Jat जाट Jatt ਜੱਟ Jutt جٹ - Sakas

Jat जाट Jatt ਜੱਟ Jutt جٹ - Sakas Welcome to all Jat/Jatt/Jutt/کہانی. A step to bring together Jats from all across the World.

International JAT Day ..
13/04/2025

International JAT Day ..

13/08/2024

Arshad Nadeem Sukhera Jat

नहीं रहे हमारे बीच एक  बड़ी जाट  शख़्सियत kunwar natwar Singh ( भरतपुर) कल  10 अगस्त को उनका निधन (गुड़गाँव) हो gaya यह ...
11/08/2024

नहीं रहे हमारे बीच एक बड़ी जाट शख़्सियत kunwar natwar Singh ( भरतपुर) कल 10 अगस्त को उनका निधन (गुड़गाँव) हो gaya यह एक IFS or former foreign Minister रह चुके हैं और यह Amrinder Singh (पूर्व CM पंजाब के ) जीजा जी थे
Om Shanti 🌸🙏🏻🌸

"ਸਾਡੇ ਵਿਚਕਾਰ ਵੱਡੀ ਜੱਟ ਸ਼ਖਸੀਅਤ ਕੁਵਰ ਨਟਵਰ ਸਿੰਘ (ਭਰਤਪੁਰ) ਹੁਣ ਨਹੀਂ ਰਹੇ। ਕੱਲ੍ਹ 10 ਅਗਸਤ ਨੂੰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਨਿਧਨ (ਗੁੜਗਾਂਵ) ਹੋ ਗਿਆ। ਉਹ ਇੱਕ IFS ਅਤੇ ਪੂਰਵ ਵਿਦੇਸ਼ ਮੰਤਰੀ ਰਹਿ ਚੁੱਕੇ ਹਨ ਅਤੇ ਅਮਰਿੰਦਰ ਸਿੰਘ (ਪੂਰਵ CM ਪੰਜਾਬ) ਦੇ ਜੀਜਾ ਜੀ ਸਨ।
ਓਮ ਸ਼ਾਂਤੀ 🌸🙏🏻🌸"

"ہمارے درمیان ایک بڑی جاٹ شخصیت کنور نٹور سنگھ (بھرت پور) اب نہیں رہے۔ کل 10 اگست کو ان کا انتقال (گڑگاؤں) میں ہو گیا۔ وہ ایک IFS اور سابق وزیر خارجہ رہ چکے ہیں اور امریندر سنگھ (سابق وزیراعلیٰ پنجاب) کے جیجا جی تھے۔
اوم شانتی 🌸🙏🏻🌸"

महान जाट दौड़- अपनी अंतिम सांस पर आज के समय जाटों को इतना तो पता है कि भैस,गाय,कुत्ता,बिल्ली के लिए और घोड़े के लिए कौन ...
28/09/2023

महान जाट दौड़- अपनी अंतिम सांस पर

आज के समय जाटों को इतना तो पता है कि भैस,गाय,कुत्ता,बिल्ली के लिए और घोड़े के लिए कौन सी ब्रीड देखनी है । पर अपने युवा बच्चो के लिए वैवाहिक रिश्तों में क्या देखें? इसके लिए कोई दिमाग ही नहीं है!

पशुओं की नस्लों की डिटेल जाट की उंगलियों पर लिखी है। जिसने घोड़ा भी नहीं रखा वो भी मजुका रुस्तम की सारी पीढ़ियों को जानता है।

गाय,भैंस जिससे सिर्फ दूध ही लेना है। सींगों से लेकर पूंछ के बाल तक गिनने वाले तबके को ऐसा क्या हुआ कि अपने खून,डीएनए नस्लों के प्रति लापरवाह और बेदिमाग हो गया है। वैवाहिक रिश्ते शादी.कॉम पर होने लगे। या बच्चो ने मां बाप को शारीरिक संबंधों की मनपसंद दौड़ के चलते फैसलों के हक से बेदखल कर दिया है।

आपके बुजुर्ग हमेशा से जानते थे कि सांसारिक जीवन की दौड़ में नस्ल (डीएनए) से ऊपर कुछ नहीं है। लेकिन आज सदियों बाद बनी पीढ़ी चार नौकरियों के बदले किराए पर मिलेंगी। तू वही जाट है जो कहा करता था घोड़े सिर्फ नस्ल से बनते है। क्या कभी खच्चरों की अमीर परवरिश करने से खच्चर, घोड़े बन सकते है?

