सर्व ब्राह्मण महासभा

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निम्न लिखित गुणों को धारण कर ही ब्रह्मांड में हर ब्राह्मण मार्ग दर्शक की भूमिका ग्रहण करेगा

रिजुः तपस्वी सन्तोषी क्षमाशीलो जितेन्द्रियःदाता शूर दयालुश्च अभय ब्राह्मणाे नवभिर्गुणै

पूर्ण विश्वास से शास्त्र से शस्त्र, शक्ति से शांति का मार्ग प्रशस्त होगा

पंच तत्व जमी, आकाश, जल, वायु और अग्नि से बना शरीर इन्हीं पंच तत्वों से जो पंच निर्गुण काम, क्रोध, मोह, लोभ ओर अहंकार हास...
28/07/2026

पंच तत्व जमी, आकाश, जल, वायु और अग्नि से बना शरीर इन्हीं पंच तत्वों से जो पंच निर्गुण काम, क्रोध, मोह, लोभ ओर अहंकार हासिल करता है उन को अपनी आत्मा की शक्ति से इस्तेमाल कर अपना जीवन सफल कर सकता है इन का इस्तेमाल करते समय कर्म में छिपे भाव ही उस के सुख या दुख का कारण बनते है यही ईश्वरीय माया है जो समझ गया सुखी हो गया जो नासमझ दुखी हो गया उन्हीं भावों से किय का उस के धारण शरीर के सुख और दुख का कारण बनते है मानव का स्वभाव बन कर राजेश गौतम 28 जुलाई 2026

ब्राह्मण समाज को इक स्टेज पर आना बहुत आवश्यक है आप युग निर्माता हो अपने शौर्य को पहचाने राजेश गौतम9855733447
27/07/2026

ब्राह्मण समाज को इक स्टेज पर आना बहुत आवश्यक है आप युग निर्माता हो अपने शौर्य को पहचाने

राजेश गौतम
9855733447

27/07/2026
23/04/2026

*चुनावी परिपेक्ष में सबसे ज्यादा शोषण किसान का किया गया चाहे वो फसल की खेती करता हो या फिर अपने अपने परिवार का पालन पोषण नुकसान भी सब से ज्यादा धरती मां और परिवार परम्परा का हुआ है विजय क्रूर शासक की हुई है*

1. राजा, रजवाड़े, सामंतवादी समय में शासक जमीन बलपूर्वक कब्जा कर पट्टे पर जमीन लोगों को खेती के लिय दे कर किसान का नाम दिया जाता था और जबरी प्रकृति आपदाओं के बावजूद कर के रूप में वसूली की जाती थी किसान राजा, रजवाड़े, सामंतों से दुखी और विरोध में रहता था परिणाम स्वरूप जब विदेशी आक्रमणकारियों ने आक्रमण किया उस ने साथ नहीं दिया
2. जब विदेशी आक्रमणकारियों ने अपनी सत्ता बनाई तब उसी किसान ने उन को उखाड़ फेंका अंग्रेज, मुगल, मंगोल, यूनानी सब को मात थी समय समय पर और 1947 में कुर्बानियां देने वाले क्रांतिकारियों को धोखा दे धूर्त विदेशो से पड़ेलिखे वकीलों ने तर्क वितर्क के नाम सत्ता पर कब्जा किया 1885 में कांग्रेस, उस के बाद राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ 1925 में और जिन्ना की मुस्लिम लीग ने दो मुल्क बना लोकतांत्रिक व्यस्था की स्थापना की 1947.
3. उन्होंने पट्टे पर दी जमीन को किसानों को तो सौंप दी, कर भी नहीं लिया किंतु झूठे भरोसे में ले किसानों का शोषण का अलग तरीका निकला किसानों की फसल का दाम सरकार तह करेगी किन्तु उद्योग से उत्पादन का दाम यह उद्योगपति करेगें उद्योगों के मालिकों के साथ मिल इक ऐसा कुचक्र रचा व्यापारिकरण के नाम पर की किसान को 6000 प्रति माह रिश्वत और परिवारों की मुखिया में दरार डाल महिलाओं को 2100 या 10000 रुपए बिहार में दे कर उनके बुनियादी हकों न्याय, स्वास्थ, शिक्षा से दूर रखने के लिय भेदभाव वाले आरक्षण की नीति रख राजनीतिक की व्याख्या ही अलग ढंग से कर दी आज किसान चाहे खेती धरती मां पर पर परिवार पालने के लिय कर रहा हो या फिर मानव उद्योगों में काम कर नए शहरों में उद्योगपतियों की गुलामी कर रहा हो इक ऐसे व्यापारियों, वकीलों के कुचक्र में फंस चुका है कि युग के चौथे चक्र में विशेष रूप से समाज से विश्वास ही लुप्त हो चुका है

