29/04/2021
श्री निर्मल कुमार जी सेठीजी का परीचय
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श्रीमान् निर्मल कुमार जी सेठी एक ऐसे स्तम्भ हैं जिन पर जैन समाज गौरवान्वित होकर अपनी खयाति फैला रहा है। आपने वाणिज्य से स्नातक की परीक्षा कलकत्ता विश्वविद्यालय से पूर्ण की। श्री सेठी जी सरल प्रकृति के एक ऐसे पुरुष हैं, जिनमें धार्मिक भावना और धार्मिक निष्ठा कूट-कूट कर भरी है। आपकी दिनचर्या पूजन और जन-सेवा से प्रारम्भ होती है और सर्व सुखाय के चिंतन से समाप्त होती है। आपका मुखय लक्ष्य सादा जीवन और उच्च विचार है। सेठी जी का व्यक्तित्व बहुप्रतिभाशाली है, ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जिसमें उन्होंने जैन समाज की सेवा न की हो।
श्री निर्मल कुमार जी सेठी जैन समाज के जाने-माने ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें सेवा के संस्कार विरासत में प्राप्त हुये हैं। सामाजिक कार्यों के अंतर्गत सन् 1953 से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सक्रिय कार्यकर्ता थे, असम में तिनसुकिया व सिल्चर तथा उ.प्र.में सीतापुर व लखनऊ कांग्रेस कमेटियों के सदस्य की हैसियत से समाज के प्रादुर्भाव में अपने आप को समर्पित करते रहे। सन् 1984 के लोकसभा चुनावों में सीतापुर में डा. राजेन्द्र कुमार बाजपेयी के, लखनऊ में श्रीमती शीला कौल के, बहराइच में श्री आरिफ मोहम्मद खां के, बाराबंकी में श्री राना रनवीर के तथा मेरठ में श्रीमती मोहसिना किदवई के चुनाव अभियानों में सक्रिय कार्य किया तथा सम्पूर्ण भारतवर्ष की जैन समाज के प्रमुख व्यक्तियों को व अहिंसा में आस्था रखने वाले लोगों को लगभग 1200 पत्र कांग्रेस प्रत्याशियों का पूर्ण समर्थन करने के लिये लिखे तथा उनमें से अधिकांश से समर्थन के वचन प्राप्त किये। श्री सेठी जी द्वारा दिनांक 13-14 अप्रैल सन् 1984 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में अहिंसा, शाकाहार व जीवदया पर एक सेमीनार आयोजित किया गया, जिसका उद्घाटन केन्द्रीय मंत्री माननीय श्री बसंत साठे ने किया था। देश भर से कई सौ चिकित्सा विशेषज्ञों, विद्वानों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस सेमीनार में भाग लेकर इसे अभूतपर्व सफलता प्रदान की। दिनांक 8-10 फरवरी, 1985 को दिल्ली में विश्व जैन कान्फ्रेंस का आयोजन किया।
धार्मिक कार्यों में अपने आप को अग्रसर किये श्री निर्मल कुमार जी सेठी, अध्यक्ष-श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन (धर्म संरक्षिणी) महासभा, स्थापित सन् १८९४ यह दिगम्बर जैन समाज का सर्वाधिक पुराना संगठन है तथा सम्पूर्ण भारत में इसकी प्रान्तीय समितियां स्थापित हैं। इस संस्था के १०० वर्ष पूरे होने पर इसका शताब्दी महोत्सव सारे भारतवर्ष में जगह-जगह सन् (१९९४-९५) में मनाया गया। श्री जम्बू द्वीप ज्ञानज्योति प्रवर्तक समिति का शुभारंभ दिनांक ४ जून सन् १९८२ को दिल्ली से स्व. प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा किया गया था। उक्त अवसर पर माननीया प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जी को समस्त जैन समाज की ओर से अभिनंदन-पत्र भेंट किया गया। ज्योति ने सम्पूर्ण प्रदेश के ३००० से अधिक नगरों, कस्बों व ग्रामों का भ्रमण किया तथा सभायें आयोजित कर देश भर में शाकाहार, अहिंसा तथा आपसी भाई-चारे के सद्भाव का अभूतपूर्व प्रचार किया।
