बजरंग दल की स्थापना 1 अक्टुबर 1984 को अयोध्या में हुई। ‘‘श्रीराम जानकी रथ यात्रा’’ अयोध्या से प्रस्थान के समय तत्कालीन सरकार ने सुरक्षा देने से मना कर दिया उस समय संतो के आवाहन पर विश्व हिन्दू परिषद द्वारा वहां उपस्थिति युवाओं को यात्रा की सुरक्षा का दायित्व दिया। श्रीराम के कार्य के लिए हनुमान सदा उपस्थित रहे है। उसी प्रकार आज के युग में श्रीराम के कार्य के लिए यह बजरंगियों की टोली ‘‘बजरंग दल’’ क
े रूप में कार्य करेगी। बजरंग दल का संगठन किसी के विरोध में नही बल्कि हिन्दूओं को चुनोती देने वाले असमाजिक तत्वों से रक्षा के लिये हुआ। उस समय केवल स्थानीय युवाओं को ही दायित्व दिया गया जो श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के कार्यो में सक्रिय रह सके। देश भर के युवा राष्ट्र और धर्म के कार्य के लिये आतुर थे माने वह प्रतीक्षा ही कर रहे थे, जैसे ही अवसर आया सम्पूर्ण देश की राष्ट्रभक्ति तरूणाई बजरंग दल के रूप में प्रकट हो गयी।
श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के विभिन्न चरणों की घोषणा होती रही और बजरंग दल उस अभियान को सफलता पूर्वक करता गया। रामशिला पूजन, चरण पादुका पूजन, राम ज्योति यात्रा, कारसेवा, शिलान्यास आदि।
30 अक्टूबर, 02 नवम्बर 1990 की कारसेवा का दृश्य यह प्रकट करता है कि हिन्दू युवा हिन्दूमान विन्दुओं का अपमान नही सह सकता चाहे कितना भी बलिदान देना पड़े। अनेक बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का बलिदान 1990 की कारसेवा में हुआ। लेकिन बजरंग दल अधिक प्रभावी और सक्रियता से आन्दोलन में भूमिका निर्वाह करने लगा। अपने देश में हिन्दुओं की इस दशा पर सम्पूर्ण देश आक्रोशित हुआ।
शौर्य का 1992 की कारसेवा में सम्पूर्ण हिन्दू समाज का आक्रोश प्रकट हुआ, और इतिहास बन गया। सम्पूर्ण देश का बजरंग दल पर विश्वास हो गया कि हिन्दू समाज व हिन्दू मान बिन्दुओं की रक्षा में बजरंग दल सक्षम है।
1993 में बजरंग दल का अखिल भारतीय संगठनात्मक स्वरूप तय हुआ। सभी प्रान्तों में बजरंग दल की इकाई घोषित हो गयी, आज देश भर में बजरंग दल सक्रिय है।
हिन्दू धर्म, हिन्दू मानबिन्दुओं की रक्षा, शाश्वत हिन्दू जीवन मूल्यों का संरक्षण राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्य को लेकर एक सशक्त युवाओं की टोली बजरंग दल के रूप में कार्य कर रही है।
श्रीराम के कार्य के लिए जन्मे श्रीराम के कार्य में अवरत प्रयास रत है। ‘‘सेवा सुरक्षा संस्कार’’ के कार्य का आधार बना कर ‘‘जयकारा वीर बजरंगे-हर हर महादेव’’ उद्बोध के साथ बढ़ते जा रहे है।
•संगठनात्मक गतिविधि•
साप्ताहिक मिलन केन्द्र
बलोपसना केन्द्र
हिन्दू उत्सव, महापुरूषों की जयन्ती
शौर्य प्रशिक्षण वर्ग
•अखिल भारतीय कार्यक्रम•
अखण्ड भारत दिवस ( 14 अगस्त)
हनुमान जयन्ती ( चैत पूर्णिमा)
हुतात्मा दिवस ( 30 अक्टूबर से 02 नवम्बर)
शौर्य दिवस ( 6 दिसम्बर)
साहसिक यात्रा (बूढ़ा अमरनाथ यात्रा सावन शुक्ल पक्ष)
इसके अतिरिक्त जिला सम्मेलन, प्रदेश अधिवेशन राष्ट्रीय अधिवेशन, विभिन्न बैठकों का क्रम भी निश्चित है।
•आन्दोलनात्मक गतिविधि•
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जब तक निर्माण एवं मांगों को मानवाने हेतु आन्दोलन करने पड़ते है। समाज जागरण एवं आने वाली समस्यों के समाधान हेतु विभिन्न आन्दोलन की आवश्यकता होती है जैसे –
धार्मिक मंदिरो की सुरक्षा
गौरक्षा
आंतरिक सुरक्षा
हिन्दू मान बिन्दू पर आक्रमण अपमान
अस्पृश्यता
सांस्कृतिक प्रदूषण
बाँग्लादेशी घुसपैठ
•रचनात्मक एवं सेवा कार्य•
दैवीय आपदा पर सहायता शिविर, दुर्घटना के समय सहायता के लिए बजरंगदल त्वरित सेवा के लिए पहुँचना है। भूकम्प, बाढ़ आदि में चिकित्सा, भोजन सहायता सामाग्री पहुँचाना तथा फँसे नागरिकों को सुरक्षित निकालना जैसे कार्य करना है।
रक्त दान – देश के सभी जिलों में हुतात्मा दिवस पर रक्तदान का कार्यक्रम आयोजित होता है। रक्तदान के साथ रक्तगट सूची भी बनायी गयी है। आवश्यकता के अनुसार रक्तदान करते ही रहते है। रक्त की कमी से भारत में कोई मृत्यु न हो सके इसी संकल्प के साथ 2014 में एक ही दिन 82000 यूनिट रक्तदान भी किया था। रक्तगट की सूची भी रखते है।
मंदिर उत्सव मेला आदि में जल, सुरक्षा भण्डारा लंगर सेवा व्यवस्था पालन एवं प्रबन्धन के अनेक कार्य का समाज का विश्वास प्राप्त किया है। निःशुल्क फ्री कोचिग, स्वरोजगार ( डाइविग, इलैक्ट्रिशियन, मोटर मैकनिक का प्रशिक्षण)।
वृक्षारोपण, जल संरक्षण ,स्वास्थ शिविर और हस्तशिल्प में सहायता के कार्य भी चल रहे है।
।।जय श्री राम।।।।जय श्री राम।।।।जय श्री राम।।।।जय श्री राम।।।।जय श्री राम।।।।जय श्री राम।।।।जय श्री राम।।।।जय श्री राम।।।।जय श्री राम।।।।जय श्री राम।।।।जय श्री राम।।।।जय श्री राम।।।।जय श्री राम।।।।जय श्री राम।।