The Great Hindu Dharma

The Great Hindu Dharma सत्य ही धर्म है।

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07/02/2024

3 Din phle aapke apne ish dharmic page The Great Hindu Dharma pr Monetization walo k traf se strike aaya hai ..
Pta nhi Aisa kya content Humne promote Kiya hai. ..

Bss aapke apne ish channel k liye aap sbo ki aashirvaad ki jrurat hai ..

Jai shree ram 🙏
Satya ki Jeet ho , Asatya ka vinash
Vishwa ka kalyan ho
Har Har Mahadev🙏🙏

08/03/2023

🟣🟢भारतीय हिन्दू धर्म एवं दर्शन का सर्वश्रेष्ठ त्योहार होली जो मानवीय जीवन में उत्साह-उमंग, सत्य-स्नेह, ईश्वरीय भक्ति-आत्मिक शक्ति, नवगति-नवलय एवं नव जीवन प्रदान करता है, ऐसे अद्भुत एवं अनूठे त्योहार के लिए आप सबों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं ढेर सारी बधाईयाँ।🙏🙏

शुभकामनाओं के साथ Manish yadav एवम परिवार,सारण, बिहार 🎊💐🌷🍇🟢🟡🟠🔴🟣🟢🔵

28/09/2022
शास्त्रों की मान्यता है कि देवी इन नौ दिनों में पृथ्वी पर आकर अपने भक्तों को मनोवांछित फल देती हैं,  इसलिए नवरात्रि माता...
26/09/2022

शास्त्रों की मान्यता है कि देवी इन नौ दिनों में पृथ्वी पर आकर अपने भक्तों को मनोवांछित फल देती हैं, इसलिए नवरात्रि माता भगवती की साधना का श्रेष्ठ समय होता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री माता की पूजा अर्चना की जाती है जो भक्तों को सुख-सौभाग्य और शौर्य प्रदान करती हैं। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि पर देवी दुर्गा का पृथ्वी पर आगमन हाथी की सवारी के साथ होगा।

जय माता दी🙏🙏

🚩🚩
13/08/2022

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ईश्वर कौन है ?कौन चलाता है यह दुनियां को ??? कहाँ है ईश्वर??तुम माँ के पेट में थे नौ महीने तक, कोई दुकान तो चलाते नहीं थ...
25/06/2022

ईश्वर कौन है ?

कौन चलाता है यह दुनियां को ??? कहाँ है ईश्वर??
तुम माँ के पेट में थे नौ महीने तक, कोई दुकान तो चलाते नहीं थे,
फिर भी जिए।
हाथ—पैर भी न थे कि भोजन कर लो,
फिर भी जिए।
श्वास लेने का भी
उपाय न था,
फिर भी जिए।
नौ महीने माँ के पेट में तुम थे,
कैसे जिए?
तुम्हारी मर्जी क्या थी?
किसकी मर्जी से जिए?
फिर माँ के गर्भ से जन्म हुआ, जन्मते ही, जन्म के पहले ही माँ के स्तनों में दूध भर आया,
किसकी मर्जी से?
अभी दूध को पीनेवाला
आने ही वाला है कि
दूध तैयार है,
किसकी मर्जी से?
गर्भ से बाहर होते ही
तुमने कभी इसके पहले
साँस नहीं ली थी माँ के पेट में
तो माँ की साँस से ही
काम चलता था—
लेकिन जैसे ही तुम्हें
माँ से बाहर होने का
अवसर आया,
तत्क्षण तुमने साँस ली,
किसने सिखाया?
पहले कभी साँस ली नहीं थी,
किसी पाठशाला में गए नहीं थे,
किसने सिखाया कैसे साँस लो?
किसकी मर्जी से?
फिर कौन पचाता है तुम्हारे दूध को
जो तुम पीते हो,
और तुम्हारे भोजन को?
कौन उसे हड्डी—मांस—मज्जा में बदलता है?
किसने तुम्हें जीवन की
सारी प्रक्रियाएँ दी हैं?
कौन जब तुम थक जाते हो
तुम्हें सुला देता है?
और कौन जब तुम्हारी
नींद पूरी हो जाती है
तुम्हें उठा देता है?
कौन चलाता है इन चाँद—सूर्यों को?
कौन इन वृक्षों को हरा रखता है?
कौन खिलाता है फूल
अनंत—अनंत रंगों के
और गंधों के?
इतने विराट का आयोजन
जिस स्रोत से चल रहा है,
एक तुम्हारी छोटी—सी जिंदगी
उसके सहारे न चल सकेगी?
थोड़ा सोचो,
थोड़ा ध्यान करो।
अगर इस विराट के आयोजन को
तुम चलते हुए देख रहे हो,
कहीं तो कोई व्यवधान नहीं है,
सब सुंदर चल रहा है,
सुंदरतम चल रहा है;
ईश्वर दिखता नही बल्कि दिखाता है
ईश्वर सुनता नही बल्कि सुनने की शक्ति देता है
संसार में कोई भी वस्तु बिना बनाये नही बनती अतः संसार भी किसी ने अवश्य बनाया है
यही तो ईश्वर है।

Credit— Wisdom

17/05/2022

Jai bajrang bali

परशुराम जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं
03/05/2022

परशुराम जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं

Jai shree ram
23/04/2022

Jai shree ram

तमिलनाडु में भगवान मुरुगन की 146 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित किया गया! 🙏🙏🚩🚩
20/04/2022

