जैन स्मारक चूरु ॐ अभीराशिको नमः

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जैन स्मारक चूरु ॐ अभीराशिको नमः ॐ अ.भी.रा.शि.को. नमः
तेरापंथ धर्म संघ के तपस्वी संतो का समाधि स्थल "जैन स्मारक" चूरू (राजस्थान)

02/09/2026
02/09/2026

🌸।।ॐ ऋषभाय नमः।।🌸

अम्भोनिधौ क्षुभितभीषणनक्रचक्र-
पाठीन-पीठभयदोल्वणवाडवाग्‍नौ।
रंगत्तरंग-शिखरस्थित-यानपात्रास्‌-
त्रासं विहाय भवत: स्मरणाद्‌ व्रजन्ति।।40।।

।। जप के लाभ।।
समुद्र का भय दूर होता है । जल का भय भी समाप्त होता है ।

Benefit
The fear of ocean and water disappears.

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🙏 सादर आमंत्रण 🙏🌸 224वाँ भिक्षु चरमोत्सव 🌸📅 गुरुवार, 24 सितम्बर 2026💐 आप सभी की सपरिवार गरिमामयी उपस्थिति सादर प्रार्थनी...
02/09/2026

🙏 सादर आमंत्रण 🙏

🌸 224वाँ भिक्षु चरमोत्सव 🌸

📅 गुरुवार, 24 सितम्बर 2026

💐 आप सभी की सपरिवार गरिमामयी उपस्थिति सादर प्रार्थनीय है।

*आचार्य श्री भिक्षु समाधि स्थल संस्थान, सिरीयारी*

🌸 गुरु सान्निध्य में बच्चों के मन में संस्कार, सेवा और सद्भाव के बीज अंकुरित होते हैं—यही उनके उज्ज्वल भविष्य की सच्ची न...
02/09/2026

🌸 गुरु सान्निध्य में बच्चों के मन में संस्कार, सेवा और सद्भाव के बीज अंकुरित होते हैं—यही उनके उज्ज्वल भविष्य की सच्ची नींव है। 🙏✨

*जय   भिक्षु                      जय  महाश्रमण*            *ॐ अ. भी. रा. शि. को. नम:*        *तेरापंथ धर्मसंघ के नवमाचार...
02/09/2026

*जय भिक्षु जय महाश्रमण*

*ॐ अ. भी. रा. शि. को. नम:*

*तेरापंथ धर्मसंघ के नवमाचार्य*
*"श्री तुलसीगणी "*

*जीवन परिचय*

*दिनांक 02 सितम्बर 2026 , बुधवार*

*श्रृंखला ( आचार्य श्री तुलसीगणी -960 )*

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*फाल्गुन कृष्णा दूसरी द्वितीया (1 फरवरी) का मध्याह्न । गोठी जी की हवेली के हाॅल में साधु- साध्वियों की विशेष गोष्ठी का समायोजन । श्रावक- श्राविकाओं के प्रवेश पर पूर्ण पाबन्दी । मेरे आसपास मंत्री मुनि और मुनि चम्पालाल जी की अवस्थिति । सामने एक और साधु , दूसरी ओर साध्वियां । सबकी आकृतियों पर गंभीरता और उत्सुकता । एक भव्य और सुन्दर सीन । मैंने पूज्य गुरुदेव कालूगणी की स्तुति में लिखे गए गीत- जय कालू गुरुदेव का संगान कर गोष्ठी का प्रारम्भ किया । विगत नौ दिनों से चर्चित बोलों के सन्दर्भ में अपना निर्णायक वक्तव्य दिया, जो इस प्रकार है- 'साधु- साध्वियों ! आज मैं अपने जीवन के अड़तीस वर्षों की मधुर स्मृतियों से ओतप्रोत हो रहा हूं । इस जीवन के प्रथम ग्यारह वर्ष गृहस्थ अवस्था में बीते । उसके बाद ग्यारह वर्षों का समय पूज्य गुरुदेव की मंगलमय सन्निधि में व्यतीत हुआ । वह समय गुरु की असाधारण कृपा पाने का समय था । अध्ययन- अध्यापन का समय था । पूर्ण निश्चिन्तता का समय था । सुख और शान्ति का समय था । उसे मैं कभी स्मृतियों से ओझल नहीं कर पाता । कितना सुखद था वह समय ! रत्नाधिक साधुओं का मेरे प्रति कितना वात्सल्य था । वे मुझे कितनी प्रियता से शिक्षा देते थे ! छोटे साधु कितना विनम्र व्यवहार रखते थे ! मेरे साथी व सहपाठी साधु मुझे बहुत ऊंची दृष्टि से देखते थे । उस समय भी हम कभी-कभी धर्मसंघ के भविष्य के बारे में चिन्तन किया करते थे । गुरुदेव की मुझ पर जो कृपा थी, मैं उसे शब्दों में अभिव्यक्ति नहीं दे सकता । मैं जानता हूं कि वह कृपा नैसर्गिक थी, संस्कारजनित थी । मैंने कालूयशोविलास में इस विषय का एक पद्य लिखा है-*

