Maa Banbhori Ji

Maa Banbhori Ji Banbhori (also spelt as Banbhauri) is a village in Hisar (also known as Hissar) district of Haryana province of northwestern India.

"Sarav Mangal Mangle, Shive Sarvarth Sadhike Sharanye Triambike Gauri, Narayani Namastute" || Om Aien Hreem Kleem Chamundaye Viche |♥❤¸.•*""*•.¸❤ ☼ ❤¸.•*""*•.¸❤ ☼ ❤¸.•*""*•.¸❤ ☼ ❤¸.•*| The place is known for its local deity (Devi), which is worshipped by people who originally hail from around that area. There are families that have left the area generations back, and still come to worship the deit

y, especially after new birth and marriage in the family. Special festivities are organised at the time of Navratri. As the myth goes, the buried idols of Devi Durga and Bhairav were found together from that place. First banker (State Bank of Patiala) was introduced in the village by MAHARAJA AGGARSEN DHARMARTH PARISHAD (A NGO), when they built their Dharamshala in year 2010
Coordinates: 29°25′00″N 76°3′00″E
In this village was a famus man Shri Vjay Singh Chahar son of Amilal Singh Chahar. He was actully the head of the Panchayatat of Banbhori at his time......

🌟“अगर कोई पूछे कि तुम्हारी आत्मा क्यों झूम उठती है… तो उत्तर बस इतना है – मेरी मां”🥰🙏🏻जय वीर हनुमान🙏🏻
16/09/2025

🌟“अगर कोई पूछे कि तुम्हारी आत्मा क्यों झूम उठती है… तो उत्तर बस इतना है – मेरी मां”🥰
🙏🏻जय वीर हनुमान🙏🏻

जगतजननी  माँ बनभौरी हम सभी की श्रीवृद्धि करे।
31/03/2025

जगतजननी माँ बनभौरी हम सभी की श्रीवृद्धि करे।

JAi MATA DI💐🙏Devi Maa  sab ke ghar padhareDur ho aapke dukh sareKhushiyon se na ho kabhi aapki judaiNavaratri ki aap sab...
10/10/2024

JAi MATA DI💐🙏
Devi Maa sab ke ghar padhare
Dur ho aapke dukh sare
Khushiyon se na ho kabhi aapki judai
Navaratri ki aap sab ko dhero bhadhai..

06/07/2024

जय माता दी......
Ashadh Gupt Navratri 2024: नवरात्रि साल में कुल चार बार मनाई जाती है. दो बार गुप्त नवरात्रि और दो बार सामान्य नवरात्रि. इसमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि ज्यादा प्रसिद्ध हैं. इसके अलावा माघ और आषाढ़ में गुप्त नवरात्रि भी मनाई जाती है. इस बार 6 जुलाई यानी आज से आषाढ़ माह के गुप्त नवरात्रि शुरू होने जा रही है. और इसका समापन 15 जुलाई को होगा. इस साल आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्रि में इस बार गुप्त नवरात्रि में माता रानी की सवारी घोड़ा है. गुप्त नवरात्रि, गोपनीय साधनाओं के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है. इसमें शक्ति प्राप्त की जाती है और बाधाओं का नाश करने का वरदान मांगा जाता है
Ashadha Gupt Navratri 2024 Tithi)
6 जुलाई 2024 – आषाढ़ गुप्त नवरात्रि प्रतिपदा तिथि, घटस्थापना मुहूर्त
7 जुलाई 2024 – आषाढ़ गुप्त नवरात्रि द्वितीया तिथि
8 जुलाई 2024 – आषाढ़ गुप्त नवरात्रि तृतीया तिथि
9 जुलाई 2024 – आषाढ़ गुप्त नवरात्रि तृतीया तिथि
10 जुलाई 2024 – आषाढ़ गुप्त नवरात्रि चतुर्थी तिथि
11 जुलाई 2024 – आषाढ़ गुप्त नवरात्रि पंचमी तिथि
12 जुलाई 2024 – आषाढ़ गुप्त नवरात्रि षष्ठी तिथि
13 जुलाई 2024 – आषाढ़ गुप्त नवरात्रि सप्तमी तिथि
14 जुलाई 2024 – आषाढ़ गुप्त नवरात्रि महाष्टमी
15 जुलाई 2024 – आषाढ़ गुप्त नवरात्रि महानवमी

