16/12/2021
सरयू पारीय ब्राह्मण
लंका विजय करके जब भगवान राम अयोध्या लौटे तो उन्हे जिनती विजयी होने कि प्रसन्नता थी उससे अधिक दुख इस बात का था कि मैंने एक विद्वान,तपश्वी और कुलीन ब्राह्मण कि हत्या की है, तो हमे ब्रह्महत्या का दोष लगा ही होगा।इसलिए उन्होने बड़े-बड़े ऋषियों से अपनी पीड़ा बताईं और ब्रह्महत्या से निवृत्ति का मार्ग पूछा। ऋषियों ने भगवान राम की बात का समर्थन करते हुए उन्हे अश्वमेघ यज्ञ करने की सलाह दी।
यज्ञ का आयोजन हुआ। देश के उद्भट विद्वान और तपश्वी पधारे। यज्ञ में कन्नौज के दो महान विद्वान और तपश्वी कान्य और कुब्ज भी पधारे। कान्य छोटे और कुब्ज बड़े थे। यज्ञ में इनका प्रमुख स्थान था। जब यज्ञ समाप्त हो गया, तो कुब्ज ने सोचा, ' अब तो भगवान राम दक्षिणा का वितरण करेंगे। राम एक राजा हैं। राजा का प्रतिग्रह तो ऐसे ही दूषित होता है,क्योंकि वह संपत्ति पसीने के कमाई की नहीं होती। वह जनता से वैध-अवैध तरीके से उगाही की संपत्ति होती है। इसलिए ऐसे राजा का दान भी नहीं लेना चाहिए। यदि राजा प्रायश्चित कर रहा हो और वह भी साधारण पाप का नहीं, बल्कि एक विद्वान, कुलीन और तपश्वी ब्राह्मण की हत्या का हो, तो वह कितना भयानक दान होगा? यह सोचा जा सकता है।
महर्षि कुब्ज दान-दक्षिणा लेने के भय से चुपचाप अयोध्या से सरयू नदी पार करके सरयू से उत्तर दिशा की ओर चले गए। उनके पीछे-पीछे और सारे ब्राह्मण चले आए। ये ब्राह्मण सरयू नदी पार कर के दक्षिणा लेने के भय से भागे थे, इसलिए इनको सरयू पारीण या सरयू-पारी या सरबरिया कहते हैं।
सरयू पारीय ब्राह्मणो का ऋषि गोत्र-
सरयू पारीय ब्राह्मणो में निम्न लिखित ऋषियों के गोत्र मिलते हैं-
गर्ग, गौतम, साडिल्य, पराशर, सावर्णि, कश्यप, वत्स, भारद्वाज, कौसिक, उपमन्यु, वशिष्ठ, घृत कौसिक, गार्ग्य,गर्दभीमुख,भृगु,भार्गव,अगस्त्य,कौंडिल्य
सरयू पारीय ब्राह्मणो के भेद-
1 त्रिकुल (गर्ग, गौतम, साडिल्य)
2 त्रयोदस कुल (पराशर, सावर्णि, कश्यप, वत्स, भारद्वाज, कौसिक, उपमन्यु, वशिष्ठ, घृत कौसिक, गार्ग्य,गर्दभीमुख,भृगु,भार्गव,अगस्त्य,कौंडिल्य)
3 तीसरी श्रेणी
कश्यप
वेद-सामवेद
उपवेद- गंधर्व वेद
साखा- कौथुमी
सूत्र-गोमिल
पाद-वाम
शिखा-वाम
उपास्य देव-विष्णु
प्रवर- कश्यप,असित,देवल
आस्पद-पाण्डेय, द्विवेदी,चौबे,मिश्र,ओझा,उपाध्याय
मूल गाँव- पाण्डेय- त्रिफला, बनगाँव, फ़रेदा, जगदीशपुर, नाथपुर, बिसनैया, गौरा तथा नथुला
द्विवेदी-काश्जनी (परवा कांतित)
चौबे-सोनवर्ष, विष्णुपुर
उपाध्याय-पकड़ी,बरौली, भरसांड
मिश्र- राढ़ी,मिश्रौलिया,परमेश्वर पुर
पाठक-सोनौरा