श्री रामभंजन ब्रह्म देव

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श्री रामभंजन ब्रह्म देव बरहुआं, सैदूपुर,चंदौली

13/06/2024

घर में एगो पूजन

आगामी पुस्तक
13/06/2024

आगामी पुस्तक

बुद्ध की नगरी कुशीनगर
13/06/2024

बुद्ध की नगरी कुशीनगर

बरहुआं के दुबे लोग(तब आ अब)
30/01/2024

बरहुआं के दुबे लोग
(तब आ अब)

आपन गांव, वंश, परंपरा आ इतिहास केसंजोवे के एगो छोटी चुकी परयास
30/01/2024

आपन गांव, वंश, परंपरा आ इतिहास के
संजोवे के एगो छोटी चुकी परयास

अपना इतिहास
30/01/2024

अपना इतिहास

13/01/2024
25/12/2021

सगौत्रीय वियाह
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वैदिक गोत्र प्रणाली, गुणसूत्र पर आधारित हवे मने y गुणसूत्र के जाने के एगो माध्यम हवे। एकरा के समझे खातिर ई मानल जाव कि कवनो मनई के गोत्र कश्यप हवे त ओह मनई के y गुणसूत्र कश्यप ऋषि से आइल बाटे भा कश्यप ऋषि ओह y गुणसूत्र के मूल हवें।बतावत चलीं कि y गुणसूत्र मेहरारून में नाही होला, इहे कारण हवे कि वियाह के बाद मेहरारुन के उनुका पति के गोत्र से जोड़ दिहल जाला। वैदिक/ हिन्दू संस्कृति में एक्के गोत्र में विवाह के मनाही के इहे मुख्य कारण हवे। आजु के आनुवंशिक विज्ञान का हिसाब से देखल जाव त सामान गुणसूत्र के दू लोगन में अगर वियाह भइल त उनुके संतान आनुवंशिक विकार का संगे जनम लेही। अइसन दंपत्ति के संतान में एके लेखा विचारधारा, पसंद, व्यवहार आदि में कवनो नयापन ना होखी। अइसन बचवन में रचनात्मकता के कमी पावल जाला। विज्ञानो एह विसे में इहे क़हत देखाला कि सगौत्र वियाह कइला पर जेयादेतर अइसन दंपत्ति के संतानन में अनुवांशिक दोष मने मानसिक विकलांगता, अपंगता, गंभीर रोग आदि जनमे से पावल जाला। शास्त्रन का हिसाब से अइसने बातिन का चलते सगौत्रीय वियाह के नीमन नाही मानल जाला।

16/12/2021

सरयू पारीय ब्राह्मण
लंका विजय करके जब भगवान राम अयोध्या लौटे तो उन्हे जिनती विजयी होने कि प्रसन्नता थी उससे अधिक दुख इस बात का था कि मैंने एक विद्वान,तपश्वी और कुलीन ब्राह्मण कि हत्या की है, तो हमे ब्रह्महत्या का दोष लगा ही होगा।इसलिए उन्होने बड़े-बड़े ऋषियों से अपनी पीड़ा बताईं और ब्रह्महत्या से निवृत्ति का मार्ग पूछा। ऋषियों ने भगवान राम की बात का समर्थन करते हुए उन्हे अश्वमेघ यज्ञ करने की सलाह दी।
यज्ञ का आयोजन हुआ। देश के उद्भट विद्वान और तपश्वी पधारे। यज्ञ में कन्नौज के दो महान विद्वान और तपश्वी कान्य और कुब्ज भी पधारे। कान्य छोटे और कुब्ज बड़े थे। यज्ञ में इनका प्रमुख स्थान था। जब यज्ञ समाप्त हो गया, तो कुब्ज ने सोचा, ' अब तो भगवान राम दक्षिणा का वितरण करेंगे। राम एक राजा हैं। राजा का प्रतिग्रह तो ऐसे ही दूषित होता है,क्योंकि वह संपत्ति पसीने के कमाई की नहीं होती। वह जनता से वैध-अवैध तरीके से उगाही की संपत्ति होती है। इसलिए ऐसे राजा का दान भी नहीं लेना चाहिए। यदि राजा प्रायश्चित कर रहा हो और वह भी साधारण पाप का नहीं, बल्कि एक विद्वान, कुलीन और तपश्वी ब्राह्मण की हत्या का हो, तो वह कितना भयानक दान होगा? यह सोचा जा सकता है।
महर्षि कुब्ज दान-दक्षिणा लेने के भय से चुपचाप अयोध्या से सरयू नदी पार करके सरयू से उत्तर दिशा की ओर चले गए। उनके पीछे-पीछे और सारे ब्राह्मण चले आए। ये ब्राह्मण सरयू नदी पार कर के दक्षिणा लेने के भय से भागे थे, इसलिए इनको सरयू पारीण या सरयू-पारी या सरबरिया कहते हैं।
सरयू पारीय ब्राह्मणो का ऋषि गोत्र-
सरयू पारीय ब्राह्मणो में निम्न लिखित ऋषियों के गोत्र मिलते हैं-
गर्ग, गौतम, साडिल्य, पराशर, सावर्णि, कश्यप, वत्स, भारद्वाज, कौसिक, उपमन्यु, वशिष्ठ, घृत कौसिक, गार्ग्य,गर्दभीमुख,भृगु,भार्गव,अगस्त्य,कौंडिल्य