जय माता दी .....देवी और हरि की पूजा के बाद यह श्लोक अवश्य कहें - ताकि दोष निवारण हो जाए। अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं...
18/06/2024

जय माता दी .....देवी और हरि की पूजा के बाद यह श्लोक अवश्य कहें -
ताकि दोष निवारण हो जाए।
अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया |
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि || १ ||

हे परमेश्वरी! परम भगवती ! रात और दिन मेरे द्वारा सहस्त्रों अपराध हुआ करते है । यह मेरा दास है ऐसा समझकर आप मुझ पर कृपा करके मेरे अपराधों को क्षमा करो।
( ऐसा कहने से पराम्बा तत्काल उस दिन के एक हजार अपराधों को भी क्षमा कर देती हैं )
तथा हे पार्वती
श्रीहरि के वैष्णव जन यह कहें पूजा पाठ के बाद -अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया |
तवाहमिति मां मत्वा क्षमस्व मधुसूदन ।।
अर्थात
"हे मधुसूदन! मुझसे प्रतिदिन हजारों अपराध होते रहते हैं किन्तु मैं आपका ही सेवक हूँ , ऐसा समझकर मुझे उन सब अपराधों के लिए क्षमा करें "।
हे शिवे ! ऐसा उच्चारण करते ही प्रभु हरि सहस्र अपराध क्षमा कर देते हैं।
पर हे देवी वैष्णव का कर्तव्य है कि वह इन 32 अपराधों को जानकर जानबूझकर गलती न करें ।

02/01/2023

✨🚩🌺 🌿नए साल पर जगतजननी माँ बनभौरी जी का आशीर्वाद आप सभी को प्राप्त हो और पूरा साल मंगलमय हो👏🌿🌺🚩

27/12/2022

. माँ तुम बहुत ही खुबसूरत हो.....
हमेशा देखता हूँ तुम्हे,अपनी बन्द आँखों से..
🌺🌺🌺 माँ🌺🌺🌺

01/12/2022

जय मां भ्रामरी देवी 🌹
“क्या पापी, क्या घमंडी..
माँ के दर पर सभी शीश झुकाते हैं..
मिलता है चैन तेरे दर पर मैया..
झोली भरके तेरे दर से, सभी मुस्कुराते हुए जाते हैं “
प्रेम से बोल- जय माता दी🙏

जय मां भ्रामरी देवी🕉️भक्तों की सभी 🪔 सात्विक कामनाओं को पूर्ण करने की कृपा करें🙏
22/09/2022

जय मां भ्रामरी देवी🕉️
भक्तों की सभी 🪔 सात्विक कामनाओं
को पूर्ण करने की कृपा करें🙏

21/07/2022

अब तो बस एक ही बात सुकून देती है माँ..
की आप सब देख रही हो
🌸जय माँ बनभोरी जी🌸

*इन नौ औषधियों में वास है नवदुर्गा का* *औषधी: सम्प्रवक्ष्यामि महारक्षा विधायिनी ।**महाकाली तथा चण्डी वाराही चेश्वरी तथा ...
02/04/2022

*इन नौ औषधियों में वास है नवदुर्गा का*

*औषधी: सम्प्रवक्ष्यामि महारक्षा विधायिनी ।*
*महाकाली तथा चण्डी वाराही चेश्वरी तथा ।।*
*सुदर्शना तथेन्द्रेणी गात्रास्या रक्षयन्ति तम् ।*
*बला चातिबला भीरूर्मुसली सहदेव्यपि ।।*
*जाती च मल्लिका यूथी गारुड़ी भृङ्गराजक:।*
*चक्ररूपा महौषध्यो धारिताविजयादिदा: ।।अग्निपुराण १२५/४३-४५*
मां दुर्गा नौ रूपों में अपने भक्तों का कल्याण कर उनके सारे संकट हर लेती हैं।

इस बात का जीता जागता प्रमाण है, संसार में उपलब्ध वे औषधियां,जिन्हें मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के रूप में जाना जाता है। नवदुर्गा के नौ औषधि स्वरूपों को सर्वप्रथम मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया गया। चिकित्सा प्रणाली का यह रहस्य वास्तव में ब्रह्माजी ने दिया था जिसे बारे में दुर्गाकवच में संदर्भ मिल जाता है। ये औषधियां समस्त प्राणियों के रोगों को हरने वाली हैं।

