17/02/2025
बुरहानपुर तीर्थ के गौरवशाली इतिहास की कुछ झलकियां
☀️ आज से 250 वर्ष पूर्व बुरहानपुर में लगभग जैनों के 2000 घर एवं 10,000 उपरांत साधर्मिकों की बस्ती थी।
☀️18 भव्याति भव्य जैन मंदिर एवं उपश्रय आदि अनेक धर्म स्थान थे। धर्मशालाएं थी।
भूतकालीन जिन मंदिरों के मूल नायक भगवंत अभी वर्तमान जीन मंदिर में विराजमान है।
सिर्फ श्री मनमोहन पार्श्वनाथजी नेर (धुलीया) में......... एवं श्री गोडी जी पार्श्वनाथ प्रभु बालापुर (अकोला) में विराजमान है.....
ईसी गोडीजी पार्श्वनाथ प्रभु के जीर्ण अवस्था में
खाली पडे मंदिर में एक देहरी में विराजमान
महा प्रभावक , चमत्कारी
श्री यक्षराज माणिभद्रजी के देहरी का अभी जिर्णोद्धार करके माणिभद्र धाम बनाया है।
जमीन से लेकर सारा कार्य साधारण द्रव्य में किया जा रहा है।
☀️ बुरहानपुर से 420 किलोमीटर दूर सूरत जैसे प्रतिष्ठित श्री संघ के कार्य बुरहानपुर श्री जैन संघ की सहमति के बाद ही होते थे। (यहां की ताप्ती नदी आगे सूरत तक जाती है)
बुरहानपुर के व्यापार उद्योग पूर जोश में थे। साथ में नगर के झवेरी भाइयों की सूझबूझ से शहर की जाहो जलाली चरम सीमा पर थी।
☀️ बुरहानपुर के सेठ श्री श्री चंद ठाकुर दास की धर्मपत्नी शिव कौर बेन वर्षों तक मांडवगढ़ तीर्थ का हिसाब संभालते थे।
☀️ पुराने जिन मंदिर के बाजू में जो उपाश्रय था उस पुण्य भूमि पर वर्तमान के श्री शांतिनाथ मंदिर जी का निर्माण किया गया है। तीन मंजिला मंदिर में ऊपर चौमुखजी श्रीशांतिनाथ जी
बीच में परिकरयुक्त मुलनायक श्रीशांति नाथ जी भगवान जिनकि प्रतिष्ठा पुज्य विजय सिंह सूरिश्वर जी के वरद्हस्ते हुई थी।
(पूर्व में महाजना पेठ के मंदिर में विराजमान थे)
एवं नीचे
भव्य श्री शीतल नाथ दादा (जो पूर्व में लकेरवाडी के मंदिर में विराजमान थे।)एकसे एक भव्य मनोहारी प्रतिमाएं बिराजमान है।
☀️यहां बाजु में जीर्ण अवस्था में धर्म शाला थी वहां पर शांति नाथ वाडी का निर्माण ई.सन.....
किया गया है। जहां पर पाठशाला,आयंबिल खाता,एवं यात्रीकोंकी ठहेरनेकी व्यवस्था है।
उपर बहेनोंका उपाश्रय है।
☀️ श्री शांतिनाथ जी के बाजू के नवनिर्मित देवकुली का में सन ..1996..
में पु.नेमीसूरि समुदाय के
आ.भ.पु.श्रेयांससूरिजी के वरद हस्त से प्रतिष्ठित भव्य मनोहारी
विमल नाथ दादा बिराजमान है।
☀️ बुरहानपुर से 4 कि.मी. दूर टेकरी पर 400 वर्ष प्राचीन सोनबर्डी है.... श्री पार्श्वनाथ जी श्री महावीर स्वामी जी एवं उनके गणधरों की चरण पादुकाएं ,यतीवर्य श्री हेमदत्त जी की चरण पादुकाएं एवं अरणिक मुनिवर की देहरी बहुत प्रभावशाली है।
ई.सन 2014 डीसेंबर में
सोनबर्डी के जिर्णोद्धार की
शताब्दी केशर सूरि समुदाय के पूज्य आ. भ. राजचंद्र सूरिश्वर जी कि पावन निश्रा में हुई थी। ऊनकी प्रेरणा से सोनबर्डी की भूमि पर विशाल,नयनरम्य शाश्वत गिरि राज का निर्माण कार्य शुरू किया गया।एवं
(माघ वद चौदस )दो महीने में 2015ई.सन में 16वे वर्षितप के आराधक पु.आ.भ.राजचंद्रसूरिजीकी निश्रा में बड़ी धूमधाम से गिरिराज पर प्रभु प्रतिष्ठा संपन्न हुई ।
☀️ कुछेक साल पहेले
श्री संग्राम सोनी द्वारा निर्मित मांडवगढ़ के मूळ नायक श्री सुपार्श्वनाथ दादा की धातु की भव्य परिकर युक्त प्रतिमाअद्रृश्यरुपसे भैरवजी के साथ यहां पधारी है। प्रातः काल सभी ने आश्चर्य सह दर्शन करके धन्यता और प्रसन्नता का अनुभव किया।
मनोवांछित पूरक श्री सुपार्श्वनाथ दादा की चल प्रतिष्ठा ( वर्तमान गच्छाधिपति) पु.आ.श्रीनरदेवसागर जी द्वारा सन2000मे हुई थी।नवनिर्मित देवकुलीका में जो शांति नाथ भगवान कि बाजु में
बनी हुई है ।
मांडवगढ़ नो राजीयो नामे देव सुपास....
बुरहानपुर मा बिराजतो
पूरे मननी आश...
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प.पु.आ.भ.राजचंद्रसूरिजी
म.सा.एवं मुनि धर्म रत्न विजय जी म.सा.की निश्रा में
श्री शांतिनाथ दादा की शताब्दी ई. सन2020मे
श्री विमल नाथ प्रभु की
25मी। ई. सन 2021मे
और अब हमारे संघ के पुण्योदय से श्री सुपार्श्वनाथ प्रभु की 25वीं वर्षगांठ का शुभमंगल अवसर आया है।
साथ में जिर्णोद्धार करके
नवनिर्मित 'माणिभद्र धाम'मे माणिभद्र दादा की
प्रथम ध्वजा का सोने पे सुहागा जैसा शुभ अवसर आया है तो इस पुण्य अवसर पर आप सहपरिवार अवश्य पधारें और देव गुरु की भक्ति में मस्त होकर धन्य बने...