28/07/2026
"वन्दे गुरोर्मण्डलम्"
ॐ नमस्ते भगवन्नाथ! शिवाय गुरु रूपिणे।
"वागातीतं गुणातीतं शक्त्यातीतं देहातीतं कुटातीतं ओघातीतं ब्रह्म गुर्वभिन्नं द्वादशान्त स्थित गुरुमंडल स्वरुपं श्री गुरु पादुकां पूजयामि नमः।"
"आनन्दानन्दं परमसुखदं केवलं ज्ञानमूर्ति
भावातीत गगशसदृशं तत्वमस्यादिलक्ष्यं।
एकं नित्यं विमलं अचलं सर्वधीसाक्षिभूतं
विश्वातीतं त्रिगुणरहितं सद् गुरुं तं नमामि।।"
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"श्री गुरु पादुका पञ्चकम्"
"नमो गुरुभ्यो गुरुपादुकाभ्यो नमः परेभ्य: परपादुकाभ्य:।
आचार्य सिद्धेश्वर पादुकाभ्यो नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्य:।।१।।
ऐंकार ह्रींकार रहस्ययुक्तं श्रींकार गूढ़ार्थ महाविभूत्या।
ॐकार मर्मप्रतिपादिनीभ्यां नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम्।।२।।
होत्राग्निहोत्राग्निहविष्यहोतृहोमादिसर्वाकृतिभासमानम्।
यद् ब्रह्म तद्वोधवितारिणीभ्याम्, नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम्।।३।।
कामारिसर्पव्रजगारुडाभ्याम् विवेक वैराग्य निधिप्रदाभ्याम्।
बोधप्रदाभ्याम् द्रुतमोक्षदाभ्याम् नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम्।।४।।
अनन्तसंसार समुद्रतार नौकायिताभ्यां स्थिरभक्तिदाभ्यां | जाड्याब्धि संशोषण वाडवाभ्यां,नमो नमः श्रीगुरुपादुकाभ्याम् ||५।।"
सभी गुरुभक्तों को स्वगुरु चरणों में अचल आस्था की शुभेच्छा और मंगलकामनायें।
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गुरु पूर्णिमा के दिन -- गणपति की, शिव की, और गुरु-पादुका की (गुरु के शरीर की नहीं) पूजा होती है।
आध्यात्मिक रूप से - सहस्रारचक्र में दिखाई दे रही ब्रह्मज्योति का ध्यान - गुरु महाराज के चरण-कमलों के रूप में होता है।
गुरु महाराज तत्व रूप में होते हैं। उनकी न कभी मृत्यु हुई है और न कभी जन्म।
("न मे मृत्युशङ्का न मे जातिभेदः पिता नैव मे नैव माता न जन्मः।
न बन्धुर्न मित्रं गुरुर्नैव शिष्यः चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥" - निर्वाणषटकम्)
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