God, ministry Uttarakhand

God, ministry Uttarakhand पेंटाकोस्टल चर्च parsanl page

संजू सैमसन ने सबसे पहले येसुमसीह का धन्यवाद किया Amen
01/03/2026

संजू सैमसन ने सबसे पहले येसुमसीह का धन्यवाद किया Amen

प्रभु के अभिसिक्त दास के लिये दुआ करे Ankur Narula Ministries
01/03/2026

प्रभु के अभिसिक्त दास के लिये दुआ करे Ankur Narula Ministries

 #सुखी  #हड्डियों की  #तराई [  #मैदान] से हमें क्या सीखने को मिलता है? चलिए वचन से समझते हैं। यहेजकेल 37:1–14 — “सूखी हड...
11/01/2026

#सुखी #हड्डियों की #तराई [ #मैदान] से हमें क्या सीखने को मिलता है? चलिए वचन से समझते हैं।

यहेजकेल 37:1–14 — “सूखी हड्डियों की तराई” बाइबल का बहुत गहरा और आशा से भरा संदेश है। यह परमेश्वर की सामर्थ, पुनर्स्थापना और नई ज़िंदगी का चित्र है।
1️⃣ दर्शन क्या था?
यहेजकेल भविष्यवक्ता को परमेश्वर एक तराई (मैदान) में ले जाता है जहाँ
चारों ओर सूखी, बिखरी हुई हड्डियाँ पड़ी हैं — बिल्कुल मरी हुई, बिना किसी जीवन के।
परमेश्वर पूछता है:
“हे मनुष्य, क्या ये हड्डियाँ जीवित हो सकती हैं?”
यहेजकेल उत्तर देता है:
“हे प्रभु यहोवा, तू ही जानता है।”
2️⃣ हड्डियाँ किसका प्रतीक हैं?
परमेश्वर स्वयं समझाता है (वचन 11):
“ये हड्डियाँ इस्राएल के पूरे घराने हैं… वे कहते हैं:
हमारी आशा नष्ट हो गई है, हम कट गए हैं।”
👉 ये हड्डियाँ उन लोगों का चित्र हैं जो:
निराश हैं
टूट चुके हैं
आत्मिक रूप से मर चुके हैं
कहते हैं: “अब कुछ नहीं हो सकता”
यानी यह परमेश्वर से दूर पड़े लोगों का प्रतीक है।
3️⃣ भविष्यवाणी करने पर क्या हुआ?
परमेश्वर यहेजकेल से कहता है:
“इन हड्डियों से भविष्यवाणी कर।”
जब वह बोलता है:
हड्डियाँ हिलने लगती हैं
एक-दूसरे से जुड़ जाती हैं
नसें, मांस, चमड़ी चढ़ जाती है
परन्तु उनमें अभी भी सांस नहीं थी।
फिर परमेश्वर कहता है:
“हे प्राण (आत्मा), चारों दिशाओं से आ और इनमें प्रवेश कर।”
तब वे जीवित हो गए और एक बहुत बड़ी सेना बन गए।
4️⃣ इसका आत्मिक अर्थ
यह केवल शरीर के जीवित होने की कहानी नहीं है।
यह बताती है कि:
🔹 परमेश्वर मरे हुए आत्मिक जीवन को फिर से जगा सकता है
🔹 जो लोग आशा खो चुके हैं, उन्हें फिर से खड़ा कर सकता है
🔹 टूटा हुआ जीवन भी नया बन सकता है
परमेश्वर कहता है:
“मैं अपनी आत्मा तुम में डालूँगा और तुम जीवित हो जाओगे।”
5️⃣ आज हमारे लिए संदेश
आज बहुत से लोग:
अंदर से टूटे हुए हैं
पाप, डर, दुख, और निराशा में फँसे हैं
कहते हैं: “मेरा जीवन खत्म हो गया”
पर यह वचन कहता है:
कोई भी जीवन इतना मरा हुआ नहीं कि परमेश्वर उसे जगा न सके।
यीशु मसीह के द्वारा:
पाप से मरे लोग जीवित होते हैं
टूटी आत्मा चंगी होती है
निराशा आशा में बदलती है
✨ संक्षेप में
सूखी हड्डियाँ = निराश और आत्मिक रूप से मरे लोग
परमेश्वर की आत्मा = नया जीवन
जब परमेश्वर की आत्मा आती है,
तो मरे हुए भी खड़े हो जाते हैं।
“मैं तुम्हें अपनी आत्मा दूँगा, और तुम जीवित हो जाओगे।” (यहेजकेल 37:14)
आमीन। 🙏