वैसे तो धर्म संरक्षिणी महासभा में तीर्थ जीर्णोद्धार विभाग स्थापित कर तीर्थ जीर्णोंद्धार योजना लगभग १५-१६ वर्ष पूर्व प्रारम्भ की गई थी परन्तु कार्य की व्यापकता, प्राचीन सांस्कृतिक धरोहरों को अक्षुण्ण बनाये रखने, भारतभर में जीर्ण शीर्ण प्राचीन तीथोर्ं/मंदिरों, यत्र-तत्र बिखरी हुई कलात्मक संपदाओं को सुरक्षित तथा कार्य को और अधिक गति प्रदान करने हेतु श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन (धर्म संरक्षिणी) महासभा द्वारा नई संस्था का गठन श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन (तीर्थ संरक्षिणी) महासभा के नाम से श्री महावीर जी में दिनांक ५ फरवरी, १९९८ को किया गया जिसका भी अध्यक्ष पद आप ही सुशोभित कर रहे हैं। आप अपने समस्त व्यापारिक कार्यों को गौण कर इस यज्ञ में अपनी आहुति दे रहे हैं। आपके संरक्षण में तीर्थ संरक्षिणी महासभा द्वारा अब तक तीन सौ सत्तावन तीर्थ/मंदिरों का जीर्णोद्धार हो चुका है।
श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा चेरिटेबुल ट्रस्ट तथा श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन (श्रुत संवर्द्धिनी) महासभा के भी आप अध्यक्ष हैं। साथ ही आप श्री दिगम्बर जैन अयोध्या तीर्थक्षेत्र कमेटी, रायगंज, अयोध्या (उ.प्र.) के संरक्षक, श्री दिगम्बर जैन वैशाली तीर्थक्षेत्र कमेटी, वैशाली (बिहार) के अध्यक्ष, श्री गोपाल दिगम्बर जैन सिद्धान्त संस्कृत महाविद्यालय मुरैना (मध्यप्रदेश) के अध्यक्ष तथा श्री सम्मेदशिखर जी आंदोलन समिति के संरक्षक हैं।
सामाजिक उत्कर्ष उनके बिना प्रायः दिशाहीन बना रहता है। सेठी जी समाज की नहीं अपितु देश की अनुपम निधि हैं। आपका भव्य विशाल व्यक्तित्व सघन वटवृक्ष की भांति चिरंतन सद्भाव तथा सौहार्द्र को प्रस्फुटित करने वाला है। सौम्य व मृदु स्वभावी सेठी जी समाजोत्थान के प्रति दृढ़संकल्पी तथा आत्मप्रतिज्ञ हैं। इस युग में आप जैन समाज और जैन संस्कृति के जागरूक प्रहरी हैं। आपने समाज को जो निःस्वार्थ सेवायें दी हैं वे अविस्मरणीय हैं। श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा के अध्यक्ष के रूप में आपने जैन समाज को संगठित करके एक नया रूप और नई दिशा दी है। आपके नेतृत्व में महासभा ने जो रचनात्मक कार्य किये हैं, वे सदा स्वर्णिम अक्षरों में लिखे जायेंगे।
देश भर में सामाजिक व धार्मिक कार्यों में रत संस्थाओं को उदारतापूर्वक दान देते रहे हैं, जिससे समाज के सभी वर्ग लाभान्वित हुये। सामाजिक सेवाओं के सम्मान में विभिन्न संस्थाओं द्वारा 'जैन युवक रत्न', 'जैन समाज भूषण', 'श्रावक शिरोमणि', 'जैन युवा सम्राट' आदि मानद उपाधियों से अलंकृत किया गया। शिक्षा में आपका योगदान अत्यंत प्रशंसनीय रहा। आसाम के कछार जिले में २५ हिन्दी स्कूलों तथा डिब्रूगढ जिले में ४ हिन्दी स्कूलों की स्थापना एवं विकास में सहायता की तथा अपना संरक्षण प्रदान किया।
सीतापुर नगर के आर.एम.पी. डिग्री कालेज में विज्ञान विभाग की स्थापना के लिये तथा उजागर लाल इंटर कालेज के कामर्स विभाग के लिये भवन निर्माण करा कर दिया। इस विद्यालय के वर्तमान में आप सचिव भी हैं।
सीतापुर जिले के ग्राम लक्ष्मणपुर तथा नेरी में श्री हरकचंद्र शिक्षा निकेतन की स्थापना की। भारतीय संस्कृति संबंधी कई प्राचीन ग्रंथों को सहायता देकर प्रकाशित कराया।
उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र में आपका योगदान सराहनीय है। एक लघु उद्योग की स्थापना से अपने औद्योगिक जीवन का प्रारंभ किया। अपनी प्रबंधकता तथा व्यापारिक योग्यता से इस समय असम के तिनसुकिया, सिल्चर एवं उ.प्र. के बिलारी, सीतापुर, लखनऊ, गोरखपुर में अपने औद्योगिक प्रतिष्ठानों का तथा गुवाहाटी व दिल्ली में व्यापारिक प्रतिष्ठानों का दक्षतापूर्वक संचालन किया।
औद्योगिक विकास में संलग्न क्षेत्रीय संगठनों में आप कछार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, सिल्चर (आसाम) के मानद मंत्री, सीतापुर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, सीतापुर के मानद मंत्री (सन् १९७६ से ) तथा यू.पी. रोलर फ्लोर मिल्स एसोसिएशन, लखनऊ (उ.प्र.) के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं।
