोत्रम् सम्पूर्णम्।।

पुष्पाणि सन्तु तव देव मम इन्द्रियांणि
धूपोगरुर्वपुरिदम् हृदयं प्रदीपः।
प्राणा हवीषि करणाणि तवाक्षताश्च
पूजा फलं व्रततु साम्प्रतमेष जीवः।
त्वमेव रक्षको असि मे त्वमेव करुणाकरः।
न पर्वतय पापाणि प्रवृतानि निवारय।
दुःस्वपनः दुःसकुनः दुर्गति दौर्मनस्य दुर्भिक्ष दुर्व्यसन दुःसः दुर्सांसि।
उत्पात ताप विष भित्ति मस्दग्रहार्ति व्याधिश्च नाशयतु मे जग तात मिशः।।
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते।

सत्य को पहचानो।
04/09/2020

सत्य को पहचानो।

23/08/2020

गणपति बप्पा मौर्या
ॐ श्री गणेशाय नमः गं गणपतये नम: ॐ श्री गणेशाय नमः गं गणपतये नम:

22/08/2020

गणेश चतुर्थी का मुहूर्त:

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी ति​थि की शुरुआत 21 अगस्त दिन शुक्रवार को रात 11 बजकर 02 मिनट से हो रही है। यह तिथि 22 अगस्त दिन शनिवार को शाम 07 बजकर 57 मिनट तक रहेगी। गणेश चतुर्थी पर गणेश चतुर्थी की पूजा दोपहर के मुहू्र्त में ही पूजा की जाती है क्योंकि गणेश जी का जन्म दोपहर में हुआ था। ऐसे में 22 अगस्त के दिन गणपति जी की पूजा के लिए दोपहर में 02 घंटे 36 मिनट का समय है। दिन में 11 बजकर 06 मिनट से दोपहर 01 बजकर 42 मिनट के मध्य गणपति जी की पूजा कर लें।

इस तरह करें गणेश चतुर्थी की पूजा:

इस दिन सुबह नित्यकर्मों से निर्वत्त हो जाएं। गणेश चतुर्थी की पूजा दोपहर में की जाती है तो सुबह में पूजा की सारी तैयारी कर लें। एक शुद्ध आसान लें और उस पर बैठ जाएं। सभी पूजन सामग्री इक्ट्ठा करें। इसमें पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि शामिल होते हैं। गणेश जी को दुर्वा अवश्य चढ़ाई जाती है ऐसे में इसे बिल्कुल न भूलें। श्रीगणेश को मोदक भी बेहद प्रिय हैं। ऐसे में इन्हें मोदक प्रसाद के रूप में चढ़ाना न भूलें। फिर 108 बार ॐ श्री गं गणपतये नम: का जाप करें। शिव जी, गौरी, नन्दी, कार्तिकेय की भी पूजा-अर्चना करें। शास्त्रों के अनुसार, श्रीगणेश की प्रतिमा की 1, 2, 3, 5, 7, 10 आदि दिनों तक पूजा करने के बाद उसका विसर्जन करते हैं।
#श्रीगणेशचतुर्थी #गणपति

 #श्रीगणेशचतुर्थीआईए कल से गणपती आ रहे हे तो आज की ये पोस्ट इसी विषय पर है.. तो अद्भुत जानकारी का लाभ आप भी ले👇👇श्री गणे...
22/08/2020

#श्रीगणेशचतुर्थी

आईए कल से गणपती आ रहे हे तो आज की ये पोस्ट इसी विषय पर है.. तो अद्भुत जानकारी का लाभ आप भी ले👇👇

श्री गणेश चतुर्थी पर्व 22 अगस्त को मनाया जा रहा है। इस दिन हम गणेश जी महाराज को अपने घर, दुकान या अन्य प्रतिष्ठान पर स्थापित करते हैं। जैसे जब हम बाजार से गणेश जी ले रहे होते हैं तो ज्यादा मोल भाव करते हैं। ऐसा करने से अनुकल फल की प्राप्ति नहीं होती है।