सरयू पारीय ब्राह्मणो के भेद-
1 त्रिकुल (गर्ग, गौतम, साडिल्य)
2 त्रयोदस कुल (पराशर, सावर्णि, कश्यप, वत्स, भारद्वाज, कौसिक, उपमन्यु, वशिष्ठ, घृत कौसिक, गार्ग्य,गर्दभीमुख,भृगु,भार्गव,अगस्त्य,कौंडिल्य)
3 तीसरी श्रेणी

कश्यप
वेद-सामवेद
उपवेद- गंधर्व वेद
साखा- कौथुमी
सूत्र-गोमिल
पाद-वाम
शिखा-वाम
उपास्य देव-विष्णु
प्रवर- कश्यप,असित,देवल
आस्पद-पाण्डेय, द्विवेदी,चौबे,मिश्र,ओझा,उपाध्याय
मूल गाँव- पाण्डेय- त्रिफला, बनगाँव, फ़रेदा, जगदीशपुर, नाथपुर, बिसनैया, गौरा तथा नथुला
द्विवेदी-काश्जनी (परवा कांतित)
चौबे-सोनवर्ष, विष्णुपुर
उपाध्याय-पकड़ी,बरौली, भरसांड
मिश्र- राढ़ी,मिश्रौलिया,परमेश्वर पुर
पाठक-सोनौरा

निर्माण के क्रम में ब्रह्म स्थान
14/12/2021

निर्माण के क्रम में ब्रह्म स्थान

11/12/2021

रामभंजन बरम बाबा से जुडल कई गो कहनी बाड़ी।
बरम बाबा अपना भक्त लोगन पर हरमेसा किरपा करत रहेनी।एह बात के कई गो प्रमाण भेंटा जाई गांव जवार में।

05/12/2021

बरहुआ आ बरम बाबा
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उत्तर प्रदेश के चंदौली जिला मे एगो चकिया तहसील बा। सुरम्य वनस्थली जहाँ प्रकृतिं मनोरम छटा बिखेर रहल बा,अइसने सुघर उपत्यका में गाँव बरहुआँ जवने क नाम ब्रह्मपुर बाटे ,बसल ह। चकिया से इलिया तक पक्की सड़क बनल बा,जवन बिहार तक गइल बा,चकिया से पूरब 4 कि0मी0 दूर पर लबे रोड पर ई गाँव पड़ेला। इहां से रचिके दूर कर्मनासा नदी पर लतीफशाह बांध बनल बाटे,जवना से नहर क जाल बिछल बा।इहाँ के धरती शस्य स्यामला बाटे।कर्मनासा नदी एही क्षेत्र से बहत आगु जाले ,जवने से लाख लाख आबादी क भरण पोषण हो रहल बा,एसे एकर पौराणिक नाम कुकर्मनासा बाटे। गाँव का दखिन में गोलवा अउर देवरी पहाड़ खड़ा बा, जवन विंध्य पर्वत सृंखला के भाग हवे। इहाँ हमनी क पुरखा पुरनिया पवनी परजुनियाँ का संगे कांतिथ मिर्जापुर जहवाँ परवा गॉंव बाटे उहवें से आके बसलन,एही से हमनी के परवा दूबे कहल जाला। बरहुआँ गाँव में सरयुपारीय कश्यप गोत्रीय दुबे लोग बसल बा।

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Barhua, Saidupur, Chandauli
Chakia
232103

Telephone

+919999614657

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