08/01/2026

यीशु नाम से 2026 मे आपका सारा कर्जा
खत्म हो जाए।
आमीन

यीशु ने क्यों कहा “अपने मन की रक्षा करना” इसलिए कहा क्योंकि मन ही मनुष्य के पूरे जीवन, विश्वास और आचरण का केंद्र होता है...
14/12/2025

यीशु ने क्यों कहा “अपने मन की रक्षा करना” इसलिए कहा क्योंकि मन ही मनुष्य के पूरे जीवन, विश्वास और आचरण का केंद्र होता है। यदि मन सुरक्षित है तो जीवन भी सुरक्षित रहता है, और यदि मन भटक गया तो पूरा जीवन भटक जाता है।
1️⃣ मन से ही जीवन निकलता है
📖 नीतिवचन 4:23
“सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर, क्योंकि जीवन का स्रोत वही है।”
यीशु जानते थे कि विचार → निर्णय → कर्म → आदत → चरित्र → भविष्य बनाते हैं।
इसलिए मन की रक्षा जीवन की रक्षा है।
2️⃣ पाप की शुरुआत मन से होती है
📖 मत्ती 15:19
“क्योंकि मन से बुरे विचार, हत्या, व्यभिचार, चोरी, झूठी गवाही निकलती है।”
यीशु ने सिखाया कि पाप केवल बाहर का काम नहीं, बल्कि अंदर के मन की दशा है।
3️⃣ शैतान का पहला हमला मन पर होता है
📖 यूहन्ना 10:10
“चोर केवल चोरी करने, घात करने और नाश करने आता है।”
शैतान भय, संदेह, निराशा और गलत विचारों के द्वारा मन पर आक्रमण करता है।
इसलिए यीशु ने कहा—सावधान रहो, जागते रहो।
4️⃣ मन नया न हुआ तो जीवन नया नहीं होगा
📖 रोमियों 12:2
“अपने मन के नए हो जाने से रूपांतरित होते जाओ।”
यीशु केवल व्यवहार नहीं बदलना चाहते थे, बल्कि मन का नवीनीकरण चाहते थे।
5️⃣ शांति या अशांति – दोनों मन से आती हैं
📖 यूहन्ना 14:27
“मैं तुम्हें शांति देता हूँ… तुम्हारा मन व्याकुल न हो।”
मन सुरक्षित होगा तो शांति बनी रहेगी, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो।
✝️ यीशु का सार संदेश
👉 मन की रक्षा = आत्मा की रक्षा
👉 मन शुद्ध = जीवन शुद्ध
👉 मन प्रभु में = जीवन सुरक्षित
🙏 छोटी प्रार्थना
“हे प्रभु यीशु, मेरे मन को बुरे विचारों से बचा,
मुझे अपनी शांति और सत्य से भर दे।
मेरा मन तेरे वचन में स्थिर रहे।
आमीन।”

*🙏सभी को जय मसीह की* आज मैंने मत्ती अध्याय 19 और 20 पढा । *मत्ती 19:30;और 20:16“में लिखा ,,जो पहले है वह पीछे हो जाएगा औ...
11/12/2025

