10/07/2026
प्राचीन शिव बजरंग मंदिर
रावण गेट, चौमूं (जयपुर, राजस्थान)
430 वर्षों की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक गाथा
लेखक एवं संकलन
केसी (कैसी) बछेरा
समर्पण
ॐ श्री हनुमते नमः
यह पुस्तक श्री प्राचीन शिव बजरंग मंदिर के आराध्य भगवान श्री बजरंगबली एवं भगवान शिव के श्रीचरणों में समर्पित है। साथ ही उन सभी श्रद्धालुओं, पुजारियों, समाजसेवियों एवं मंदिर समिति के सदस्यों को समर्पित है जिन्होंने इस 430 वर्ष पुरानी धरोहर की परंपरा को आज तक जीवित रखा।
भूमिका
राजस्थान की पावन भूमि पर अनेक ऐसे मंदिर स्थित हैं जो केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और समाज की अमूल्य धरोहर हैं। चौमूं नगर का प्राचीन शिव बजरंग मंदिर भी ऐसा ही एक दिव्य तीर्थ है, जिसका इतिहास लगभग 430 वर्षों पुराना माना जाता है।
यह मंदिर चौमूं नगर की स्थापना, राजशाही काल की परंपराओं, भगवान श्री हनुमान जी की दिव्य प्रतिमा के प्राकट्य, शिव पंचायत की स्थापना तथा वर्तमान सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों का साक्षी है।
इस पुस्तक का उद्देश्य मंदिर के इतिहास को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखना है।
अध्याय–1
चौमूं नगर की स्थापना और दिव्य प्रतिमा का प्राकट्य
सन 1595 ईस्वी में ठाकुर करण सिंह जी द्वारा चौमूं नगर के सुरक्षा परकोटे का निर्माण कराया जा रहा था। दक्षिण दिशा के मुख्य द्वार के निर्माण के लिए पत्थरों से लदी बैलगाड़ियाँ लाई जा रही थीं।
निर्माण सामग्री उतारते समय एक बैलगाड़ी में रखे विशाल पत्थरों के बीच से भगवान श्री हनुमान जी की एक दिव्य एवं जागृत प्रतिमा प्रकट हुई। उपस्थित सभी लोग इस अद्भुत घटना को देखकर आश्चर्यचकित रह गए। इसे किसी सामान्य संयोग के रूप में नहीं, बल्कि ईश्वर की इच्छा और दिव्य संकेत के रूप में स्वीकार किया गया।
जब यह समाचार चौमूं के राजा तक पहुँचा, तो उन्होंने स्वयं स्थल का निरीक्षण किया। राजा ने निर्णय लिया कि इस दिव्य प्रतिमा को नगर के भीड़-भाड़ वाले क्षेत्र में न रखकर एक शांत और पवित्र स्थान पर स्थापित किया जाए, जहाँ श्रद्धालु निर्बाध रूप से पूजा-अर्चना कर सकें।
राजा ने वर्तमान खादी बाग रोड, बजरंग पोल से लगभग 500 मीटर दूर स्थित स्थान का चयन किया। वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ और विधि-विधान के साथ भगवान श्री बजरंगबली की प्रतिमा की स्थापना करवाई गई। इसी के साथ इस पावन मंदिर की नींव पड़ी, जिसे आज श्री प्राचीन शिव बजरंग मंदिर के नाम से जाना जाता है।
इसी दिव्य घटना की स्मृति में नगर के दक्षिणी द्वार का नाम बजरंग पोल रखा गया। कालांतर में यहाँ विजयादशमी के अवसर पर रावण दहन की परंपरा प्रारंभ हुई और यह स्थान रावण गेट के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
लगातार... शिव पंचायत की स्थापना
मन्नत पूर्ण होने पर शिव पंचायत की स्थापना
लगभग 50 वर्ष पूर्व स्थानीय श्रद्धालु श्री हनुमान सहाय जी ने पुत्र प्राप्ति की कामना लेकर बजरंगबली के समक्ष मन्नत मांगी कि यदि उनकी इच्छा पूर्ण होगी तो वे मंदिर परिसर में शिव पंचायत की स्थापना करवाएंगे।
श्रद्धा और विश्वास के अनुसार उनकी मनोकामना पूर्ण हुई तथा उनके घर तीन पुत्रों का जन्म हुआ। उन्होंने उनके नाम शंकर, शंभू और पप्पू रखे। मन्नत पूर्ण होने पर श्री हनुमान सहाय जी ने मंदिर परिसर में विधि-विधानपूर्वक दिव्य शिव पंचायत की प्रतिमाओं की स्थापना करवाई। इसी घटना के बाद यह देवस्थान प्राचीन शिव बजरंग मंदिर के रूप में व्यापक रूप से प्रसिद्ध हुआ।