18/09/2019
#जीवित्पुत्रिका_विशेष
प्रिय मित्रो।
हमारे देश में भक्ति एवम उपासना का एक रूप उपवास हैं जो मनुष्य में संयम, त्याग, प्रेम एवम श्रद्धा की भावना को बढ़ाते हैं।
उन्ही में से एक है आश्विन मास की कृष्णपक्षीय सूर्योदयकालीन अष्टमी को किया जाने वाला जीवित्पुत्रिका व्रत | यह व्रत संतान के दीर्घायुष्य एवं मंगल कामना के लिए माताओं द्वारा किया जाता है। जीवित्पुत्रिका व्रत निर्जला किया जाता हैं जिसमे पूरा दिन एवम रात पानी नही लिया जाता ।
यह व्रत उदयकालीन अष्टमी में ही करना है,इसका प्रमाण स्वयं पक्षीराज गरुड़ ने #जीवित्पुत्रिका_व्रत_कथा में दिया है--
"उपोष्य च अष्टमी राजन,सप्तमी रहिता शिवा।
यस्यां उदयते भानुः,पारणं नवमी दिने"।।
वर्जनीया प्रयत्नेन सप्तमी सहिताष्टमी।
अन्यथा फलहानिःस्यात् सौभाग्यं नश्यति ध्रुवम्।।
इसके अतिरिक्त अन्यान्य अनेकों निर्णय हमारे ग्रन्थों में इस व्रत को उदयकालिक अष्टमी में करने के सन्दर्भ में दिये गये हैं।यथा......
#राजमार्त्तण्ड_भृगु― स्त्रियः प्रकुर्वन्ति तदाशु नूनं सूर्योदये जीवित्पुत्रिका स्यात।
#कात्यायन―आश्विने बहुले पक्षे अष्टमी भास्करोदये।
स्वल्पापि चेक्तदा कार्या सा स्मृता जीवपुत्रिका।।
#माधवाचार्यः― उदये च अष्टमी किंचित सकला नवमी भवेत्। सैवोपोष्या वरस्त्रिभीः पूजयेत् जीवपुत्रिकाम्।।
इसके विपरीत कुछ अल्पज्ञ जो शास्त्राचार एवं शास्त्रादेशोंं को नहीं जानते,अथवा नहीं समझते हैं, इस वर्ष दिनांक 21-9-2019 को सप्तमी विद्ध अष्टमी में व्रत करने की बात कर रहे हैं,जो सर्वथा त्याज्य है।
अतः इस #वर्ष_2019 में यह व्रत #सितम्बर_22 को उदयकालीन अष्टमी में मनाया जायेगा | अगले दिन प्रातः सूर्योदयोपरान्त पारण होगा।
जीवित्पुत्रिका व्रत पूजा विधि
यह व्रत तीन दिन किया जाता है, तीनो दिन व्रत की विधि अलग-अलग होती हैं.
#नहा_खा― यह जीवित्पुत्रिका व्रत का पहला दिन कहलाता है, इस दिन से व्रत शुरू होता हैं | इस दिन महिलायें नहाने के बाद भोजन लेती हैं |
ितिया यह जीवित्पुत्रिका व्रत का दूसरा दिन होता हैं, इस दिन महिलायें निर्जला व्रत करती हैं | यह दिन विशेष होता हैं |
यह जीवित्पुत्रिका व्रत का अंतिम दिन होता हैं, इस दिन कई लोग बहुत सी चीज़े खाते हैं, लेकिन खासतौर पर इस दिन साग भात, नोनी का साग एवम मडुआ अथवा मरुवा की रोटी दिन के पहले भोजन में ली जाती हैं |