गौड़ी शंकर मंदिर तपसी नगर सलखुआँ

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गौड़ी शंकर मंदिर तपसी नगर सलखुआँ Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from गौड़ी शंकर मंदिर तपसी नगर सलखुआँ, Hindu temple, Vill-Salakhuan, P. O-Aphar, Dist-Chapra, Chhapra.

 #राणा_सांगा के समाधि स्थल की दुर्दशाराणा सांगा (राणा संग्राम सिंह) (शासन 1509-1528) उदयपुर के राजा थे तथा राणा रायमल के...
23/03/2025

#राणा_सांगा के समाधि स्थल की दुर्दशा

राणा सांगा (राणा संग्राम सिंह)
(शासन 1509-1528)
उदयपुर के राजा थे तथा राणा रायमल के सबसे छोटे पुत्र थे। राणा सांगा का पूरा नाम महाराणा संग्रामसिंह था। राणा सांगा ने मेवाड़ में 1509 से 1528 तक शासन किया,
जो आज भारत के राजस्थान प्रदेश के रेगिस्थान में स्थित है।
राणा सांगा ने विदेशी आक्रमणकारियों के विरुद्ध सभी राजपूतों को एकजुट किया। राणा सांगा सही मायनों में एक बहादुर योद्धा व शासक थे जो अपनी वीरता और उदारता के लिये प्रसिद्ध हुये। राणा रायमल के बाद सन 1509 में कर्मचन्द पंवार की सहायता से राणा सांगा मेवाड़ के उत्तराधिकारी बने। इन्होंने दिल्ली, गुजरात, व मालवा मुगल बादशाहों के आक्रमणों से अपने राज्य की बहादुरी से ऱक्षा की। उस समय के वह सबसे शक्तिशाली हिन्दू राजा थे। एक विश्वासघाती के कारण वह बाबर से युद्ध हारे लेकिन उन्होंने अपने शौर्य से दूसरों को प्रेरित किया। राव गांगा ने राणा सांगा के कहने पर पाती-पेरवन परम्परा के तहत् अपनी एक विशाल सेना मुगलों के विरुद्ध खानवा के मैदान में भेजी, मारवाड़ की एक विशाल सेना का नेतृत्व राव गांगा के पुत्र राव मालदेव ने किया |
खानवा के मैदान में ही राणा सांगा जब घायल हो गए, तब उन्हें दौसा के निकट बसवा लाया गया यहाँ से राणा सांगा को कुछ असंतुष्ट सरदारों के कारण मेवाड़ के एक सुरक्षित स्थान कालपी पहुचाया गया लेकिन असंतुष्ट सरदारों ने इसी स्थान राणा सांगा को जहर दे दिया | ऐसी अवस्था में राणा सांगा पुनः बसवा आए जहाँ सांगा की 30 जनवरी,1528 को मृत्यु हो गयी, लेकिन राणा सांगा का विधि विधान से अन्तिम संस्कार माण्डलगढ़ (भीलवाड़ा) में हुआ। वहाँ आज भी हम राणा सांगा का समाधि स्थल देखते हैं| इनके शासनकाल में मेवाड़ अपनी समृद्धि की सर्वोच्च ऊँचाई पर था। एक आदर्श राजा की तरह इन्होंने अपने राज्य की ‍रक्षा तथा उन्नति की। राणा सांगा अदम्य साहसी (indomitable spirit) थे।
एक भुजा, एक आँख खोने व अनगिनत ज़ख्मों के बावजूद उन्होंने अपना महान पराक्रम नहीं खोया। सुल्तान मोहम्मद शासक
माण्डु को युद्ध में हराने व बन्दी बनाने के बाद उन्हें उनका राज्य पुनः उदारता के साथ सौंप दिया, यह उनकी बहादुरी को दर्शाता है।
मन में एक ही ख्याल कि जिस्म पर 80 घाव,
एक हाथ, एक पैर और एक आंख का अभाव।
अंदर से कितना मजबूत रहें होंगे सांगा।
यह माटी के प्रति उनका प्रेम और समर्पण ही होगा जो उनकी रगों में साहस का संचार करता होगा।
उनकी वीरता को नमन है लेकिन यहां उनके समाधि स्थल की बदहाली देखकर मन व्यथित होता है।
एक ओर मुगलों ने आगरा में अपने घोड़ों तक की इतनी भव्य समाधि बना दीं तो दूसरी ओर आजादी के बाद भी राणा सांगा की ऐसी अनदेखी…।

