23/09/2025
श्री गणेशाय नमः
मां त्रिपुर सुंदरी का जैसा वर्णन आदि गुरु शंकराचार्य ने सौंदर्य लहरी में किया है ,ठीक उसी प्रकार का वर्णन यहां भी मिलता है, कालिदास ने भी कुमार संभव में ऐसा ही वर्णन किया है तंत्र जैसे दुरुह विषयों का ललित एवं मधुर शब्द में विवेचन साधारण व्यक्ति नहीं कर सकता यह उनके ही समर्थ की बात है
महर्षि दुर्वासा की इस देन से यदि देशवासी अपने चरित्र को उच्च स्तर का बनाने का प्रयास करेंगे तो निश्चय ही राष्ट्र का भविष्य उज्जवल होगा.
यह स्तोत्र सच्चरित्र और उपासना रत लोगों के लिए अत्यंत प्रेरणा प्रद है
मां ललिता त्रिपुर सुंदरी अनेक कोटि ब्रह्मांड जननी तो है ही किंतु इसके साथ प्रपंच की अधिष्ठान भूता सत चित आनंद रूप, शिव शक्ति रुपाणी है, सर्व की उत्पत्ति स्थिति और संहार भर उन्हें में है, वे ही साक्षी ,सत्ता और चित् शक्ति है,
ज्ञान शक्ति क्रियाशक्ति और चित् शक्ति महामाया के ही भेद हैं उनमें कोई लिंग नहीं है किंतु चित्, ललिता, भवानी, कामेश्वरी आदि स्त्रीलिंग शब्दों से ,आत्मा पुरुष, सदाशिव ,ब्रह्म आदि नाम पुलिंग तथा ब्रह्म ज्ञान आदि नपुंसक लिंग से व्यवहर्त होते हैं, किंतु माँ को उपरोक्त सभी शब्दों से संबोधित किया जाता है. माया का आश्रय लेकर वही त्रिपुर सुंदरी, भवानी, ललिता, भुवनेश्वरी ,दुर्गा ,काली ,परम पुरुष, सच्चिदानंद, परम ब्रह्म सदाशिव, शाश्वत, सनातन, प्रत्यग आत्मा आदि नाम से व्यवहृत होती हैं ,स्थूल सूक्ष्म, कारण ,षट विद्या, परा पश्यन्ती, त्रिपुरा, शिव शक्ति सब उन्हीं के नाम है
वैष्णवी शक्ति, अनंत वीर्य ,विश्व बीजं, परमासिमाया आदि के रूप में शास्त्रों में उनकी चर्चा की गई है
कोई भी कार्य बिना शक्ति के नहीं किया जाता है शक्ति और शक्तिमान में भेद देखना सर्वथा गलत है, शक्ति शक्तिमान की होती है बिना शक्ति के शक्तिमान शव है ,और शक्तिमान के बिना कोई भी कार्य करना संभव नहीं है
भगवान कृष्ण ने यही वचन गीता में अर्जुन को कहे हैं ,आदि शंकराचार्य जी का भी यही कथन है ,
इस बात पर उल्लेख किया गया है की ललिता सहस्रनाम और श्री चक्र में आबिनाभाव संबंध है श्री भास्कर राय ने श्री ललिता सहस्रनाम की परिभाषा में इसका उल्लेख किया है भगवान शिव, महर्षि अगस्त, सूर्य , इंद्र ,अग्नि दुर्वासा, दत्तात्रेय ,चंद्रमा, मनु लोपमुद्रा, कामदेव और कुबेर को त्रिपुर रहस्य में श्री विद्या का आचार्य बताया गया है उक्त सभी आचार्य ललिता सहस्रनाम से संबंधित है
वायु पुराण में भी कहा गया है कि संसार में जो कुछ भी घटित हो रहा है और जो होने वाला है सब की जानकारी प्राप्त कर लेने की क्षमता और अपार शक्ति इससे प्राप्त होती है .
12 शक्तियों के सहित परमेश्वर पूर्ण स्वभाव माने जाते हैं अखंड द्वादशार के महा चक्र में शक्तियों की संख्या 12 ही बताई गई है, श्री विद्या, ब्रह्म विद्या अथवा पार्वती सदा महेश्वर के साथ विद्यमान रहती है ,चिति शक्ति इनका संचालन करती है
श्री भास्कर राय ने भी ऐसा ही लिखा है, सौंदर्य लहरी में उल्लेख है, शास्त्रों को जानने वाले ब्रह्मा की पत्नी को सरस्वती कहते हैं, विष्णु की पत्नी को कमला और हर की सहचारी को पार्वती कहते हैं, परंतु महामाया तू और कोई चौथी ही है तेरी महिमा असीम है तूने समस्त जगत को भ्रम में डाल दिया है
श्री दुर्गा सप्तशती में भी उल्लेख है कि वह भगवती महामाया देवी ज्ञानियों के चित् को भी बलपूर्वक खींचकर मोह में डाल देती है
जय माई की