Rudranath

Rudranath Rudranath is a Hindu temple dedicated to god Shiva, located in the Garhwal Himalayan mountains in Uttarakhand.

|| श्री रूद्रनाथो विजयतेत्राम ||🕉️ विश्व प्रसिद्ध पंच केदार में से एक चर्तुथ केदार बाबा रूद्रनाथ महादेव जी के कपाट आगामी...
16/10/2020

|| श्री रूद्रनाथो विजयतेत्राम ||

🕉️ विश्व प्रसिद्ध पंच केदार में से एक चर्तुथ केदार बाबा रूद्रनाथ महादेव जी के कपाट आगामी 17 तारिक (कल) ब्रह्म मुहरत 4:30 बजे पर भगवान श्री रूद्रनाथ जी के शीतकालीन के लिए पंडित वेद प्रकाश भट्ट जी द्वारा मंत्रोचर कर बंद कर दिए जाएँगे ।।।

वही कल भगवान रुद्रनाथ जी की डोली अपनी शीतकालीन गद्दीस्थल गोपीनाथ मंदिर प्रांगण में भी प्रस्थान करेगी ।।

और आने वाले 6 माह के लिए भगवान रुद्रनाथ जी की पूजा अपने गद्दीस्थल गोपीनाथ मंदिर गोपेश्वर में की जाएगी।।

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21/12/2019

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(21 December to 29 December) For more details contact us 8800867200

★◆  ाबा__रुद्रनाथ___महादेव ◆★🙏👉भगवान  #रुद्रनाथ दर्शन के लिए यात्रियों के लिए विशेष जानकारी इस प्रकार है । 👇👇👇◆मंदिर परि...
21/07/2019

★◆ ाबा__रुद्रनाथ___महादेव ◆★
🙏👉भगवान #रुद्रनाथ दर्शन के लिए यात्रियों के लिए विशेष जानकारी इस प्रकार है । 👇👇👇
◆मंदिर परिसर नारद कुंड से शुरू होता है। रास्ते के ऊपरी ओर घर्मशालाओं की एक नजदीकी कतार है। मंदिर प्रवेशद्वार पर ही पुजारीजी की कुटी हेै, जिसके बाहरी दरवाजे के पास ‘रुद्रनाथ की समुद्रतल से ऊंचाई #लगभग 3500 मीटर’ लिखी है।
◆मुख्य मंदिर गुफा के रूप में #दक्षिणाभिमुखी है। मंदिर प्रवेश में 2 नंदी यज्ञ मंडप हैं। मंदिर के #गर्भगृह में चट्टान पर भगवान शिव की रौद्र #मुखाकृत्ति मुख्य मूर्ति है। साथ में विष्णु एवं शिव परिवार की दुर्लभ मूर्तियां हैं। शिव के रौद्र रूप के कारण ही यह स्थल रुद्रनाथ कहलाया। मुख्य मंदिर के दांयी ओर वणद्यौ (वन देवता) का मंदिर है जिसमें कई शिवलिंग मौजूद हैं।
◆वणद्यौ मंदिर के दांयी ओर 7 पूर्वामुखी मंदिरों की श्रृंखला विशाल चट्टान के ऊपरी ओर को जा रही है। इनमें एक मंदिर दुमंजिला है।
◆सभी मंदिरों का बाहरी आवरण ताम्रवर्ण (तांबे का रंग) पत्थरों से बना है। रुद्रनाथ के पुजारी गोपेश्वर के भट्ट और तिवारी लोग हैं। अभी मंदिर परिसर मेें केवल ‘हम पांच’ यात्री हैं। ऐसा मुश्किल संयोग होता है कि किसी पौराणिक मंदिर में दर्शन के साथ पुजारीजी धैर्य और रुचि से उस मंदिर और स्थान का महात्मय भी भक्तगणों को बताते चलें।
◆ यह संयोग एवं सौभाग्य हमें मिल रहा है। बताया गया कि #रुद्रनाथ मंदिर #हिंवाल नामक पर्वत में विराजमान है। रुद्र शब्द रौद्र से अभिप्रेरित है। शिव का #रौद्र रूप उनके मुख के माध्यम से रुद्रनाथ में प्रकट हुआ है।
◆सामान्यतया शिवजी की पूजा #लिंग स्वरूप की जाती है, रुद्रनाथ ही एक ऐसा #पौराणिक तीर्थ है, जहां महादेव #मुखारविंद में हैं। लोक विश्वास है कि अन्य केदार मंदिरों की तरह रुद्रनाथ मंदिर का निर्माण पांडवों द्वारा किया गया।
◆रुद्रनाथ #पंचकेदार में #चतुर्थ #केदार माना जाता है। यहां की एक चट्टान मेें कई तलवारें एक साथ फसांई गयी हैं।
◆यह मान्यता है कि ये तलवारें पांडवों की रही होंगी। रुद्रनाथ को #रुद्रमहालय कहा गया गया है। यही कारण है कि रुद्रनाथ के आस-पास कई अन्य मंदिरों और जलकुडों की उपस्थिति है। 👉 #नारायण मूर्ति, #शिव प्रतिमा, #उमा-महेश प्रतिमा, #ज्योर्तिलिंग, #त्रिशिखकार्तिकेय, #गणेश विग्रह, #दुर्गा, वैतरणी कुण्ड, #सारस्वत कुण्ड, #सूर्य कुण्ड, #भीम गदा, #नारद कुण्ड, #स्वर्गद्वारी आदि इनमेें प्रमुख हैं। ◆रुद्रमहालय ऐड़ी और आंछरियों (मृत प्रेत आत्मायें) का भी प्रिय स्थान है। हमें बताया गया कि पनार से रुद्रनाथ तक अनेकों खड़े पत्थरों को इन ऐड़ी अथवा आंछरियों के प्रतीक मान कर देवी एवं देवता के रूप में पूजा जाता है।
◆ रुद्रनाथ के पास स्थित वैतरणी कुण्ड में अपने पूर्वजों/पित्र आत्माओं को #पिंडदान एवं #तर्पण देने का सर्वाधिक पुण्य स्थान माना गया है।
◆रुद्रनाथ मंदिर का प्रबंधन #गोपेश्वर मंदिर से संचालित होता है। रुद्रनाथ जी की पूजा जेठ से कार्तिक माह तक की जाती है। ©रुद्रनाथ महादेव
◆शीतकाल में यहां के कपाट बंद होने पर रुद्रनाथजी गोपीनाथ मंदिर, गोपेश्वर में विराजमान रहते हैं।||
🙏
|| जय महाकाल ||