हर हर महादेव 🚩
26/02/2025

हर हर महादेव 🚩

ये हनुमान जी की मूर्ति देखें ध्यान से...1500 वर्ष पुरानी बताई ही नहीं जाती बल्कि लिखित इतिहास भी उपलब्ध है...इसकी सबसे ब...
26/02/2025

ये हनुमान जी की मूर्ति देखें ध्यान से...
1500 वर्ष पुरानी बताई ही नहीं जाती बल्कि लिखित इतिहास भी उपलब्ध है...
इसकी सबसे बड़ी ख़ास बात ये है कि ये मानव निर्मित नहीं.... #प्रकृति_निर्मित_है... अपने इसी स्वरुप में प्रकट हुईं ऐसी मान्यता है

लेकिन फ़िलहाल आपको इसके यहीं दर्शन करने पड़ेंगे काहे कि ये मूर्ती स्थित है एक मंदिर में जो 24000 वर्गफुट इलाके में बना हुआ है और पाकिस्तान के शहर कराची में स्थित है...

ये मंदिर कई सालों से बंद पड़ा था... इसपर वहाँ के कट्टर पंथी जहादी तत्वों ने कब्ज़ा कर लिया था... पूजा इत्यादि बंद करवा दी गयी थी... मामला बीसियों साल कोर्ट में चला.... कोर्ट ने भी इसे हिन्दू पक्ष को देने का फैसला दिया 2018 में.... लेकिन बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधता... जहादी तंजीमो से कौन मंदिर वापस लेता तो पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू नहीं हुआ... कब्ज़ा बरकरार रहा....

फिर चमत्कार हुआ...
अचानक 10 दिन पहले पाकिस्तानी सेना की कई गाड़ियां वहाँ पहुंची... पूरे इलाके को छावनी बना दिया...
मंदिर पर कब्ज़ा जमाये ज़हदियों की #संभल_खोद गाड़ियों में डाला.... साफ सफाई करवाई और मंदिर की चाबीयां पुजारी जी के हवाले कर और सुरक्षा गॉर्ड वहाँ बैठा दोबारा पूजा अर्चना चालू करवा दी....

आखिर कैसे पाकिस्तानी फ़ौज का ये हृदय परिवर्तन हुआ???

दरअसल इस मदिर के पुजारी जी का परिवार भारत कुम्भ स्नान करने आया था... और यहाँ उन्होंने ये कब्ज़े की बात बताई.... बात सही कानों तक पहुंची...
फिर आगे बढ़ी....
और फिर सऊदी के प्रिन्स मोहम्मद बिन सलमान का फ़ोन बताते हैं पाकिस्तान के जनरल आसिम मुनीर के पास पहुँचा....
और फिर मुनीर साब अचानक से हनुमान भक्त 😊 हो गये और एक टुकड़ी भेज मंदिर को पुनः खुलवा दिया...

पाकिस्तानी फ़ौज जल्द ही कई अन्य हिन्दू मंदिरो से अवैध कब्ज़े हटवाने की तैयारी कर रही है....

इतना आश्चर्य न करें आपके वोट में बड़ी ताक़त है.... कराची हो या लंदन इसका असर पहुँचता है... बस सही व्यक्ति को मिले...
बाकी बजरंग बली तो हैं ही कलयुग के देव....
दर्शन करिये.... और उम्मीद भी कि जल्द सिंधुदेश जाकर आप बजरंगबली के साक्षात् दर्शन कर पाएंगे!

पटना में जमीन के नीचे से निकला 500 साल पुराना शिवमंदिर 🚩🍁🙏🏻Breaking NEWS 🚨500-year-old Shiva temple was discovered in Ol...
06/01/2025

पटना में जमीन के नीचे से निकला 500 साल पुराना शिवमंदिर 🚩🍁🙏🏻

Breaking NEWS 🚨500-year-old Shiva temple was discovered in Old Patna.