*🙏सभी को जय मसीह की*
आज मैंने मत्ती अध्याय 19 और 20 पढा ।
*मत्ती 19:30;और 20:16“में लिखा ,,जो पहले है वह पीछे हो जाएगा और जो पीछे है वह आगे हो जाएगा*
*📖मैंने सिखा 👉 इस आत्मिक सिद्धांत को हमें समझाने के लिए यीशु ने इसका गहरा अर्थ यह बताया कि परमेश्वर का राज्य मनुष्य के दिखावे, पद, प्रभाव या बाहरी धार्मिकता पर नहीं चलता—बल्कि नम्रता, आज्ञाकारिता और सच्चे मन से चलता है।
✦ इसका मुख्य अर्थ
1. परमेश्वर के राज्य में मूल्य-व्यवस्था उलटी है
दुनिया जिसको “बड़ा”, “महान”, “पहले” मानती है—
जैसे:• धन• पद• प्रसिद्धि•धार्मिक दिखावा• शक्ति
—उनका परमेश्वर के सामने कोई विशेष मूल्य नहीं।
परमेश्वर के राज्य में “नम्र”, “छोटे”, “तिरस्कृत”, और ऐसे “विश्वासी” आगे होंगे।
2. जो खुद को पहले रखता है, उसका हृदय घमंड से भर जाता है
यीशु ने कहा:
“जो अपने आप को बढ़ाता है वह घटाया जाएगा; और जो अपने आप को घटाता है वह बढ़ाया जाएगा।”
— लूका 14:11
जो लोग खुद को ही महान समझते हैं वे आत्मिक रूप से पीछे रह जाते हैं।
3. जो आख़िरी हैं—नम्र, छोटे, टूटे, लेकिन विश्वासयोग्य—वे आगे माने जाएंगे
यीशु उन लोगों को आगे रखता हैं जैसे:
• जो व्यक्ति नम्र होकर चलते हैं
• दिल से प्रभु के प्रति सच्चे हैं
• दूसरों की सेवा करते हैं
• गुप्त में भलाई करते हैं
• परमेश्वर के ऊपर निर्भर रहते हैं।

4. लेकिन एक यह चेतावनी भी है—धार्मिक घमंड से सावधान रहने की
फरीसी खुद को “पहले” समझते थे, लेकिन उनके हृदय परमेश्वर से दूर थे।
जबकि टैक्स-कलेक्टर, पापी, और साधारण लोग यीशु के पास टूटे मन से आए—वे “आगे” हो गए।
5. यह दृष्टांत के संदर्भ में कहा गया था
मत्ती 20 में यीशु ने दाख की बारी के मजदूरों का दृष्टांत बताया, जहाँ आख़िरी घंटे में बुलाए गए मजदूरों को भी समान मजदूरी मिली।
*इसलिए यीशु ने कहा: जो आज इसी वक़्त मन फिराकर यीशु के पास आते वो उनके बराबर होगें जो मसीह में 10 या 20 साल से है*
“इस प्रकार आखिरी पहले और पहले आखिरी होंगे।”
इसका अर्थ—
परमेश्वर अनुग्रह से देता है, पद या समय से नहीं।
✦ संक्षेप में
यीशु कह रहे हैं:
दुनिया में जो बड़े दिखते हैं, वे परमेश्वर के राज्य में छोटे हो सकते हैं।
जो दुनिया में छोटे, तुच्छ या तिरस्कृत हैं, लेकिन नम्र और विश्वासयोग्य हैं—वे परमेश्वर के राज्य में बड़े होंगे।
घमंड पीछे कर देता है; नम्रता आगे बढ़ाती है।
*नोट ःइसलिए घमंड मे ं आकर किसी से भी ना कहे हम मसीह में तुमसे पहले है* आमीन।

