13/08/2024
🙏🙏🚩🚩🕉️🕉️ जय श्री सीता राम ॐ नमः शिवाय पूज्य श्री गुरुवे नमः सत्य सनातन धर्म कि जय हो आप समस्त परिवार को शास्त्री दास रघुनाथ झा कि ओर से आपका दिन शुभ मंगलमय हो आज का भजन कीर्तन राम राम राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम
🙏🙏जय सियाराम जी🙏🙏
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सभा सकुच बस भरत निहारी।
राम बंधु धरि धीरजु भारी॥
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कुसमउ देखि सनेहु सँभारा।
बढ़त बिंधि जिमि घटज निवारा॥
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भावार्थ:-गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि भरतजी ने सभा को संकोच के वश देखा। रामबंधु (भरतजी) ने बड़ा भारी धीरज धरकर और कुसमय देखकर अपने उमड़ते हुए प्रेम को संभाला, जैसे बढ़ते हुए विन्ध्याचल को अगस्त्यजी ने रोका था।
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सोक कनकलोचन मति छोनी।
हरी बिमल गुन गन जगजोनी॥
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भरत बिबेक बराहँ बिसाला।
अनायास उधरी तेहि काला॥
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भावार्थ:-शोक रूपी हिरण्याक्ष ने (सारी सभा की) बुद्धि रूपी पृथ्वी को हर लिया जो विमल गुण समूह रूपी जगत की योनि (उत्पन्न करने वाली) थी। भरतजी के विवेक रूपी विशाल वराह (वराह रूप धारी भगवान) ने (शोक रूपी हिरण्याक्ष को नष्ट कर) बिना ही परिश्रम उसका उद्धार कर दिया।
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वंदउ राम लखन वैदेही।
जे तुलसी के परम् सनेही॥
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अनुज जानकी सहित निरंतर ।
बसउ राम नृप मम् उर अंतर॥
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🙏🙏जय सियाराम जी🙏🙏
जय श्री सीता राम🕉️🕉️ 🚩🚩🙏🙏
शास्त्री दास रघुनाथ झा 🙏