Ground suddenly started sinking on Sunday.

Local people immediately reached there and started cleaning work.

When the soil was removed, a temple-like structure was visible.

An attractive and shining Shivling and also footprints are present in the temple

शायद आधे से ज़्यादा भारतीयों को अपनी इस महान विरासत का पता ही नही होगा...यह अमरकंटक, मध्यप्रदेश का श्रीयंत्र मंदिर है। एक...
28/04/2023

शायद आधे से ज़्यादा भारतीयों को अपनी इस महान विरासत का पता ही नही होगा...यह अमरकंटक, मध्यप्रदेश का श्रीयंत्र मंदिर है। एक अद्भुत एवं यूनिक मंदिर, ऐसा ही एक मंदिर थाईलैंड में भी है।

हजारो वर्ष पहले इन मंदिरो को प्रचार नही मिल पाया। जो मंदिर बचे रह गए, उनका कभी प्रचार तक नही करने दिया गया! आइए इन महान विरासतों का जमकर प्रचार करें।

#सत्य_सनातन_धर्म की सदा ही जय 🚩🙏🏻

The seven-headed Naga at the entrance of the World’s largest religious monument Angkor Wat Temple, Cambodia 🇰🇭 The grand...
28/02/2023

The seven-headed Naga at the entrance of the World’s largest religious monument Angkor Wat Temple, Cambodia 🇰🇭

The grand Temple was built by the Hindu King Suryavarman II.

15/01/2023

भाषा की दरिद्रता : #नाम

हिन्दूओं के एक बहुत बड़े वर्ग को न जाने हो क्या गया है? उत्तर भारतीय हिन्दू समाज पथभ्रष्ट एवं दिग्भ्रमित हो गया है.
एक सज्जन ने अपने बच्चों से परिचय कराया, बताया पोती का नाम #अवीरा है, बड़ा ही #यूनिक_नाम रखा है। पूछने पर कि इसका अर्थ क्या है, बोले कि बहादुर, ब्रेव कॉन्फिडेंशियल। सुनते ही दिमाग चकरा गया। फिर बोले कृपा करके बताएं आपको कैसा लगा? मैंने कहा बन्धु अवीरा तो बहुत हीअशोभनीय नाम है। नहीं रखना चाहिए. उनको बताया कि
1. जिस स्त्री के पुत्र और पति न हों. पुत्र और पतिरहित (स्त्री)
2. स्वतंत्र (स्त्री) उसका नाम होता है अवीरा.
नास्ति वीरः पुत्त्रादिर्यस्याः सा अवीरा

उन्होंने बच्ची के नाम का अर्थ सुना तो बेचारे मायूस हो गए, बोले महाराज क्या करें अब तो स्कूल में भी यही नाम हैं बर्थ सर्टिफिकेट में भी यही नाम है। क्या करें?

आजकल लोग नया करने की ट्रेंड में कुछ भी अनर्गल करने लग गए हैं जैसे कि लड़की हो तो मियारा, शियारा, कियारा, नयारा, मायरा तो अल्मायरा ... लड़का हो तो वियान, कियान, गियान, केयांश ...और तो और इन शब्दों के अर्थ पूछो तो दे गूगल ... दे याहू ... और उत्तर आएगा "इट मीन्स रे ऑफ लाइट" "इट मीन्स गॉड्स फेवरेट" "इट मीन्स ब्ला ब्ला"

नाम को यूनीक रखने के फैशन के दौर में एक सज्जन ने अपनी गुड़िया का नाम रखा "श्लेष्मा". स्वभाविक था कि नाम सुनकर मैं सदमें जैसी अवस्था में था. सदमे से बाहर आने के लिए मन में विचार किया कि हो सकता है इन्होंने कुछ और बोला हो या इनको इस शब्द का अर्थ पता नहीं होगा तो मैं पूछ बैठा "अच्छा? श्लेष्मा! इसका अर्थ क्या होता है? तो महानुभाव नें बड़े ही कॉन्फिडेंस के साथ उत्तर दिया "श्लेष्मा" का अर्थ होता है "जिस पर मां की कृपा हो" मैं सर पकड़ कर 10 मिनट मौन बैठा रहा ! मेरे भाव देख कर उनको यह लग चुका था कि कुछ तो गड़बड़ कह दिया है तो पूछ बैठे. क्या हुआ have I said anything weird? मैंने कहा बन्धु तुंरत प्रभाव से बच्ची का नाम बदलो क्योंकि श्लेष्मा का अर्थ होता है "नाक का mucus" उसके बाद जो होना था सो हुआ.