08/12/2025

आज कई लोग यीशु को जानते हुए भी क्यों परेशान हैं ?
बाइबल इसके कई कारण बताती है। नीचे वे मुख्य कारण हैं:
1️⃣ क्योंकि लोग यीशु को जानते हैं, लेकिन मानते नहीं हैं
सिर्फ जानकारी जीवन नहीं बदलती, आज्ञाकारिता बदलती है।
📖 याकूब 1:22
“केवल वचन सुनने वाले न बनो, परन्तु उस पर चलो।”
लोग यीशु के बारे में जानते हैं लेकिन यीशु पर भरोसा और आज्ञाकारिता नहीं करते।
2️⃣ क्योंकि वे अपनी इच्छा से चलते हैं, परमेश्वर की इच्छा से नहीं
लोग कहते हैं — “प्रभु, आपका रास्ता नहीं… मेरा रास्ता।”
📖 नीतिवचन 3:5-6
“अपने पूरे मन से यहोवा पर भरोसा रख… उसी को मान, और वह तेरे मार्ग सीधे करेगा।”
जब कोई परमेश्वर की नहीं, अपनी इच्छा चलाता है — जीवन में उलझन आती है।
3️⃣ क्योंकि वे दुनिया की चीज़ों में शांति ढूंढ़ते हैं
पैसा, मोबाइल, रिश्ते, स्टेटस, मनोरंजन—
ये सब क्षणिक सुख देते हैं, लेकिन सच्ची शांति नहीं।
📖 यूहन्ना 14:27
“मेरी शांति तुम्हें देता हूँ... जैसी संसार देता है वैसी नहीं।”
4️⃣ प्रार्थना न करना जीवन को कमजोर बनाते हैं
कई लोग प्रार्थना सिर्फ समस्या आने पर करते हैं, हर दिन नहीं।
📖 मत्ती 26:41
“जागते रहो और प्रार्थना करो, ताकि परीक्षा में न पड़ो।”
बिना प्रार्थना के विश्वास कमजोर हो जाता है।
5️⃣ क्योंकि वे बाइबल पढ़ते नहीं, या समझकर चलने की कोशिश नहीं करते
बाइबल आत्मिक जीवन का भोजन और मार्गदर्शन है।
📖 भजन 119:105
“तेरा वचन मेरे पांव के लिए दीपक और मेरे रास्ते के लिए उजियाला है।”
अगर वचन नहीं — तो जीवन में अंधकार और भ्रम आता है।
6️⃣ क्योंकि शैतान उन पर हमला करता है
जो परमेश्वर के हैं, शैतान उन्हें और ज्यादा परेशान करता है ताकि वे हार मान लें।
📖 1 पतरस 5:8
“शैतान गरजते हुए सिंह के समान डोलता फिरता है कि किस को निगल जाए।”
7️⃣ क्योंकि वे पाप छोड़ नहीं पाए हैं
कुछ लोग पाप को पकड़े रहते हैं —
झूठ, गुस्सा, गलत रिश्ते, नशा, घमंड, क्षमा न करना आदि।
📖 यशायाह 59:2
“तुम्हारे पापों ने तुम्हें परमेश्वर से अलग कर दिया है।”
पाप शांति को नष्ट करता है।
तो समाधान क्या है?
✔ यीशु पर भरोसा करो, सिर्फ जानकारी मत रखो।
✔ दैनिक प्रार्थना और बाइबल पढ़ो।
✔ पाप छोड़ दो और पश्चाताप करो।
✔ विश्वास, आज्ञाकारिता और क्षमा से जियो।
यीशु का वादा
📖 मत्ती 11:28
“हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ और मैं तुम्हें विश्राम दूंगा।”
🙏 छोटी सी प्रार्थना
हे प्रभु यीशु, मैं आपको जानता हूँ पर हमेशा आपके अनुसार नहीं चलता।
आज मैं अपना डर, चिंता, और बोझ आपके चरणों में रखता हूँ।
मुझे विश्वास, शांति, आज्ञाकारिता और पवित्र जीवन में चलना सिखाएं।
आमीन।

06/12/2025

*शैतान को स्वर्ग से क्यों निकल दिया गया आइए समझते*
बाइबल के अनुसार शैतान (लूसिफ़र) को स्वर्ग से इसलिए निकाला गया क्योंकि उसके हृदय में घमंड, विद्रोह और परमेश्वर जैसा बनने की इच्छा पैदा हुई।
📌 पहले वह कौन था?
शैतान पहले एक सुंदर, सामर्थी स्वर्गदूत था।
बाइबल कहती है:
“तू अभिषिक्त करूब था… तू सिद्ध था… जब तक तुझ में अधर्म न पाया गया।”
📖 यहेजकेल 28:14–15
वह परमेश्वर के पास था, और स्वर्गदूतों में सबसे ऊंचा स्थान रखता था।
📌 उसका पाप क्या था?
उसके भीतर पाँच इच्छाएँ उठीं, जो बताती हैं कि वह क्या चाहता था:
📖 यशायाह 14:13-14
“मैं स्वर्ग पर चढ़ जाऊंगा,
उच्च आसन पर बैठूंगा,
मैं परमप्रधान के समान हो जाऊंगा।”
➡️ मतलब:
वह उपासना नहीं करना चाहता था
वह उपासना लेना चाहता था
वह परमेश्वर के ऊपर बैठना चाहता था
उसे शक्ति, महिमा और नियंत्रण चाहिए था
📌 परिणाम क्या हुआ?
“आकाश में लड़ाई हुई… और बड़ा अजगर (शैतान) फेंका गया… और उसके दूत भी।”
📖 प्रकाशितवाक्य 12:7-9
👉 शैतान परमेश्वर को हरा नहीं सका
👉 और स्वर्ग से बाहर निकाल दिया गया
👉 उसके साथ वो स्वर्गदूत भी गिरे जो उसका साथ देते थे (ये आज दुष्ट आत्माएँ/दानव हैं)
📌 अब शैतान क्या कर रहा है?
बाइबल कहती है:
“शैतान गड़गड़ाने वाले सिंह की तरह घूमता है कि किसे निगल जाए।”
📖 1 पतरस 5:8
यानी उसका काम है:
लोगों को पाप में फँसाना
सत्य से दूर करना
झूठ, डर, लालच और प्रलोभन देना
परमेश्वर के बच्चों का विरोध करना
📌 आख़िर में उसका क्या होगा?
बाइबल कहती है:
शैतान आग की झील में डाला जाएगा।”
📖 प्रकाशितवाक्य 20:10
👉 यह उसकी अंतिम सजा है
👉 वह राजा नहीं, बल्कि दोषी कैदी है
❤️ अच्छी खबर क्या है?
👉 यीशु ने शैतान को हराया है!
“परमेश्वर का पुत्र इसलिये प्रगट हुआ कि शैतान के कामों को नाश करे।”
📖 1 यूहन्ना 3:8
जो यीशु पर विश्वास करता है, उसके ऊपर शैतान की कोई शक्ति नहीं रहती।
✨ सारांश
कारण क्यों निकाला गया
उसका पाप घमंड, विद्रोह
उसकी इच्छा परमेश्वर जैसा बनना
परिणाम स्वर्ग से गिराया गया
अंतिम दंड आग की झील

