23/04/2026
অক্ষয় তৃতীয়ার পরম পবিত্র, সিদ্ধিদায়ক এবং অনন্ত শুভ ফল প্রদানকারী এই দিব্য উৎসবে পরম পূজ্য মহামণ্ডলেশ্বর শ্রী অবধ বিহারী দাস জি মহারাজের আবির্ভাব দিবস (জন্মোৎসব), যাকে বৃদ্ধিাপন দিবসও বলা হয়, অত্যন্ত গৌরব, শ্রদ্ধা ও আধ্যাত্মিক উল্লাসের সঙ্গে পালন করা হচ্ছে। এই তিথি নিজেই অক্ষয় পুণ্য, অক্ষয় সাধনা এবং অক্ষয় কৃপারের প্রতীক; অতএব এই পবিত্র সংযোগে পালিত এই বৃদ্ধি মহোৎসব নিঃসন্দেহে অনন্ত গুণফল প্রদানকারী, লোককল্যাণময় এবং সাধকের জীবনকে উন্নত করার মাধ্যম।
গুরু-তত্ত্বকে বেদে ব্রহ্মস্বরূপ বলা হয়েছে—“গুরুর্ব্রহ্মা গুরুর্বিষ্ণুঃ গুরুর্দেবো মহেশ্বরঃ।” এমন পরম শ্রদ্ধেয় গুরু মহারাজের আবির্ভাব দিবস সকল শিষ্যের জন্য কেবল একটি উৎসব নয়, বরং সাধনা, সমর্পণ এবং কৃতজ্ঞতার এক পবিত্র সুযোগ। তাঁর শ্রীচরণে শ্রদ্ধা নিবেদন করে আমরা সকলে তাঁর প্রদত্ত দিব্য পথ—ভক্তি, সেবা, ত্যাগ ও বৈরাগ্য—অনুসরণ করার সংকল্প পুনরায় দৃঢ় করি।
অক্ষয় তৃতীয়ার এই দিব্য যোগে অনুষ্ঠিত এই বৃদ্ধি মহোৎসব ত্যাগী সম্প্রদায়ের গৌরবময় ঐতিহ্যকে আরও উজ্জ্বল করে তোলে। এই পবিত্র উপলক্ষে গুরু মহারাজের সকল শিষ্য, ভক্ত এবং সকল বৈষ্ণব সাধু-সন্তদের প্রতি আন্তরিক মঙ্গলময় শুভেচ্ছা ও অভিনন্দন।
আমি শ্রীভগবান প্রভুর কাছে প্রার্থনা করি যে, গুরু মহারাজের কৃপা সকলের উপর অক্ষয়ভাবে বিরাজমান থাকুক, সকলের জীবনে ধর্ম, অর্থ, কাম ও মোক্ষের সিদ্ধি লাভ হোক এবং ভক্তির আলোক নিরন্তর বিকশিত হতে থাকুক।
अक्षय तृतीया के परम पवित्र, सिद्धिदायक तथा अनंत शुभ फल प्रदान करने वाले इस दिव्य उत्सव में परम पूज्य महामंडलेश्वर श्री अवध बिहारी दास जी महाराज के आविर्भाव दिवस (जन्मोत्सव), जिसे वृद्धि-उत्सव दिवस भी कहा जाता है, अत्यंत गौरव, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह तिथि स्वयं अक्षय पुण्य, अक्षय साधना और अक्षय कृपा का प्रतीक है; अतः इस पवित्र संयोग में मनाया जाने वाला यह वृद्धि महोत्सव निःसंदेह अनंत गुणों का फल देने वाला, लोककल्याणकारी और साधक के जीवन को उन्नत करने का माध्यम है।
गुरु-तत्त्व को वेदों में ब्रह्मस्वरूप कहा गया है—“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।” ऐसे परम श्रद्धेय गुरु महाराज का आविर्भाव दिवस सभी शिष्यों के लिए केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि साधना, समर्पण और कृतज्ञता का एक पवित्र अवसर है। उनके श्रीचरणों में श्रद्धा अर्पित कर हम सभी उनके द्वारा प्रदत्त दिव्य मार्ग—भक्ति, सेवा, त्याग और वैराग्य—का अनुसरण करने का संकल्प पुनः दृढ़ करते हैं।
अक्षय तृतीया के इस दिव्य योग में आयोजित यह वृद्धि महोत्सव त्यागी संप्रदाय की गौरवशाली परंपरा को और भी उज्ज्वल करता है। इस पावन अवसर पर गुरु महाराज के सभी शिष्यों, भक्तों तथा समस्त वैष्णव साधु-संतों को हार्दिक मंगलमय शुभकामनाएँ एवं अभिनंदन।
मैं श्रीभगवान प्रभु से प्रार्थना करता/करती हूँ कि गुरु महाराज की कृपा सभी पर अक्षय रूप से बनी रहे, सभी के जीवन में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की सिद्धि प्राप्त हो ...