Gavyanjali

Gavyanjali गौआधारीत अर्थव्यवस्था से ही भारत सोने की चिड़िया बन सकता हैं।

24/11/2022




पहले गांव एकदम सूखे साफ सुथरे रहते थे क्योंकि न तो घरों में कोई टट्टी करता था, न नहाता था, न ही मूतता था। #हांपड़ने के ल...
23/09/2022

पहले गांव एकदम सूखे साफ सुथरे रहते थे क्योंकि न तो घरों में कोई टट्टी करता था, न नहाता था, न ही मूतता था।

#हांपड़ने के लिए गांव के पास के कुओं पर जाते थे। पानी घर में सिर्फ पीने के लिए ही होता रहा। बर्तन भी चूल्हे से निकली #राख / #वानी से मांजते थे। गांव की गलियां एकदम सूखी रहती थी।

फिर आया #भिकास का दौर।
हगना, मूतना, नहाना, धोना, मोटरसायकिल धोना सब घरों में होने लगा। नालियां बनी और वो भरी गर्मी में भी सड़े पानी से भरी हुई रहने लगी। पहले सालभर में एकाध महीने बारिश के टाइम कभी कभार मच्छर काटते थे आज इतना विकास कर लिया है कि सर्दी के दिनों में भी पंखे चलाकर मच्छर भगाने पड़ते हैं, पर मच्छर हैं कि भागते ही नहीं! पहले चुल्हे पर खाना बनाने से हुए धुएं से ही मच्छर भाग जाते थे तो हमको बताया गया कि ये तो पिछड़ेपन की निशानी है तो हम गैस लियाए, और फिर अब उसी विकास की बदौलत दिल में छेद वाले बच्चे पैदा ले रहे हैं ! और मच्छर भगाने के लिए कोई जहर ले आए, आज वायरल बुखार इतना वायरल हो गया है कि ऐसा कोई घर नहीं छुटा होगा! और हम मुर्ख कह रहे हैं कि हम विकास कर रहे हैं!
क्या आपकी नजर में यही विकास है?

आप सभी जानते हैं कि गौमाता के गोबर में लक्ष्मी व मुत्र में धनवंतरि का निवास होता हैं।फिर हमारे देश में में इतनी गरीबी व ...
24/07/2022

आप सभी जानते हैं कि गौमाता के गोबर में लक्ष्मी व मुत्र में धनवंतरि का निवास होता हैं।
फिर हमारे देश में में इतनी गरीबी व बीमारी क्यों बढी ?
जब तक गांवों की अर्थव्यवस्था गौ आधारित नहीं होगी, तब तक न गांव आत्मनिर्भर बनेंगे और न हमारा देश आर्थिक महाशक्ति बन पाएगा।
हम जितना गौमाता से दूर होते गये, उतनी ही देश में गरीबी व बीमारी बढ़ती गयी।