जिंदगी भर अमीरी का सर्टिफिकेट बना कर सुविधा भोगने वाले, तू अपनी नस्ल के लिए इतना लापरवाह क्यों है? अब घरों में महिलाऐं, बच्चे तेरी नही सुनते।

भाईयो उदारवादी पूंजीवाद से कोई भविष्य तैयार नहीं होगा?बच्चो के मनपसंद सेक्स को छूट देकर कोई खुशहाली नही आयेगी। अंत में अपनी जमीन और जायदाद बेचनी पड़ती है। अदालतों में अभी भी कम भीड़ है। अगर नस्ल अच्छी नहीं होगी!जवानी अच्छी नही होगी!परिवार में कुछ भी अच्छा नहीं बचेगा।

घोड़ा सिर्फ नस्ल से ही बनेगा। पैसे और उदारवाद से खच्चर कभी भी घोड़ा नही बन सकता।

पहले नस्लें फिर फसलें यही समस्या है,यही समाधान है।

ਅੱਜ- ਕੱਲ੍ਹ ਜੱਟਾਂ ਨੂੰ ਪਤਾ ਹੈ ਕਿ ਮੱਝ, ਗਾਂ, ਕੁੱਤਾ, ਬਿੱਲੀ ਅਤੇ ਘੋੜੇ ਲਈ ਕਿਹੜੀ ਨਸਲ ਦੀ ਭਾਲ ਕਰਨੀ ਹੈ। ਪਰ ਆਪਣੇ ਛੋਟੇ ਬੱਚਿਆਂ ਲਈ ਵਿਆਹੁਤਾ ਰਿਸ਼ਤੇ ਵਿੱਚ ਕੀ ਵੇਖਣਾ ਹੈ? ਇਸ ਲਈ ਕੋਈ ਦਿਮਾਗ ਨਹੀਂ ਹੈ!

ਜਾਨਵਰਾਂ ਦੀਆਂ ਨਸਲਾਂ ਦਾ ਵੇਰਵਾ ਜੱਟਾਂ ਦੀਆਂ ਉਂਗਲਾਂ 'ਤੇ ਲਿਖਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਜਿਸ ਨੇ ਘੋੜਾ ਵੀ ਨਹੀਂ ਰੱਖਿਆ, ਉਹ ਵੀ ਮਜੂਕਾ ਰੁਸਤਮ ਦੀਆਂ ਸਾਰੀਆਂ ਪੀੜ੍ਹੀਆਂ।

ਜਾਣਦਾ ਹੈ।

ਗਾਂ, ਮੱਝ ਜਿਸ ਤੋਂ ਸਿਰਫ਼ ਦੁੱਧ ਹੀ ਲੈਣਾ ਹੈ। ਸਿੰਗਾਂ ਤੋਂ ਪੂਛ ਤੱਕ ਵਾਲ ਗਿਣਨ ਵਾਲੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਕੀ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਆਪਣੇ ਖੂਨ ਅਤੇ ਡੀਐਨਏ ਨਸਲਾਂ ਪ੍ਰਤੀ ਲਾਪਰਵਾਹ ਅਤੇ ਬੇਪਰਵਾਹ ਹੋ ਗਏ ਹਨ? ਸ਼ਾਦੀ ਡਾਟ ਕਾਮ 'ਤੇ ਵਿਆਹੁਤਾ ਰਿਸ਼ਤੇ ਹੋਣ ਲੱਗੇ। ਜਾਂ ਬੱਚਿਆਂ ਨੇ ਸਰੀਰਕ ਸਬੰਧਾਂ ਨੂੰ ਤਰਜੀਹ ਦੇ ਕੇ ਆਪਣੇ ਮਾਪਿਆਂ ਨੂੰ ਫੈਸਲੇ ਲੈਣ ਦੇ ਅਧਿਕਾਰ ਤੋਂ ਬੇਦਖਲ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਹੈ।

