05/07/2026
बिहार राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड ने समय-समय पर पटना के कोतवाली थाना, पीरबहोर थाना और जिलाधिकारी (डीएम) आवास जैसी प्रमुख संपत्तियों को वक्फ की जमीन बताते हुए इन्हें खाली करने या राज्य सरकार द्वारा इसके बदले उचित मुआवजा/किराया देने की मांग उठाई है।
इस संबंध में वक्फ बोर्ड की ओर से जो आधिकारिक कदम और दावे सामने आए हैं, वे इस प्रकार हैं:
दावा और नोटिस का मामला: सुन्नी वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड और बयानों के मुताबिक, पटना का कोतवाली थाना वक्फ की संपत्ति (संभावित तौर पर मस्जिद या मजार के तहत आने वाली जमीन) पर बना हुआ है। बोर्ड की ओर से पूर्व में गृह विभाग और स्थानीय प्रशासन को पत्र लिखकर यह याद दिलाया गया है कि ये संपत्तियां वक्फ एस्टेट के तहत दर्ज हैं और इन पर किया गया प्रशासनिक कब्जा कानूनी रूप से वक्फ नियमों के दायरे में आता है।
जमीन खाली करने या मुआवजे की मांग: आमतौर पर, सरकार के प्रशासनिक भवनों और थानों के मामलों में सीधे बलपूर्वक खाली कराने की जगह वक्फ बोर्ड द्वारा "अतिक्रमण मुक्त करने" की आधिकारिक चिट्ठी या नोटिस जारी किए जाते हैं। इसके साथ ही, बोर्ड का यह भी स्टैंड रहा है कि यदि सरकार सुरक्षा और जनहित के दृष्टिकोण से इन थानों (जैसे कोतवाली और पीरबहोर) को उसी स्थान पर बनाए रखना चाहती है, तो सरकार को वक्फ बोर्ड के साथ लीज (किराया) एग्रीमेंट करना चाहिए या वक्फ अधिनियम के तहत बोर्ड को उचित मुआवजा/वैकल्पिक जमीन देनी चाहिए।
रिकॉर्ड में दर्ज स्थिति: बिहार में वक्फ संपत्तियों के सर्वे और दावों के दौरान बोर्ड के पदाधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया है कि राजधानी के कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय वक्फ की जमीनों पर चल रहे हैं, जिनमें कोतवाली थाना भी शामिल है और इसे लेकर संबंधित विभागों को पत्र भेजे जा चुके हैं।
चूंकि यह एक बेहद संवेदनशील और सरकारी सुरक्षा से जुड़ा मामला है, इसलिए सरकार और वक्फ बोर्ड के बीच इस तरह के पत्राचार प्रशासनिक स्तर पर चलते रहते हैं, लेकिन कोतवाली थाना जैसे प्रमुख सुरक्षा केंद्र को व्यावहारिक रूप से खाली कराना पूरी तरह सरकार के निर्णय और कानूनी प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है।