यही हालात है उत्तर भारतीय हिन्दूओं के एक बहुत बड़े वर्ग का। न जाने हो क्या गया है उत्तर भारतीय हिन्दू समाज को ? फैशन के दौर में फैंसी कपड़े पहनते पहनते अर्थहीन, अनर्थकारी, बेढंगे शब्द समुच्चयों का प्रयोग हिन्दू समाज अपने कुलदीपकों के नामकरण हेतु करने लगा है

अशास्त्रीय नाम न केवल सुनने में विचित्र लगता है, बालकों के व्यक्तित्व पर भी अपना विचित्र प्रभाव डालकर व्यक्तित्व को लुंज पुंज करता है - जो इसके तात्कालिक कुप्रभाव हैं.

भाषा की संकरता इसका दूरस्थ कुप्रभाव है.

नाम रखने का अधिकार दादा-दादी, भुआ, तथा गुरुओं का होता है. यह कर्म उनके लिए ही छोड़ देना हितकर है.
आप जब दादा दादी बनेंगे तब यह कर्तव्य ठीक प्रकार से निभा पाएँ उसके लिए आप अपनी मातृभाषा पर कितनी पकड़ रखते हैं अथवा उसपर पकड़ बनाने के लिए क्या कर रहे हैं, विचार करें. अन्यथा आने वाली पीढ़ियों में आपके परिवार में भी कोई "श्लेष्मा" हो सकती है,कोई भी अवीरा हो सकती है।

शास्त्रों में लिखा है व्यक्ति का जैसा नाम है समाज में उसी प्रकार उसका सम्मान और उसका यश कीर्ति बढ़ती है.
नामाखिलस्य व्यवहारहेतु: शुभावहं कर्मसु भाग्यहेतु:।
नाम्नैव कीर्तिं लभते मनुष्य-स्तत: प्रशस्तं खलु नामकर्म।
{वीरमित्रोदय-संस्कार प्रकाश}

स्मृति संग्रह में बताया गया है कि व्यवहार की सिद्धि आयु एवं ओज की वृद्धि के लिए श्रेष्ठ नाम होना चाहिए.
आयुर्वर्चो sभिवृद्धिश्च सिद्धिर्व्यवहृतेस्तथा ।
नामकर्मफलं त्वेतत् समुद्दिष्टं मनीषिभि:।।

नाम कैसा हो--
नाम की संरचना कैसी हो इस विषय में ग्रह्यसूत्रों एवं स्मृतियों में विस्तार से प्रकाश डाला गया है पारस्करगृह्यसूत्र 1/7/23 में बताया गया है-
द्व्यक्षरं चतुरक्षरं वा घोषवदाद्यंतरस्थं।
दीर्घाभिनिष्ठानं कृतं कुर्यान्न तद्धितम्।।
अयुजाक्षरमाकारान्तम् स्त्रियै तद्धितम् ।।
इसका तात्पर्य यह है कि बालक का नाम दो या चारअक्षरयुक्त, पहला अक्षर घोष वर्ण युक्त, वर्ग का तीसरा चौथा पांचवा वर्ण, मध्य में अंतस्थ वर्ण, य र ल व आदिऔर नाम का अंतिम वर्ण दीर्घ एवं कृदन्त हो तद्धितान्त न हो।
जैसे देव शर्मा ,सूरज वर्मा ,कन्या का नाम विषमवर्णी तीन या पांच अक्षर युक्त, दीर्घ आकारांत एवं तद्धितान्त होना चाहिए यथा श्रीदेवी आदि।

