02/01/2014
प्रभू राम जब लंका जाने के लिएसमूंद्र पार करने को लेकर, चितिंत थे,तब नल और नील ने श्री राम का चिंता दूर करने के लीए एक उपाय निकाला था।वो हर पत्थर पे राम नाम लिख कर पानी मे छोड देते, जिससे पत्थर समूंद्र मेतैरने लग जाता था।जब राम समस्त वानर सेना को ऐसेकरते देख रहे थे, तो सहसा उनके मन मे एकविचार उत्पन्न हूआ, कि जब मेरा नाम लिखने पे ये पत्थर जल मे तैर सकते है,तो क्या होगा जब मै स्वयं ये पत्थर जल मे फेकूं तब।इस बात को देखने के लिए प्रभू रामने एक पत्थर उठा लिया, और अकेले मे एकस्थान पर जा कर उस पत्थर को पानीमे छोड दिया, लेकिन वो पत्थरतो पानी मे डूब गया, तैरा नही।इस बात को लेकर राम जी थोरे उदासहो गए, और अगल बगल देखने लगेकि कही किसी ने ये दृश्य देखा तोनही ना! पर तभी उनकी नजर हनुमान जी परपडी,और उन्होने हनूमान जी से कहा: हनुमान तुमने कूछ देखा तो नही ना?हनुमान जी ने कहाप्रभू मैने तो देखा है,प्रभू ने कहा: तो ये बात किसी को बताना नही, नही तो लोग मेरा उपहास करेगें।हनुमान जी ने कहामै तो ये बात सब को बताउंगा, समस्त ब्रहमाण्डको बताउंगा, की...जिसको राम अपने से दूर फेंक देतेहै वो इस जीवन रूपी मझदार मे डूब जाता है,और अगर जिसको इस मझदार मे तैरना है, उसे राम नामका सहारा लेना हीपडेगा,।प्रभु आपने उस पत्थर को अपने सेअलग कर दिया और दूर फेक दिया तो येपत्थर डूब गए, पर जिस पत्थर पे आपका नाम लिखा हैवो तो आराम से तैर रहेहै, आपके नाम के सहारे।.............................................राम से बड़ा राम का नाम, बनाए सब केबिगडे काम,श्री हनूमान जपे अवीराम ''श्री राम जय राम -जय जय राम,'' कारन, कर्ता, और कर्म है केवल रामका नाम, भक्तो को माध्यम बना,रामकरे सब काम।