Shri Radha Madhav Darshnam

Shri Radha Madhav Darshnam activity & update about Temple in Chandigarh

16/08/2024
16/08/2024
रथयात्रा चंडीगढ़
16/08/2024

रथयात्रा चंडीगढ़

((((( संतवाणी )))))_हे हरि, हे गोविंद, सुन मेरी करुण पुकार,__सारे जहाँ के मालिक, तेरा ही आसरा है.._ _राजी हैं हम उसी में...
05/08/2024

((((( संतवाणी )))))

_हे हरि, हे गोविंद, सुन मेरी करुण पुकार,_
_सारे जहाँ के मालिक, तेरा ही आसरा है.._
_राजी हैं हम उसी में, जिसमें तेरी रजा है!_
🌷
संत पुरुष यह संदेश देते है कि भगवान ने ही हमारे प्रारब्‍ध के अनुसार हमारी आयु और सुख-दु:ख के भोग नियत कर दिये हैं।

यह मानव तन शरीर रथ के समान है, बुद्धि सारथि है, इन्द्रियाँ घोड़े हैं और मन लगाम है। जो पुरुष स्वेच्‍छापूर्वक छौड़ते हुए उन घोड़ों के वेग का अनुसरण करता है, वह तो इस संसार चक्र में पहिये के समान घूमता ही रहता है।

किंतु जो संयमशील होकर बुद्धि के द्वारा उन इन्द्रियरुपी अश्वों को काबू में रखता है, मोह के वशीभूत नहीं होता, उसे फिर संसार में भटकना नहीं पड़ता।

संसार में भटकने वालों को दु:ख प्राप्त होता ही रहता है; अत: विज्ञ पुरुष को इस संसार बन्‍धन की निवृति के लिए अवश्‍य यत्‍न करना चाहिये। इस विषय में कदापि उपेक्षा नहीं करनी चाहिये।

जय जय श्री राधे श्याम! 🌹

05/08/2024

कदाचित् कालिन्दी तट विपिन सङ्गीत तरलो
मुदाभीरी नारी वदन कमल स्वाद मधुपः।
रमा शम्भु ब्रह्मामरपति गणेशार्चित पदो
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे॥

भुजे सव्ये वेणुं शिरसि शिखिपिच्छं कटितटे
दुकूलं नेत्रान्ते सहचर कटाक्षं विदधते।
सदा श्रीमद्वृन्दावन वसति लीला परिचयो
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे॥

((((( उपदेशामृत )))))_कर हरि चरनन से हेत हेत, कर हरि चरनन से हेत हेत।__बाल पनो खेलन में खोयो, केस भये सिर स्वेत स्वेत।__...
26/07/2024

((((( उपदेशामृत )))))

_कर हरि चरनन से हेत हेत, कर हरि चरनन से हेत हेत।_

_बाल पनो खेलन में खोयो, केस भये सिर स्वेत स्वेत।_
_मानुष जनम अमोलक हीरा, काहे रुलावत रेत रेत॥_

_बीज बोइ कर खबर न लीन्ही, चिड़िया चुग गइ खेत खेत।_
_कहत "कबीर" सुनो भाई साधो, मरकर होहि हैं प्रेत प्रेत॥_
~ कबीर दास

संत शिरोमणि श्री कबीरदास इस दोहे में कहते हैं कि; "भगवान श्री हरि के चरणों से प्रेम कर लो, जीवन सफल हो जाएगा।"

बचपन तो खेल कूद में खोया और अब सिर के बाल भी सफेद हो गये हैं, बुढ़ापा आ गया है फिर भी इस जीवन का उद्देश्य नही समझ पा रहा तू ?

अरे यह मनुष्य जन्म एक अनमोल रत्न है, क्यूं इसे बिना मोल की माटी के लिए बेच रहा है तू ?

जैसे किसान खेत में बीज बोने के बाद, उसका रोपण न करे, सीचन न करे, अपने खेत की देखभाल न करे और कहे कि हाय राम, मेरी सारी फ़सल नष्ट हो गई। ऐसे विलाप से क्या लाभ ? ऐसे पछतावे से क्या फायदा जब चिड़िया चुग गई खेत ?

इसी प्रकार यदि हम इस मानव जीवन का लाभ नही उठाते हैं तो अगला जन्म प्रेत योनि का ही मिलेगा।

इस अनमोल जीवन का पूरा लाभ उठाइए और मन में गाते रहिए:
हे मनवा रे मनवा, जीवन है संग्राम।
भजले राम राम राम, भजले राम राम राम॥
तेरे पूरन होंगे सब काम, इस से बड़ा नहीं कोई नाम।
जपले राम राम राम...

🌹जय जय श्री राधेश्याम 🌹

24/07/2024

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