धर्मसिंधु में चार प्रकार के नाम बताए गए हैं -
१ देवनाम
२ मासनाम
३ नक्षत्रनाम
४ व्यावहारिक नाम

नोट -कुंडली के नाम को व्यवहार में नहीं रखना चाहिए क्योंकि जो नक्षत्र नाम होता है उसको गुप्त रखना चाहिए. यदि कोई हमारे ऊपर अभिचार कर्म मारण, मोहन, वशीकरण इत्यादि कार्य करना चाहता है तो उसके लिए नक्षत्र नाम की आवश्यकता होती है, व्यवहार नाम पर तंत्र का असर नहीं होता इसीलिए कुंडली का नाम गुप्त होना चाहिए।

हमारे शास्त्रों में वर्ण अनुसार नाम की व्यवस्था की गई है ब्राह्मण का नाम मंगल सूचक, आनंद सूचक, तथा शर्मा युक्त होना चाहिए. क्षत्रिय का नाम बल रक्षा और शासन क्षमता का सूचक, तथा वर्मा युक्त होना चाहिए, वैश्य का नाम धन ऐश्वर्य सूचक, पुष्टि युक्त तथा गुप्त युक्त होना चाहिए, अन्य का नाम सेवा आदि गुणों से युक्त, एवं दासान्त होना चाहिए।

पारस्कर गृहसूत्र में लिखा है -
शर्म ब्राह्मणस्य वर्म क्षत्रियस्य गुप्तेति वैश्यस्य

शास्त्रीय नाम की हमारे सनातन धर्म में बहुत उपयोगिता है मनुष्य का जैसा नाम होता है वैसे ही गुण उसमें विद्यमान होते हैं. बालकों का नाम लेकर पुकारने से उनके मन पर उस नाम का बहुत असर पड़ता है और प्रायः उसी के अनुरूप चलने का प्रयास भी होने लगता है इसीलिए नाम में यदि उदात्त भावना होती है तो बालकों में यश एवं भाग्य का अवश्य ही उदय संभव है।

हमारे सनातन धर्म में अधिकांश लोग अपने पुत्र पुत्रियों का नाम भगवान के नाम पर रखना शुभ समझते हैं ताकि इसी बहाने प्रभु नाम का उच्चारण भगवान के नाम का उच्चारण हो जाए।
भायं कुभायं अनख आलसहूं।
नाम जपत मंगल दिसि दसहूं॥

विडंबना यह है की आज पाश्चात्य सभ्यता के अंधानुकरण में नाम रखने का संस्कार मूल रूप से प्रायः समाप्त होता जा रहा है. इससे बचें शास्त्रोक्त नाम रखें इसी में भलाई है, इसी में कल्याण है।

साभार : चंद्रधर झा

 देवभूमि उत्तराखंड मैं पाँच प्रयाग स्थित है l पंचप्रयाग में पवित्र नदियों का संगम होता है l इन पंचप्रयाग का संक्षेप में ...
09/01/2023


देवभूमि उत्तराखंड मैं पाँच प्रयाग स्थित है l पंचप्रयाग में पवित्र नदियों का संगम होता है l इन पंचप्रयाग का संक्षेप में विवरण इस प्रकार है l

प्रथम प्रयाग : विष्णुप्रयाग
श्री बद्रीनाथ धाम मार्ग पर,बद्रीनाथ जी से 31 km पहले,विष्णुप्रयाग पड़ता है l यहाँ अलकनंदा नदी और धौली गंगा नदी का संगम होता है l

द्वितीय प्रयाग : नंदप्रयाग
चमोली से 40 km आगे जोशीमठ मार्ग पर नंदप्रयाग पड़ता है l यहाँ अलकनंदा नदी व नंदाकिनी नदी का संगम होता है l

तृतीय प्रयाग : कर्णप्रयाग
कर्णप्रयाग में अलकनंदा नदी और पिंडर नदी (पिदार गंगा ) का संगम होता है l

चतुर्थ प्रयाग : रुद्रप्रयाग
रुद्रप्रयाग में अलकनंदा नदी व मन्दाकिनी नदी का संगम होता है l

