17/03/2026
°°_____नवरात्र विशेष_____°°
॥ अथ जयदुर्गा मंत्र प्रयोगः ॥
भगवती दुर्गा का यह रक्षात्मक मंत्र हैं। इसका प्रयोग शत्रुओं से घिरने पर, दुर्गमस्थान में भय हाने पर, ऋणयोग, कर्ज मुक्ति न होने पर, रोग मुक्ति न होने पर, पारिवारिक क्लेश के निवारण के लिए, देवी की ओर से देह, व्यापार,गृह व स्थान रक्षा प्राप्ति के लिए,स्पर्धा मे विजय के लिए, जीवन में उन्नति न होने की दशा में या अन्य विपत्ति-समस्यायें आने पर किया जाता है।
पूजन स्थान पर बेजोट पर देवी प्रतिमा या चित्र लाल वस्त्र पर अनाज के ढेर पर स्थापित करें.गुरु गणेश दिव के स्मरण के बाद देवी को संमुख धूप दीप नेवैध्य अर्पित करें. भूतशुद्धि कर आसन तिलक इत्यादि के बाद देवी अग्नि और जल को साक्षी रख कर संकल्प लेकर 9 दिनों का अनुष्ठान नवरात्रो में संपन्न करें.. पूर्ण रूप से स्वयं को देवी को समर्पित करके ही सम्पूर्ण समर्पण के साथ शांत भाव से निर्विघ्नता से अनुष्ठान आरम्भ करें.
विनियोगः- अस्य श्री जय दुर्गा मंत्रस्य नारद ऋषिः,गायत्री छन्दः,जयदुर्गा देवता
ॐ बीजम्, स्वाहा शक्तिं, ॐ कीलकं, मम अभीष्ट सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।
॥ ध्यानम् ॥
मेघश्यामां ग्लौकिरीटां त्रिनेत्रां सिंहवाहिनीम् । चक्रं वरं खड्गशूलौ बाहुभिर्बिभ्रतीं भजे ॥
द्वादशाक्षर मंत्र :- ॐ नमः दुर्गे दुर्गे रक्षणि स्वाहा।
करन्यासः-
ॐ दुर्गे अंगुष्ठाभ्यां नमः ।
दुर्गे तर्जनीभ्यां स्वाहा।
दुर्गायै मध्यमाभ्यां वषट् ।
भूतरक्षणि अनामिकाभ्यां हुं।
ॐ दुर्गे दुर्गे रक्षणि कनिष्ठाभ्यां वौषट् ।
ॐ दुर्गे दुर्गे रक्षण करतलकरपृष्ठाभ्यां फट् ।
नवरात्रो में प्रतिदिन रुद्राक्ष, कुमकुम या लाल चंदन की माला से 3 माला फेरना चाहिए,, नवमी तिथि को माला संपन्न करके एक माला से होम करना तथा रात्रि अथवा संध्या काल मे किसी जलाशय में अथवा देवी मंदिर में दुर्गा के निमित्त दीपदान करना उत्तम होता है।
(विशेष:-होम के लिए इनमे से जो जो उपलब्ध हो हविष्य मे मिलाया जा सकता हैं,,हविष्य मे गन्ने के टुकड़े, जीरा, कपास के बीज,लाल पुष्प, गन्ने का रस, ढाक के पुष्प, बेल फल,काले तिल, गुड़, शक्कर, शहद, चने, जौ, इत्यादि,
बलि विधि की जानकारी हो तो निम्बू, अनार, गन्ना, ककड़ी, या कूष्माण्ड की बली निवेदन करना चाहिए. अन्यथा आरती चालीसा स्तोत्र नैवैध्य पूजन इत्यादि से देवी को संतुष्ट करें.)
जय महामाई