JAI Shiddh BABA

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28/12/2025

जय श्री सिद्ध बाबा की।

21/05/2023

जय श्री राधे कृष्णा

🙏 सविनय निवेदन 🙏
सभी भक्तजन से विनती है कि जो भी भक्त महाग्रन्थ श्रीमदभागवत गीताजी का पाठ पढ़ना चाहता है।लेकिन ग्रंथ घर में या पास में ना होने के कारण वंचित है । तो वो भक्त सम्पर्क करे।
नाम और एड्रेस कमेंट में ना डाले, सिर्फ मैसेंजर करे।

( हर महीने एक महाग्रन्थ श्रीमदभागवत गीता जी का श्री राधेजू के नाम)

श्री राधे चरणदास कृधा

एक ऐसा भाव जो ना तो आपको किसी ग्रंथ में पढ़ने को मिलेगा और ना ही यह आपने किसी संत के मुख से सुना होगा।नोट :- कृपा भाव के ...
06/04/2023

एक ऐसा भाव जो ना तो आपको किसी ग्रंथ में पढ़ने को मिलेगा और ना ही यह आपने किसी संत के मुख से सुना होगा।

नोट :- कृपा भाव के साथ छेड़छाड़ ना करें।अर्थात यदि आपको अच्छा लगें।और आगे भेजने का मन हो तो ज्यों का त्यों ही भेजें।

भगवान राम को अवतरित हुए अभी एक सप्ताह ही हुआ था।पूरी अयोध्या नगरी भरपूर आनंद मे झूम रही थी।तीनों लोकों से सभी भगवान के दर्शन करने के लिए अयोध्या पहुंच रहे थे।
दूर-दूर से आए सभी देवी देवता,नर,किन्नर आदि पंक्ति में खड़े अपनी-अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।
माता कौशल्या कुुछ क्षण के लिए सभी की गोद में अपने लाला को दे रही थी।यह सौभाग्य मुझे भी प्राप्त हुआ।

जैसे ही माता कौशल्या ने भगवान को मेरी गोद में दिया वैसे ही समय का पहिया थम गया।जो जहाँ था सो वहीं स्थिर हो गया।

अब मेरी और भगवान राम की वार्ता हो रही हैं।अब आप इस वार्ता का आनंद लिजिए।

मैंने देखा सभी के मुख पर आनंद हैं,हर्षोल्लास हैं।परन्तु भगवान के मुख पर एक उदासी सी है।

मैंने कहा :- क्या बात सरकार आपके आने से तो निर्जीव वस्तुएं भी आनंद मे हैं और एक आप हो की उदासीन लग रहे हो ?

भगवान राम :- क्या बताऊँ बाबा।पिछले एक सप्ताह से जो एश्वर्य,जो सुख सुविधा मुझे यहाँ मिल रही हैं।इससे तो अधिक बैकुण्ठ मे भी थी।परन्तु मेरे आने का यह उद्देश्य तो नहीं था।एक खालीपन सा महसूस हो रहा है।

मैं भगवान के हृदय की स्थिति समझ रहा था।जिस तरह एक नवजात शिशु की मां को उसके बालक से अलग कर दिया जाता हैं।और उसके स्तनों मे भरा दूध अपने आप वात्सल्य के कारण निकलता रहता है।परन्तु उस माता को वह सूख प्राप्त नहीं होता जो उसे अपने बालक को स्तनपान कराने के बाद मिलता हैं।बस भगवान के हृदय की स्थिति भी कुुछ ऐसी ही है।

अब भगवान को भी कौई ऐसा चाहिए जो भगवान को भगवान बना सके।और भगवान को भगवान तो केवल उसका भगत ही बना सकता है।भगत के बिना भगवान का कोई अस्तित्व नहीं है।बस यही एक पीडा हैं भगवान की।

अब भगवान अपने एक ऐसे भगत को धराधाम पर बुलाना चाहते हैं जो चीर काल तक भगवान की लीलाओं का गुणगान करता रहे।भगवान को और उनके आने वाले भगतों को वो सुख प्रदान कर सकें जिसके लिए भगवान ने अवतार लिया है।

तब भगवान राम ने भगवान शिव से प्रार्थना की।और भगवान शिव ने अपने ही अंश से एक ऐसी विभूति को प्रगट किया जो आज भी संसार के सभी जीवों को रामकथा का सुख प्रदान कर रहे हैं।

