Ramanand Mission

Ramanand Mission Ramanand Mission ॥ सर्वे प्रपत्ते अधिकारणो मता: ॥

04/04/2026

विशेष सूचना 🔔

पिछले कुछ दिनों से विभिन्न स्थानों से यह जानकारी प्राप्त हो रही है कि कुछ अज्ञात व्यक्ति अनजान नंबरों से फोन करके राघव परिवार के परिकरों से पूज्यपाद जगद्गुरु जी के आयोजनों के नाम पर आर्थिक सहयोग की मांग कर रहे हैं।

इस संबंध में आप सभी को सूचित किया जाता है कि ऐसे किसी भी फोन कॉल या आग्रह से पूज्यपाद जगद्गुरु जी अथवा आश्रम प्रशासन का कोई भी संबंध नहीं है।

पूज्यपाद जगद्गुरु जी द्वारा संचालित केवल दो ही अधिकृत संस्थाएँ हैं:
1. श्री तुलसीपीठ सेवा न्यास
2. रामानन्द मिशन

अतः आप सभी से विनम्र निवेदन है कि उपरोक्त संस्थाओं के अतिरिक्त किसी भी व्यक्ति या संस्था को सहयोग न करें। अन्यथा होने वाली किसी भी हानि के लिए आप स्वयं उत्तरदायी होंगे।

🙏 सतर्क रहें, सुरक्षित रहें 🙏

विशेष सम्पर्क- 9151491008

वर्तमान समय में पूज्यपाद जगद्गुरु जी के एक साक्षात्कार को लेकर जो विवाद खड़ा किया जा रहा है, वह नहीं किया जाना चाहिए था ...
25/08/2025

वर्तमान समय में पूज्यपाद जगद्गुरु जी के एक साक्षात्कार को लेकर जो विवाद खड़ा किया जा रहा है, वह नहीं किया जाना चाहिए था ।
पूज्य गुरुदेव ने स्पष्ट रूप से यह कह दिया है कि श्री प्रेमानंद जी से उन्हें किसी प्रकार की ईर्ष्या नहीं है । वे एक अच्छे नामजापक संत हैं , और भगवन्नाम जपने वाला हरेक व्यक्ति गुरुदेव की दृष्टि में सम्मान के योग्य होता है । अपने प्रवचनों में गुरुदेव बार - बार यह बात कहते हैं कि जो राम - कृष्ण को भजता है , वह चाहे जिस धर्म , वर्ण , अवस्था अथवा लिंग का हो , वह आदर के योग्य है । हम सालबेग को अपना मानते हैं , तो श्री प्रेमानंद महाराज जैसे नामजापक संत को पराया कैसे मान सकते हैं ! साक्षात्कार में पूज्य जगद्गुरु जी ने स्पष्ट कहा है कि अवस्था और धार्मिक व्यवस्था दोनों प्रकार से श्री प्रेमानंद जी उनके पुत्र के समान हैं । विचार कीजिए - पिता के मुँह से निकला वाक्य सद्यः कठोर प्रतीत होने पर भी उसके हृदय का भाव पुत्र के लिए कल्याणकारी ही होता है । जगद्गुरु सबके गुरु होते हैं , सारी प्रजा उनके लिए पुत्र के समान होती है । अतः , जिसप्रकार एक पिता अपनी संतान का अहित नहीं चाहता, उसीप्रकार किसी भी सनातनी का अहित पूज्य जगद्गुरु जी नहीं चाहते ।

आचार्य चाणक्य के अनुसार -
लालनाद् बहवो दोषास्ताडनाद् बहवो गुणाः ।
तस्मात्पुत्रं च शिष्यं च ताडयेन्न तु लालयेत् ॥

संतति और शिष्यों को वाणी के द्वारा निरंतर सचेत करते रहना चाहिए ।

सचिव बैद गुरु तीनि जो प्रिय बोलहिं भय आस।
राज, धर्म, तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास।।

गुरु शिष्य को प्रसन्न करने के लिए मीठा - मीठा बोलने लग जाए तो धर्म का नाश होना अवश्यंभावी है ।
अतः , अपनी वाणी के माध्यम से गुरुदेव समय - समय पर जनमानस को सचेत करते रहते हैं ।

सेवा , शिक्षा और संस्कार के माध्यम से गुरुदेव सनातनियों के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं । तुलसी पीठ में पधारने वाले हरेक संत की सेवा भोजन , आवास, वस्त्रादि के माध्यम से की जाती है ।
विद्यालय , विश्वविद्यालय, अपने ग्रंथों और प्रवचनों के माध्यम से गुरुदेव शिक्षा का प्रचार - प्रसार करते हैं ।
तथा , वैदिक मर्यादा का पालन करके तथा करवाके गुरुदेव संस्कारों का बीजारोपण जनसामान्य के अंतःकरण में करते रहते हैं ।

