09/01/2026
लोक-मान्यताओं और शाबर तंत्र में भैरव नाथ को "भूत-प्रेत का राजा" माना जाता है। जब कोई साधारण मंत्र काम नहीं करता, तब भैरव जी के 'झाड़ा' या 'उतारे' का प्रयोग किया जाता है। 'रथ' या 'कबीले' जैसी भारी बाधाओं को शरीर से खींचकर बाहर निकालने के लिए यह मंत्र अत्यंत उग्र और प्रभावशाली माना जाता है।
यहाँ बाबा भैरव का वह शाबर मंत्र है जिसे 'भूत-प्रेत नाशक जंजीरा' भी कहते हैं:
भैरव भूत-प्रेत निवारण शाबर मंत्र
"ॐ नमो आदेश गुरु को,
काली के पूत, वीर भैरव!
लाल मुख, विकराल आंखें, हाथ में लाठी, कमर में जंजीर।
चल-चल रे भैरव, अमुक (रोगी का नाम लें) के शरीर से भूत बांध, प्रेत बांध।
जिन्न बांध, खबीस बांध, सवा सौ कबीला बांध।
अघोरी बांध, मसान बांध, लगी-पराई की धार बांध।
न बांधे तो तुझे तेरी माता का दूध हराम,
राजा रामचंद्र की आन, गुरु गोरखनाथ की दुहाई।
शब्द सांचा, पिंड कांचा, फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।"
प्रयोग की विधि (झाड़ा देने का तरीका)
इस मंत्र का प्रयोग केवल मंत्र पढ़ने तक सीमित नहीं है, इसे क्रिया के साथ किया जाता है:
• मोर पंख का झाड़ा: मोर के पंखों का एक गुच्छा (मुट्ठा) लें। मंत्र को पढ़ते हुए पीड़ित व्यक्ति के सिर से पैर तक जोर-जोर से झाड़ें। ऐसा कम से कम 21 बार करें।
• भभूत (राख) का प्रयोग: किसी प्राचीन भैरव मंदिर की भभूत या धूप की राख लें। मंत्र पढ़ते हुए उस पर फूंक मारें (अभिमंत्रित करें) और पीड़ित के माथे पर तिलक लगाएं और थोड़ी सी भभूत पानी में मिलाकर पिला दें।
• लौंग का उतारा: 7 साबुत लौंग लें। मंत्र पढ़ते हुए रोगी के सिर से 7 बार वारें और उन्हें जलते हुए अंगारों (कंडे) पर डाल दें। यदि लौंग जलने पर तेज गंध न आए, तो समझें कि बाधा जल रही है।
उतारने का विशेष टोटका
जब भूत-प्रेत समूह में हों, तो केवल झाड़ा काफी नहीं होता। इसके लिए 'चौराहे का भोग' अनिवार्य है:
1. सामग्री: मिट्टी का एक सकोरा (मिट्टी की कटोरी), उसमें थोड़ा सा सिंदूर, कच्चा कोयला, और एक सवा रुपए या एक रुपये का सिक्का।
2. क्रिया: मंत्र पढ़ते हुए उस सकोरे को पीड़ित के ऊपर से 7 बार उतारें।
3. विसर्जन: इसे रात के समय किसी सुनसान चौराहे पर चुपचाप रख आएं। पीछे मुड़कर बिल्कुल न देखें।
4. सुरक्षा और सावधानी (अनिवार्य)
चूंकि यह मंत्र बहुत उग्र है, इसलिए साधक को खुद की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए:
• स्वयं का कीलन: साधना शुरू करने से पहले अपनी उंगली से अपने चारों ओर जमीन पर एक घेरा (Circle) खींचते हुए इस मंत्र को 3 बार पढ़ें:
"ॐ नमो आदेश गुरु को,
बजरंग का कोठा, भैरव की खाई,
राजा राम की कार (रेखा) फिराई।
कहाँ गया वो कबीला, कहाँ गया वो रथ?
हनुमान की गदा पड़ें, काल भैरव का दण्ड चलें।
मेरे तन की रक्षा करें, बाबा बटुक नाथ।
दुहाई महादेव की, दुहाई गौरा पार्वती की।"
• निडरता: प्रेत बाधा के दौरान वह शक्ति डराने की कोशिश कर सकती है या अजीब आवाजें निकाल सकती है। बाबा भैरव के नाम पर अडिग रहें।
• गुरु आज्ञा: यदि संभव हो, तो इस प्रकार के उग्र प्रयोग किसी अनुभवी सिद्ध व्यक्ति के मार्गदर्शन में ही करें।
भैरव जी की "आन" का महत्व
इस मंत्र में जो "आन" (शपथ) दी गई है, वह बहुत शक्तिशाली होती है। तांत्रिक भाषा में इसे "महाकाल की कसम" माना जाता है। इससे बड़ी से बड़ी नकारात्मक शक्ति (चाहे वह कितनी भी पुरानी क्यों न हो) को शरीर छोड़ना ही पड़ता है।