03/12/2025

लोग स्वर्ग बदले नर्क की ओर क्यों जा रहे हैं, इसका कारण परमेश्वर की कमी नहीं है — कारण मनुष्य का चुनाव है।
बाइबल कहती है:
📖 मत्ती 7:13–14
“जो फाटक चौड़ा है और जो मार्ग व्यापक है, वह नाश की ओर ले जाता है और बहुत लोग उस पर चलते हैं। परंतु जीवन की ओर ले जाने वाला मार्ग संकरा और कठिन है, और थोड़ा लोग उसे पाते हैं।”
✦ लोग नर्क की ओर क्यों जा रहे हैं?
1️⃣ क्योंकि वे सत्य से दूर भागते हैं
लोग सुसमाचार सुनना नहीं चाहते, क्योंकि वह उनके पापों को उजागर करता है।
📖 यूहन्ना 3:19
“मनुष्यों ने ज्योति की अपेक्षा अंधकार को अधिक प्यार किया, क्योंकि उनके काम बुरे थे।”
2️⃣ क्योंकि वे पाप में मज़ा पाते हैं
झूठ, वासना, क्रोध, बदला, शराब, अहंकार — ये सब पाप हैं, लेकिन लोग इन्हें “गलत” नहीं बल्कि “स्वतंत्रता” मानते हैं।
3️⃣ क्योंकि वे सोचते हैं समय बहुत है
लोग सोचते हैं — “अभी मज़ा कर लेते हैं, बाद में परमेश्वर को ढूंढ लेंगे।”
पर बाइबल कहती है:
📖 नीतिवचन 27:1
“कल के विषय में घमंड मत कर, क्योंकि तू नहीं जानता कि एक दिन में क्या होगा।”
4️⃣ क्योंकि वे दूसरों का अनुसरण करते हैं
बहुत लोग भीड़ का रास्ता चुनते हैं, लेकिन भीड़ हमेशा सही रास्ते पर नहीं होती।
5️⃣ क्योंकि वे यीशु को स्वीकार नहीं करते
उद्धार केवल यीशु के माध्यम से है।
📖 यूहन्ना 14:6
“मैं मार्ग, सत्य और जीवन हूं; मेरे द्वारा बिना कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता।”
लोग धर्म चुनते हैं, पर यीशु को नहीं चुनते।
6️⃣ क्योंकि वे सोचते हैं उनके अच्छे काम उन्हें बचा सकते हैं
लोग सोचते हैं— “मैं अच्छा हूँ, इसलिए मुझे नर्क नहीं मिलेगा।”
लेकिन बाइबल कहती है:
📖 इफिसियों 2:8–9
“उद्धार अनुग्रह से विश्वास के द्वारा है... यह कर्मों से नहीं, ताकि कोई घमंड न करे।”
7️⃣ क्योंकि शैतान उन्हें धोखा देता है
शैतान लोगों के मन को अंधा करता है ताकि वे सत्य न देखें।
📖 2 कुरिन्थियों 4:4
“शैतान ने उनके मनों को अंधा कर दिया है ताकि वे सुसमाचार की ज्योति को न देख सकें।”
✦ तो फिर कौन बचेंगे?
📖 यूहन्ना 3:16
“जो कोई उस पर विश्वास करेगा, वह नाश नहीं होगा, परन्तु अनन्त जीवन पाएगा।”
✦ आज परमेश्वर क्या कहता है?
📖 यशायाह 55:6
“जब तक वह मिल सकता है, तब तक प्रभु को खोजो।”
✦ प्रार्थना
यदि आप कहना चाहें तो यह प्रार्थना कर सकते हैं👇
हे प्रभु यीशु, मैं पापी हूँ। मुझे क्षमा कर। मैं नरक नहीं, स्वर्ग चाहता हूँ। आज से मैं तेरा अनुसरण करूंगा। मेरे हृदय में आ, मेरा जीवन बदल दे। आमीन।”