ਤੁਹਾਡੇ ਬਜ਼ੁਰਗ ਹਮੇਸ਼ਾ ਜਾਣਦੇ ਸਨ ਕਿ ਸੰਸਾਰਕ ਜੀਵਨ ਦੀ ਦੌੜ ਦੌੜ (DNA) ਤੋਂ ਉਪਰ ਕੁਝ ਵੀ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਪਰ ਅੱਜ ਸਦੀਆਂ ਬਾਅਦ ਬਣੀ ਪੀੜ੍ਹੀ ਨੂੰ ਚਾਰ ਨੌਕਰੀਆਂ ਦੇ ਬਦਲੇ ਕਿਰਾਇਆ ਮਿਲੇਗਾ। ਤੁਸੀਂ ਉਹੀ ਜੱਟ ਹੋ ਜੋ ਕਹਿੰਦੇ ਸਨ ਕਿ ਘੋੜੇ ਨਸਲਾਂ ਨਾਲ ਹੀ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦੇ ਹਨ। ਕੀ ਖੱਚਰਾਂ ਨੂੰ ਅਮੀਰ ਬਣਾ ਕੇ ਘੋੜੇ ਬਣ ਸਕਦੇ ਹਨ?

ਤੁਸੀਂ ਆਪਣੀ ਨਸਲ ਪ੍ਰਤੀ ਇੰਨੇ ਲਾਪਰਵਾਹ ਕਿਉਂ ਹੋ, ਜੋ ਸਾਰੀ ਉਮਰ ਧਨ- ਦੌਲਤ ਦਾ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਬਣਾ ਕੇ ਲਾਭ ਉਠਾਉਂਦੇ ਹਨ? ਹੁਣ ਘਰ ਦੀਆਂ ਔਰਤਾਂ ਅਤੇ ਬੱਚੇ ਤੁਹਾਡੀ ਗੱਲ ਨਹੀਂ ਸੁਣਦੇ।

ਭਾਈਓ, ਕੀ ਉਦਾਰ ਪੂੰਜੀਵਾਦ ਕੋਈ ਭਵਿੱਖ ਨਹੀਂ ਸਿਰਜੇਗਾ? ਬੱਚਿਆਂ ਦੇ ਮਨਪਸੰਦ ਸੈਕਸ ਨੂੰ ਛੋਟ ਦੇਣ ਨਾਲ ਕੋਈ ਖੁਸ਼ਹਾਲੀ ਨਹੀਂ ਆਵੇਗੀ। ਅੰਤ ਨੂੰ ਆਪਣੀ ਜ਼ਮੀਨ ਅਤੇ ਜਾਇਦਾਦ ਵੇਚਣੀ ਪੈਂਦੀ ਹੈ। ਅਦਾਲਤਾਂ ਵਿੱਚ ਅਜੇ ਵੀ ਭੀੜ ਘੱਟ ਹੈ। ਜੇ ਨਸਲ ਚੰਗੀ ਨਹੀਂ ਹੋਵੇਗੀ! ਜਵਾਨੀ ਚੰਗੀ ਨਹੀਂ ਰਹੇਗੀ! ਪਰਿਵਾਰ ਵਿੱਚ ਕੁਝ ਵੀ ਚੰਗਾ ਨਹੀਂ ਬਚੇਗਾ।

ਘੋੜਾ ਸਿਰਫ ਪ੍ਰਜਨਨ ਦੁਆਰਾ ਬਣਾਇਆ ਜਾਵੇਗਾ. ਪੈਸੇ ਅਤੇ ਉਦਾਰਵਾਦ ਨਾਲ ਖੱਚਰ ਕਦੇ ਘੋੜਾ ਨਹੀਂ ਬਣ ਸਕਦਾ।

ਪਹਿਲਾਂ ਨਸਲਾਂ ਫਿਰ ਫਸਲਾਂ, ਇਹ ਹੈ ਸਮੱਸਿਆ, ਇਹ ਹੈ ਹੱਲ।

آج جاٹ جانتے ہیں کہ بھینس، گائے، کتے، بلی اور گھوڑے کے لیے کونسی نسل تلاش کرنی ہے۔ لیکن اپنے چھوٹے بچوں کے لیے ازدواجی تعلقات میں کیا دیکھنا چاہیے؟ اس کے لیے کوئی دماغ نہیں ہے!