*हो गुरु गुणगेहरा ! मैं मिहनदातार जो,*
*पल-पल छिन-छिन आजीवन गुरुवर ! रह्यो रे लोय ।*
*हो म्हारा शिरसेहरा ! आप जिसा दिलदार जो,*
*पामर नै अजरामर पद दे निर्वह्यो रे लोय ।।*

*बाईस वर्ष की अवस्था में पूज्य गुरुदेव ने धर्मसंघ का भार मुझे सौंप दिया । उस समय मुझे साधु- साध्वियों का पूरा सहयोग मिला । मंत्री मुनि के सक्रिय सहयोग को तो मैं कभी भूल ही नहीं सकता । मेरे शासनकाल के प्रारम्भिक कुछ वर्षों का समय शैक्षणिक विकास का समय था । उसमें कोई उतार- चढ़ाव नहीं आया । पर समय की गति सदा एक समान नहीं रहती । बीच में कुछ ऐसे प्रसंग भी आए, जिनको संभालने में मुझे बहुत सन्तुलित रहना पड़ा । विगत चार वर्षों का समय एक दृष्टि से उत्क्रान्ति का समय रहा । इस अवधि में एक लम्बी यात्रा हुई । यात्रा में अनेक प्रकार के अनुभव हुए । नए लोगों से उत्साहवर्धक सम्पर्क और अन्तरंग उथल-पुथल के कारण मानसिक द्वन्द्व की स्थिति बनी । इस समय की तुलना जयाचार्य के युग से की जा सकती है । उस समय संघ में एक क्रान्ति घटित हुई थी । साधु- संघ में तीव्र ऊहापोह हुआ था । चर्चाएं हुई थीं । उस परिस्थिति को जयाचार्य ने जिस ढंग से संभाला, मुझे भी कुछ-कुछ वैसा ही करना पड़ रहा है । मैं मानता हूं कि मैंने जो भी किया है, वह सिद्धान्त, मर्यादा और परम्परा के प्रतिकूल नहीं किया, फिर भी कुछ लोगों के मन संदिग्ध हो गए । सन्देह की स्थिति में उन्होंने जो काम किया, उसे मैं अक्षम्य मानता हूं ।*


*" ॐ अर्हम् "*



*तेरापंथ धर्मसंघ के नवमाचार्य "श्री तुलसीगणी" के जीवन परिचय की विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहिये जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला.........."नवमाचार्य श्री तुलसीगणी"*


*क्रमश:------*

*👉🏻 "शासन समुद्र" एवं "मेरा जीवन : मेरा दर्शन" पुस्तक से साभार🙏🙏*

*लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छा मि दुक्कडं🙏🏻🙏🏻*

*🙏🏻प्रस्तुति: "जैन स्मारक" चूरू*

*🙏कल का त्याग 🙏**जय  भिक्षु*             *जय महाश्रमण*   *ॐ  अ. भी. रा. शि. को. नमः**🙏हाथ जोड़कर  " नमस्कार महामंत्र" का ...
01/09/2026

*🙏कल का त्याग 🙏*

*जय भिक्षु* *जय महाश्रमण*

*ॐ अ. भी. रा. शि. को. नमः*

*🙏हाथ जोड़कर " नमस्कार महामंत्र" का स्मरण करके "त्याग " करें ।*

*🕰️प्रतिदिन छोटे- छोटे नियम लेकर कर्म निर्जरा करने वाले सभी श्रावक-श्राविकाओं के प्रति बारम्बार अनुमोदना ।*

*📿आप सभी से विनम्र निवेदन है कि कल " ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं शीतलनाथाय नमः " की एक माला फेरने का प्रयास करें ।*

*🙏प्रस्तुति :- 🙏*
*जैन स्मारक चूरू*

*जय   भिक्षु                      जय  महाश्रमण*            *ॐ अ. भी. रा. शि. को. नम:*        *तेरापंथ धर्मसंघ के नवमाचार...
01/09/2026

*जय भिक्षु जय महाश्रमण*

*ॐ अ. भी. रा. शि. को. नम:*

*तेरापंथ धर्मसंघ के नवमाचार्य*
*"श्री तुलसीगणी "*

*जीवन परिचय*

*दिनांक 01 सितम्बर 2026 , मंगलवार*

*श्रृंखला ( आचार्य श्री तुलसीगणी -959 )*

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*इस सन्दर्भ में हस्तक्षेप करते हुए मैंने कहा- 'मुनि चौथमल जी का कथन सही है । बात करने की, प्रश्न करने की और तर्क उपस्थित करने की सबको स्वतंत्रता है । किन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि औचित्य की सीमा का अतिक्रमण हो जाए । बड़े साधुओं के व्यवहार से छोटे साधुओं को सीख मिलनी चाहिए । पर आज इससे उल्टा हो रहा है । विचारों की प्रस्तुति का तरीका प्रशस्त होना चाहिए । आपके प्रति सबके मन में सद्भावना और आदर की भावना है । लेकिन आप जिस रूप में शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं और उत्तेजना में बोल रहे हैं, आप अपना स्थान खो बैठेंगे ।'*