ध्यान देने योग बात है उद्योगपति अपने प्रोडक्ट का मूल्य खुद तह करेगें क्योंकि वहां से सरकार को टैक्स आता किंतु उद्योगों में काम करने वाले की पगार सरकार तह करेगी
किसान अपनी खेती खुद करेगा किंतु उस की फसल का मुख्य व्यापारी और सरकार तह करेगी

फर्क सिर्फ इतना है जो जमीन किसान के पास पट्टे पर फसल बोने के लिय थी उस का मालिक किसान है किंतु फसल का मोल आज भी सरकार और व्यापारी मिल कर तह करते है

निगम चुनाव में अंधभक्त मिल वोट पार्टी को मत डालना व्यक्ति को देख कर डालना पार्टियां ही आप के हक़्क़ों का हनन कर रही है

चंद शब्दों में आज भी गुलाम है सिर्फ दशकों के बाद शासकों के लिबास बदल गए है पहले राजा, रजवाड़े, सामंत होते थे आज कल प्रधान मंत्री, मुख्यमंत्री, महापौर होते है

आजादी की सुबह जब आयेंगे जब शासक धन के बल, धार्मिक उन्माद फैलाने वाला, समाज में भेदभाव फैलाने वाले आरक्षण का प्रचारक नहीं बल्कि महाराजा रणजीत सिंह जी की तरह रात को भेद बदल प्रजा का हाल जानने वाला उस का मित्र शासक होगा

राजेश गौतम

20/04/2026

*कहानी भारत देश की पिछले 150 सोलर दिनों की कुछ लोग इसको तरक्की कहते है हाल ही में प्रकृति ने क्रोना में दिखाया था छोटा सा ट्रेलर*

कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 में इक अंग्रेज ने की जिस का पालन पोषण विदेशों से पड़े लिखे नामी वकीलों ने किया जैसे नेहरू, गांधी, आंबेडकर, वल्लभ भाई पटेल और अनेक नाम विदेश से पड़े लिखे वकील

राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ की स्थापना कुछ हिंदू विचारधारा वालों ने 27 सितम्बर 1925 में की जिस की धारा से जनसंघ और फिर भाजपा जैसी हिंदूवादी विचारधारा की पार्टियों का जन्म हुआ

दोनों ने ग्रोथ के नाम पर सब से ज्यादा घात प्रकृति, मातृभूमि, सनातन विश्व कुटुम्बत्व की मूल भावना को किया कैसे

आज आप सड़क पर पैदल चल नहीं सकते घर के अंदर भी बिना एयरकंडीशनर के बैठ नहीं सकते शरीर की क्षीण होती ऊर्जा के पीछे औद्योगिकरण के नाम पर किया प्रदूषण है शरीर की ऊर्जा ऑक्सीजन है जिस का प्रोडक्शन पेड़ पौधे करते है और आज विकास के लिय औद्यकीकरण के नाम पर सब से ज्यादा नुकसान पेड़ पौधों का किया गया है

शरीर के ऊर्जा प्राप्त करने के व्यतीत धन से कही ज्यादा धन जीवन को संचालित करने वाले विकास के नाम पर उत्पन्न औद्यकीकरण के तंत्र गाड़ी, बिजली, टेलीकॉम पर व्यतीत करना पड़ता था जो कभी लक्जरी होता था आज जरूरत हो गया है