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19/07/2019

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महत्वपूर्ण सूचना 👇श्री बदरीनाथ -केदारनाथ धाम👉 16 जुलाई शायं से 17  जुलाई प्रात: तक  चंद्र ग्रहण  के दौरान  कपाट बंद रहें...
15/07/2019

महत्वपूर्ण सूचना 👇
श्री बदरीनाथ -केदारनाथ धाम
👉 16 जुलाई शायं से 17 जुलाई प्रात: तक चंद्र ग्रहण के दौरान कपाट बंद रहेंगे- धर्माधिकारी
* श्री गंगोत्री- यमुनोत्री धाम, श्री नृसिंह मंदिर,पंच बदरी-पंच केदार, श्री कालीमठ, श्री त्रिजुगीनारायण, ग्रहण काल में बंद रहेंगे
श्री बदरीनाथ/केदारनाथ/ गोपेश्वर/ रूद्रप्रयाग/ उत्तरकाशी: 17 जुलाई के चंद्रग्रहण के कारण 16 जुलाई को शायं 4:25 बजे से बदरीनाथ, केदारनाथ, बदरी-केदार के अधीनस्थ मंदिरों, सहित श्री गंगोत्री, श्री यमुनोत्री धाम के रहेंगे कपाट बंद होंगे। चंद्र ग्रहण 17 जुलाई रात 1:31बजे से लेकर 4:31 बजे तक है ग्रहणकाल से 9 घंटे पहले सूतक काल माना जाता है।सूतक काल के चलते रहेंगे मंदिर बंद रहेगे।
17 जुलाई को प्रातः 4:40 बजे बदरीनाथ मंदिर खुलेगा।
और 6 बजे से अभिषेक पूजा शुरू होगी।
17 जुलाई रात 1:31 बजे से प्रातः 4:31 बजे तक 3 घंटे का चंद्रग्रहण है।ग्रहणकाल से 9 घंटे पहले सूतक काल माना जाता है।इसका असर देश - विदेश के सभी मंदिरो पर भी पड़ेगा।और ठीक 9 घण्टे पहले मंदिर बंद हो जायेंगे।भू बैकुण्ड धाम की बात करे तो बदरीनाथ के कपाट 16 जुलाई को शाय 4:25 बजे बंद हो जायेगे ।इसके लिए शाय 3:15 बजे सायंकालीन मंगल आरती पूजा होगी।3:45 बजे भोग और शयन आरती होगी।और सायं 4:25 बजे मंदिर के कपाट बंद हो जाएंगे
बदरीनाथ धाम के धर्माधिकारी भुवनचन्द्र उनियाल ने बताया कि 16 /17 जून को रात 1:31 बजे से 4:31 प्रातः तक चंद्रग्रहण है ।ग्रहणकाल से 9 घण्टे पूर्व सूतककाल लग जाता है।इस लिए बदरीनाथ धाम के कपाट सायं 4:25 बजे बंद हो जायेगा।भगवान बदरीनाथ को अपराह्न 3:15 बजे
सायंकालीन पूजा मंगल आरती 3:45 अपराह्न भोग और शयन आरती होगी।और सायं 4:25 बजे मंदिर बंद होगा।17 जुलाई को प्रातः 4:40 बजे बदरीनाथ धाम की घंटी बजेगी।और 6 बजे अभिषेक पूजा होगी।और बाकि पूजा यथावत चलेगी। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डा.हरीश गौड़ ने बताया कि श्री बदरीनाथ एवं श्री केदारनाथ मंदिर सहित नृसिंह मंदिर जोशीमठ, माता मूर्ति मंदिर बदरीनाथ,श्री आदि केदारेश्वर मंदिर बदरीनाथ,सभी पंच बदरी मंदिर, पंच केदार, श्री कालीमठ मंदिर, श्री त्रिजुगीनारायण मंदिर ग्रहणकाल में बंद रहेंगे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री गंगोत्री धाम, श्री यमुनोत्री मंदिर भी चंद्रग्रहण के सूतक काल से ग्रहण समाप्ति तक बंद रहेंगे।
17 जुलाई को शुद्धिकरण पश्चात यथावत पूजा-अर्चना शुरू हो जायेगी।
( Team Uttaranchal Tourism )

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14/07/2019

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13/07/2019

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