हम एक दिन पूर्व ही श्री गणेश जी को लेकर आते हैं।इस बार 21 अगस्त को 11 बजे सुबह चुतुर्थी शुरू हो जाएगी। 22 अगस्त को 7.57 शाम तक चुतुर्थी तिथि रहेगी श्री गणेश जी का स्मरण कर सपरिवार गणेश जी को अपने घर के लिए आमंत्रित करके लाए।
जब बाजार में दुकान से श्री गणेश जी की पूजा करके लायें उनसे कहें कि श्री गणेश जी रिद्धि सिद्धि सहित हमारे घर पधारे। गणेजी को घर लाते वक्त दुकानदार से श्री गणेश जी की मूर्ति का ज्यादा भाव मोल ना करे। उन्हें शुद्ध कोरे लाल वस्त्र से ढ़क कर लाये । कार में उन्हें सीट पर या अपनी गोद में रख कर लाये ।
मूर्ति कौन सी लाये
सबसे ज्यादा शुभ पीले रंग और लाल रंग के गणेश जी होते है नीले रंग के गणेश जी बहुत ही विशेष पूजा के लिये और विशेष मुहूर्त में लाये जाते हंै। हल्दी से बने गणेश जी -हरिद्रा गणपति भी विशेष संतान प्रप्ति के लिये लाये जाते है । गणपति श्यामवर्ण - पराक्रम के लिये लाये जाते है सफेद रंग के गणपति : ऋण मोचन गणपति -ॠणों से मुक्ति दिलाते है । चार भुजाओं वाले लाल गणपति : संकटष्टहरण गणपति -संकटों का नाश होता है। त्रिनेत्र धारी रक्त वर्ण और दस भुजाधारी -इसमे सारे गणेशजी के रुप होते है । लाल और पीले रंग के गणपति सबसे शुभ है ।
आप 3, 5, 7 या 11 दिन के लिये श्री गणेश जी को आमन्त्रित करने का संकल्प ले सकते हंै और यह संकल्प मूर्ति लाते समय या स्थापना के समय मन में ले सकते हैं।

मगर ध्यान रहे कि जितने दिन का संकल्प करके लाये है उससे पूर्व विसर्जन ना करे। परंतु अधिक दिन रुकने के लिए श्री गणेश जी से अनुनय विनय करके दिन उपरोक्त संख्या मे बढ़ा सकते हैं। जितने दिन श्री गणेश जी घर में विराजमान रहे, घर को ताला लगाकर सपरिवार बाहर नहीं जाये, कोई न कोई सदस्य घर पर ही रुके।
अगर आप दोनों "पति पत्नी" ही कार्यरत हो तो श्री गणेश जी को बोलकर जाना चाहिये किहम इतने बजे तक आ जायेंगे फिर जा सकते है।आपको यह भावना मन में रखनी है कि श्री गणेश जी आपके घर मे अतिथि बनकर विराजमान है।

कैसे करे #पूजा #गणपति की #पूजा
लकड़ी के पट्टी पर पीला वस्त्र बिछाये , पीले फूल, मेवा, दुर्वा और लड्डू का भोग लगाये। अखंड घी का दीपक जलाये। जितनी उम्र है उतने लड्ड़ू चढ़ाये। पीले वस्त्र पान सुपारी चढ़ाये। इस दिन जल और फल ही खाये और व्रत करें।

चंद्रमा को नहीं देखे । चंद्रमा को नीची निगाह रख कर अर्घ्य दे । अगर गलती से चंद्र दर्शन हो जाये तो श्री कृष्ण- श्री कृष्ण मंत्र बोलकर माफी माँगे । प्रसाद ग्रहण करे और अन्न और वस्त्र का दान करे और फिर व्रत खोले।