पंचम प्रयाग : देवप्रयाग
देवप्रयाग में अलकनंदा नदी व भागीरथी नदी का संगम होता है l इन दोनों के संगम से ही आगे गंगा जी बहती है l

प्रयाग या संगम के विषय में एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि,जब दो नदियां आपस में मिलती है,संगम होता है,तो संगम से आगे उसी नदी का नाम रहता है,जिसका बहाव तेज हो,जिसमें पानी ज्यादा हो..जैसे की पहले चार प्रयाग में अलकनंदा नदी का ही नाम रह जाता है..लेकिन देवप्रयाग में भागीरथी जी और अलकनंदा में समान प्रवाह,समान जलराशि है,और जहाँ दोनों नदी समान हो वहाँ संगम के बाद आगे वाली नदी को अलग नाम दे दिया जाता है..जैसे की माँ गंगा 🙏
इतिसिद्धम 😊


29/12/2022

रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना ""
7 मार्च 1679 ई0 की बात है, ठाकुर सुजान सिंह अपनी शादी की बारात लेकर जा रहे थे, 22 वर्ष के सुजान सिंह किसी देवता की तरह लग रहे थे,
ऐसा लग रहा था मानो देवता अपनी बारात लेकर जा रहे हों

उन्होंने अपने दुल्हन का मुख भी नहीं देखा था, शाम हो चुकी थी इसलिए रात्रि विश्राम के लिए "छापोली" में पड़ाव डाल दिये । कुछ ही क्षणों में उन्हें गायों में लगे घुंघरुओं की आवाजें सुनाई देने लगी, आवाजें स्पष्ट नहीं थीं, फिर भी वे सुनने का प्रयास कर रहे थे, मानो वो आवाजें उनसे कुछ कह रही थी ।

सुजान सिंह ने अपने लोगों से कहा, शायद ये चरवाहों की आवाज है जरा सुनो वे क्या कहना चाहते हैं ।
गुप्तचरों ने सूचना दी कि युवराज ये लोग कह रहे है कि कोई फौज "देवड़े" पर आई है। वे चौंक पड़े । कैसी फौज, किसकी फौज, किस मंदिर पे आयी है ?

जवाब आया "युवराज ये औरंगजेब की बहुत ही विशाल सेना है, जिसका सेनापति दराबखान है, जो खंडेला के बाहर पड़ाव डाल रखी है ।
कल खंडेला स्थित श्रीकृष्ण मंदिर को तोड़ दिया जाएगा । निर्णय हो चुका था,

एक ही पल में सब कुछ बदल गया । शादी के खुशनुमा चहरे अचानक सख्त हो चुके थे, कोमल शरीर वज्र के समान कठोर हो चुका था ।
जो बाराती थे, वे सेना में तब्दील हो चुके थे, वे अपने सेना के लोगों से विचार विमर्श करने लगे । तब उनको पता चला कि उनके साथ मात्र 70 लोगों की छोटी सी एक सेना थी ।
तब वे रात्रि के समय में बिना एक पल गंवाए उन्होंने पास के गांव से कुछ आदमी इकठ्ठे कर लिए ।
करीब 500 घुड़सवार अब उनके पास हो चुके थे,

अचानक उन्हें अपनी पत्नी की याद आयी, जिसका मुख भी वे नहीं देख पाए थे, जो डोली में बैठी हुई थी । क्या बीतेगी उसपे, जिसने अपनी लाल जोड़े भी ठीक से नहीं देखी हो ।

वे तरह तरह के विचारों में खोए हुए थे, तभी उनके कानों में अपनी माँ को दिए वचन याद आये, जिसमें उन्होंने राजपूती धर्म को ना छोड़ने का वचन दिया था, उनकी पत्नी भी सारी बातों को समझ चुकी थी, डोली के तरफ उनकी नजर गयी, उनकी पत्नी महँदी वाली हाथों को निकालकर इशारा कर रही थी । मुख पे प्रसन्नता के भाव थे, वो एक सच्ची क्षत्राणी के कर्तब्य निभा रही थी, मानो वो खुद तलवार लेकर दुश्मन पे टूट पड़ना चाहती थी, परंतु ऐसा नहीं हो सकता था ।
सुजान सिंह ने डोली के पास जाकर डोली को और अपनी पत्नी को प्रणाम किये और कहारों और नाई को डोली सुरक्षित अपने राज्य भेज देने का आदेश दे दिया और खुद खंडेला को घेरकर उसकी चौकसी करने लगे ।

