Shri Bhagwan Vedantacharya

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मुंबई प्रवास....
15/08/2026

मुंबई प्रवास....

काशी साधुसङ्गतिः सह पुष्पाञ्जलिसभा,                                                ततः मुम्बईप्रस्थानम्।
10/08/2026

काशी साधुसङ्गतिः सह पुष्पाञ्जलिसभा,
ततः मुम्बईप्रस्थानम्।

08/08/2026

विगन (Vegan)एक वैचारिक पृष्ठ भूमि पर प्रकृति का संदेश...

वीगन (Vegan) वीगन का उद्देश्य पशुओं के प्रति करुणा, पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना है।यह...
07/08/2026

वीगन (Vegan) वीगन का उद्देश्य पशुओं के प्रति करुणा, पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना है।
यह केवल आहार नहीं, बल्कि अहिंसा और संवेदनशील जीवन जीने की एक विचारधारा भी है।
जीवनशैली में केवल पौधों से प्राप्त खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाना चाहिये ।
इसमें मांस, मछली, अंडा, दूध, दही, घी, पनीर, मक्खन और शहद जैसे सभी पशु-उत्पादों का त्याग किया जाता है।
मारियाना के साथ भारतीय युवाओं की आवाज
तुलसी घाट से प्रारंभ होकर आशापुर (स्टूडियो) सहित काशी के गलियारों में एक सुर में गुंजायमान हुईं इसके परिदृश्य में कोतवाल मंहत श्री मोहन दास जी महाराज एवं महंत माता लक्ष्मी जी का भी शुभाशीर्वाद प्राप्त हुआ ।

अयोध्या धाम दर्शन...
05/08/2026

अयोध्या धाम दर्शन...

समरसता अभियान एवं संत रविदास जी महाराज की  650 वी जयंती पर आयोजित सभा काशी में , अन्नपुर्णा महंत श्री शंकर पुरी एवं ईश्व...
02/08/2026

समरसता अभियान एवं संत रविदास जी महाराज की 650 वी जयंती पर आयोजित सभा काशी में ,
अन्नपुर्णा महंत श्री शंकर पुरी एवं ईश्वर दास जी महाराज के साथ मंत्री श्री नितिन नवीन जिसके पश्चात
गुरुदेव प्रो. श्री कृष्णकांत शर्मा जी का आशीर्वाद ग्रहण करते हुए । साकेत धाम में गुरुपूर्णिमा पर्व के समाचार पत्रक का संग्रह समायोजित है जो संकलनकृत दृश्यावली का अंग है ।

*परम्परा ही गुरु पूर्णिमा का वास्तविक स्वरूप: श्री महंत डॉ. श्री भगवान वेदांताचार्य रसिक*दमोह एवं वाराणसी~ द्विधा भाव की...
30/07/2026

*परम्परा ही गुरु पूर्णिमा का वास्तविक स्वरूप: श्री महंत डॉ. श्री भगवान वेदांताचार्य रसिक*

दमोह एवं वाराणसी~ द्विधा भाव की एकात्मा जिस विचार को समलंकृत करे अर्थात एक करे वही सद्गुरु है
गुरु पूर्णिमा केवल किसी एक व्यक्ति के अभिनंदन का अवसर नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म की अखंड गुरु-शिष्य परम्परा के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का महापर्व है। इस पावन अवसर पर प्रत्येक साधक का कर्तव्य है कि वह अपने गुरु के साथ-साथ उनकी सम्पूर्ण गुरु-परम्परा का भी आदरपूर्वक स्मरण करे।

श्री महंत डॉ. श्री भगवान वेदांताचार्य रसिक जी ने अपने संदेश में कहा कि किसी भी संत, महंत या आचार्य का वास्तविक गौरव उनके गुरु, सद्गुरु, परमगुरु, जगद्गुरु तथा उनके सम्प्रदाय से प्रतिष्ठित होता है। गुरु पूर्णिमा की पूर्ण भावना का प्रतिनिधित्व श्रद्धा में है

उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में व्यक्ति नहीं, परम्परा सर्वोपरि होती है। शिष्य की पहचान उसके गुरु से होती है, गुरु की पहचान उनके गुरु से, और यही अखंड श्रृंखला सनातन धर्म की आत्मा है। जहाँ परम्परा पीछे छूट जाती है और व्यक्ति आगे आ जाता है, वहाँ सम्मान तो दिखाई देता है, किन्तु गुरु-तत्त्व की पूर्ण अभिव्यक्ति नहीं हो पाती।

डॉ. श्री भगवान जी ने अपने जीवन और कृतित्व से यह आदर्श प्रस्तुत किया है कि एक सच्चा साधक अपनी गुरु-परम्परा में पूर्ण समर्पित होकर ही गौरव प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि हमारा वास्तविक परिचय किसी व्यक्तिगत प्रसिद्धि में नहीं, बल्कि एक विशाल वटवृक्ष की छाया के समान गुरु-परम्परा में समाहित होने में है। जिस प्रकार दीपज्योति में घृत, पुष्प में सुगंध और फल में माधुर्य अभिन्न रूप से विद्यमान रहते हैं, उसी प्रकार गुरु-भक्ति की सार्थकता भी गुरु-परम्परा में आत्मसात होने से ही सिद्ध होती है।

उन्होंने सभी श्रद्धालुओं, साधकों एवं भक्तों से आग्रह किया कि इस वर्ष गुरु पूर्णिमा महापर्व को गुरु-परम्परा की उसी दिव्य भावना के साथ साकेतधाम एवं तपोवन आश्रम, नक्की घाट में मनाएँ। आइए, हम सब एक ही माला के मोती बनकर गुरु-परम्परा के दिव्य सूत्र में बंधें और गुरु-कृपा के अधिकारी बनें। यही गुरु-भक्ति की सच्ची साधना तथा गुरु पूर्णिमा का वास्तविक संदेश है।

गुरु पूर्णिमा महामंगलोत्सवगुरु-परम्परा वन्दन एवं सद्गुरु कृपा महोत्सवसर्वसमर्थ श्री श्री आंनद कंद दयालु भगवान की जयदिनां...
26/07/2026

गुरु पूर्णिमा महामंगलोत्सव

गुरु-परम्परा वन्दन एवं सद्गुरु कृपा महोत्सव
सर्वसमर्थ श्री श्री आंनद कंद दयालु भगवान की जय

दिनांक: 29 जुलाई 2026 (बुधवार)
समय: सायं 5:00 बजे से
स्थान: साकेतधाम, दमोह मध्यप्रदेश एवं तपोवन आश्रम, नक्की घाट ,उत्तर प्रदेश

«"कर्णधार सद्गुरु दृढ़ नावा, दुर्लभ साज सुलभ करि पावा।"»

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आमंत्रण

हे अनादि-अनन्त साधक श्री ....

सद्गुरु की कृपा ही वह दिव्य सेतु है जो साधक को अप्राप्त से प्राप्त, सीमित से असीम तथा जीवभाव से ब्रह्मभाव की ओर अग्रसर करती है। जो कुछ प्राप्त हुआ है और जो अभी प्राप्त होना शेष है, उसका वास्तविक मार्गदर्शन केवल सद्गुरु के उपदेश एवं सनातन गुरु-परम्परा के अनुरूप सत्संग से ही संभव है।

गुरु पूर्णिमा केवल किसी एक महापुरुष का अभिनन्दन नहीं, बल्कि अखण्ड गुरु-शिष्य परम्परा का महापर्व है। सनातन धर्म में व्यक्ति नहीं, परम्परा सर्वोपरि है। शिष्य अपने गुरु से, गुरु अपने सद्गुरु से और सद्गुरु अपनी अखण्ड परम्परा से प्रतिष्ठित होते हैं। यही गुरु-तत्त्व सनातन संस्कृति की आत्मा है।

हमें अपने जीवनमें यह सिद्ध करना चाहिए कि सच्चा साधक अपनी गुरु-परम्परा में पूर्ण समर्पण द्वारा ही महान बनता है।

हम सबका सौभाग्य इसी में है कि विशाल वटवृक्ष की छाया में जैसे दीप में घृत , पुष्प में सुगन्ध तथा फल में माधुर्य की भाँति गुरु का स्नेहात्मक दुलार शिष्य के उत्कर्ष में समाहित होकर अपनी साधना को सार्थक करता है।