शरीर की रक्षा के लिए कवच समान कार्य करती हैं। इनके प्रयोग से मनुष्य अकाल मृत्यु से बचकर सौ वर्ष जी सकता है। आइए जानते हैं दिव्य गुणों वाली नौ औषधियों को जिन्हें नवदुर्गा कहा गया है।

१ प्रथम शैलपुत्री यानि हरड़👉 नवदुर्गा का प्रथम रूप शैलपुत्री माना गया है। कई प्रकारकी समस्याओं में काम आने वाली औषधि हरड़, हिमावती है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप हैं। यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है, जो सात प्रकार की होती है। इसमें हरीतिका (हरी) भय को हरने वाली है।

पथया - जो हित करने वाली है।
कायस्थ - जो शरीर को बनाए रखने वाली है।
अमृता - अमृत के समान
हेमवती - हिमालय पर होने वाली।
चेतकी -चित्त को प्रसन्न करने वाली है।
श्रेयसी (यशदाता)- शिवा यानी कल्याण करने वाली।

२ द्वितीय ब्रह्मचारिणी यानि ब्राह्मी👉 ब्राह्मी, नवदुर्गा का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी है। यह आयु और स्मरण शक्ति को बढ़ाने वाली, रूधिर विकारों का नाश करने वालीऔर स्वर को मधुर करने वाली है।

इसलिए ब्राह्मी को सरस्वती भी कहा जाता है। यह मन एवं मस्तिष्क में शक्ति प्रदान करती है और गैस व मूत्र संबंधी रोगों की प्रमुख दवा है। यह मूत्र द्वारा रक्त विकारों को बाहर निकालने में समर्थ औषधि है। अत: इन रोगों से पीड़ित व्यक्ति को ब्रह्मचारिणी कीआराधना करना चाहिए।

३ तृतीय चंद्रघंटा यानि चन्दुसूर👉 नवदुर्गा का तीसरा रूप है चंद्रघंटा, इसे चन्दुसूर या चमसूर कहा गया है। यह एक ऐसा पौधा है जो धनिये के समान है। इस पौधे की पत्तियों की सब्जी बनाई जाती है, जो लाभदायक होती है।

यह औषधि मोटापा दूर करने में लाभप्रद है, इसलिए इसे चर्महन्ती भी कहते हैं। शक्ति को बढ़ाने वाली, हृदय रोग को ठीक करने वाली चंद्रिका औषधि है। अत: इस बीमारी से संबंधित रोगी को चंद्रघंटा की पूजा करना चाहिए।

४ चतुर्थ कुष्माण्डा यानि पेठा👉 नवदुर्गा का चौथा रूप कुष्माण्डा है। इस औषधि से पेठा मिठाई बनती है, इसलिए इस रूप को पेठा कहते हैं।

इसे कुम्हड़ा भी कहते हैं जो पुष्टिकारक, वीर्यवर्धक व रक्त के विकार को ठीक कर पेट को साफ करने में सहायक है। मानसिकरूप से कमजोर व्यक्ति के लिए यह अमृत समान है। यह शरीर के समस्त दोषों को दूर कर हृदय रोग को ठीक करता है। कुम्हड़ा रक्त पित्त एवं गैस को दूर करता है। इन बीमारी से पीड़ितव्यक्ति को पेठा का उपयोग के साथ कुष्माण्डादेवी की आराधना करना चाहिए।

५ पंचम स्कंदमाता यानि अलसी👉 नवदुर्गा का पांचवा रूप स्कंदमाता है जिन्हें पार्वती एवं उमा भी कहते हैं। यह औषधि के रूप में अलसी में विद्यमान हैं। यह वात, पित्त, कफ, रोगों की नाशक औषधि है।

"अलसी नीलपुष्पी पावर्तती स्यादुमा क्षुमा।
अलसी मधुरा तिक्ता स्त्रिग्धापाके कदुर्गरु:।।
उष्णा दृष शुकवातन्धी कफ पित्त विनाशिनी।"
इस रोग से पीड़ित व्यक्ति ने स्कंदमाता की आराधना करना चाहिए।

