23/04/2026
*चुनावी परिपेक्ष में सबसे ज्यादा शोषण किसान का किया गया चाहे वो फसल की खेती करता हो या फिर अपने अपने परिवार का पालन पोषण नुकसान भी सब से ज्यादा धरती मां और परिवार परम्परा का हुआ है विजय क्रूर शासक की हुई है*
1. राजा, रजवाड़े, सामंतवादी समय में शासक जमीन बलपूर्वक कब्जा कर पट्टे पर जमीन लोगों को खेती के लिय दे कर किसान का नाम दिया जाता था और जबरी प्रकृति आपदाओं के बावजूद कर के रूप में वसूली की जाती थी किसान राजा, रजवाड़े, सामंतों से दुखी और विरोध में रहता था परिणाम स्वरूप जब विदेशी आक्रमणकारियों ने आक्रमण किया उस ने साथ नहीं दिया
2. जब विदेशी आक्रमणकारियों ने अपनी सत्ता बनाई तब उसी किसान ने उन को उखाड़ फेंका अंग्रेज, मुगल, मंगोल, यूनानी सब को मात थी समय समय पर और 1947 में कुर्बानियां देने वाले क्रांतिकारियों को धोखा दे धूर्त विदेशो से पड़ेलिखे वकीलों ने तर्क वितर्क के नाम सत्ता पर कब्जा किया 1885 में कांग्रेस, उस के बाद राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ 1925 में और जिन्ना की मुस्लिम लीग ने दो मुल्क बना लोकतांत्रिक व्यस्था की स्थापना की 1947.
3. उन्होंने पट्टे पर दी जमीन को किसानों को तो सौंप दी, कर भी नहीं लिया किंतु झूठे भरोसे में ले किसानों का शोषण का अलग तरीका निकला किसानों की फसल का दाम सरकार तह करेगी किन्तु उद्योग से उत्पादन का दाम यह उद्योगपति करेगें उद्योगों के मालिकों के साथ मिल इक ऐसा कुचक्र रचा व्यापारिकरण के नाम पर की किसान को 6000 प्रति माह रिश्वत और परिवारों की मुखिया में दरार डाल महिलाओं को 2100 या 10000 रुपए बिहार में दे कर उनके बुनियादी हकों न्याय, स्वास्थ, शिक्षा से दूर रखने के लिय भेदभाव वाले आरक्षण की नीति रख राजनीतिक की व्याख्या ही अलग ढंग से कर दी आज किसान चाहे खेती धरती मां पर पर परिवार पालने के लिय कर रहा हो या फिर मानव उद्योगों में काम कर नए शहरों में उद्योगपतियों की गुलामी कर रहा हो इक ऐसे व्यापारियों, वकीलों के कुचक्र में फंस चुका है कि युग के चौथे चक्र में विशेष रूप से समाज से विश्वास ही लुप्त हो चुका है
ध्यान देने योग बात है उद्योगपति अपने प्रोडक्ट का मूल्य खुद तह करेगें क्योंकि वहां से सरकार को टैक्स आता किंतु उद्योगों में काम करने वाले की पगार सरकार तह करेगी
किसान अपनी खेती खुद करेगा किंतु उस की फसल का मुख्य व्यापारी और सरकार तह करेगी
फर्क सिर्फ इतना है जो जमीन किसान के पास पट्टे पर फसल बोने के लिय थी उस का मालिक किसान है किंतु फसल का मोल आज भी सरकार और व्यापारी मिल कर तह करते है
निगम चुनाव में अंधभक्त मिल वोट पार्टी को मत डालना व्यक्ति को देख कर डालना पार्टियां ही आप के हक़्क़ों का हनन कर रही है
चंद शब्दों में आज भी गुलाम है सिर्फ दशकों के बाद शासकों के लिबास बदल गए है पहले राजा, रजवाड़े, सामंत होते थे आज कल प्रधान मंत्री, मुख्यमंत्री, महापौर होते है
आजादी की सुबह जब आयेंगे जब शासक धन के बल, धार्मिक उन्माद फैलाने वाला, समाज में भेदभाव फैलाने वाले आरक्षण का प्रचारक नहीं बल्कि महाराजा रणजीत सिंह जी की तरह रात को भेद बदल प्रजा का हाल जानने वाला उस का मित्र शासक होगा
राजेश गौतम