20/11/2025
महासू देवता की परंपरा में वज़ीर देवता का मुख्य सेवक, दूत और प्रतिनिधि माना जाता है। देवता के आदेश, निर्णय और वचनों को जनता तक पहुँचाने का कार्य वज़ीर करता है।
वर्तमान में महासू देवों के दो मुख्य वजीर है -
शांठीबिल के वजीर श्री दीवान सिंह राणा जी है और पांशीबिल के बजीर श्री जयपाल सिंह बंगुवान जी है। जौनसार–बावर, हिमाचल और उत्तराखंड के कई हिस्सों में यह परंपरा सदियों से चलती आ रही है।
महासू देवता के वज़ीर की प्रमुख भूमिकाएँ
1. देव वाणी का दूत
•देवता के संदेश, आदेश और आशीष को लोगों तक वजीर पहुँचाता है।
• देवता की वाणी (देव वचन) को सही रूप में समझाने की जिम्मेदारी वजीर की होती है।
2. न्याय और फैसलों में सहायक
• लोक–परंपरा में महासू देवता को न्याय का देवता माना जाता है।
•वज़ीर देवता की ओर से पंचायतों, विवादों और सामाजिक मामलों में मार्गदर्शन देता है।
3. देव कारज एवं धार्मिक कार्यक्रम
•देव यात्रा, जागरण, मेलों, और विशेष अनुष्ठानों में वज़ीर की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है।
•देवता की पालकी की यात्रा में वज़ीर आगे–आगे चलता है।
4. अनुशासन एवं व्यवस्था
•खाने–पीने, बैठने–उठने, घर–गांव की मर्यादा, विशेष अनुष्ठान, सुरक्षा आदि में वज़ीर निगरानी रखता है।
•देवता के स्थल, मंदिर व धार्मिक सामग्री की देखभाल भी वज़ीर की जिम्मेदारी होती है।
5. जनता और देवता के बीच सेतु
•कोई भी व्यक्ति देवता की शरण में आता है, अगर देवता उससे रूष्ट है तो वज़ीर के निवेदन पर देवता को मनाया जा सकता है।
•वज़ीर ही बताता है कि देवता की कृपा पाने के लिए क्या उपाय या नियम आवश्यक हैं।
(वज़ीर का महत्व)
महासू देवता की पूरी व्यवस्था चार भाइयों की तरह मानी जाती है—परंतु इस व्यवस्था को चलाने और जनता तक पहुँचाने में वज़ीर का स्थान बहुत ऊँचा होता है।
उसे देव शासन का प्रधान कार्यकारी अधिकारी भी कहा जा सकता है।
देव परम्पराओं की माने तो हमें वजीरो का उतना ही सम्मान करना चाहिए जितना सम्मान हम अपने देवों का करते है।