02/09/2022
क्या आप सबको रविन्द्र जैन जी याद हैं?
रामानन्द सागर के धारावाहिक रामायण के गीतकार व संगीतकार। इन्होंने रामायण से पहले 36 फिल्मों में संगीत दिया। इसमे 80%सफल रही। संगीत तो लगभग सभी फिल्मों का सफल रहा, रामायण के बाद इन्हें केवल एक बड़ी फ़िल्म राजकपूर के बैनर की हिना मिली, जिसे डायरेक्ट राजकपूर के निधन के बाद उनके पुत्र रणधीर कपूर निर्देशित करने वाले थे, । जबकि रामायण से पहले भी वो राजकपूर की फिल्म "राम तेरी गंगा मैली" के लिए भी संगीत दे चुके थे,,, अन्य कोई भी बड़े बैनर की फ़िल्म नहीं मिली।
इसी तरह बी.आर.चोपडा जी के बेहद प्रसिद्ध धारावाहिक महाभारत के संगीतकार राजकमल का भी फिल्म जगत में अघोषित रूप से बहिष्कार किया गया।
इसके विपरीत गुलशन कुमार का हत्यारोपी नदीम इंग्लैंड में बैठकर भी बॉलीवुड से कमाई करता रहा।
महेश भट्ट के बेटे राहुल भट्ट से जब डेविड हेडली के विषय मे जांच अधिकारियों ने पूछताछ की तो महेशभट्ट ने प्रधानमंत्री मनमोहन को पत्र लिखा। इसके बाद जांच एजेंसियों ने राहुलभट्ट से पूछताछ बन्द कर दी। 26/11 RSS की साजिश पुस्तक के विमोचन में महेशभट्ट मुख्य था।
जावेद अख्तर ने 1970 से 1982 तक लेखक सलीम के साथ मिलकर 24 बॉलीवुड फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखी।इनमें ज्यादातर फिल्में अंडरवर्ल्ड पर अपराध आधारित कहानियां थीं।
इस अवधि के दौरान, बॉम्बे में पांच खूंखार अपराधी थे - हाजी मस्तान, यूसुफ पटेल, करीम लाला, वरदराजन मुदलियार और दाऊद इब्राहिम। इनमें से चार मुसलमान थे। पुलिस रिकॉर्ड से पता चलता है कि मुंबई में 80 प्रतिशत अपराधी मुसलमान थे।
लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि उसी दौरान बॉम्बे में जावेद अख्तर और सलीम की जोड़ी,,,सलीम-जावेद ने लगभग 24 फिल्मों की कहानी लिखी, उनकी स्क्रिप्ट के खलनायक कभी मुसलमान नहीं थे। यह जावेद अख्तर को लोकप्रिय फिल्मों के शक्तिशाली माध्यम से जनता की सोच को प्रभावित करने के लिए अचूक पूर्वाग्रह दिखाता है।
जावेद अख्तर द्वारा लिखी गई फिल्म दीवार से जुड़ी कहानी जानी-पहचानी है। फिल्म का नायक एक हिंदू है, एक नास्तिक है जो हिंदू धर्म से इतनी नफरत करता है कि वह मंदिर की सीढ़ियों पर भी पैर नहीं रखता है। वह भगवान के प्रसाद को छूता तक नहीं है ....लेकिन वही नास्तिक हिंदू नायक, एक इस्लामी धार्मिक प्रतीक पर अंधविश्वासी है, उसकी बांह पर संख्या 786 बिल्ला है जिसपर वह गहरा विश्वास करता है। यही बिल्ला उसकी जान बचाता है जब एक गोली उसे लगती है।
1983 से 2006 तक जावेद अख्तर ने 14 और फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखी लेकिन उन 14 फिल्मों में भी एक भी मुस्लिम किरदार को नेगेटिव नहीं दिखाया, यानी 1970 से 2006 तक कुल 38 फिल्मों में जावेद अख्तर के किस्सों में एक भी मुस्लिम किरदार को विलेन के तौर पर नहीं दिखाया गया। ध्यान रहे उनमें से लगभग 60% फिल्में शुद्ध अपराध की कहानियों पर आधारित थीं।
उन दिनों मुंबई में मुस्लिम गुंडों, तस्करों, हत्यारों, आतंकवादियों का अपराध कहर ढा रहा था। जिस बारे में पूरा देश जानता था लेकिन जावेद अख्तर की लिखी हर कहानी का खलनायक हमेशा हिंदू था।
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