02/11/2025
" शिव: शक्त्या युक्तो यदि भवति शक्त: प्रभवितुं।
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"बालार्क मण्डलभासां चतुर्बाहुं त्रिलोचनां।
पाश अंकुश धनुर्बाणं धारयंतीं शिवां भजे ।।"
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परम पुज्य गुरुदेव भगवन त्रिलोकी नाथ जी महाराज की महती अनुकंपा से उनके शिष्य " योगी बलवीर नाथ जी" ने " बिल्वकेश्वर धाम आश्रम आंवलीघाट मध्यप्रदेश" मे 18/10/25 से 20/10/25 (कार्तिक कृष्ण द्वादशी से कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी) तक के तीन दिन के अनुष्ठान में " श्री यंत्र (स्फटिक)" की वैदिक विधि विधान से स्थापना की।
विग्रह के विभिन्न अधिवासों के क्रम में "स्वयंभू घृत(गिर गाय का) गणपति " का श्री यंत्र पर आना आकर्षक का केंद्र रहा। और अचानक आयी बारिश के आकाश जल से देवी यंत्र का अभिषेक भी।
तीनों दिन श्री यंत्रस्थ देवियों के विभिन्न मंत्रों से मां नर्मदा में आटे के दीयों में सहस्त्र दीप दान भी किये गये।
सारे कर्म "द्वारका पीठ के "पूर्व शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी" से श्री विद्या पूर्ण दीक्षा प्राप्त विद्वान शिष्य " चतुर्वेदी जी नरसिंहपुर" के आचार्यत्व में संपन्न किए गए।
और आज बलवीर नाथ जी ने देवोत्थान एकादशी के दिन चातुर्मास व्रत पुर्ण कर परम पावनी *माँ नर्मदा की (5) पांचवी बार परिक्रमा* हेतु कन्या भोजन आदि के पश्चात आश्रम से प्रस्थान किया। कल ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन/पूजन से *पदयात्रा* आरंभ करेंगे।
...... *त्वदीय पाद पंकजं नमामि देवी नर्मदे* ............... *नर्मदे हर* ......
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