लोग कहते हैं कि मानो खुद कृष्ण उस मंदिर की चौकसी कर रहे थे, उनका मुखड़ा भी श्रीकृष्ण की ही तरह चमक रहा था।
8 मार्च 1679 को दराबखान की सेना आमने सामने आ चुकी थी, महाकाल भक्त सुजान सिंह ने अपने इष्टदेव को याद किये और हर हर महादेव के जयघोष के साथ 10 हजार की मुगल सेना के साथ सुजान सिंह के 500 लोगो के बीच घनघोर युद्ध आरम्भ हो गया ।

सुजान सिंह ने दराबखान को मारने के लिए उसकी ओर लपके और 40 मुगल सेना को मौत के घाट उतार दिए । ऐसे पराक्रम को देखकर दराबखान पीछे हटने में ही भलाई समझी, लेकिन ठाकुर सुजान सिंह रुकनेवाले नहीं थे ।
जो भी उनके सामने आ रहा था वो मारा जा रहा था । सुजान सिंह साक्षात मृत्यु का रूप धारण करके युद्ध कर रहे थे । ऐसा लग रहा था मानो खुद महाकाल ही युद्ध कर रहे हों ।
इस बीच कुछ लोगों की नजर सुजान सिंह पे पड़ी,
लेकिन ये क्या सुजान सिंह के शरीर में सिर तो है ही नहीं...
😭😭😭😭😭😭
लोगों को घोर आश्चर्य हुआ, लेकिन उनके अपने लोगों को ये समझते देर नहीं लगी कि सुजान सिंह तो कब के मोक्ष को प्राप्त कर चुके हैं ।
ये जो युद्ध कर रहे हैं, वे सुजान सिंह के इष्टदेव हैं । सबों ने मन ही मन अपना शीश झुककर इष्टदेव को प्रणाम किये ।

अब दराबखान मारा जा चुका था, मुगल सेना भाग रही थी, लेकिन ये क्या, सुजान सिंह घोड़े पे सवार बिना सिर के ही मुगलों का संहार कर रहे थे ।
उस युद्धभूमि में मृत्यु का ऐसा तांडव हुआ, जिसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुगलों की 7 हजार सेना अकेले सुजान सिंह के हाथों मारी जा चुकी थी । जब मुगल की बची खुची सेना पूर्ण रूप से भाग गई, तब सुजान सिंह जो सिर्फ शरीर मात्र थे, मंदिर का रुख किये ।

इतिहासकार कहते हैं कि देखनेवालों को सुजान के शरीर से दिव्य प्रकाश का तेज निकल रहा था, एक अजीब विश्मित करनेवाला प्रकाश निकल रहा था, जिसमें सूर्य की रोशनी भी मन्द पड़ रही थी ।

ये देखकर उनके अपने लोग भी घबरा गए थे और सबों ने एक साथ श्रीकृष्ण की स्तुति करने लगे, घोड़े से नीचे उतरने के बाद सुजान सिंह का शरीर मंदिर के प्रतिमा के सामने जाकर लुढ़क गया और एक शूरवीर योद्धा का अंत हो गया ।

🚩🚩🙏🙏माँ भारती के इस शूरवीर योद्धा को कोटि-कोटि नमन हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए 🚩🚩🙏🙏
खाटू श्याम जी मंदिर के पास ही स्थित है खंडेला धाम 🙏🚩

साभार..

Masterpiece of india ❤️Koodal Azhagar Madir situated at famous city Madhurai, Tamilanadu, India.
28/12/2022

Masterpiece of india ❤️

Koodal Azhagar Madir situated at famous city Madhurai, Tamilanadu, India.