यूनाइटेड स्टेट्स के कृषि विभाग के निमंत्रण पर गेहँू की काश्त्, कटाई व यातायात के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने के लिये भारत में फ्लोर मिलिंग उद्योग के विकास के लिये भारत सरकार द्वारा प्रेरित (स्पान्सर्ड) इंडियन व्हीट इंडस्ट्री टीम के नेता के रूप में सन् १९७७ में अमेरिका, जापान, हांगकांग व अन्य देशों का भ्रमण किया। चार बार विदेशों का भ्रमण कर जैन धर्म का प्रचार-प्रसार किया। खेल क्षेत्र में टेनिस व बैडमिंटन के चैम्पियन तथा उ.प्र. के विभिन्न खेल संघों से सम्बद्ध भी रहे।
अन्य कार्यों के अंतर्गत श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद के प्रमुख संरक्षक (१ अक्टूबर १९८३ में लंदन में आयोजित विश्व जैन कांफ्रेंस में भारत के एक प्रतिनिधिमंडल के नेता के रूप में सम्मिलित हुये।)
राष्ट्रीय एकीकरण समिति की उ.प्र. परिषद के सदस्य भी रहे। समाज में शांति एवं सद्भाव की स्थापना व बढ़ोत्तरी के लिये समर्पित रहते हैं।
पारिवारिक परिचय के अंतर्गत श्री सेठी जी चार भाई हैं। बड़े स्वयं हैं, तीन लघु भ्राता हैं, क्रमशः श्री हुलाशचंद जी सेठी, श्री महावीर प्रसाद जी सेठी एवं श्री दिनेश जी सेठी। सभी बड े ही धर्मात्मा, दानी एवं सरल स्वभावी हैं। आपका विवाह स्व. माहैरीलाल जी रारा, बाय जिला-सीकर (राजस्थान) की पुत्री संतरा देवी जी के साथ सम्पन्न हुआ। श्री सेठी जी तीन सुपुत्र व तीन सुपुत्रियों के सौभाग्यशाली पिता हैं। सुपुत्र श्री नवीन जैन, श्री धर्मेन्द जी जैन एवं श्री पारस जी जैन। सबसे बड े श्री नवीन जैन का विवाह महासभा के उपाध्यक्ष श्री निरंजनलाल बैनाड ा आगरा के लघु भ्राता की पन्नालाल जी बैनाड ा की सुपुत्री अनु जैन के साथ सम्पन्न हुआ, का १० नवम्बर सन् २००० को निधन हो चुका है। श्री धर्मेन्द्र जैन तथा पारस जैन भी विवाहित हैं। आपकी तीन सुपुत्रियां हैं सरिता बाई जी, कल्पना बाई जी एवं रेखा जैन जी (सभी विवाहित हैं)।
सेठी परिवार की धर्म के प्रति अटूट आस्था, समाजसेवा की उत्कट अभिलाषा, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक जागृति के लिये समर्पित निष्ठा, दानवीर और आतिथ्य सत्कार सर्वविदित है।
श्री सेठी जी के नेतृत्व में श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन (धर्म संरक्षिणी) महासभा द्वारा उ.प्र. में जैन समुदाय को अल्पसंखयक का दर्जा दिलाये जाने के प्रयासों के अंतर्गत श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन (धर्म संरक्षिणी) महासभा के अध्यक्ष श्री निर्मल कुमार जैन (सेठी) के नेतृत्व में संस्था के केन्द्रीय कार्यालय जो कि लखनऊ में है, द्वारा उत्तर प्रदेश में जैन समुदाय को अल्पसंखयक का दर्जा दिलवाये जाने हेतु गत लगभग सन् १९९५ से प्रयास प्रारंभ कर दिये गये थे उसके पश्चात् से श्रीमान् सेठी जी के दिशा निर्देशन में शासन, अल्पसंखयक विभाग, शासन के मंत्रियों, सचिवों आदि को लगातार ज्ञापन दिये जाते रहे एवं प्रतिनिधि मण्डलों ने भी कई बार महामहिम राज्यपाल, माननीय मंत्रीगणों एव सचिवों आदि से मुलाकात का सिलसिला जारी रखा। एक महत्वूपर्ण सफलता २५ अक्टूबर २००२ को राज्य संग्रहालय लखनऊ में आयोजित उनके सुपुत्र स्व. श्री नवीन सेठी की स्मृति में जैन कला वीथिका के उद्घाटन अवसर पर मिली जब उस समय वीथिका प्रदर्शनी के उद्घाटन के लिये पधारीं उ.प्र. की माननीय मुखयमंत्री सुश्री मायावती जी ने महासभाध्यक्ष श्री निर्मल कुमार जी सेठी द्वारा समस्त जैन समाज की ओर से की गई उ.प्र. में जैन समुदाय को अल्पसंखयक का दर्जा देने की मांग पर गंभीरता पूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया और दिनांक २६ मार्च, २००३ को लखनऊ में मुखयमंत्री सुश्री मायावती जी की अध्यक्षता में सम्पन्न उत्तर प्रदेश राज्य मंत्रिमण्डल की बैठक में उ.प्र. के जैन समुदाय को अल्पसंखयक समुदाय घोषित करने का निर्णय ले लिया गया।