21/07/2019
★◆ ाबा__रुद्रनाथ___महादेव ◆★
🙏👉भगवान #रुद्रनाथ दर्शन के लिए यात्रियों के लिए विशेष जानकारी इस प्रकार है । 👇👇👇
◆मंदिर परिसर नारद कुंड से शुरू होता है। रास्ते के ऊपरी ओर घर्मशालाओं की एक नजदीकी कतार है। मंदिर प्रवेशद्वार पर ही पुजारीजी की कुटी हेै, जिसके बाहरी दरवाजे के पास ‘रुद्रनाथ की समुद्रतल से ऊंचाई #लगभग 3500 मीटर’ लिखी है।
◆मुख्य मंदिर गुफा के रूप में #दक्षिणाभिमुखी है। मंदिर प्रवेश में 2 नंदी यज्ञ मंडप हैं। मंदिर के #गर्भगृह में चट्टान पर भगवान शिव की रौद्र #मुखाकृत्ति मुख्य मूर्ति है। साथ में विष्णु एवं शिव परिवार की दुर्लभ मूर्तियां हैं। शिव के रौद्र रूप के कारण ही यह स्थल रुद्रनाथ कहलाया। मुख्य मंदिर के दांयी ओर वणद्यौ (वन देवता) का मंदिर है जिसमें कई शिवलिंग मौजूद हैं।
◆वणद्यौ मंदिर के दांयी ओर 7 पूर्वामुखी मंदिरों की श्रृंखला विशाल चट्टान के ऊपरी ओर को जा रही है। इनमें एक मंदिर दुमंजिला है।
◆सभी मंदिरों का बाहरी आवरण ताम्रवर्ण (तांबे का रंग) पत्थरों से बना है। रुद्रनाथ के पुजारी गोपेश्वर के भट्ट और तिवारी लोग हैं। अभी मंदिर परिसर मेें केवल ‘हम पांच’ यात्री हैं। ऐसा मुश्किल संयोग होता है कि किसी पौराणिक मंदिर में दर्शन के साथ पुजारीजी धैर्य और रुचि से उस मंदिर और स्थान का महात्मय भी भक्तगणों को बताते चलें।
◆ यह संयोग एवं सौभाग्य हमें मिल रहा है। बताया गया कि #रुद्रनाथ मंदिर #हिंवाल नामक पर्वत में विराजमान है। रुद्र शब्द रौद्र से अभिप्रेरित है। शिव का #रौद्र रूप उनके मुख के माध्यम से रुद्रनाथ में प्रकट हुआ है।
◆सामान्यतया शिवजी की पूजा #लिंग स्वरूप की जाती है, रुद्रनाथ ही एक ऐसा #पौराणिक तीर्थ है, जहां महादेव #मुखारविंद में हैं। लोक विश्वास है कि अन्य केदार मंदिरों की तरह रुद्रनाथ मंदिर का निर्माण पांडवों द्वारा किया गया।
◆रुद्रनाथ #पंचकेदार में #चतुर्थ #केदार माना जाता है। यहां की एक चट्टान मेें कई तलवारें एक साथ फसांई गयी हैं।
◆यह मान्यता है कि ये तलवारें पांडवों की रही होंगी। रुद्रनाथ को #रुद्रमहालय कहा गया गया है। यही कारण है कि रुद्रनाथ के आस-पास कई अन्य मंदिरों और जलकुडों की उपस्थिति है। 👉 #नारायण मूर्ति, #शिव प्रतिमा, #उमा-महेश प्रतिमा, #ज्योर्तिलिंग, #त्रिशिखकार्तिकेय, #गणेश विग्रह, #दुर्गा, वैतरणी कुण्ड, #सारस्वत कुण्ड, #सूर्य कुण्ड, #भीम गदा, #नारद कुण्ड, #स्वर्गद्वारी आदि इनमेें प्रमुख हैं। ◆रुद्रमहालय ऐड़ी और आंछरियों (मृत प्रेत आत्मायें) का भी प्रिय स्थान है। हमें बताया गया कि पनार से रुद्रनाथ तक अनेकों खड़े पत्थरों को इन ऐड़ी अथवा आंछरियों के प्रतीक मान कर देवी एवं देवता के रूप में पूजा जाता है।
◆ रुद्रनाथ के पास स्थित वैतरणी कुण्ड में अपने पूर्वजों/पित्र आत्माओं को #पिंडदान एवं #तर्पण देने का सर्वाधिक पुण्य स्थान माना गया है।
◆रुद्रनाथ मंदिर का प्रबंधन #गोपेश्वर मंदिर से संचालित होता है। रुद्रनाथ जी की पूजा जेठ से कार्तिक माह तक की जाती है। ©रुद्रनाथ महादेव
◆शीतकाल में यहां के कपाट बंद होने पर रुद्रनाथजी गोपीनाथ मंदिर, गोपेश्वर में विराजमान रहते हैं।||
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|| जय महाकाल ||