तमिलनाडु में भगवान मुरुगन की 146 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित किया गया!
🙏🙏🚩🚩

श्रीराम नवमी पर मालवा के असली रघुवंशी समाज को यदुवंशियों की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।कौन हैं असली यदुवंशी और रघुवंशी क्ष...
17/04/2022

श्रीराम नवमी पर मालवा के असली रघुवंशी समाज को यदुवंशियों की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।
कौन हैं असली यदुवंशी और रघुवंशी क्षत्रिय आइए रौशनी डालते हैं:
भाईयो मध्यप्रदेश के मालवा और शिवपुरी, गुना अशोकनगर के इलाकों में एक जाति एक वंश निवास करती हैं जिनसे यहां के यादवों का वैदिक काल से अच्छा संबंध रहा है।

वो जाति वो बिरादरी है श्रीराम प्रभु के असली वंशज सूर्यकुल अवतंस रघुवंशी क्षत्रिय ।

पहले के समय में यानी आज से मात्र 30_40 वर्ष पूर्व तक भी इनसे यहां के यदुवंशी क्षत्रियों उर्फ अहीरों के शादी ब्याह तक के रिश्ते होते थे।

ये कोई नई बात नही है क्योंकि श्रीराम की परदादी श्री रानी मधुमति यादव राजा शशिबिंदु की कन्या थीं।

एक हुक्के से हुक्का पीना, साथ मैं बैठकर खाना ये सब तो आज भी होता है दोनो वंश के लोगों में यहां।

फिर धीरे धीरे हमारे ही यदुवंश के कुछ लालची नेताओं ने तुष्टिकरण की राजनीति चालू करदी। यादवों को मूर्ख बना ओबीसी में डलवाया ताकि लोगों को यह लगे कि यादव छोटे कुल के हैं ताकि जो शूद्र आदि छोटे तबके के लोग हैं वो इन्हे वोट दें।

खैर आरक्षण का न तो कोई फायदा मिला यादवों को, उल्टा इसका गलत असर ही पड़ा , हमारी प्रतिष्ठा भी गई।

आरक्षण तो कई ब्राह्मणों और वैश्य और राजपूत तबके के लोगों ने भी लिया लेकिन उन लोगों ने हमारे नेताओं की तरह स्वाभिमान से समझौता नहीं किया।

खैर वापस लौटे मुद्दे पर। हमारे यहां रघुवंशी क्षत्रिय आज भी आरक्षण से बाहर हैं जैसा हमने ऊपर बताया यह आरक्षण राजनीति में पैठ बनाने का झुंझना मात्र है।

रघुवंशी क्षत्रिय आज भी किसी राजस्थान इत्यादि के राजपूत यानी चौहान, राठौड़, परिहार परमार, सेंगर इत्यादि जो हैं इनसे शादी विवाह तो दूर आज भी इनसे रोटी तक का नाता नहीं रखते।

रघुवंशी सिर्फ रघुवंशी में शादी करता है गोत्र बचाकर । इनमे यहां मूलतः 62 गोत्र होते हैं जो अब बढ़कर 70 हैं। ये हजार वर्ष पूर्व अवध और काशी से यहां आकर बसे थे ।

खैर आज वर्षों बाद गंदी राजनीति में डूबने के बावजूद भी यादवों और रघुवंशियों में कभी कभार रिश्ते हो जाते हैं लेकिन ये तथाकथित चौहान, राठौड़ इत्यादि जो भी राजपूत होते हैं जो भले ही जनरल में हो लेकिन उनसे शादी मरे नहीं करते।

हमारे छेत्र में ठाकुर साहब सिर्फ यदुवंशियों यानी अहीरों और रघुवंशियों को कहा जाता है।

और कोई गैर इन दो के सामने खुद को ठाकुर बोलदे तो ये उसे बैज़्जत कर देते हैं।

आज भी यहां यदुवंशी ठाकुर और रघुवंशी ठाकुर साथ बैठे हों तो कोई तीसरा गैर बराबरी में खाट पर नहीं बैठ सकता भले ही वो कितना ही बड़ा तुर्रम खान क्यों न हो।

अभी कुछ दिन पूर्व एक जानने वाले बुजुर्ग रघुवंशी ठाकुर साहब से एक जानने वाले यदुवंशी ठाकुर मित्र के बुजुर्ग बात कर रहे थे तो रघुवंशी जी ने बताया कि " ठाकुर साहब कुछ अरसे पहले राजपूत करणी सेना ने भरसक प्रयास किए थे हम रघुवंशियों को राजपूत संघ में जोड़ने की लेकिन हमारी पंचायत ने उन्हें उनकी खिचड़ी में शामिल न करने की सख्त हिदायत दी थी। हम भगवान श्री राम जी के वंशज हैं, हज़ारों वर्षों पुरानी वंशावलियां हैं हम लोगों के पास और हमारी अपनी पहचान है"।

इसीलिए धरती पर आज भी विद्दमान असली आर्य वैदिक क्षत्रिय हैं जिन्हे यदुवंशी और रघुवंशी कहते हैं।

कृपया अपनी पहचान और क्षत्रिय स्वाभिमान बचाकर रखें क्योंकि आजकल फेसबुक पर इतिहास चुराया जाता है 😂😂।

इसीलिए हे यदुवंशियों राजनीति से ऊपर उठो।

जय श्री राम जय श्री कृष्ण।

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