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14/03/2018

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20/10/2017
जायका:  बूंदी कचोरी की दीवानी है दुनियाजायका तो वही होता है जो आपकी जुबान पर चढ़कर बोले और उसे लाख चाहने के बाद भी ना भु...
18/05/2017

जायका: बूंदी कचोरी की दीवानी है दुनिया

जायका तो वही होता है जो आपकी जुबान पर चढ़कर बोले और उसे लाख चाहने के बाद भी ना भुलाया जा सके। बूंदी की कचौरी का स्वाद भी कुछ ऐसा ही है। चटपटी, हींग की खुशबू में डूबी और एक दम खस्ता। आइए जानते हैं कि लोग इसके दीवाने क्यों हैं। पिज्जा-बर्गर की एंट्री के बावजूद कचौरी की डिमांड क्यों बढ़ रही है।

पूरा देश भले ही पिज्जा और बर्गर का दीवाना हो, लेकिन बूंदी के लोगों की जुबान पर बूंदी कचौरी का जायका ही छाया हुआ है। उदड़ की दाल से बनने वाली इस खास कचौरी के जायके का सफर रियासतकाल में शुरु हुआ जो आधुनिकता की निशानी समझे जाने वाले खाने-पीने पर भी भारी पड़ गया। इसका अंदाज इसी बात से लगा सकते हैं कि बूंदी में 100 से ज्यादा दुकानों और करीब इतने ही ठेलों पर हर रोज कचौरियां बिकती हैं। जिन्हें लोग बड़े चाव से खाते हैं।

दुनिया में बनाई पहचान
कोटा- बूंदी की कचौरी ने देश ही नहीं दुनिया में अपनी खास पहचान बनाई है। अल्फांसो के आम और दार्जलिंग टी की तरह ही कोटा -बूंदी की कचौरी भी 'ज्योग्राफिकल आइडेंटिफिकेशन' के तौर पर दुनिया भर में मशहूर है। उड़द की दाल में हींग के तड़के के साथ तली जाने वाली इस खास कचौरी को लोग बड़े चाव से खाते है ।

जायके का तोड़ नहीं
उड़द की दाल में हींग, गर्म मसाले और खड़ी मिर्च डालकर तैयार होने वाली इस कचौरी के जायके का कोई तोड़ नहीं है। एक कचौरी का वजन करीब 80-85 ग्राम होता है। जिसमें करीब 55-60 ग्राम दाल और मसालों का मिक्सचर भरा जाता है। तेज आंच पर सेकने से एक दम खस्ता हो जाती है। जिसे लोग लहसून, अमचुर व हरे धनिए की चटनी के साथ बड़े चाव से खाते हैं।

18/05/2017

जायका: बूंदी कचोरी की दीवानी है दुनिया

जायका तो वही होता है जो आपकी जुबान पर चढ़कर बोले और उसे लाख चाहने के बाद भी ना भुलाया जा सके। बूंदी की कचौरी का स्वाद भी कुछ ऐसा ही है। चटपटी, हींग की खुशबू में डूबी और एक दम खस्ता। आइए जानते हैं कि लोग इसके दीवाने क्यों हैं। पिज्जा-बर्गर की एंट्री के बावजूद कचौरी की डिमांड क्यों बढ़ रही है।

पूरा देश भले ही पिज्जा और बर्गर का दीवाना हो, लेकिन बूंदी के लोगों की जुबान पर बूंदी कचौरी का जायका ही छाया हुआ है। उदड़ की दाल से बनने वाली इस खास कचौरी के जायके का सफर रियासतकाल में शुरु हुआ जो आधुनिकता की निशानी समझे जाने वाले खाने-पीने पर भी भारी पड़ गया। इसका अंदाज इसी बात से लगा सकते हैं कि बूंदी में 100 से ज्यादा दुकानों और करीब इतने ही ठेलों पर हर रोज कचौरियां बिकती हैं। जिन्हें लोग बड़े चाव से खाते हैं।

दुनिया में बनाई पहचान
कोटा- बूंदी की कचौरी ने देश ही नहीं दुनिया में अपनी खास पहचान बनाई है। अल्फांसो के आम और दार्जलिंग टी की तरह ही कोटा -बूंदी की कचौरी भी 'ज्योग्राफिकल आइडेंटिफिकेशन' के तौर पर दुनिया भर में मशहूर है। उड़द की दाल में हींग के तड़के के साथ तली जाने वाली इस खास कचौरी को लोग बड़े चाव से खाते है ।

जायके का तोड़ नहीं
उड़द की दाल में हींग, गर्म मसाले और खड़ी मिर्च डालकर तैयार होने वाली इस कचौरी के जायके का कोई तोड़ नहीं है। एक कचौरी का वजन करीब 80-85 ग्राम होता है। जिसमें करीब 55-60 ग्राम दाल और मसालों का मिक्सचर भरा जाता है। तेज आंच पर सेकने से एक दम खस्ता हो जाती है। जिसे लोग लहसून, अमचुर व हरे धनिए की चटनी के साथ बड़े चाव से खाते हैं।

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323001

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