सिद्धि-साधना रहस्य VYASS

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वार्षिक "गुप्त नवरात्रि महाविद्या एवं श्रावण मास शिव साधना"~२०२४*🪔  (06 जुलाई से 03 सितंबर 2024) 🧘🏻‍♀️🧘🏻‍♂️यह वार्षिक मह...
12/06/2024

वार्षिक "गुप्त नवरात्रि महाविद्या एवं श्रावण मास शिव साधना"~२०२४*🪔
(06 जुलाई से 03 सितंबर 2024) 🧘🏻‍♀️🧘🏻‍♂️
यह वार्षिक महाविद्या (शक्ति) और महादेव (शिव) साधना सर्वजन को, "साधना प्रकल्प" ~ "वैदिक योग अध्यात्म सेवा संस्थान®" के सौजन्य से प्रदान की जा रही है 🔱
👉🏽 केवल गंभीर जिज्ञासु साधक इस लिंक द्वारा व्हाट्सएप समूह में जुड़ें
https://chat.whatsapp.com/JZdl4b8YZzuCt2EfNM10E3

13/05/2021
प्रवेश सूचना - "साधना प्रकल्प" 2021(जनवरी बैच)===========================मित्रों,आपको जानकर हर्ष होगा कि VYASS TRUST® द्...
03/01/2021

प्रवेश सूचना - "साधना प्रकल्प" 2021(जनवरी बैच)
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मित्रों,आपको जानकर हर्ष होगा कि VYASS TRUST® द्वारा संचालित "साधना प्रकल्प" के वर्ष 2021(प्रथम बैच) हेतु प्रवेश प्रक्रिया आरम्भ हो चुकी है I इस निःशुल्क Whatsapp प्रशिक्षण समूह में प्रवेश की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2021 है I स्थान सीमित है I नीचे दिए लिंक द्वारा "स्वागत समूह" में प्रवेश करें....
https://chat.whatsapp.com/DYyHsoSkTSo01MLOoCuBGZ
👉🏽 यह चर्चा समूह नहीं है, अतः केवल साधना मार्ग पर चलने के इच्छुक गंभीर अध्यात्म प्रेमी और वास्तविक जिज्ञासु ही कष्ट करें I
"विश्व की सर्वप्रथम ऑनलाइन पराविज्ञान प्रशिक्षण योजना" - "साधना प्रकल्प" के साधकों के अनुभव एवं संस्था द्वारा संचालित अन्य प्रकल्पों की जानकारी के लिए संस्था की वेबसाइट www.vyass.in पर जाएं...
वैदिक योग अध्यात्म सेवा संस्थान®

प्रवेश सूचना - "साधना प्रकल्प" 2021(जनवरी बैच)
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मित्रों,आपको जानकर हर्ष होगा कि VYASS TRUST® द्वारा संचालित "साधना प्रकल्प" के वर्ष 2021(प्रथम बैच) हेतु प्रवेश प्रक्रिया आरम्भ हो चुकी है I इस निःशुल्क Whatsapp प्रशिक्षण समूह में प्रवेश की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2021 है I स्थान सीमित है I नीचे दिए लिंक द्वारा "स्वागत समूह" में प्रवेश करें....
https://chat.whatsapp.com/DYyHsoSkTSo01MLOoCuBGZ

👉🏽 यह चर्चा समूह नहीं है, अतः केवल साधना मार्ग पर चलने के इच्छुक गंभीर अध्यात्म प्रेमी और वास्तविक जिज्ञासु ही कष्ट करें I

"विश्व की सर्वप्रथम ऑनलाइन पराविज्ञान प्रशिक्षण योजना" - "साधना प्रकल्प" के साधकों के अनुभव एवं संस्था द्वारा संचालित अन्य प्रकल्पों की जानकारी के लिए संस्था की वेबसाइट www.vyass.in पर जाएं...
वैदिक योग अध्यात्म सेवा संस्थान®

"पराविज्ञान महोत्सव" का ऑनलाइन आयोजन संपन्न~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~रविवार 13 दिसंबर 2020,को वैदिक योग अध्यात्...
16/12/2020

