Chak bedaulia khash Tabhaka South

Chak bedaulia khash Tabhaka South Maa Durga is the prime deity . There are many famous temples of Durga Maa are situated at chakbedaulia. famous Durga temples are Harmandir Durga Temple

28/09/2022
Jai mahakal
16/12/2021

Jai mahakal

ॐ श्री भानूय नमः
17/02/2021

ॐ श्री भानूय नमः

ॐ नमः शिवाय !
06/07/2020

ॐ नमः शिवाय !

आप सभी महानुभावों एवं भक्तगण इस शुभअवसर पर सादर आमंत्रित है। हर हर महादेव!
12/02/2020

आप सभी महानुभावों एवं भक्तगण इस शुभअवसर पर सादर आमंत्रित है। हर हर महादेव!

आज चकवेदौलिया में सूर्य मंदिर निर्माण हेतु निव रखा गया है
20/01/2020

आज चकवेदौलिया में सूर्य मंदिर निर्माण हेतु निव रखा गया है

15/01/2020

*मकर संक्रान्ति अब 15 जनवरी को क्यों हो रही है?*
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वर्ष 2008 से 2080 तक मकर संक्राति 15 जनवरी को होगी।
विगत 72 वर्षों से (1935 से) प्रति वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही पड़ती रही है।

2081 से आगे 72 वर्षों तक अर्थात 2153 तक यह 16 जनवरी को रहेगी।

ज्ञातव्य रहे, कि *सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश* (संक्रमण) का दिन मकर संक्रांति के रूप में जाना जाता है। इस दिवस से, मिथुन राशि तक में सूर्य के बने रहने पर सूर्य उत्तरायण का तथा कर्क से धनु राशि तक में सूर्य के बने रहने पर इसे दक्षिणायन का माना जाता है।

सूर्य का धनु से मकर राशि में संक्रमण प्रति वर्ष लगभग 20 मिनिट विलम्ब से होता है। स्थूल गणना के आधार पर तीन वर्षों में यह अंतर एक घंटे का तथा 72 वर्षो में पूरे 24 घंटे का हो जाता है।

*यही कारण है, कि अंग्रेजी तारीखों के मान से, मकर-संक्रांति का पर्व, 72 वषों के अंतराल के बाद एक तारीख आगे बढ़ता रहता है।*

विशेष:- यह धारणा पूर्णतः भ्रामक है, कि मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को आता है।

31/12/2019

जानिए शिवलिंग पर क्या चढ़ाने से क्या फल मिलता है?
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👉 शिवलिंग पर दूध अर्पित करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है।

👉 शिवलिंग पर दही अर्पित करने से हमें जीवन में हर्ष और उल्लास की प्राप्ति होती है।

👉 शिवलिंग पर शहद चडाने से रूप और सौंदर्य प्राप्त होता है , वाणी में मिठास रहती है, समाज में लोकप्रियता बढ़ती है।

👉 शिवलिंग पर घी चढ़ाने से हमें तेज की प्राप्ति होती है।

👉 शिवलिंग पर शकर चढ़ाने से सुख - समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

👉 शिवलिंग पर ईत्र चढ़ाने से धर्म की प्राप्ति होती हैं।

👉 शिवलिंग पर सुगंधित तेल चढ़ाने से धन धान्य की वृद्धि होती है, जीवन में सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।

👉 शिवलिंग पर चंदन चढ़ाने से समाज में यश और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।

👉 शिवलिंग पर केशर अर्पित करने से दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है , विवाह में आने वाली समस्त अड़चने दूर होती है, मनचाहा जीवन साथी प्राप्त होता है विवाह के योग शीघ्र बनते है ।

👉 शिवलिंग पर भांग चढ़ाने से हमारे समस्त पाप समस्त बुराइयां दूर होती हैं।

👉 शिवलिंग पर आँवला अथवा आँवले का ऱस चढ़ाने से दीर्घ आयु प्राप्त होती है ।

👉 शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाने से समस्त पारिवारिक सुखो की प्राप्ति होती है , परिवार के सदस्यों के मध्य में प्रेम बना रहता है।

👉 शिवलिंग पर गेहूं चढ़ाने से वंश वृद्धि होती है, योग्य संतान की प्राप्ति होती है, संतान आज्ञाकारी होती है।

👉 शिवलिंग पर चावल चढ़ाने से धन और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।

👉 शिवलिंग पर तिल चढ़ाने से पापों समस्त रोगो का नाश होता है।

👉 शिवलिंग पर जौ अर्पित करने से सांसारिक सुखो की प्राप्ति होती है।

👉 भगवान भोलेनाथ की बेलपत्र से पूजा करने से सभी संकट दूर होते है।

👉 भगवान भोलेनाथ की दूर्वा से पूजन करने दीर्घ आयु की प्राप्ति होती है।

👉 भगवान भोलेनाथ की हारसिंगार के फूलों से पूजन करने पर जीवन में सुख-संपत्ति और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