राजनीतिक व्यक्ति प्रकृति के विरुद्ध जा कर आज लोगों आरक्षण जैसे मुद्दों पर उलझा रहे है और अब बात प्रकृति में मानव की जननी नारी शक्ति तक आप पहुंची है और जनता भी प्रकृति और नारी दोनों के नाम पर होता वाक्य युद्ध देख रही चुपचाप

जिस व्यक्ति ने अपने को जन्म देने वाली और जीवन की अर्धांगिनी के साथ न्याय नहीं किया वो संपूर्ण नारी जाती को आरक्षण द्वारा न्याय दिलाने के बात कर रहा है और लोग खूब पागलों की तरह ताली पीट रहे है ये वो ही राम भक्त है जिन राम जी ने अपनी गर्भवती अर्द्धांगिनी सीता मां को जंगल भेज दिया था कुछ लोगों में सत्य सहने की और बोलने की शक्ति नहीं होती सिर्फ झूठ झूठ अच्छा लगता है

ऊपर लिखे शब्दों में छिपी छोटी सी बात की मृत्युलोक में प्रकृति के नियमों को सम्मान न देने वाले नारी, शक्ति, प्रकृति को न्याय देने की ताल ठोक रहे है

शोध करो शब्दों में सत्यता है या फिर झूठ कहते है आदमी ने जीवन कैसे जीया वो हाईवस के चरित्र को दर्शाता है शब्द चक्रव्यू जो रचते है सत्य गुम हो जाता है

राजेश गौतम

19/04/2026

Brahma Kumaris सर्व ब्राह्मण महासभा

19/04/2026

असली ब्राह्मण सनातन विचारधारा में विश्वास रखते है कुछ ढोंगी जरूरी जाति के चक्र में पड़ अपने पूर्वजों को बदनाम करते है ब्राह्मण जन्म से मिलना सौभाग्य है किंतु असली ब्राह्मण वो ही होता है जो कर्म से ब्राह्मण हो और ब्राह्मण के नौ सद्गुणों *रिजुता (सरलता), तपस्वी, संतोषी, क्षमाशील, जितेन्द्रिय (इंद्रिय विजय), दाता (दानी), शूर (धैर्यवान/वीर), दयालु और ब्रह्मज्ञानी* पर चल अपना मृत्युलोक में अपना जीवन सफल बनाये

विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी के जीवन से यही शिक्षा मिलती है अन्याय के खिलाफ युद्ध में सर्वस्त्र नचावर करने से भयभीत न हो भय के परे ही जीत है

परशुराम जयंती की सभी सनातन भाई बहन को बहुत बहुत बधाई और आशीर्वाद

राजेश गौतम

18/04/2026

*कुर्सी के मोहपाश में कुछ इस तरह बंध गए मोदी*
*सब का विकास सब का विश्वाश पाने के लिय राजू*
*आरक्षण को सीढ़ी बना आस्मां पाने की कोशिश में*
*जननी, मातृभूमि का जख्मी होता सीना भी न देख पाए*
*जननी ने कब बहन भाई में भेदभाव की इच्छा जताई कभी*

आरक्षण ही दिलाएगा सम्मान समाज में सब को
कौन मूर्ख परम्परा भेदभाव की सिखा गया
मेहनत से काम कर रोटी खाने वाले समाज को
मार्ग दूसरों का हक छीन जीने का दिखा गया
खेल खेलने का भाव ही खत्म हो गया जो
आकर्षित खेल को आरक्षण का लिबास पहना गया
ईश्वर ने मानव को देने में जब भेदभाव न किया
मानव को मानव का दुश्मन कौन बना गया
बंदर और बिल्ली के खेल से क्या सीखा राजू
मानव खुद ही कुलघातियों की श्रेणी में आ गया
मांसाहारी जीव अपने बच्चों को खा जाता है
शाकाहाशी मानव को मांसाहारी कौन बना गया

राजेश गौतम
🙏🙌👍

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