*मुनि सोहनलाल जी (चूरू) ने मुनि रंगलाल जी को सम्बोधित कर कहा- 'आचार्यश्री क्या कह रहे हैं, आपको ध्यान देना चाहिए ।*

*मुनि रंगलाल जी ने आगे आकर विनम्रतापूर्वक 'खमतखामणा' करते हुए कहा- 'मैं जब तक नहीं बोलता हूं , तब तक ठीक है । बोलते समय मुझे भान नहीं रहता । इस बात को मैं समझता हूं । पर क्या करूं, मेरी प्रकृति ही ऐसी हो गई है ।' मुनि रंगलाल जी की विनम्रता से वातावरण में आई गर्मी छंट गई । सभा में खामोशी छा गई ।*

*इस प्रकार छोटे- बड़े, सीधे- उल्टे, नए- पुराने जितने बोल विवादास्पद बन रहे थे, उन पर विशद चर्चा हुई । दोनों पक्षों ने अपने सैद्धान्तिक और पारम्परिक ज्ञान तथा अनुभवों का भरपूर उपयोग किया । भारतीय संसद में पक्ष- प्रतिपक्ष के बीच जिस रूप में बहस और प्रश्नोत्तरों का क्रम चलता है, वैसा ही दृश्य देखने को मिला । अन्तर था तो इतना- सा था कि वहां उत्तेजना के प्रसंग में अनुशासन और मर्यादा का भी ध्यान नहीं रहता । यहां मेरा हस्तक्षेप होते ही स्थिति सामान्य बन जाती ।*

*नौ दिनों की लम्बी चर्चा के बाद कुछ साधुओं ने कहा- 'चर्चा बहुत हो गई । अब निर्णय हो जाना चाहिए ।' इस पर प्रतिपक्ष के साधु बोले- 'अभी कुछ बोल बाकी हैं ।' मैं एक भी बोल शेष रखना नहीं चाहता था । उनकी बात सुनकर मैंने कहा- 'जो कुछ बाकी बचा है, उसे छोड़ना नहीं है । मैं अभी किसी भी सिंघाड़े को विहार के लिए नहीं कहूंगा । पूरा फाल्गुन का महीना हाथ में है । विहार की कोई जल्दी नहीं है । मैं न तो किसी बात को लम्बाना चाहता हूं और न खटाई में डालना चाहता हूं ।' मेरे द्वारा बहस को चालू रखने का आह्वान करने पर साधुओं के मन का सन्देह क्षीण हो गया । सामूहिक सहमति से उन्होंने कहा- 'अब अलग से चर्चा करने जैसा कोई गंभीर बोल नहीं रहा है । चर्चित बोलों के बारे में आपका निर्णय जानने की उत्सुकता है । आप कृपा करें, निर्णय सुनाएं ।'*


*" ॐ अर्हम् "*



*तेरापंथ धर्मसंघ के नवमाचार्य "श्री तुलसीगणी" के जीवन परिचय की विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ते रहिये जीवन परिचय की क्रमबद्ध श्रंखला.........."नवमाचार्य श्री तुलसीगणी"*


*क्रमश:------*

*👉🏻 "शासन समुद्र" एवं "मेरा जीवन : मेरा दर्शन" पुस्तक से साभार🙏🙏*

*लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छा मि दुक्कडं🙏🏻🙏🏻*

*🙏🏻प्रस्तुति: "जैन स्मारक" चूरू*

*🙏कल का त्याग 🙏**जय  भिक्षु*             *जय महाश्रमण*   *ॐ  अ. भी. रा. शि. को. नमः**🙏हाथ जोड़कर  " नमस्कार महामंत्र" का ...
31/08/2026

*🙏कल का त्याग 🙏*

*जय भिक्षु* *जय महाश्रमण*

*ॐ अ. भी. रा. शि. को. नमः*

*🙏हाथ जोड़कर " नमस्कार महामंत्र" का स्मरण करके "त्याग " करें ।*

*🕰️प्रतिदिन छोटे- छोटे नियम लेकर कर्म निर्जरा करने वाले सभी श्रावक-श्राविकाओं के प्रति बारम्बार अनुमोदना ।*

*📿आप सभी से विनम्र निवेदन है कि कल " ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं सुविधिनाथाय नमः " की एक माला फेरने का प्रयास करें ।*

*🙏प्रस्तुति :- 🙏*
*जैन स्मारक चूरू*

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