६ षष्ठम कात्यायनी यानि मोइया👉 नवदुर्गा का छठा रूप कात्यायनी है। इसे आयुर्वेद में कई नामों से जाना जाता है जैसे अम्बा, अम्बालिका, अम्बिका। इसके अलावा इसे मोइया अर्थात माचिका भी कहते हैं। यह कफ, पित्त, अधिक विकार एवं कंठ के रोग का नाश करती है।
इससे पीड़ित रोगी को इसका सेवन व कात्यायनी की आराधना करनी चाहिए।

७ सप्तम कालरात्रि यानि नागदौन👉 दुर्गा का सप्तम रूप कालरात्रि है जिसे महायोगिनी, महायोगीश्वरी कहा गया है।

यह नागदौन औषधि केरूप में जानी जाती है। सभी प्रकार के रोगों की नाशक सर्वत्र विजय दिलाने वाली मन एवं मस्तिष्क के समस्त विकारों को दूर करने वाली औषधि है। इस पौधे को व्यक्ति अपने घर में लगाने पर घर के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। यह सुख देने वाली एवं सभी विषों का नाश करने वाली औषधि है। इस कालरात्रि की आराधना प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को करना चाहिए।

८ अष्टम महागौरी यानि तुलसी👉 नवदुर्गा का अष्टम रूप महागौरी है, जिसे प्रत्येक व्यक्ति औषधि के रूप में जानता है क्योंकि इसका औषधि नाम तुलसी है जो प्रत्येक घर में लगाई जाती है। तुलसी सात प्रकार की होती है- सफेद तुलसी, काली तुलसी, मरुता, दवना, कुढेरक, अर्जक और षटपत्र।
ये सभी प्रकार की तुलसी रक्त को साफ करती है एवं हृदय रोग का नाश करती है।

"तुलसी सुरसा ग्राम्या सुलभा बहुमंजरी।
अपेतराक्षसी महागौरी शूलघ्नी देवदुन्दुभि:
तुलसी कटुका तिक्ता हुध उष्णाहाहपित्तकृत् ।
मरुदनिप्रदो हध तीक्षणाष्ण: पित्तलो लघु:।"
इस देवी की आराधना हर सामान्य एवं रोगी व्यक्ति को करना चाहिए।

९ नवम सिद्धिदात्री यानि शतावरी👉 नवदुर्गा का नवम रूप सिद्धिदात्री है, जिसे नारायणी याशतावरी कहते हैं। शतावरी बुद्धि बल एवं वीर्य के लिए उत्तम औषधि है। यह रक्त विकार एवं वात पित्त शोध नाशक और हृदय को बल देने वाली महाऔषधि है।

सिद्धिदात्री का जो मनुष्य नियमपूर्वक सेवन करता है। उसके सभी कष्ट स्वयं ही दूर हो जाते हैं। इससे पीड़ित व्यक्ति को सिद्धिदात्री देवी की आराधना करना चाहिए। इस प्रकार प्रत्येक देवी आयुर्वेद की भाषा में मार्कण्डेय पुराण के अनुसार नौ औषधि के रूप में मनुष्य की प्रत्येक बीमारी को ठीक कर रक्त का संचालन उचित एवं साफ कर मनुष्य को स्वस्थ करती है। अत: मनुष्य को इनकी आराधना एवं सेवन करना चाहिए।

*या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।*
*नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।*
*सर्व मंगलम मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।*
*शरण्ये त्रयम्ब्के गौरी नारायणी नमो स्तुते।।*

01/04/2022

¸.•*""*•.¸नवरात्रि के इस पावन पर्व पर आप सभी को ढेर सारी शुभकामनाये ¸.•*""*•.¸
माँ तुम आओ 🙏 तुम्हारा स्वागत है
सिंह की सवार बनकर
रंगों की फुहार बनकर
पुष्पों की बहार बनकर
सुहागन का श्रंगार बनकर 💎
खुशियाँ अपार बनकर
रसोई में प्रसाद बनकर
रिश्तों में प्यार बनकर
बच्चों का दुलार बनकर
व्यापार में लाभ बनकर
समाज में संस्कार बनकर
तुम्हारे आने से सभी सुख खुद ही चले आयेंगे
तुम्हारे दास बनकर
माँ तुम आओ
जल्दी आओ
🙏स्वागत है 🙏🌺🚩💐
जय माँ बनभौरी 🚩🌺🙏

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