पूज्य सद्गुरु श्री आनंद कंद दयालु भगवान जी के पावन वचनों को स्मरण करते हुए आइए, हम सब एक माला के मोती बनकर गुरु-मणियों के रूप में गुरु-भक्ति, सेवा एवं समर्पण का यह दिव्य पर्व इस बार दमोह एवं वाराणसी के तपोवन आश्रम में मनायेंगे जिसमें महान संतो का सानिध्य भी प्राप्त हो

आप सपरिवार पधारकर इस पावन महोत्सव की शोभा बढ़ाएँ एवं सद्गुरु कृपा के भी अधिकारी बनें।

कार्यक्रम

गुरु-पाद पूजन

गुरु-वन्दना एवं आरती

संकीर्तन एवं भजन

सत्संग एवं आशीर्वचन

प्रसाद वितरण

गुरुपाद पूजन:
आचार्य पं.श्री दिनेश पाठक जी एवं
ओम गुरु दीक्षित
विशेष सान्निध्य:
पं. श्री राकेश चतुर्वेदी (लाला जी महाराज)
संरक्षक श्री पुरुषोत्तम शास्त्री जी काशी

शिष्य मण्डल

रविन्द्र दांगी , जितेन्द्र मिश्रा, रवि,गजेंद्र, दिनेश,मनोज, सुरेश बलासरिया ,दयाराम सोनी, सुनील,सीताराम-राजू ताम्रकार,लाड़ सिंह, केदार , गौरी शंकर, संजू,अश्वनी, श्री राम,गुलाब बाबा, भूपेन्द्र ,जादू, , शरद , आकाश, कान्हा, राजकुमार

शिल्पा , मारियाना,रोमी , ईप्सा,जया-मिली - मोना - नमन, सपना- डाली-कारिज्मा, रेखा,ज्योति पाठक, मुक्ता , गौरा ,रजनी,प्रियंका, इन्दु शर्मा, मंजू ,लक्ष्मी, खुशी, आराध्य, गीता प्रीति, वाणी-सोनू ,

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श्री उमाशंकर चौरसिया,श्रीमती शारदा–वेदप्रकाश पाठक, श्रीमती नेहा–जगदीश मिश्रा,
शिवाकान्त चौरसिया, प्रीति–प्रहलाद, विजय - मोनू ,आरती-लखन लीला-घनश्याम एवं समस्त साकेतधाम परिवार,

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आयोजक

महामंगल सेवा समिति
साकेत धाम, दमोह (मध्यप्रदेश)

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मार्गदर्शन

श्रीमहंत डॉ.श्रीभगवान वेदान्ताचार्य रसिक
(बीएचयू, काशी के चार स्वर्ण पदक विजेता)

संपर्क:
98936 90734
99355 53421

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जय भगवान जी

विमोचन – चतु:श्लोकी भागवतम्पं.श्री विजय शंकर त्रिपाठी जी के सान्निध्य में विगत दिनों काशी के विविध पावन स्थलों पर सम्पन्...
24/07/2026

विमोचन – चतु:श्लोकी भागवतम्

पं.श्री विजय शंकर त्रिपाठी जी के सान्निध्य में विगत दिनों काशी के विविध पावन स्थलों पर सम्पन्न हुए आध्यात्मिक अनुष्ठानों, सत्संग, भागवत-चर्चा, पूजन एवं साधना के प्रेरणादायी क्षणों की मनोहारी झलकियाँ।

इन अनुष्ठानों के माध्यम से सत्संग के दिव्य संदेश, गुरु-परम्परा की महिमा तथा सनातन संस्कृति के आध्यात्मिक मूल्यों का व्यापक प्रसार हुआ।
प्रस्तुत चित्र उन अविस्मरणीय पलों के साक्षी हैं, जिन्होंने श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति, श्रद्धा और आत्मचिंतन का दिव्य आलोक प्रज्वलित किया।
जय विश्वनाथ....

साप्ताहिक दृश्यावली के विविध रूपों में संतो के संग
20/07/2026

साप्ताहिक दृश्यावली के विविध रूपों में संतो के संग

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Saketdham, Savalakh Manaspath
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+919893690734

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