جانوروں کی نسلوں کی تفصیلات جاٹوں کی انگلیوں پر لکھی جاتی ہیں۔ جس نے گھوڑا بھی نہ رکھا وہ بھی مجوکہ رستم کی ساری نسلیں

جانتا ہے۔

گائے، بھینس جس سے صرف دودھ لینا ہے۔ سینگوں سے لے کر دم تک بال گننے والوں کو کیا ہو گیا ہے کہ وہ اپنے خون اور ڈی این اے کی نسل سے لاپرواہ اور بے فکر ہو گئے ہیں؟ شادی ڈاٹ کام پر ازدواجی تعلقات ہونے لگے۔ یا بچوں نے جسمانی تعلقات کو ترجیح دینے کی وجہ سے اپنے والدین کو فیصلے کرنے کے حق سے بے دخل کر دیا ہے۔

آپ کے بزرگ ہمیشہ جانتے تھے کہ دنیاوی زندگی کی دوڑ دوڑ ‏(DNA) سے بڑھ کر کچھ نہیں ہے۔ لیکن آج صدیوں بعد بننے والی نسل کو چار نوکریوں کے بدلے کرایہ ملے گا۔ تم وہی جاٹ ہو جو کہتے تھے کہ گھوڑے صرف نسل سے بنتے ہیں۔ کیا خچروں کو مالا مال کر کے گھوڑے بن سکتے ہیں؟

آپ اپنی نسل کے بارے میں اتنے لاپرواہ کیوں ہیں جو زندگی بھر دولت کا سرٹیفکیٹ بنانے کے ثمرات حاصل کرتے ہیں؟ اب گھر کی عورتیں اور بچے آپ کی بات نہیں سنتے۔

بھائی، کیا لبرل سرمایہ داری کوئی مستقبل نہیں بنائے گی؟ بچوں کی پسندیدہ جنس کو چھوٹ دینے سے خوشحالی نہیں آئے گی۔ آخر کار اپنی زمین اور جائیداد بیچنی پڑتی ہے۔ عدالتوں میں اب بھی کم ہجوم ہے۔ نسل اچھی نہیں ہوگی تو! جوانی اچھی نہیں رہے گی! خاندان میں کوئی اچھی چیز باقی نہیں رہے گی۔

گھوڑا صرف افزائش نسل سے پیدا ہوگا۔ پیسے اور لبرل ازم سے خچر کبھی گھوڑا نہیں بن سکتا۔

پہلے نسلیں پھر فصلیں، یہی مسئلہ ہے، یہی حل ہے۔


13/09/2023

 #मेवात_का_इतिहास मेव अपने आप को  मुसलमान नही मेव कहलाना पसंद करते है। जानिए आखिर क्यों ?मेवात के मेव समाज के बारे में ल...
05/08/2023

