01/05/2025
भारत के संविधान निर्माता और दलित समुदाय के प्रतीक डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का इससे बड़ा अपमान और कुछ नहीं हो सकता, कि उनके चेहरे को बिगाड़कर उस पर अखिलेश यादव का चेहरा थोप दिया जाए। अखिलेश यादव चाहे कितनी भी बार जन्म लें, वे बाबासाहेब की महानता और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान में उनके योगदान के बराबर नहीं हो सकते। समाजवादी पार्टी और अखिलेश ने पहले महान योद्धा राणा सांगा का अपमान किया और अब बाबासाहेब का। यह हिंदू समाज के लिए कतई स्वीकार्य नहीं हो सकता।