जी हाँ हमारे केसरी नंदन,माँ अंजना के लाल,"मारूति"।

आप सभी को भगत शिरोमणि हनुमानजी के प्राकट्य दिवस की मंगलमय बधाई।

।।जय हनुमान।।
।।जय श्रीराम।।

****(जय जय श्री राधे)****

🙏 जय श्री राम जय हनुमानजी 🙏भगत शिरोमणि हनुमानजी बाबा के प्रकात्य महामहोत्सव की बहुत बहुत मंगल बधाई 🙏🙏🙏जय श्री राम🙏
06/04/2023

🙏 जय श्री राम जय हनुमानजी 🙏
भगत शिरोमणि हनुमानजी बाबा के प्रकात्य महामहोत्सव की बहुत बहुत मंगल बधाई 🙏🙏
🙏जय श्री राम🙏

ये  पत्थर 6 करोड़ साल पुराने है।हो सकता है ये पत्थर 6 करोड़ साल से अभिशप्त हो और मुक्ति के लिए तपस्या कर रहे हो।मुक्ति भी ...
03/02/2023

ये पत्थर 6 करोड़ साल पुराने है।
हो सकता है ये पत्थर 6 करोड़ साल से अभिशप्त हो और मुक्ति के लिए तपस्या कर रहे हो।
मुक्ति भी मिली तो नेपाल के गंडक नदी से मुक्त हुए और ईश्वर की कृपा हुई तो ये पत्थर स्वयं भगवान हो गए।

मेरा ईश्वर में अतिविश्वास है, मैं घोर आस्तिक हूँ मुझे पता है कि कण-कण में भगवान है, हमारे अगल-बगल हर जगह विधमान है।

सबकुछ वही कर और करा रहे है।
अब देखिए अयोध्या जी में उत्सव का माहौल है क्योंकि राम लला वर्षों बाद अपने जन्मस्थान पर जा रहे है तो ऐसे शुभ कार्य में उनके ससुराल वाले कैसे पीछे रहते।
नेपाल की गंडकी नदी से वर्षो पुराने शालिग्राम बाहर निकले है।
ये पत्थर मानो भक्ति में 6 करोड़ साल से डूबे हुए थे।
प्रभु के कहने से बाहर आए।
अब तय किया गया कि इनसे राम मंदिर के गर्भगृह के लिए सीताराम की मूर्ति बनाई जाएगी।

प्रभु की लीला देखिए।
वर्षो से तपस्या में लीन शालिग्राम को आशीर्वाद में राम होना मिला है, कहते है न कि कण कण में राम है तो शालिग्राम के कण से राम है।

जब नेपाल से शालिग्राम ने राम होने की यात्रा शुरू की, तो रामभक्तों का जमावड़ा सड़क किनारे लगने लगा और देखने लगी...कि किस भाग्यवान के हिस्से में राम होना लिखा है और लंबी प्रतीक्षा के बाद शालिग्राम पत्थर से राम होना है। उसके उस स्वरूप को आँख भर देख लेना चाहते है।

बूढ़े-बुजुर्ग अपनी पीढ़ियों को बतला रहे होंगे, आँखें इन पलों को देखने के लिए व्याकुल थी। न जाने कितनी आँखें इस घड़ी की प्रतीक्षा में सो गई। उन्हें राम को जाते देखना न लिखा था।
देखो, राम जा रहे है और अयोध्या जी की गोद में बैठ जाएंगे।

युवा इन दृश्यों को समेटकर अपनी सबसे बड़ी विरासत में जोड़ लेंगे और आने वाली पीढ़ियों को बतलाएँगे कि शालिग्राम को जाते व राम होते, अपनी आँखों से देखा था।
मेरे राम यही होकर गुजरे और विश्राम को ठहरे थे, हमने उन्हें स्पर्श किया।

तुम जिन्हें देख रहे हो वो राम है।
हमने उन्हें राम होते देखा था, इन आँखों ने जीवन का सबसे सुखद पल संभालकर रखा हुआ है। ताकि तुन्हें अपनी विरासत सौंप सके। राम को देखने लोग घरों से निकल आए, किसी ने आवाज़ तक न लगाई, ना किसी से निमंत्रण दिया।
बस अपने प्रभु के जाने की आहट से पहचान गए कि उनके प्रभु अयोध्याजी के लिए निकल रहे है और कभी भी उनके द्वार से होकर गुजर सकते है। उनके स्वागत में हजारों की संख्या में श्रदालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। आखिर राम जाते कौन न देखना चाहेगा।

उन शिलाओं ने न जाने कितनी तपस्या की होगी, कि स्वयं प्रभु श्रीराम मिले....उनका कद भी अयोध्याजी के मुकाबले रहा होगा। क्योंकि दोनों में राम बसे है, सारे जग में राम है।

उन आँखों को देखना चाहिए, जो पूछती थी।
राम कब आएंगे, देखिए राम जा रहे है। रामभक्त उनका दर्शन लाभ ले रहे है। साथ ही मोदी सरकार के बजट पर चर्चा कर रहे है। कि क्या है बजट मे क्या है?

