Akhil Vishwa Gayatri Pariwar, Chhatarpur

Akhil Vishwa Gayatri Pariwar, Chhatarpur This Page will inform you for any religious Programs, Events and Many more.........................

26/07/2026
26/07/2026
26/07/2026

:शब्द और शक्ति:---
आधूनिक विज्ञान ने भी शब्द को शक्ति के रूप मे स्वीकार किया है। मनुष्य जो भी कुछ सोचता है, वही बाद मे शब्द के रुप मे प्रकट होता है। उस शक्ति की तरंगें वायुमण्डल मे फैलती हैं। भारतीय अध्यात्म ने वाणी को चार रूपों मे स्वीकार किया है--
बेखरी, मध्यमा, पश्यन्ति एवं परा। शब्दो् द्वारा प्रकट वाणी को बेखरी वाणी कहते है। इससे जो ध्वनि तरंगे उठती है वे वायु मण्डल मे सदा विद्यमान रहती है।
वे कभी नष्ट नही होती। शक्ति अपने मूल रूप मे रह सकती है अथवा इसका रूपान्तरण हो सकता है किन्तु नष्ट नही होती। सृष्टि के आदि काल से लेकर अब तक जो शब्द छोडें गये है वे अन्तरिक्ष मे किसी विशेष क्षेत्र मे अवस्थित है ।
यह बेखरी वाणी स्थूल है जिसे कान सुन सकते है। यह स्थूल शरीर की वाणी है। इसे स्थूल शरीर ही ग्रहण कर सकता है व सुन सकता है किंतु मन की वाणी दूसरी है जो सूक्ष्म है। इसे कान नही सुन सकते किन्तु मन इसको ग्रहण कर लेता है। जिसे नेत्र जान सकते हैं, इस वाणी को मध्यमा वाणी कहते हैं। यह मन के भावों द्वारा व्यक्त होती है जिससे शरीर पर क्रोध ,धृणा , निंदा , उपेक्षा, प्रशंसा आनंदं द्वेष, आदि के भाव चेहरे पर प्रकट होते है । इसी कारण किसी के चेहरे को देखकर उसके मनोभावो को जाना जा सकता है। इसी कारण कहा गया है कि मध्यमा वाणी चेहरे पर प्रकट होती है जिसे कान नही सुन पाते इसे आखें ही सुनती है।
तीसरे प्रकार की वाणी इससे भी सूक्ष्म है जो ह्रदय की वाणी है तथा इसे ह्रदय ही सुन सकता है जिसका जिससे आत्मीय सम्बन्ध होता है वही इस वाणी को सुन सकता है। इस वाणी को पश्यन्ति वाणी कहते है। इसे सुना नही देखा जाता है। इसकी अनुभूति होती है ह्रदय से निकली हुई इन तरंगो की अनुभूति ह्रदय को होती है यह ह्रदय की भाषा है। दया,करूणा, प्रेम, आदि भावो की अभिव्यक्ति ह्रदय करता है जिसे ह्रदय ग्रहण कर सकता है। जिसका ह्रदय संवेदनशील नही है वह इस भाषा को नही समझ सकता। पशु पक्षी इसी वाणी के अच्छे ग्राहक होते हैं। जो अपना पारस्परिक वैरभाव भूलकर ऋषि के आश्रमो में एक साथ रहते थे।
चौथेे प्रकार की वाणी इससे भी सूक्ष्म स्तर की है जो आत्मा की वाणी है और जिसे परावाणी कहते हैं। इसका संप्रेषण आत्मिक तरंगो द्वारा ही होता है जिसका प्रभाव आत्मिक तल पर ही होता है। ज्ञानी जन इसी का प्रयोग अपने साधकों पर करके उनकी चेतना को जाग्रत कर उनमें आमूलचूल परिवर्तन ला सकते हैं।

Address

Opp. Bundelkhand Garage
Chhatarpur
471001

Telephone

+919424446555

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Akhil Vishwa Gayatri Pariwar, Chhatarpur posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to Akhil Vishwa Gayatri Pariwar, Chhatarpur:

Shortcuts

Share