गांवों में गोबर खाद की जगह युरिया डीएपी ने ले ली।
गोमुत्र रुपी देशी कीटनाशक की जगह जहरीले रासायनिक कीटनाशकों ने ले ली।
बैलों द्वारा हल से जुताई की जगह ट्रेक्टर ने ले ली।
फलस्वरूप खेती महंगी हो गयी, खेतों से निकलने वाली उपज भी जहरीली हो गयी।
एक तरफ किसानों के लिए आर्थिक संकट उत्पन्न हुआ, वही दूसरी तरफ रसायन युक्त अनाज व सब्जियों के सेवन से बीमारियां भी बढ़ती गयी।
आज हमारे गाँव की वर्तमान स्थिति ये हैं कि न गांव में पर्याप्त दुध हैं, न घी हैं, न अनाज हैं, न सब्जियां हैं, न पीने योग्य पानी हैं।
गांव के चारों तरफ प्लास्टिक व कचरे के ढेर भरे पड़े हैं। बेसहारा गायें व गौवंश इन्ही कचरे के ढेर पर पेट भरते हैं।
गांवों से युवाओं का पलायन अनवरत जारी हैं।
खेती व गौपालन से लोगों की दूरी बढ़ती जा रही है।
हमारे गाँव में कोई भी माँ बाप अपने बच्चों से खेती व गौपालन करवाना नहीं चाहता।
मानसून की बेरुखी ने बुजुर्ग किसानों व ट्रैक्टर वालों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया हैं।
गांव के लोगों की स्थिति किंकर्तव्यविमूढ़ जैसी हैं।
ऐसी विकट परिस्थिति में मैं अपने गांव में बेसहारा गौमाता व गौवंश के लिए कुछ करना चाहता हूँ।
मैंने ऐसी योजना बनाई हैं, जिससे दुध न देने वाली गायों व गौवंश के लिए पानी व चारे की व्यवस्था उनके गोबर व मुत्र से चीजें बनाकर की जाये। जैसे - गोबर के गमले, मुर्तिया, सजावट के सामान, जैविक खाद, गोनाईल
इन वस्तुओं के उपयोग से पर्यावरण सुरक्षा व स्वास्थ्य रक्षा होगी।
इस योजना के तहत गौ संरक्षण का आत्मनिर्भर प्रकल्प शुरू करने के लिए 2.25 लाख से 2.50 लाख रुपयों की लागत आएगी। इस प्रकल्प को शुरू करने के लिए मेरी स्वयं की जगह पर 20×25 पतरे का शेड, कुछ मशीनें व रो मटेरियल की जरुरत पड़ेगी।
पतरे का शेड
गोबर का पावडर बनाने की मशीन,
गोबर से गमला बनाने की मशीन,
गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन,
गोबर से दिया बनाने की मशीन,
गोमुत्र से अर्क बनाने का सिस्टम,
मिक्सर मशीन,
गोबर से उत्पाद बनाने के लिए मोल्ड,
रो मटेरियल, पैकिंग मटेरियल
इस प्रकल्प में One Time Invest करके गांवों की दशा व दिशा दोनों बदल सकते हैं।

इस प्रकल्प के उद्देश्य
गौ संरक्षण संवर्धन
गौ केंद्रित खेती
गौ आधारित अर्थव्यवस्था
गांव के युवाओं को गांवों में रोजगार

गांवो को आत्मनिर्भर बनाने के लिए,
गौमाता के संरक्षण व संवर्धन के लिए,
पर्यावरण व स्वास्थ्य की रक्षा के लिए,
ऐसे प्रकल्प हर गाँव में होने चाहिए।

मैं अपने गांव में इस प्रकल्प की शुरुआत करने जा रहा हूँ, जिसमें आप सबके सहयोग की अपेक्षा है।
इस प्रकल्प से गौमाता के लिए हर रोज चारे व पानी का प्रबन्ध हो सकेगा।
किसानों को जैविक खाद मिलेगा।
लोगों को स्वास्थ्यवर्धक पंचगव्य उत्पाद मिलेंगे।
पर्यावरण की रक्षा होगी।
गांव के युवाओं व महिलाओं को अपने गांव में ही रोजगार मिलेगा।

तो आईए तन मन धन से बेसहारा गौमाता के संरक्षण व संवर्धन के लिए एकमुश्त सहयोग के लिए आगे आए।

अगर भारत को बचाना हैं तो गौमाता को बचाना ही होगा।
13/07/2022

अगर भारत को बचाना हैं तो गौमाता को बचाना ही होगा।

जय गौमाता
12/07/2022

जय गौमाता

12/07/2022

गव्याजंली

05/07/2022



साभार Tbnp

02/07/2022

अपने गांवों में बेघर घूमती गौमाता व गोवंश की सेवा कैसे कर सकते हैं ?

गौमाता की महिमा विदेशों में भी
18/06/2022

गौमाता की महिमा विदेशों में भी

05/06/2022

मल द्वार व मुत्र द्वार पर गंभीर जख्म से पीड़ित गौमाता को ईलाज की तत्काल जरूरत हैं।

स्थान गांव बडगावडा, पोस्ट लापोद तहसील सुमेरपूर जिला पाली राजस्थान

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MDR-105
Chanod
306602

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