"पराविज्ञान महोत्सव" का ऑनलाइन आयोजन संपन्न
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रविवार 13 दिसंबर 2020,को वैदिक योग अध्यात्म सेवा संस्थान® (VYASS TRUST) का वार्षिकोत्सव, "पंचम पराविज्ञान महोत्सव" भली-भांति संपन्न हुआ । वर्तमान परिस्तिथियों को देखते हुए इस वर्ष ऑनलाइन आयोजन किया गया,जिसमें सम्मिलित संस्था के सभी अनुशासित साधक बंधुओं एवं आमंत्रित प्रबुद्धजनों का सराहनीय योगदान रहा । सभी विद्वान वक्ताओं ने सुंदर विचार प्रस्तुत किए और सहभागियों का मार्गदर्शन किया ।

स्वामी भवानी जी महाराज, अवधूत बाबा निरंजन नाथ जी, पराविज्ञानी गोपाल राजू जी, संत कमल किशोर जी, निर्मल फतेहपुरिया जी, डॉ. सुरेंद्र कुमार शर्मा जी, माँ योगशक्ति निखिलम जी, प्रशांत गुप्ता जी, बहन भावना जी, बहन दिव्या जी एवं अन्य सभी विद्वतजनों का हृदय से आभार !!

आयोजन में विद्वानों द्वारा कुछ सरल एवं व्यवहारिक प्रयोग भी बताए गए, जिन्हें सहभागियों ने बहुत पसंद किया । सभी उपस्थित साधकों को प्रश्न पूछने का पर्याप्त अवसर दिया गया एवं संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया । सभी उपस्थित सहभागियों को हेमंत जी द्वारा "ऐश्वर्यदायी समृद्धि शक्तिपात" प्रदान किया गया, जिसमें साधकों ने ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रत्यक्ष अनुभव किया ।

यह अवसर इस दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, कि आज वैदिक योग अध्यात्म सेवा संस्थान® (Vyass Trust) की वेबसाइट www.vyass.in का लोकार्पण भी किया गया । अब "ओजस्वी वाणी" और "साधकों के अनुभव" इसपर प्रकाशित किए जाएंगे । शीघ्र ही इस साइट में अतिरिक्त जानकारी और संस्था द्वारा उपलब्ध विशेष सेवाएं भी जोड़ी जाएंगी ।

सभी के परस्पर सहयोग और साधकों की सकारात्मक ऊर्जा ने इस कार्यक्रम को सफल बनाया ।
अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें : www.vyass.in 9818060309 , 8527783070

"पराविज्ञान महोत्सव" का ऑनलाइन आयोजन संपन्न
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रविवार 13 दिसंबर 2020,को वैदिक योग अध्यात्म सेवा संस्थान® (VYASS TRUST) का वार्षिकोत्सव, "पंचम पराविज्ञान महोत्सव" भली-भांति संपन्न हुआ । वर्तमान परिस्तिथियों को देखते हुए इस वर्ष ऑनलाइन आयोजन किया गया,जिसमें सम्मिलित संस्था के सभी अनुशासित साधक बंधुओं एवं आमंत्रित प्रबुद्धजनों का सराहनीय योगदान रहा । सभी विद्वान वक्ताओं ने सुंदर विचार प्रस्तुत किए और सहभागियों का मार्गदर्शन किया ।

स्वामी भवानी जी महाराज, अवधूत बाबा निरंजन नाथ जी, पराविज्ञानी गोपाल राजू जी, संत कमल किशोर जी, निर्मल फतेहपुरिया जी, डॉ. सुरेंद्र कुमार शर्मा जी, माँ योगशक्ति निखिलम जी, प्रशांत गुप्ता जी, बहन भावना जी, बहन दिव्या जी एवं अन्य सभी विद्वतजनों का हृदय से आभार !!

