Sumit Kumar

Sumit Kumar जिला अध्यक्ष, सारण
विश्व हिन्दू परिषद

नमामि गंगे तव पाद पंकजं, सुरासुरैः वंदित दिव्यरूपं।भुक्तिचं मुक्तिचं ददासनित्यं, भावानुसारें न सारे न सदा स्मरानाम।।पतित...
25/05/2026

नमामि गंगे तव पाद पंकजं, सुरासुरैः वंदित दिव्यरूपं।
भुक्तिचं मुक्तिचं ददासनित्यं, भावानुसारें न सारे न सदा स्मरानाम।।

पतित पावनी, मोक्षदायनी मां गंगा के अवतरण दिवस ‘गंगा दशहरा’ की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।

हर हर गंगे!

#गंगा_दशहरा

21/05/2026

प्रेस वक्तव्य:
बजरंग दल की साहसिक बूढ़ा अमरनाथ यात्रा से हिंदू आबादी में 4% बढ़ोत्तरी; इस वर्ष यह यात्रा 17 अगस्त से: मिलिंद परांडे
नई दिल्ली। मई 21, 2026। भारतीय सीमा से सटे कश्मीर घाटी के पुंछ में बिराजमान श्री बाबा बूढा अमरनाथ के दर्शन पूजन हेतु बजरंग दल गत 21 वर्षों से लगातार एक साहसिक यात्रा का संचालन कर रहा है। इस बारे में बताते हुए विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय संगठन महामंत्री श्री मिलिंद परांडे ने बताया है कि 90 के दशक में घाटी में जिहादी आतंकवाद और सीमापार से लगातार होने वाली गोलाबारी के चलते सदियों पुरानी यह महान यात्रा मृत प्राय: हो गयी थी। अब श्री बाबा बूढा अमरनाथ साहसिक यात्रा के नाम से प्रति वर्ष चलने वाली इस यात्रा के सहभागी श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बृद्धि हो रही है। इतना ही नहीं, वहाँ से निरंतर होने वाले हिंदुओं के पलायन पर भी विराम लगा है। हमें यह बताते हुए खुशी है कि वहाँ की स्थानीय हिन्दू जनसंख्या में लगभग 4% बृद्धि भी हुई है।
उन्होंने कहा कि बजरंग दल द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली यह यात्रा का धार्मिक तो है ही, राष्ट्रीय एकात्मता में भी इसका एक महत्त्वपूर्ण योगदान है। यह सीमा पर प्रहरी के रूप में खड़े सेना के जवानों के प्रति सम्मान और गौरव के दर्शन की भी यात्रा है। इस यात्रा के परिणामस्वरूप यात्रा मार्ग में आने वाले सभी हिन्दू धर्मस्थलों का संरक्षण हुआ है तथा पाकिस्तान से लगी भारत की सीमा पर रहने वाले अल्पसंख्यक हिन्दुओं में ‘‘पलायन नहीं पराक्रम’’ का भाव जागृत हुआ है। यात्रा में बजरंग दल के देशभर के सभी प्रांतों के कार्यकर्ता भाग लेते हैं। इस बार यह यात्रा 16 अगस्त से 27 अगस्त तक चलेगी।
विस्तृत ब्योरा देते हुए श्री परांडे ने बताया कि यात्रा का उद्घाटन 16 अगस्त 2026 को सायं 4 बजे भगवती नगर बेस कैम्प जम्मू में होगा। 17 अगस्त को प्रातः 5 बजे जम्मू से बाबा बूढ़ा अमरनाथजी के दर्शन हेतु पुंछ के लिए प्रस्थान करेगा। 18 अगस्त को प्रातः 6 बजे पुंछ से प्रस्थान कर दो घंटे बाद दर्शन और वहाँ से 10 बजे यात्रा की वापसी होगी। वापसी में राजौरी होते हुये सुन्दरबनी में रात्रि विश्राम और अगले दिन सुबह 5 बजे यात्रा शिवखोड़ी दर्शन के लिए प्रस्थान करेगी। तत्पश्चात यात्रा कटरा जाकर सम्पन्न होगी। यात्रा का यही क्रम प्रतिदिन रहेगा और हर दिन 4-5 प्रांतों के जत्थे दर्शन करेंगे।
वर्ष 2005 में बजरंगदल द्वारा पुन: प्रारंभ की गई इस यात्रा में अब देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आने लगे हैं। उनकी सुविधा और व्यवस्था की दृष्टि से आज budhaamarnath.org पर एक वेब पोर्टल भी लॉन्च किया गया जिसके माध्यम से दुनिया में कहीं भी बैठा कोई श्रद्धालु अपना रजिस्ट्रेशन करा सकता है। दिल्ली में हुई इस प्रेस वार्ता में बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक श्री किशन प्रजापत भी उपस्थित थे।
जारी कर्ता :
विनोद बंसल
राष्ट्रीय प्रवक्ता
विश्व हिन्दू परिषद

