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12/11/2016
31/10/2016

गोवर्धन पर्व की मुख्य बातें :

* अगर आप गाय रखते हों तो इस दिन उसे नहलाये चन्दन- दूब और गंगाजल से उसकी पूजा करें।
* यदि आपके पास गाय नही हो तो पास के किसी गोशाला में जाएं।अथवा बाजार में घूमती गौओं की भी सेवा की जा सकती है।ये तो हमारा ही दुर्भाग्य है तो क्यों ना एक दिन इसे सौभाग्य में परिवर्तित कर दें।
* कहा जाता है की गऊ के रोम रोम में तैतींस करोड़ देवताओं का निवास है।सोचिये जरा एक दिन एक गौ की सेवा क्या मायने रखती है।
* गौ के लिए नयी पगहिया और घंटी ख़रीदे और थोड़ी देर खुला छोड़ उसे अपनी मन की करने दें।जब जब वो घंटी बजेगी यकीन मानिये उसे भी आनंद आएगा और आपको भी।
*आज सारे कार्यों को छोड़ कर गौ सेवा करें।उसका गोबर और दूध दोनों का दान करें।बछरे को सारा दिन खेलने दें।
*गाय के दूध से युक्त भोजन सामग्री तैयार करें और प्रसाद के रूप में वितरण करें।
- Team "Aacharyaम्"

31/10/2016

आप सभी को गोवर्धन पूजा की हार्दिक शुभकामनायें - Team "Aacharyaम्"

28/10/2016

।।धनतेरस की खास बातें।।

दीवालीसे दो दिन पहले आने वाला धनतेरस का त्यौहार शुक्रवार को है। इस त्यौहार को भगवान धनवंतरी का त्यौहार माना जाता है। इसलिए भगवान धनवंतरी को खुश करने के लिए हमें इस दिन 11 माला का भगवान धनवंतरी का जप करना चाहिए।भगवान धनवंतरी की पूजा के समय उनकी फोटो ना होने पर भगवान विष्णु की फोटो या मूर्ति रखकर भगवान धनवंतरी के मंत्र ऊं धं धनवंतरी नमः’ की कम से कम ग्यारह माला का जाप करे। इस दौरान अगर हवन भी हो सके तो सर्वोत्तम होगा।हो सके तो एक माला(108 दाने)का हवन करे। इसी प्रकार इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना सोने में सुहागे का काम करेगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन धातु से संबंधित चीजों का खरीदना शुभ माना गया है। इसके लिए शुक्रवार शाम 6:16 बजे तक शुभ मुहूर्त है। धनतेरस का संबंध भगवान विष्णु के अवतार भगवान धनवंतरी से है,जो आयुर्वेद चिकित्सा के जनक है। चूंकि यह त्यौहार कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की तेरस को दीवाली से दो दिन पहले आता है। इसलिए इसका संबंध धन से भी जोड़कर देखा जाता है।

यदि किसी व्यक्ति को हवन के बाद तर्पण-मार्जन आदि समझ आए या करें या कर पाए तो उतनी संख्या में जप की संख्या बढ़ा दें। उदाहरण के तौर पर 10 हजार जप का दशांश में हवन की जप संख्या 1000 होगी। दशांश का दसवां भाग तर्पण की जप संख्या 100 होगी।हवन या दशांश बिना उठे करना चाहिए। तभी वह सफल हवन या दशांश समझा जाएगा।

धनतेरस वाले दिन रोगमुक्त रहने के लिए पूजा करनी चाहिए। इस दौरान साधक को बैठने की दिशा दिन में पूर्व,उत्तर,उत्तरपूर्व हो और रात में उत्तर या पश्चिम हो। इस दौरान साधक का आसन लाल,पीला और ऊनी हो तो सर्वोत्तम। उन्होंने बताया कि इस दौरान किए जाने वाले हवन में काला सफेद तिल,चावल तथा घी को मिलाकर हवन करना चाहिए। हवन की समाप्ति से पहले हवन में आखिरी आहुति भोग(शाकाहारी बलि)के द्वारा होनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर पीली या सफेद मिठाई,गुड़,गजक तिल आदि। हवन के बाद ब्राह्मण देवता के साथ-साथ तीन साल से नौ साल तक की एक कन्या का पूजन हो तो सर्वोत्तम है। पूजन का अर्थ उनके पांव स्वयं धोकर तिलक करके आदर के साथ भोजन कराकर,उनके चरण छूकर,दक्षिणा आदि देकर विदा करें।
- Team "आचार्यम्"

25/10/2016

।।कार्तिक मास रमा एकादशी।।

महत्व :
यह चिंतामणि एवं कामधेनु के समान सभी पापों को हरने वाली तथा सभी मनोरथ पूर्ण करने वाली है।इस व्रत के करने से सभी रोग-दोष शान्त होते हैं साथ ही लंबी आयु,सुख-सम्रद्धि एवं शांति की प्राप्ति होती है।

कैसे करें :
प्रातः काल : ब्रह्म मुहूर्त (3.30am-5.00am)में जाग जाएं,शैया पर पूर्व की तरफ बैठ कर प्रभु का ध्यान करे।उन्हें दुर्लभ मनुष्य जीवन के लिए धन्यवाद दें।

दोपहर : देवी गंगा का स्मरण करते हुए पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके स्नान करें।स्वछ एवं हल्के वस्र धारण करें।अगर कर सकें तो भोजन,आभूषण एवं अन्य अलंकार का त्याग करें आज।
मन को शांत रखते हुए अपने आराध्य का ध्यान एवं विधिवत पूजन करें।तुलसी में जल देवें।

संध्या : संध्याकाल धर्मशास्त्रों का अध्ययन करते हुए व्यतीत करें।तुलसी वृक्ष के समीप दीप जलावें।

रात्रि: संध्या काल व्यतीत हो जाने पर भगवान् विष्णु का पूजन एवं ध्यान करें।तथा प्रसाद ग्रहण करने के बाद अल्प मात्रा में जल एवं फल का सेवन करें।अगर कर सकें तो नींद का परित्याग करें और भक्तियुक्त जागरण कर प्रभु को प्रसन्न करें।

एकादशी उपरांत :

प्रातः काल उठकर नित्यकर्म से निवृत हो स्नान करें।प्रभु का पूजन कर उनसे अपनी त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें।तुलसी के समक्ष खड़े होकर इष्टदेव का ध्यान करें और अपनी व्यथा उनसे कहें।ब्राह्मण या दरिद्र को भोजन करावें एवं सामर्थ्य अनुसार वस्त्रादि का दान देवें।

जरुरी बातें :
इस दौरान लोभ,क्रोध,ईर्ष्या,घृणा
,काम एवं नशे को अपने से दूर रखें। मज़बूरी अथवा जबरदस्ती में व्रत न करें।

प्रभु आपकी कामना पूर्ण करें।

-Team"AACHARYAम्".

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Shubhankar Pur (near-Murli Manohar Temple)
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9523199650

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