03/01/2022
परम पुरुष पूरण धनी महाराज स्वामी श्री श्री 1008 स्वामी रामानन्द जी महाराज उर्फ श्री उमाशंकर जी महाराज के चरणों में समर्पित |
बन्दों सतगुरु चरण कों बार बार सिर नाय ।
जिनको सुमरन करत ही अन्धकार नस जाय।।
बन्दों सतगुरु स्वरूप को, अन्तः प्रकाश हो जाय।
अन्धकार कौ नाश हो, ध्यान सिद्ध हो जाय ।
भजन करत महाराज कौ, समूल पाप नष्ट हो जाय।
अर्न्तमुखी वृति होत है, परम धाम मिल जाय ।।
तासें सतगुरु कहत हैं, सुमरत ध्यान भजन से होत आनन्द ।
इस युक्ति से पाय हो, शान्ति मुक्ति परम आनन्द ||
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-- स्मरणीय संत श्री जुगलकिशोर श्रीवास्तव