👉 भगवान भोलेनाथ पर चमेली के फूल चढ़ाने से सुख समृद्धि प्राप्त होती है।

👉 भगवान भोलेनाथ की धतूरे से पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है।

👉 भगवान भोलेनाथ की आंकड़े के फूल से पूजन, श्रंगार करने से जीवन के सभी सुख मिलते है, पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

👉 भगवान भोलेनाथ की अलसी के फूलों से पूजन करने से मनुष्य सभी देवताओं का प्रिय हो जाता है।

👉 भगवान भोलेनाथ की बेला के फूल से पूजन करने पर मनचाहा, सुंदर जीवनसाथी मिलता है।

👉 भगवान भोलेनाथ की जूही के फूल से पूजन करने से घर कारोबार में धन धान्य की कोई भी कमी नहीं होती है।
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भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक सामा-चकेवामिथिलांचल में सामा चकेवा की तैयारियां दीवावली के समय से ही शुरू हो जाती हैं। क...
05/11/2019

भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक सामा-चकेवा

मिथिलांचल में सामा चकेवा की तैयारियां दीवावली के समय से ही शुरू हो जाती हैं। कार्तिक मास के पंचमी शुक्ल पक्ष तिथि से सामा चकेवा के मूर्ति की खरीदारी शुरू हो जाती है। पंचमी से पूर्णिमा तक चलने वाले इस लोकपर्व सामा-चकेवा में भाई-बहन के सात्विक स्नेह की गंगा निरंतर प्रभावित होती रहती है। पर्व के दौरान बहन अपने भाई के दीर्घजीवन एवं संपन्नता की मंगलकामना करती है।

जनश्रुति के अनुसार शरद महीने में सामा-चकेवा पक्षी की जोड़ियां मिथिला में प्रवास करने पहुंच गयी थीं। भाई साम्भ भी उसे खोजते मिथिला पहुंचे और वहां की महिलाओं से अपने बहन-बहनोई को श्राप से मुक्त करने के लिये सामा-चकेवा का खेल खेलने का आग्रह किया और कहते हैं कि उसी द्वापर युग से आजतक इसका आयोजन हो रहा है। सामा चकेवा पर्व में बहनें सामा-चकेवा, सतभइया, खड़रीच, चुगिला, वृन्दावन, चैकीदार, झाझीकुकुर, साम्भ आदि की प्रतिमा एवं उपकरण मिट्टी एवं खड़ से बनाती हैं और उसे डाला (बांस की बनी टोकरी) में लेकर शाम होते ही शहर एवं गांव के चौक-चैराहा एवं जुते हुए खेतों में जुटती हैं और सामा-चकेवा से संबंधित पारम्परिक गीतों का गायन करती हैं। इसके बाद खड़ से बने नकली वृंदावन में आग लगाती हैं और बुझाती हैं। इस दौरान महिलाएं ‘वृंदावन में आगि लागल क्यों न बुझाबै हे, हमरो से बड़का भइया दौड़ल चली आबै हे, हाथ सुवर्ण लोटा वृंदावन मुझावै हे’ इसके बाद महिलाएं चुगला (संठी से निर्मित) को गालियां देती हुई। उसके ढाढी में आग लगाते हुए गाती है कि ‘चुगला करे चुगलपन, बिल्लाई करै म्याउं, ध के ला चुगला के फांसी द आउं’।

07/10/2019

दुर्गा पूजा का टाइम रहता था.. सुबह का ठंडा इतना लगता था कि कम्बल पूरा शरीर में लपेट के मच्छरदानी में ओंघरा-पोंघरा के सोते रहते थे.. अभी अन्हरौका पूरा छाएले है.. ठंडी का मीठगर शुरुआत है ई.. हम कम्बल में थोड़ा-सा गरमाए ही थे कि दादी आकर उठाबे लगी.. पहीले ता हम पलंग के ई कोना से ऊ कोना में सरक गए.. उठे ता फिर तकिया पकड़ के सूत गए.. दादी अब गुस्सा के कम्बले उठा के फेंक दी.."भ गेलै, बिछा गेलै आब फूल..! ल गेलौ पछियारी टोल वाली सब फूल बीछ क..!"

हम कम्बल फेंके आ तुरत फूलडाली लेकर दरवाजे पर दौड़ गए.. सिंगरहार का फूल नहीं बिछने देंगे किसी को.. सिंगरहार माने हरसिंगार.. गुलाब तोड़ लेगा, कनैल तोड़ लेगा, अड़हुल तोड़ लेगा, कोनो बात नहीं..लेकिन सिंगरहार का फूल..! ना-ना-ना, ई नहीं बीछे देंगे..

- Aman Aakash

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848114

Telephone

06278265157

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