भगवान राम का मंदिर वास्तव में इतना विराट सपना था जो पूरा हो रहा है... भगवान सब मैनेज कर के रखे थे... अब उनका घर बन रहा है।🙏 #जय श्री राम

शालिग्राम और श्री राम 🚩अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर के गर्भगृह में स्थापित होने वाली भगवान राम और माता सीता की मूर्...
03/02/2023

शालिग्राम और श्री राम 🚩

अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर के गर्भगृह में स्थापित होने वाली भगवान राम और माता सीता की मूर्ति इन्ही दोनों शिलाओं पर उकेरी जाएंगी, जो नेपाल की काली गंडकी नदी से मिली है। ऐसे में शालिग्राम शिला का धार्मिक महत्व की समझ नहीं रखने वाले लोगों के मन मे पिछले एक सप्ताह से एक ही सवाल है कि इसी शिला से ही रामलला की मूर्ति क्यों बनेगी? जिसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि शालिग्राम शिला को भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है।

शालिग्राम की गिनती भगवान विष्णु के 10 अवतारों के रूप में होती है। इसी वजह से सनातन धर्म मे इस शिला की पूजा भगवान विष्णु के स्वरूप के तौर पर होती है। पुराणों के अनुसार शालिग्राम को भगवान विष्णु के विग्रह के रूप में पूजा जाता है।

ऐसी मान्यता है कि शालिग्राम शिला अगर गोल है तो वह नारायण का बाल स्वरूप है। अगर वही शिला मछली के आकार की दिख रही है तो वह भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार है। वही अगर कछुए के आकार में शालिग्राम है तो उसे कूर्म या कच्छप अवतार का प्रतीक माना जाता है। शालिग्राम शिला पर दिखने वाले चक्र और रेखाएं भगवान विष्णु के दूसरे अवतारों का प्रतीक मानी जाती हैं। यही वजह है पूजा के लिए इन शिलाओं की प्राण-प्रतिष्ठा की आवश्यकता नही पड़ती है। किसी भी मंदिर के गर्भगृह में सीधे रखकर इस शिला की पूजा की जा सकती है। यही वजह है सनातन धर्म मे शालिग्राम शिला की विशेष महत्ता है।

शिवलिंग की तरह शालिग्राम शिला का मिलना भी अति कठिन होता है। ये शिला प्रत्येक स्थान पर सरलता से नही मिलते हैं। अधिकतर शालिग्राम शिलाएं नेपाल के मुक्तिनाथ क्षेत्र में काली गंडकी नदी के तट पर ही पाई जाती हैं। ऐसे कई रंगों में पाए जाने वाले शालिग्राम का सुनहरा स्वरूप सबसे दुर्लभ माना जाता है।

🚩 जय सियाराम🚩🙏🙏

कॉपी पेस्ट

 #गोपालगंज, बिहार से एक रामभक्तकी पोस्ट (Copied & Pasted)मैंने अपने शहर को इतना विह्वल कभी नहीं देखा! तीन से चार लाख लोग...
03/02/2023

#गोपालगंज, बिहार से एक रामभक्त
की पोस्ट (Copied & Pasted)