#मेवात_का_इतिहास
मेव अपने आप को मुसलमान नही मेव कहलाना पसंद करते है। जानिए आखिर क्यों ?
मेवात के मेव समाज के बारे में लोगो को बहुत कम जानकारी है। मेवात में 9वी 10वी शताब्दी के आस पास, राजपूतों के उदय से पहले। मेवाल गोत्र के राजाओं का शासन था। इसलिए इस क्षेत्र का नाम मेवात पड़ा। यहां के लोगो को मेव कहा जाता था। ये मेव शब्द उनको अपने अतीत से जोड़े रखता है। इसलिए मेव अपने आप को मुसलमान कहलाना पंसद नही करते। वे अपने आप को मेव कहलाना ज्यादा पसंद करते है। मुसलमान तो उनको हिंदुओं ने बनाया है। हिंदुओं ने मेवो को मुसलमानों की तरफ धकेला है। मेव भारत का एक ऐसा समाज है जो हिंदू-मुस्लिम धर्म, संस्कृति दोनो को एक साथ जिया है और निभाया भी है। मेव समाज हिन्दू-मुस्लिम एकता, भाईचारे की कड़ी है। ये लगभग 1992 तक ईद के साथ साथ होली भी खेलते थे, दिवाली भी मनाते थे। हिन्दुओं के लगभग सभी त्योहार हर्षो उल्लास के साथ मनाते थे। शादी में निकाह भी पढ़ते थे और फेरे भी लेते थे। इनकी पुरानी पीढ़ी के नाम भी मंगल खां, शेरू खां, कालू खां आदि हिन्दू मुस्लिम मिक्स नाम होते थे। दाढ़ी मूंछ हिन्दुओं की तरह ही रखते थे। पहनावे में पुरुष धोती कुर्ता साफा पहनते थे।
1992 के हिंदू मुस्लिम दंगो में इन्होंने महसूस किया की ना तो हिंदू अपना समझ रहे है और ना मुस्लिम। दोनो की नफरत का शिकार कब तक होते रहेंगे। उनको लगा की अब कही एक साइड हो जाना चाहिए। हिन्दू उनको अपना नही रहे थे, मुसलमानों में वे जाना नही चाह रहे थे। हिन्दुओं ने इनके घर वापसी का कोई प्रयास किया नही, मुस्लिम संस्थाओं ने इनके लिए दरवाजे खोल दिए।
1992 के बाद से इनके पहनावे, नामकरण, रितिरिवाजो में तेजी से बदलाव आया। मेवात का मेव समाज मीना, जाट, गुर्जर, अहीर, राजपूत और अन्य समाजों से बना हुआ है। मेव समाज अभी भी अपने बच्चो की शादी मुसलमानों में नही करते, मेवों में ही करते है। चाचा, ताऊ के बच्चो के साथ शादी नही करते है और ये तीन गोत्र टालते है। इन्होंने निश्चित कर रखा है की किन गोत्रो में शादी करनी है, किन में नही करनी।
मेवों का इतिहास बहुत ही शानदार और गौरवपूर्ण रहा है। मेवों को एक देशभक्त कौम के रूप में जाना जाता है। लेकिन विडंबना है कुटिल मानसिकता वाले लोग मेवों को भारत की प्राचीन संस्कृति और भाईचारे से पहले भी दूर धकेला गया और आज भी धकेलते जा रहे है। बाहरी मुस्लिम हो, अंग्रेज हो, या कोई ओर, किसी भी बाहरी अक्रांता और आततायियों का मेवों ने मुंहतोड़ जवाब दिया है। आक्रांताओं से संघर्ष में इस समाज ने अपना बहुत कुछ खोया है।
दिल्ली से महज 90 किलोमीटर की दूरी पर होते हुए भी विकास यहां से कोसो दूर है। गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, असुरक्षा की भावना चरम पर है। बेरोजगारी और अशिक्षा की वजह से यहां के युवा अपराध की तरफ बढ़ गए। ना सरकार ने मेवात की तरफ ध्यान दिया, ना हिन्दू मुसलमानों ने इनको अपना समझकर इनका विकास करने में मदद की। निरन्तर खतरा और असुरक्षा की भावना, गरीबी, बेरोजगारी निरंतर इनको अपराध की तरफ धकेल रही है।
मेरे हिन्दुस्तान के लोगो से निवेदन है कि मेवों को मेव ही रहने दो और मेवात को मेवात। मिनी पाकिस्तान का ठप्पा लगाकर अपने ही खून के हिस्से को उपहार स्वरूप पाकिस्तान को भेंट ना करो दोस्तों।
धर्म के नाम पर गन्दी राजनीति के नफरती खेल मत रंगो अपने हिन्दुस्तान की सरजमी को। भारत की इस सरजमी के हम सभी भारतवासी बराबर के हिस्सेदार है, इसे किसी एक की बापौती मत समझो।
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, किसान, दलित, आदिवासी के बलिदानी खून से छपा पड़ा है इस सरजमी पर, सब बराबर हिस्सेदार है इस मिट्टी के।
यह समय लड़ने झगड़ने का नही है। समय है सबकी उन्नति, सबका विकास और एक दूसरे के सुख दुख में सामिल होकर आपस में भाई-चारा व प्रेम बढ़ाने का !!
🙏

24/06/2023

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