आज के समय में शास्त्रीय चिंतन का ह्रास होता देख गुरुदेव अत्यंत चिंतित होते हैं । वे वर्षों से बार - बार कहते आ रहे हैं कि मैं चमत्कार में नहीं बल्कि पुरुषार्थ पर विश्वास करता हूँ । इतनी अवस्था होने पर भी आज गुरुदेव की दिनचर्या का अधिकांश समय पढ़ने और पढ़ाने में व्यतीत होता है । धर्मशास्त्रों के अध्ययन में जनता की रुचि कैसे उत्पन्न हो , इसके लिए गुरुदेव सदा प्रयत्नशील रहते हैं । अतः , जो लोग इसे ईर्ष्या का नाम दे रहे हैं, उन्हें पुनः विचार करने की आवश्यकता है ।

मीडिया अपने लाभ के लिए निःस्वार्थ संतों को भी अपने स्वार्थसिद्धि का माध्यम बना लेती है । उनकी बातों को तोड़ - मरोड़कर प्रस्तुत किया जाता है ताकि संतों पर लोगों की श्रद्धा समाप्त हो जाए और उनकी टीआरपी बढ़ती रहे । अतः , सचेत होने की आवश्यकता है । राम मंदिर के लिए गवाही देने की बात हो अथवा 200 से अधिक ग्रंथ लिखकर धर्म की महत्तम सेवा करने की बात , पूज्य गुरुदेव हरेक प्रकार से सनातनियों के लिए उपकारी ही सिद्ध हुए हैं । अतः , ऐसे महापुरुष के लिए ईर्ष्यालु , अहंकारी जैसे आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करना क्या उचित है ! घर के बड़े - बुजुर्ग कटु वाक्य कह भी दें , तो क्या बदले में उन्हें भी कटु वाक्य ही कहकर बदला लेना चाहिए ! सोचिएगा अवश्य ।

पूज्यपाद जगद्गुरु जी को भारतीय ज्ञानपीठ न्यास द्वारा भारतीय साहित्य के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार ज्ञानपीठ पुर...
17/02/2024

पूज्यपाद जगद्गुरु जी को भारतीय ज्ञानपीठ न्यास द्वारा भारतीय साहित्य के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त होने पर आप सभी को अनंत बधाई…🙏😊
Jagadguru Rambhadracharya Ji
Acharya Ramchandra Das
Ramanand Mission

जान-बूझकर वीडियो काटकर डाला गया है। बिना कुछ जाने लोग चिल्ला रहे हैं।यहाँ तुलसीदास का यह दोहा समझाया गया है—चतुराई चूल्ह...
10/01/2024

जान-बूझकर वीडियो काटकर डाला गया है। बिना कुछ जाने लोग चिल्ला रहे हैं।

यहाँ तुलसीदास का यह दोहा समझाया गया है—
चतुराई चूल्हे पड़ी घूरे पड़ा अचार।
तुलसी राम भजन बिन चारों बरन चमार॥

ऐसा ही एक दोहा कबीर का है—
बड़े गए बड़ापने रोम रोम हंकार।
सतगुरु के परचै बिना चारों बरन चमार॥

जब तुलसी अथवा कबीर के मूल दोहे में ‘चमार’ शब्द है तो दोहा पढ़ते समय अथवा समझाते समय शब्द का उच्चारण होगा ही। यहाँ ‘चमार’ शब्द अपमानसूचक नहीं है अपितु जातिसूचक ही है।

दोहों का भाव है और रामभक्ति/सद्गुरु-परिचय से युक्त व्यक्ति उच्च है और राम-भजन/सद्गुरु-परिचय के बिना सब कोई नीच हैं। भक्ति को जाति से श्रेष्ठ बताया गया है। न दोहा जातिवादी है न उसकी व्याख्या।

गुरुदेव के शब्दों में भी “जो राम को भजे वह श्रेष्ठ और जो चाम (=चमड़े) को भजे वह नीच”। इस व्याख्या में जातिवाद कहाँ?

ऐसा ही भाव इस श्लोक में आता है—
न शूद्रा भगवद्भक्ता विप्रा भागवताः स्मृताः।
सर्ववर्णेषु ते शूद्रा ये ह्यभक्ता जनार्दने॥
(—कृष्ण दुर्योधन से, भारत-सावित्री, श्लोक १४)

भगवान् के भक्त शूद्र नहीं होते, भागवत तो विप्र (=ब्राह्मण) कहे गए हैं. सब वर्णों में वे शूद्र हैं जो जनार्दन (=विष्णु) के भक्त नहीं हैं।

https://youtu.be/2I5bkkLgQ0A

Jagadguru Rambhadracharya Ji

पूज्य श्री जय महाराज जी आचार्य रामचंद्र दास जी महाराज (उत्तराधिकारी पद्मश्री जगद्गुरु रामानंदाचार्य परम पूज्य स....