मैंने अपने शहर को इतना विह्वल कभी नहीं देखा! तीन से चार लाख लोग सड़क किनारे हाथ जोड़े खड़े हैं।
अयोध्या में प्रभु की मूर्ति बनाने के लिए नेपाल से शालिग्राम पत्थर जा रहा है, और आज वह ट्रक गोपालगंज से गुजर रहा है। कोई प्रचार नहीं, कोई बुलाहट नहीं, पर सारे लोग निकल आये हैं सड़क पर... युवक, बूढ़े, बच्चे... बूढ़ी स्त्रियां, घूंघट ओढ़े खड़ी दुल्हनें, बच्चियां...
स्त्रियां हाथ में जल अक्षत ले कर सुबह से खड़ी हैं सड़क किनारे! ट्रक सामने आता है तो विह्वल हो कर दौड़ पड़ती हैं उसके आगे... छलछलाई आंखों से निहार रही हैं उस पत्थर को, जिसे राम होना है।
बूढ़ी महिलाएं, जो शायद शालिग्राम पत्थर के राम-लखन बनने के बाद नहीं देख सकेंगी। वे निहार लेना चाहती हैं अपने राम को... निर्जीव पत्थर में भी अपने आराध्य को देख लेने की शक्ति पाने के लिए किसी सभ्यता को आध्यात्म का उच्चतम स्तर छूना पड़ता है। हमारी इन माताओं, बहनों, भाइयों को यह सहज ही मिल गया है।
जो लड़कियां अपने वस्त्रों के कारण हमें संस्कार हीन लगती हैं, वे हाथ जोड़े खड़ी हैं। उदण्ड कहे जाने वाले लड़के उत्साह में हैं, इधर से उधर दौड़ रहे हैं। मैं भी उन्ही के साथ दौड़ रहा हूँ।
इस भीड़ की कोई जाति नहीं है। लोग भूल गए हैं अमीर गरीब का भेद, लोग भूल गए अपनी जाति- गोत्र! उन्हें बस इतना याद है कि उनके गाँव से होकर उनके राम जा रहे हैं।
हमारे यहाँ कहते हैं कि सिया को बियह के रामजी इसी राह से गये थे। डुमरिया में उन्होंने नदी पार की थी। हम सौभाग्यशाली लोग हैं जो रामजी को दुबारा जाते देख रहे हैं।
पाँच सौ वर्ष की प्रतीक्षा और असँख्य पीढ़ियों की तपस्या ने हमें यह सौभाग्य दिया है। हम जी लेना चाहते हैं इस पल को... हम पा लेना चाहते हैं यह आनन्द! माझा से लेकर गोपालगंज तक, मैं इस यात्रा में दस किलोमीटर तक चला हूँ, दोनों ओर लगातार भीड़ है।
कोई नेता, कोई संत, कोई विचारधारा इतनी भीड़ इकट्ठा नहीं कर सकती, यह उत्साह पैदा नहीं कर सकती। सबको जोड़ देने की यह शक्ति केवल और केवल धर्म में है, मेरे राम जी में है।
गोपालगंज में कुछ देर का हॉल्ट है। साथ चल रहे लोगों के भोजन की व्यवस्था है, सो घण्टे भर के लिए ट्रक रुक गया है। लोग इसी समय आगे बढ़ कर पत्थर को छू लेना चाहते हैं। मैं भी भीड़ में घुसा हूँ, आधे घण्टे की ठेलमठेल के बाद ठाकुरजी को स्पर्श करने का सुख... अहा!कुछ अनुभव लिखे नहीं जा सकते।
उसी समय ऊपर खड़ा स्वयंसेवक शालिग्राम पर चढ़ाई गयी माला प्रसाद स्वरूप फेंकता है। संयोग से माला मेरे हाथ में आ गिरती है। मैं प्रसन्न हो कर अंजुरी में माला लिए भीड़ से बाहर निकलता हूँ। पर यह क्या, किनारे खड़ी स्त्रियां हाथ पसार रही हैं मेरे आगे... भइया एक फूल दे दीजिये, बाबू एक फूल दे दीजिये। अच्छे अच्छे सम्पन्न घरों की देवियाँ हाथ पसार रही हैं मेरे आगे! यह रामजी का प्रभाव है।
मैं सबको एक एक फूल देते निकल रहा हूँ। फिर भी कुछ बच गए हैं मेरे पास! ये फूल मेरा सौभाग्य हैं...
कुछ लोग समझ रहे हैं कि एक सौ तीस रुपये में खरीद कर रामचरितमानस की प्रति जला वे हमारी आस्था को चोटिल कर देंगे। उन मूर्खों को कुछ नहीं मालूम... यह भीड़ गवाही दे रही है कि राम जी का यह देश अजर अमर है, यह सभ्यता अजर अमर है, राम अजर अमर हैं...