03/12/2025

यीशु ने क्यों कहा “लूत की पत्नी को स्मरण करो” (लूका 17:32) — और यह वचन बहुत गहरा, चेतावनी-भरा और आज के समय के लिए बहुत ज...
02/12/2025

यीशु ने क्यों कहा “लूत की पत्नी को स्मरण करो” (लूका 17:32) — और यह वचन बहुत गहरा, चेतावनी-भरा और आज के समय के लिए बहुत जरूरी है।
यह वचन क्यों कहा गया?
इसके 3 मुख्य कारण हैं:
1. पीछे मुड़कर देखने की प्रवृत्ति से सावधान करने के लिए
जब परमेश्वर ने सदोम और अमोरा को नष्ट किया, उसने लूत के परिवार से कहा:
➡️ “भागो—पीछे मुड़कर मत देखना!”
पर लूत की पत्नी पीछे मुड़कर देखने लगी, क्योंकि उसका मन अब भी सदोम की पुरानी दुनिया, पुरानी आदतों, और पुराने सुखों में लगा था।
पीछे मुड़कर देखने का मतलब था — दिल अभी भी दुनिया में है।
इसलिए यीशु चेतावनी देते हैं:
➡️ “मन में पुराने पापों और पुरानी दुनिया की चाह मत रखो।”
2. आधा समर्पण विनाश की ओर ले जाता है
लूत की पत्नी शरीर से बाहर निकल गई,
लेकिन मन से सदोम में ही रही।
यानी वह आधी आज्ञा मान रही थी, आधी नहीं।
यीशु दिखाना चाहते हैं कि आधा विश्वास → आधा आज्ञा पालन → पूरा विनाश।
परमेश्वर को पूरा दिल चाहिए, न कि आधा।
3. अंत समय में लोग फिर वही गलती करेंगे
लूका 17 में यीशु अंत समय की बात कर रहे थे।
उन्होंने कहा—
➡️ “जिस दिन मनुष्य का पुत्र प्रकट होगा लोग खाने-पीने, खरीदने-बेचने, बोने-रोपने में लगे होंगे… जैसे लूत के समय हुआ था…”
और फिर वह कहते हैं:
“लूत की पत्नी को स्मरण करो।”
क्यों?
क्योंकि अंत समय में लोग:
1.दुनिया के सुखों में फँस जाएंगे
2.सांसारिक चीजें नहीं छोड़ पाएंगे
3.परमेश्वर की चेतावनियों को हल्के में लेंगे
4.पाप छोड़ नहीं पाएंगे
लूत की पत्नी की मौत एक आत्मिक तस्वीर है —
जो बताती है कि दिल अगर दुनिया में बँधा रहे, तो उद्धार छूट सकता है।
आज के लिए संदेश
1.लूत की पत्नी को याद करो का मतलब है:
2.पाप छोड़ो और पीछे मत देखो
3.दुनिया से चिपके मत रहो
4.जहां परमेश्वर बुला रहा है, वहीं चलो
5.पिछला जीवन फिर से अपनाने की लालसा न रखो
6.आधे नहीं, पूरे दिल से प्रभु का पालन करो

Address

दिल्ली देहरादून. मार्ग
Dehra Dun
248001

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when God, ministry Uttarakhand posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to God, ministry Uttarakhand:

Share