मंदिर मुक्ति हेतु सर्वोच्च न्यायालय में पुनः शुरू होगी ऐतिहासिक सुनवाई:आलोक कुमार, सीनियर एडवोकेट(अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष,...
20/05/2026

मंदिर मुक्ति हेतु सर्वोच्च न्यायालय में पुनः शुरू होगी ऐतिहासिक सुनवाई
:आलोक कुमार, सीनियर एडवोकेट
(अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व हिन्दू परिषद )

अखंड सौभाग्य एवं पतिव्रता धर्म के प्रतीक पावन वट सावित्री व्रत-पूजन की समस्त सुहागन माताओं एवं बहनों को हार्दिक बधाई एवं...
16/05/2026

अखंड सौभाग्य एवं पतिव्रता धर्म के प्रतीक पावन वट सावित्री व्रत-पूजन की समस्त सुहागन माताओं एवं बहनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।

15/05/2026

प्रेस वक्तव्य:

नई दिल्ली - 15 मई 2026. विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता श्री आलोक कुमार ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा भोजशाला संबंधी प्रकरण में दिए गए ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि यह निर्णय भारत की सांस्कृतिक चेतना, सत्य एवं सनातन परंपरा की महत्वपूर्ण पुष्टि है।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने यह निर्णय दे दिया है कि धार की भोजशाला हिन्दू मंदिर है। न्यायालय ने कहा कि सैदव ही भोजशाला के पूजा स्थान की पद्द्ति हिन्दू मंदिर की रही है। न्यायालय के निर्णय से भोजशाला में अब निरंतर पूजा का हिन्दुओं को अधिकार मिल गया है। मुसलमानो के लिए भी यह कहा गया है कि वह सरकार से मस्जिद के लिए जगह मांग सकते है।

हम यह अपेक्षा करेंगे कि भोजशाला केवल माँ वाग्देवी की पूजा का स्थान न रहे अपितु पुरातन काल की तरह संस्कृत और धर्मशास्त्रों के अध्ययन का एक वैश्विक केंद्र बने। यह काम समाज और सरकार को मिलकर करना होगा। इस स्थान की ऊर्जा से पुरे जगत में आध्यात्मिक ज्योति फैलेगी।

उन्होंने कहा कि यह फैसला पूरी न्यायायिक पद्धति का पालन करके हुआ है। कोर्ट ने उस ASI को जांच करने के लिए नियुक्त किया था जो इस बारे में भारत की सबसे विशेषज्ञ संस्था है। जांच की प्रतिलिपि दोनों पक्षों को दी गयी। दोनों पक्षों को अपना मत रखने के लिए पर्याप्त समय दिया। विद्वान न्यायाधीशों ने स्वयं मौके पर जाकर उस भवन का निरिक्षण भी किया।

श्री आलोक कुमार ने यह भी कहा कि इस प्रकार से एक वैज्ञानिक विशलेषण करवाने के बाद, सबको सुनकर और प्रत्यक्ष भवन को देखने के बाद यह निर्णय आया है। माननीय उच्च न्यायालय ने उपलब्ध ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्यों एवं सतत हिन्दू उपासना की परंपरा के आधार पर यह स्पष्ट रूप से माना है कि भोजशाला देवी वाग्देवी माँ सरस्वती का प्राचीन मंदिर एवं संस्कृत शिक्षा का केंद्र था। यह निर्णय केवल एक स्थल से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और सभ्यतागत अस्मिता से जुड़ा हुआ है। यह निर्णय संतुलित है, अच्छा है। सब लोगो को यह निर्णय स्वीकार करना चाहिए।

उन्होंने न्यायालय द्वारा केंद्र सरकार को लंदन के ब्रिटिश म्यूज़ियम में स्थापित माँ सरस्वती की प्रतिमा को भारत वापस लाने हेतु प्रस्तुत अभ्यावेदनों पर विचार करने संबंधी टिप्पणी का भी स्वागत किया और कहा कि यह प्रतिमा भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है, जिसे उसके मूल स्थान भोजशाला में पुनः स्थापित किया जाना चाहिए।