24/12/2022

*जय श्री राधे कृष्णा* 🙏
*जय श्री सीताराम* 🙏

एक विनम्र निवेदन 🙏🙏 कृपया अपने श्री आराध्य प्रभु जी को २५ दिसम्बर को जोकर की ड्रेस पहना कर अपने श्री प्रभु का अनादार ना करे और ना करवाये।।
इस बात पर भुल् कर् भी संकोच ना करे की आपके श्री प्रभु सर्वश्रेष्ठ महान और परमपिता परमात्मा है।

श्रीराधेचरणदास कृधा

*राधे राधे* 🙏🙏
*जय श्री राम*🙏🙏

बड़े गुस्से से मैं घर से चला आया ..इतना गुस्सा था की गलती से पापा के ही जूते पहन के निकल गया मैं ,आज बस घर छोड़ दूंगा, औ...
26/11/2022

बड़े गुस्से से मैं घर से चला आया ..इतना गुस्सा था की गलती से पापा के ही जूते पहन के निकल गया मैं ,
आज बस घर छोड़ दूंगा, और तभी लौटूंगा जब बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा ...

जब मोटर साइकिल नहीं दिलवा सकते थे, तो क्यूँ इंजीनियर बनाने के सपने देखतें है .....आज मैं पापा का पर्स भी उठा लाया था .... जिसे किसी को हाथ तक न लगाने देते थे ...मुझे पता है इस पर्स मैं जरुर पैसो के हिसाब की डायरी होगी ....पता तो चले कितना माल छुपाया है .....माँ से भी ...इसीलिए हाथ नहीं लगाने देते किसी को..

जैसे ही मैं कच्चे रास्ते से सड़क पर आया, मुझे लगा जूतों में कुछ चुभ रहा है ....मैंने जूता निकाल कर देखा .....मेरी एडी से थोडा सा खून रिस आया था ...जूते की कोई कील निकली हुयी थी, दर्द तो हुआ पर गुस्सा बहुत था ..और मुझे जाना ही था घर छोड़कर ...जैसे ही कुछ दूर चला ....मुझे पांवो में गीला गीला लगा, सड़क पर पानी बिखरा पड़ा था ....पाँव उठा के देखा तो जूते का तला टुटा था .....जैसे तेसे लंगडाकर बस स्टॉप पहुंचा, पता चला एक घंटे तक कोई बस नहीं थी .....मैंने सोचा क्यों न पर्स की तलाशी ली जाये ....मैंने पर्स खोला, एक पर्ची दिखाई दी, लिखा था..लैपटॉप के लिए 40 हजार उधार लिए पर लैपटॉप तो घर मैं मेरे पास है ?

दूसरा एक मुड़ा हुआ पन्ना देखा, उसमे उनके ऑफिस की किसी हॉबी डे का लिखा था उन्होंने हॉबी लिखी अच्छे जूते पहनना ......ओह....अच्छे जुते पहनना ???पर उनके जुते तो ...........!!!!माँ पिछले चार महीने से हर पहली को कहती है नए जुते ले लो ...और वे हर बार कहते "अभी तो 6 महीने जूते और चलेंगे .."मैं अब समझा कितने चलेंगे......

तीसरी पर्ची ..........पुराना स्कूटर दीजिये एक्सचेंज में नयी मोटर साइकिल ले जाइये ...पढ़ते ही दिमाग घूम गया.....पापा का स्कूटर .............ओह्ह्ह्ह मैं घर की और भागा........अब पांवो में वो कील नही चुभ रही थी ....मैं घर पहुंचा .....न पापा थे न स्कूटर ..............ओह्ह्ह नही मैं समझ गया कहाँ गए ....मैं दौड़ा .....और एजेंसी पर पहुंचा......पापा वहीँ थे ...............मैंने उनको गले से लगा लिया, और आंसुओ से उनका कन्धा भिगो दिया .......नहीं...पापा नहीं........ मुझे नहीं चाहिए मोटर साइकिल...बस आप नए जुते ले लो और मुझे अब बड़ा आदमी बनना है..वो भी आपके तरीके से ..।

"माँ" एक ऐसी बैंक है जहाँ आप हर भावना और दुख जमा कर सकते है...और"पापा" एक ऐसा क्रेडिट कार्ड है जिनके पास बैलेंस न होते हुए भी हमारे सपने पूरे करने की कोशिश करते है...Always Love & Respect Your Parents

जय श्री राधे कृष्णा जय तुलसी मैया आप सभी को देवूठान की बहुत बहुत मंगल बधाई
04/11/2022

जय श्री राधे कृष्णा
जय तुलसी मैया
आप सभी को देवूठान की बहुत बहुत मंगल बधाई

26/09/2022

🙏जय माता दी 🙏

आपको और आपके समस्त परिवार को नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएं। माता रानी आप पर कृपा बरसायें.
🙏🌺 कृधा 🌺🙏

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