हनुमान जी के 12 नाम लेने से दूर हो जाते हैं सारे कष्टहनुमान जी, कलयुग के सिद्ध देव और शीघ्र प्रसन्न होकर मनोकामनाओं को प...
29/11/2022

हनुमान जी के 12 नाम लेने से दूर हो जाते हैं सारे कष्ट

हनुमान जी, कलयुग के सिद्ध देव और शीघ्र प्रसन्न होकर मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं। ऐसा कहा जाता है कि मंगलवार के दिन जय श्री राम, जय बजरंगबली नाम जपने से सब मंगल ही मंगल होता है। जानिए मंगलवार को जन्मे मंगलकारी हनुमान जी के बारह नामों के बारे में जिनके जाप से आपके सारे कष्ट, रोग, पीड़ा और संकट खुद ब खुद नष्ट हो जाएंगे और जीवन में सब मंगलमय होगा।
शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं हनुमान जी....

हनुमान जी अजर-अमर हैं । अपने भक्तों पर कृपा करते हैं और उनके सारे कष्‍ट हर लेते हैं संकटमोचन। वे महावीर हैं और हर युग में अपने भक्तों की समस्याओं का समाधान करते हैं। माना जाता है कि हनुमान एक ऐसे देवता हैं जो थोड़ी-सी प्रार्थना और पूजा से ही शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। मंगलवार और शनिवार हनुमान जी के पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन है।

हर लेते हैं सारे संकट
हनुमान चालीसा में लिखा हुआ है कि "संकट कटै मिटे सब पीरा जो सुमिरै हनुमत बलवीरा"। जी हां यह अटल सत्य है। "भूत पिसाच निकट नहीं आवै महावीर जब नाम सुनावे"। जी हां यह भी अटल सत्य है, जैसे- राम नाम की महिमा अपरम्‍पार है। ठीक वैसे ही श्री हनुमान के नाम की महिमा भी अनंत फलदायी मानी गई है।

अगर आप अपनी परेशानियों से निजात पाना चाहते हैं तो जानिए कैसे करें महाबली को प्रसन्न....
जैसा कि रामचरित मानस में लिखा हुआ है कि "कलयुग में केवल नाम अधरा सुमरि-सुमरि नर उतरहीं पारा" और यह भी माना जाता है कि कलयुग में हनुमान ही सबसे प्रभावशाली देवता हैं। उनके नाम का सुमिरने से ही आपके सारे काम बन जाएंगे।

प्रभु श्री राम के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा से ही हनुमान जी को अष्टसिद्धियों और नवनिधियों का वरदान मिला है। ये वही अष्टसिद्धियां और नवनिधियां हैं जो कलयुग में हनुमान जी के उपासकों का कल्याण करती हैं। कहते हैं कि कलयुग में राम भक्त हनुमान के द्वादश यानि बारह नामों का स्मरण किया जाए तो सारी तकलीफें, समस्याएं और व्याधियां दूर हो जाती हैं। तो आइए जानें हनुमान जी के नामों की महिमा के बारे में...
1. हनुमान
2. अंजनीसुत
3. वायुपुत्र
4. महाबल
5. रामेष्ट
6. फाल्गुनसखा
7. पिंगाक्ष
8. अमितविक्रम
9. उदधिक्रमण
10. सीताशोकविनाशन
11. लक्ष्मणप्राणदाता और
12. दशग्रीवदर्पहा

अगर आप इस विधि से हनुमान जी की पूजा करते हैं तो आपके घर में सुख, शांति और हनुमान जी की कृपा होगी। महाबली बजरंग के इन नामों का उच्चारण करने से आपकी कई वर्षों से चली आ रही परेशानियां पल भर में छूमंतर हो सकती हैं।

भगवान नरसिंह के साथ में भक्तराज प्रह्लाद 🙏🏻🚩🌹The incarnation of Bhagwan Vishnu isNarasimha with his devotee Prahlada in ...
18/11/2022

भगवान नरसिंह के साथ में भक्तराज प्रह्लाद 🙏🏻🚩🌹

The incarnation of Bhagwan Vishnu is
Narasimha with his devotee Prahlada
in the temple of Shiva Pullamangai in
Thanjavur District of Tamil Nadu,
BHARAT (India) 🚩

Address

Vill-Salakhuan, P. O-Aphar, Dist-Chapra
Chhapra
841402

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