जान-बूझकर वीडियो काटकर डाला गया है। बिना कुछ जाने लोग चिल्ला रहे हैं।यहाँ तुलसीदास का यह दोहा समझाया गया है—चतुराई चूल्ह...
10/01/2024

जान-बूझकर वीडियो काटकर डाला गया है। बिना कुछ जाने लोग चिल्ला रहे हैं।

यहाँ तुलसीदास का यह दोहा समझाया गया है—
चतुराई चूल्हे पड़ी घूरे पड़ा अचार।
तुलसी राम भजन बिन चारों बरन चमार॥

ऐसा ही एक दोहा कबीर का है—
बड़े गए बड़ापने रोम रोम हंकार।
सतगुरु के परचै बिना चारों बरन चमार॥

जब तुलसी अथवा कबीर के मूल दोहे में ‘चमार’ शब्द है तो दोहा पढ़ते समय अथवा समझाते समय शब्द का उच्चारण होगा ही। यहाँ ‘चमार’ शब्द अपमानसूचक नहीं है अपितु जातिसूचक ही है।

दोहों का भाव है और रामभक्ति/सद्गुरु-परिचय से युक्त व्यक्ति उच्च है और राम-भजन/सद्गुरु-परिचय के बिना सब कोई नीच हैं। भक्ति को जाति से श्रेष्ठ बताया गया है। न दोहा जातिवादी है न उसकी व्याख्या।

गुरुदेव के शब्दों में भी “जो राम को भजे वह श्रेष्ठ और जो चाम (=चमड़े) को भजे वह नीच”। इस व्याख्या में जातिवाद कहाँ?

ऐसा ही भाव इस श्लोक में आता है—
न शूद्रा भगवद्भक्ता विप्रा भागवताः स्मृताः।
सर्ववर्णेषु ते शूद्रा ये ह्यभक्ता जनार्दने॥
(—कृष्ण दुर्योधन से, भारत-सावित्री, श्लोक १४)

भगवान् के भक्त शूद्र नहीं होते, भागवत तो विप्र (=ब्राह्मण) कहे गए हैं. सब वर्णों में वे शूद्र हैं जो जनार्दन (=विष्णु) के भक्त नहीं हैं।

Jagadguru Rambhadracharya Ji

पूज्य श्री जय महाराज जी आचार्य रामचंद्र दास जी महाराज (उत्तराधिकारी पद्मश्री जगद्गुरु रामानंदाचार्य परम पूज्य स....

पूज्यपाद जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी श्रीरामभद्राचार्य जी महाराज के अमृत महोत्सव (75वें) जन्मोत्सव पर आयोजित हो रहे “...
29/11/2023

पूज्यपाद जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी श्रीरामभद्राचार्य जी महाराज के अमृत महोत्सव (75वें) जन्मोत्सव पर आयोजित हो रहे “अमृत यात्रा” के भारतवर्ष भ्रमण पर विभिन्न स्थानों पर स्वागत हेतु दिशा-निर्देश…

आप अपने नगर में इस ऐतिहासिक यात्रा का स्वागत् अवश्य करें।यात्रा के अन्य किसी पड़ाव पर आपके परिचित है तो उन्हें भी अवश्य सूचना करें।
Jagadguru Rambhadracharya Ji

04/10/2023

नमो राघवाय,
ऐसे यजमान जिन लोगों ने अमृत महोत्सव अयोध्या के लिए दक्षिणा ऑनलाइन भेज दी है परन्तु उनको रशीद व्हाट्सएप पर नहीं प्राप्त हुई है। कृपया, अपने पैन कार्ड और ट्रांजेक्शन डीटेल को रामानन्द मिशन के व्हाट्सएप नम्बर 9151491008 पर भेजकर प्राप्त कर लें।

07/08/2023

श्री सीतानाथ समारम्भा श्रीरामानन्दार्य मध्यमाम्।
अस्मदाचार्य पर्यंतां वन्दे श्रीगुरूपरम्पराम् ॥

भगवान श्रीसाताराम,पूज्यपाद सद्‌गुरुदेव भगवान एवं समस्त वैष्णवों की कृपा से दास को साधुवेष एवं आचीर्यपीठ के उत्तराधिकारी के रूप में सेवा के 4 वर्ष (अंग्रेज़ी दिनांक के अनुसार) पूर्ण हो गए।

पूज्य गुरुदेव,संप्रदाय एवं आचार्यपीठ की सेवा में जीवन बीते यही प्रार्थना भगवान श्रीसीताराम जी के चरणों में…🙏

Jagadguru Rambhadracharya Ji
Acharya Ramchandra Das
बागेश्वर धाम सरकार

10/06/2023

*!! नमो राघवाय !!*

सादर आमंत्रण

पूज्य गुरुदेव धर्मचक्रवती महामहोपाध्याय पदम् विभूषण श्रीमद जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी महाराज के सानिध्य में *सनातन संवाद* कार्यक्रम रखा गया है जिसमे जगद्गुरु जी सनातन चर्चा हम सभी के साथ करेंगे। इस कार्यक्रम में आप सादर आमंत्रित है।

*दिनांक* : 11 जून 2023 (रविवार)
*समय* : प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक
*स्थल* : विजयलक्ष्मी हॉल, वेसु, सुरत

*संपर्क सूत्र*: 93747 11594, 9327611951,93777 74212, 98251 30640, 93745 29441, 98251 42682, 98241 34262, 93747 15062,9377998222

05/06/2023

Address

Chitrakoot
485334

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Ramanand Mission posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to Ramanand Mission:

Share