आयोजन में विद्वानों द्वारा कुछ सरल एवं व्यवहारिक प्रयोग भी बताए गए, जिन्हें सहभागियों ने बहुत पसंद किया । सभी उपस्थित साधकों को प्रश्न पूछने का पर्याप्त अवसर दिया गया एवं संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया । सभी उपस्थित सहभागियों को हेमंत जी द्वारा "ऐश्वर्यदायी समृद्धि शक्तिपात" प्रदान किया गया, जिसमें साधकों ने ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रत्यक्ष अनुभव किया ।

यह अवसर इस दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, कि आज वैदिक योग अध्यात्म सेवा संस्थान® (Vyass Trust) की वेबसाइट www.vyass.in का लोकार्पण भी किया गया । अब "ओजस्वी वाणी" और "साधकों के अनुभव" इसपर प्रकाशित किए जाएंगे । शीघ्र ही इस साइट में अतिरिक्त जानकारी और संस्था द्वारा उपलब्ध विशेष सेवाएं भी जोड़ी जाएंगी ।

सभी के परस्पर सहयोग और साधकों की सकारात्मक ऊर्जा ने इस कार्यक्रम को सफल बनाया ।
अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें : www.vyass.in
9818060309 , 8527783070

10/12/2020

वार्षिक पराविज्ञान महोत्सव-२०२०.....By VYASS TRUST

07/11/2020

दीपावाली पर विशेष :--- "सुनिए....माँ लक्ष्मी की करुण पुकार.....!!!
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मेरे प्यारे बच्चों....आज के युग में मेरा महत्त्व और माहात्म्य अधिक माना जाने लगा है,सभी मेरी प्राप्ति द्वारा सुख साधनों का उपभोग चाहते हैं, किन्तु तुम्हारा मेरे मुद्रा रूप को त्रुटिपूर्ण ढंग से खर्च करना मुझे पसंद नहीं...!! तुमने शास्त्रों में अवश्य पढ़ा होगा कि धन की तीन गतियां होती हैं,१)धन की सबसे उत्तम गति है दान द्वारा पुण्य कार्यों में खर्च करना, २)सुख साधन, भोग एवं विलासिता हेतु व्यय मध्यम गति है, और ३) सबसे निम्न गति है,धन का संग्रह करना... निरर्थक जोड़ते रहना.....जैसे रुका हुआ जल सड़ांध और रोग उत्पन्न करता है,उसी प्रकार लोभवश इकठ्ठा किया अनावश्यक धन भी विनाश का कारण बनता है.........

किन्तु पृथ्वी पर कलयुग के इस वर्तमान समय में दुर्दैव से धन एक "चौथी गति" को भी प्राप्त होने लगा है....और वह है,आपके धन का गौमाता की हत्या का कारण बनना.....आपके दिए धन से गौमांस ख़रीदा जाना...!! धर्मशास्त्रों के रचनाकार ऋषियों ने कभी इस चतुर्थ गति की कल्पना भी नहीं की थी...अत: धन की तीन ही गतियां बताई गईं....मेरे लिए यह चतुर्थ गति बहुत पीड़ादायक है......और यह पाप जाने-अनजाने तुम्हारे ही हाथों से हो रहा है....!!
मेरे बच्चों गऊ एक प्राणी मात्र ही नहीं,इसे मेरा ही रूप समझो क्योंकि यह सम्पन्नता की कुंजी है,इसका सर्वस्व मानव मात्र के लिए उपयोगी है,गऊओं में किसी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को उच्चतम शिखर पर ले जाने का सामर्थ्य है...इसलिए गौसेवा और राष्ट्रसेवा में कोई अंतर नहीं...यह साक्षात अन्नपूर्णा का रूप है,मेरे स्वामी जगत्पालक विष्णु ने भी अपने सभी अवतारों में गौप्रेम का ही सन्देश प्रचारित किया है.सभी देवता सम्मिलित रूप से मानव मात्र का जो कल्याण करते हैं,वह सभी सुख-वैभव देने में गौमाता सक्षम है,इस कारण इसे "सर्वदेवमयी गौमाता" कहा जाता है....!! जिस समुद्र मंथन से मेरी उत्पत्ति हुई उसी से कामधेनु (गौमाता) का भी प्रादुर्भाव हुआ.