श्री आलोक कुमार ने यह भी कहा कि यह विषय किसी के हार या जीत का नहीं है। हम सभी को न्यायालयों के आदेशों एवं संवैधानिक प्रक्रियाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने सभी पक्षों से शांति, सौहार्द एवं सामाजिक समरसता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि यह निर्णय किसी समुदाय की पराजय नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सत्य एवं सांस्कृतिक न्याय की पुनर्स्थापना है।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इस निर्णय के अनुरूप भोजशाला मंदिर के संरक्षण, व्यवस्थापन एवं संस्कृत अध्ययन की गौरवशाली परंपरा के पुनर्जीवन हेतु शीघ्र आवश्यक कदम उठाएंगे।

जारी कर्ता:
विनोद बंसल
राष्ट्रीय प्रवक्ता
विश्व हिन्दू परिषद

14/05/2026

उदयनिधि स्टालिन के सनातन विरोधी बयान पर विहिप की प्रतिक्रिया: डा. सुरेंद्र जैन

अवैध घुसपैठ ना सिर्फ देश के संसाधनों व कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है बल्कि देश की अंतरिक्ष सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा ख...
12/05/2026

अवैध घुसपैठ ना सिर्फ देश के संसाधनों व कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है बल्कि देश की अंतरिक्ष सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा है। ऐसे में घुसपैठ रोकने और घुसपैठियों को चिन्हित कर भगाने के लिए कृत संकल्पित असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंता बिस्वा सरमा जी को राज्य के सेवार्थ नई पारी के लिए बधाई व शुभकामनाएं।
शुभकामनाएं व बधाई बंगाल के नवीन मुख्यमंत्री श्री शुभेंदु अधिकारी जी को भी जिन्होंने अपनी प्रथम कैबिनेट बैठक में ही देश की सीमा की सुरक्षार्थ 45 दिन के अंदर ही आवश्यक भूमि सीमा सुरक्षा बलों को हस्तांतरित करने का सराहनीय आदेश दिया है। इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए आपको साधुवाद।

“हिंन्दुत्व' ही सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का एक स्वरूप है, जिसमें धार्मिक एकता नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता महत्वपूर्ण भूमिका...
08/05/2026

“हिंन्दुत्व' ही सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का एक स्वरूप है, जिसमें धार्मिक एकता नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।”

भारतीय स्वंत्रता संग्राम के सिरमौर, महान क्रांतिकारी, हिंदुत्व विचारक, लेखक स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर जी की जयंती पर कोटि कोटि नमन्।

जिन मोहि मारा, तिन मैं मारे...सिंदूर सिर्फ एक ऑपरेशन का नाम नहीं था,मां भारती के सिंदूर पर हमला करने वालों को एक ललकार थ...
07/05/2026

जिन मोहि मारा, तिन मैं मारे...
सिंदूर सिर्फ एक ऑपरेशन का नाम नहीं था,
मां भारती के सिंदूर पर हमला करने वालों को एक ललकार थी!

'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ पर उन महान् वीरो को वंदन, जिन्होंने जिहादियों को सिर्फ जवाब नहीं, एक कठोर संदेश भी दिया जिसकी गूंज पूरी दुनिया ने सुनी.!!

पश्चिम बंगाल, असम और पुदुच्चेरी में हिंदुत्व की विजय भारतीय संस्कृति, आस्था और राष्ट्रभाव की शक्ति का प्रतीक है।यह विजय ...
05/05/2026

पश्चिम बंगाल, असम और पुदुच्चेरी में हिंदुत्व की विजय भारतीय संस्कृति, आस्था और राष्ट्रभाव की शक्ति का प्रतीक है।

यह विजय केवल राजनीतिक नहीं बल्कि, सनातन मूल्यों, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक आत्मविश्वास की पुनर्स्थापना है।

विहिप इस जनादेश का सम्मान करते हुए मतदाताओं को साधुवाद देती है।

सृष्टि के प्रथम संदेश वाहक एवं भगवान विष्णु के अनन्य उपासक परमपिता ब्रह्मा जी के मानस पुत्र देवर्षि नारद जी जयंती की हार...
02/05/2026

सृष्टि के प्रथम संदेश वाहक एवं भगवान विष्णु के अनन्य उपासक परमपिता ब्रह्मा जी के मानस पुत्र देवर्षि नारद जी जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं !

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