10/04/2025
**गौमाता के महात्म्य को समर्पित — गायत्री शक्तिपीठ चंद्रपुर में बना जिले का आदर्श श्रीराम गौशाला एवं सप्त गौ मंदिर’*** *गर्भवती माताओं के लिए विशेष परिक्रमा स्थल, गौभक्तों के लिए पुण्य अर्जन का केंद्र, गोसेवा का आधुनिक मॉडल*
*गाय केवल एक पशु नहीं,* “गावो विश्वस्य मातर:”* — समस्त सृष्टि की माता मानी गई हैं। भारतीय संस्कृति में गाय को *धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष* चारों पुरुषार्थों की सिद्धि का माध्यम माना गया है। इस गौरवशाली परंपरा को आधुनिक युग में जीवंत करती एक अनुपम पहल हुई है *श्री वेदमाता गायत्री शक्तिपीठ, चंद्रपुर* में, जहां *श्रीराम गौशाला* के अंतर्गत चंद्रपुर का पहला और देश का आठवां *श्री सप्त गोमाता मंदिर* स्थापित हुआ है।
# # # **गौमाता के पूजन का केंद्र — सप्त गोमाता मंदिर**
25 दिसंबर 2021 को *देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या जी* एवं *मा. मंत्री श्री सुधीर मुनगंटीवार जी* के करकमलों से *श्रीराम गौशाला* का भूमिपूजन हुआ। कई माहों की अथक सेवा, परिश्रम और गायत्री परिवार के सहयोग से 26 मार्च को *24 कुंडीय ‘गौ पुष्टि गायत्री महायज्ञ’* के माध्यम से मंदिर का भव्य उद्घाटन हुआ।
इस मंदिर की आकृति *आष्टकोणीय* है, जिसके मध्य में *ढाई फीट की श्री राधाकृष्ण प्रतिमा* प्रतिष्ठित है। प्रतिमा के चारों ओर सातों गायें — *पार्वती, गौरी, सरस्वती, नंदिनी, शांभवी, सुरभि और गोमयी* — सहज भाव से विचरण करती हैं। श्रद्धालु इनकी परिक्रमा करते हैं, विशेषकर *गर्भवती महिलाएं*, जिनके लिए यह *संतानोत्पत्ति में विशेष लाभकारी* माना जाता है।
# # # **गोपाष्टमी पर्व पर दिव्यता की पराकाष्ठा**
*गोपाष्टमी पर्व* के अवसर पर मंदिर में *56 भोग अर्पित किए जाते हैं* और *दीप महायज्ञ का आयोजन* होता है। इस दिव्य अनुष्ठान में *सैकड़ों की संख्या में गौ भक्त* सहभागी बनकर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि *गौ संस्कृति की पुनर्स्थापना का उत्सव* बन गया है।
# # # **व्यवस्थित गोपालन — एक मॉडल गौशाला की स्थापना**
यह गौशाला केवल गोसेवा का केंद्र नहीं, बल्कि *गोपालन के आदर्श मॉडल* के रूप में उभर रही है। यहां रखी *15 देशी नस्ल की गायों* के लिए चारे, पानी और रहने की उत्तम व्यवस्था है। *समय-समय पर पशु चिकित्सक द्वारा स्वास्थ्य जांच* होती है। गायों की संख्या और वंशवृद्धि के लिए *‘भोला’ नामक नंदी बाबा* की सेवा भी की जा रही है, जिससे प्राकृतिक रूप से संख्या में वृद्धि हो रही है।
# # # **ग्राम-ग्राम में बनें छोटे-छोटे सप्त गोमाता केंद्र**
यह गौशाला केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि *प्रेरणा का स्रोत* है। यही कारण है कि *गायत्री शक्तिपीठ चंद्रपुर* ने इसे *‘ श्रीराम गौशाला सप्त गौमंदिर’* को एक मॉडल के रूप में विकसित किया है, जिससे *गांव-गांव में छोटे-छोटे सप्त गोमाता मंदिर* बनाकर देशव्यापी *गौ क्रांति* का संचार किया जा सके।
*हम सभी गौभक्तों से करबद्ध निवेदन करते हैं कि गायत्री शक्तिपीठ की इस सप्त गौ मंदिर गौशाला में पधारकर व्यवस्था को देखें, समझें, और अपने क्षेत्र में भी ऐसी ही गौसेवा को आरंभ करें।*
*परंपरा और सहभागिता:*
यहां गौ ग्रास की परंपरा का पालन करते हुए भक्तजन हर रोज़ पहली रोटी गाय के लिए निकालते हैं। कई गौप्रेमी ₹5 प्रतिदिन या ₹150 मासिक का गौ ग्रास दान नियमित देते हैं, जिससे गौशाला की व्यवस्था चलती है।दानराशि की 80G की दानपवती भी दानदाताओं को प्रदान की जाती है जिससे आयकर में छूट भी प्राप्त होती है।
# # # **धर्म और विज्ञान का संगम — गौ माता का महत्व**
प्राचीन ग्रंथों में वर्णन है कि *गौ माता में 33 कोटि देवताओं का वास* है — सींग में वेद, नेत्रों में सूर्य-चंद्र, खुरों में गंधर्व, गोमूत्र में गंगा, गोबर में लक्ष्मी, और हृदय में स्वयं भगवान नारायण।
आज *विज्ञान* भी यह स्वीकार करता है कि *गाय के सान्निध्य से मानसिक तनाव दूर होता है।* *काउ थेरपी* का उपयोग अमेरिका जैसे देशों में हो रहा है। रिसर्च में पाया गया कि गाय के गले को सहलाने से व्यक्ति का *आभामंडल सकारात्मक* हो जाता है।
# # # **गोसेवा से जीवन का रूपांतरण — कुछ अनुभूत प्रयोग**
- *गर्भवती महिलाएं* हर अमावस्या-पूर्णिमा पर परिक्रमा करें, तो *सामान्य और स्वस्थ प्रसव* होता है।
- *तिल-गुड़ से बने लड्डू* नौ गायों को खिलाकर परिक्रमा करने से *संतान सुख* प्राप्त होता है।
- *दंपत्ति* परिक्रमा कर नौ गायों को रोटी व गुड़ खिलाएं — *आपसी प्रेम और शांति* प्राप्त होगी।
- *गाय के आगे के पांव का पूजन* करने से *मोक्ष और सुख* की प्राप्ति होती है।
- *गाय की पूंछ से सिर तक हाथ फेरकर* अपने शरीर पर स्पर्श करें — *ऊर्जा और संतुलन* प्राप्त होता है।
# # # **गौ माता की सेवा — पुनर्निर्माण की धुरी**
गायत्री शक्तिपीठ के इस गौशाला में *तुलादान, गौ उत्पाद निर्माण, प्रशिक्षण व विक्रय* की भी व्यवस्था है — जैसे *अगरबत्ती, दीपक, गौमूत्र अर्क, केंचुआ खाद,* आदि। यहां *“हर हाथ को काम हो”* संकल्प का सजीव स्वरूप देखने को मिलता है।
**आप सभी से विनम्र आग्रह है कि सप्ताह में कम से कम एक दिन इस गौशाला में परिवार सहित पधारें। गोसेवा करें, परिक्रमा करें और भावी पीढ़ी को भी गाय के महत्व से अवगत कराएं। गाय बचेगी तो संस्कृति बचेगी, राष्ट्र बचेगा।**
*श्री सप्त गोमाता मंदिर देवालय समिति* *श्री वेदमाता गायत्री शक्तिपीठ, श्रीराम सेतु मार्ग, चंद्रपुर*