ज्योतिष विज्ञान के अनुसार भी गौमाता...शुक्र का साक्षात् स्वरुप है,...और याद रखो "शुक्र" से अनेक लाभ हैं,जिनके बिना ..जीवन की पूर्णता सम्भव नहीं.....!! .उत्तम स्वास्थ्य, आकर्षक व्यक्तित्व, आभामय सौंदर्य.. अनुकूल विवाह द्वारा दाम्पत्य सुख, उत्तम संतान, गृहस्थी के वैभव, रुचिकर भोज्य पदार्थों की उपलब्धता, विलासिता के सुख, भोग और आनंद की वस्तुएं...जीवन की सुगमता और ऐश्वर्य के सभी साधन "शुक्र" ही उपलब्ध कराता है....और गौमाता के दर्शन साक्षात् शुक्रदेव के ही दर्शन हैं...!! क्या आप अपने जीवन में कभी "शुक्र" (Luxury)
का अभाव चाहोगे...??

मेरी प्रिय संतानों...!! यदि कर्म सिद्धांत को समझो, तो तुम पाओगे कि जिस मात्रा में तुम्हारे शुभ कर्मों का उदय होता है...उसी अनुसार मैं द्रव्य रूप में तुम्हें प्राप्त होती हूँ...सभी मेरे आगमन पर प्रसन्ता अनुभव करते हैं....कोई मेरे सान्निध्य का अभाव नहीं चाहता...!! सत्य कहूँ तो मैं स्वयं अपने बच्चों से दूर रहकर सहज अनुभव नहीं करती....किन्तु मेरी तुमसे एक विनती है...."तुम मुझे माँ कहते हो न ... यदि तुम्हारे ह्रदय में मेरे लिए लेशमात्र भी सम्मान और प्रेम है तो कृपया मुझे कभी भी ऐसे हाथों में मत सौंपना, जो गौमाता का सम्मान न करता हो...उसका भक्षक हो, जो उसे अपना आहार बनाने में न हिचके. जो गौहत्या को अपराध नहीं अपितु जिह्वा के स्वाद का साधन माने, जो गौमाता कि हत्या का समर्थक हो ऐसे किसी भी नरपिशाच से कोई खरीददारी मत करना,याद रखो, मेरे द्रव्य रूप को ऐसे रक्तरंजित हाथों में सौंपकर तुम अपने धन के कुछ अंश को गौहत्या का माध्यम कभी भी मत बनाना"....."अपनी माँ लक्ष्मी और गौमाता का अपमान न होने देना'

"ऐसा मानव समुदाय जो मुझे माँ का सम्मान देता हो....गौमाता का भी आदर करता हो,,,से समुदाय में ही मुद्रा का विनिमय करके तुम अपने धन को उत्तम गति प्रदान कर सकते हो....हे आर्यपुत्रों...मेरा वरदहस्त सदैव तुम्हारे शीश पर रहेगा.......और हाँ...प्रात: घर में सर्वप्रथम एक रोटी प्रति सदस्य, गौमाता का भाग निकालने से...तुम्हारे सभी भोज्य पदार्थ प्रसाद का रूप ग्रहण कर लेंगे ...और तुम्हारे जीवन में कभी कोई अभाव नहीं आएगा.... आशा है,तुम मेरी इन बातों का अवश्य ही ध्यान रखोगे"...और आज से ही यह प्रण करोगे....तुम्हारी माता- महालक्ष्मी !!"

(यदि आपने यह प्रण कर लिया है....और उपरोक्त भावपूर्ण तथ्यों से सहमत हैं...तो इस सन्देश को जन-जन तक पहुँचाने में सहयोग करें....इसे अधिक से अधिक शेयर-टैग-कमेंट-लाइक प्रदान कीजिए....इतनी सेवा तो आप कर ही सकते हैं.) -- आचार्य ओजस्वी VYASS TRUST

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