वैदिक भजन और मंत्रों का जाप, गणपति अथर्व संहिता, गणपति स्त्रोत और भक्ति के गीत गाकर भेंट अर्पित करते है। क्या ना करे : काले वस्त्र ना पहने, घर में बहुत बड़ी मूर्ति न लाये । #तुलसी नहीं चढ़ाये । क्रोध न करे । झूठ न बोले ।

श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कायेर्शु सर्वदा॥
ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि,
तन्नो दन्ति प्रचोदयात॥का जाप करें।

श्रीगणेश स्थापना 2020 कब है : जानिए क्या है Ganesh Chaturthi का सबसे अच्छा शुभ मुहूर्त भगवान श्री गणेश स्थापना इस साल 22...
21/08/2020

श्रीगणेश स्थापना 2020 कब है : जानिए क्या है Ganesh Chaturthi का सबसे अच्छा शुभ मुहूर्त

भगवान श्री गणेश स्थापना इस साल 22 अगस्त 2020 शनिवार को होगी। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी होती है...

इस वर्ष यह बडी गणेश चतुर्थी 22 अगस्त, शनिवार को आ रही है। पौराणिक कथाओं के अनुसार विघ्नहर्ता श्रीगणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन ही हुआ था, इसलिए इस दिन से लेकर 10 दिन तक उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है।

भगवान श्रीगणेश के रंग में रंगेगी कान्हा की नगरीमथुरा : भगवान श्रीकृष्ण की नगरी में शनिवार से प्रथम पूज्जनीय भगवान श्रीगण...
21/08/2020

भगवान श्रीगणेश के रंग में रंगेगी कान्हा की नगरी

मथुरा : भगवान श्रीकृष्ण की नगरी में शनिवार से प्रथम पूज्जनीय भगवान श्रीगणेश की जय-जयकार होगी। पूजा-अर्चना कर विघ्नहर्ता से घर में सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जाएगी। कोरोनाकाल के कारण इस बार मंदिरों में श्रद्धालुओं का रेला नहीं उमड़ सकेगा। सार्वजनिक स्थलों पर भी प्रतिमाएं स्थापित नहीं हो सकेंगी। हालाकि श्रद्धालु घरों में गणेश प्रतिमा स्थापित कर सुख-समृद्धि की प्रार्थना करेंगे।

गणेश उत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में हर्ष और उल्लास है। भगवान गणेश के जन्म उत्सव को गणेश चतुर्थी के रूप में जाना जाता है। गणेशजी को बुद्धि, समृद्धि, सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। यह उत्सव दस दिन बाद अनंत चतुर्थी के दिन समाप्त होता है। घरों में स्थापित करने के लिए लोग गणेश प्रतिमाएं ले जाते रहे। गणेश टीला स्थित गणेश मंदिर में गणेश उत्सव पारंपरिक तरीके से मनाया जाएगा। इस वर्ष मंदिर में श्रद्धालु नहीं पहुंच सकेंगे। मंदिर में गणेशजी का श्रृंगार और अभिषेक किया जाएगा। असकुंडा स्थित गणेश मंदिर, चौबियापाड़ा स्थित दसभुजी गणेश, गऊघाट स्थित बाल गणेश मंदिर में गणेश उत्सव हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। गणेश टीला स्थित गणेश मंदिर के सेवायत देवकीनंदन ने बताया कि सभी कार्यक्रम मंदिर में आयोजित होंगे। उन्होंने भक्तों से गणेश उत्सव घर पर ही मनाने का अनुराध किया है। कार्यक्रम फेसबुक पर भी दिखाया जाएगा। चौबिया पाड़ा स्थित दशभुजी गणेश मंदिर के सेवायत कपिल बाबा ने बताया कि दोपहर 12 बजे मंदिर में गणेशजी का पंचामृत अभिषेक किया जाएगा। कोरोनाकाल के कारण मंदिर में भीड़ एकत्रित नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने श्रद्धालुओं से घर पर ही पूजन करने का अनुरोध किया है।

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