Shri Ghada Wale Baba Ashram

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भक्तों भजन करो गाढ़ा।ना  गर्मी लगे ना  जाड़ा।।नित ही करो सूर्य प्रणाम।तन मन को मिले आराम।।निज  सांसों पर दो ध्यान।यूं कर...
01/03/2025

भक्तों भजन करो गाढ़ा।
ना गर्मी लगे ना जाड़ा।।

नित ही करो सूर्य प्रणाम।
तन मन को मिले आराम।।

निज सांसों पर दो ध्यान।
यूं करो निद्रा का आह्वान।।

सब भूलो जग की बातें।
लखो आती जाती सांसें।।

कम खाना और गम खाना।
तन मन बुद्धि बढ़े खजाना।।

मोह को त्यागो क्रोध को मारो।
बस नेकी करो कुआं में डारो।।

अपना ध्यान धरो मन माहीं।
आत्म तत्व में ब्रह्मांड समाही।।

प्रकाशानंद

हो अरण्य या मुग्ध नगर हो।चेतन चित्त विशुद्ध अगर हो।तन मन प्राण स्वयं स्थिर हों।तो निज अध्यात्म स्फुर हो।।प्रकाशानंद गिरि
09/06/2023

हो अरण्य या मुग्ध नगर हो।
चेतन चित्त विशुद्ध अगर हो।
तन मन प्राण स्वयं स्थिर हों।
तो निज अध्यात्म स्फुर हो।।

प्रकाशानंद गिरि

*🙏पुरुष को हमेशा एक स्त्री का साथ चाहिए 🙏*   _फिर वो चाहे मन्दिर हो या संसार🌹🌹🌹✍️_ मंदिर में कृष्ण के साथ --> राधा      ...
06/02/2023

*🙏पुरुष को हमेशा एक स्त्री का साथ चाहिए 🙏*

_फिर वो चाहे मन्दिर हो या संसार🌹🌹🌹✍️_

मंदिर में कृष्ण के साथ --> राधा
राम के साथ --> सीता
शंकर के साथ --> पार्वती

सुबह से रात तक मनुष्य को
अपने हर काम में
एक स्त्री की
आवश्यकता होती ही है.

पढ़ते समय --> विद्या
फिर --> लक्ष्मी
और अंत में --> शाँति
दिन की शुरुआत --> ऊषा के साथ,
दिन की समाप्ति --> संध्या से होती है.
किन्तु काम तो --> अन्नपूर्णा के
लिये ही करना है.

रात यानी --> निशा के समय भी
निंदिया रानी
सोने के बाद --> सपना

मंत्रोच्चार के लिये --> गायत्री
ग्रंथ पढ़ें तो --> गीता

👇 मंदिर में भगवान के सामने 👇
वंदना, पूजा, अर्चना
आरती, आराधना
और ये सब भी ...
केवल --> श्रद्धा के साथ.

अंधेरा हो तो --> ज्योति

लड़ाई लड़ने जायें तो -->
जया और विजया

बुढ़ापे में --> करुणा वो भी
--> ममता के साथ.

गुस्सा आ जाए, तब --> क्षमा

इसीलिए तो धन्य है --> स्त्री जाति👸
जिसके बगैर पुरुष🤵 अधूरा है.

*🙏नारी शक्ति को प्रणाम🙏*

बहुत सुन्दर वक्तव्य व्यवहारिक, भक्ति और योगिक क्रियाओं के लिए सही बात।

पर संसार में ब्रह्मा का एक ही मंदिर पुष्कर क्षेत्र में है।उनके साथ कोई स्त्री नहीं क्योंकि वो ब्रह्मज्ञान देता है और स्थूल सूक्ष्म प्रकृति व ईश्वर से परे ब्रह्म यानी आत्मा तक ले जाता है।
अतः आवागमन से छुटकारा पाना है आत्मज्ञानी बनो।कर्मकांड,भक्ति और योग अंतिम नहीं हैं।हाँ ज्ञान में सहायक हैं।अतः तत्व ज्ञानी भव।
प्रकाशानंद

07/11/2022

ये जगत यूं तो एक सपना है।
कौन है गैर व कौन अपना है।।

गैर वो है जो कुछ नहीं देता,
गर दे तो हिसाब रखना है।।

पास रहकर या दूर ही जाकर,
दर्द देता है वही अपना है।।

दर्द उतना ही वो बड़ा देगा,
जितना करीबी है जो अपना है।।

यू तो सब ही रब के बंदे हैं,
किसी किसी का रब अपना है।।

प्रकाशानंद

ॐ विश्वानि देव सवितुरदूरितानि परासुव यदभद्रम तन्न आसुव।
13/08/2022

ॐ विश्वानि देव सवितुरदूरितानि परासुव यदभद्रम तन्न आसुव।

शब्द के संग शक्ति कैसे |
प्रेम के संग भक्ति जैसे ||

अव्यक्त से है व्यक्ति कैसे |
पुरूष से है प्रकृति जैसे ||

आत्म की है मुक्ति कैसे |
देह मन हो अशक्ति जैसे ||

व्यवहार में व्यक्ति कैसे |
कर्म में अनासक्ति जैसे ||

भाव की अभिव्यक्ति ऐसे |
भगवन की हो भक्ति जैसे ||

बहता हुआ है वक्त ऐसे |
धमनियों में ये रक्त जैसे ||

भजन से हो सशक्त कैसे |
साँस भर हो सख्त जैसे ||

विचारों में हो विरक्ति कैसे |
व्यक्त में है अव्यक्त जैसे ||

प्रकाशानन्द गिरि

!! आज दिनांक 26-07-21 को शिकार पुर  खेड़ा सलेमपुर जिला बुलन्दशहर मैं श्री मोनी बाबा जी की पुण्यतिथि व मूर्ति स्थापना मैं ...
26/07/2021

!! आज दिनांक 26-07-21 को शिकार पुर खेड़ा सलेमपुर जिला बुलन्दशहर मैं श्री मोनी बाबा जी की पुण्यतिथि व मूर्ति स्थापना मैं परम पूज्य गुरुदेव भगवान श्री प्रकाशानंद गिरी जी महाराज जी सम्मिलित हुए ,व गुरुदेव ने सभी भक्त जनों को आश्रीवाद दिया !!

!!आज दिनांक 25-07-21 को बाबा गुरुदेव श्री स्वरूपानंद जी महाराज छेरत आश्रम पर श्री धुनागिरी जी महाराज की पुण्यतिथि पर संत...
25/07/2021

!!आज दिनांक 25-07-21 को बाबा गुरुदेव श्री स्वरूपानंद जी महाराज छेरत आश्रम पर श्री धुनागिरी जी महाराज की पुण्यतिथि पर संतभोज कराया व सभी भक्तों को आश्रीवाद दिया !!

एक आशु कवितागम और खुशी के बीच आनन्द एक है।स्थूल  सूक्ष्म  कारण से परे कन्द एक है।।ये स्थूल जगत स्थूल आंखों से दिखे हैऔर ...
10/04/2021

एक आशु कविता

गम और खुशी के बीच आनन्द एक है।
स्थूल सूक्ष्म कारण से परे कन्द एक है।।

ये स्थूल जगत स्थूल आंखों से दिखे है
और सूक्ष्म जगत सपनों में बन्द एक है।।

कारण शरीर अज्ञानमय जब नींद में रहे,
सोयें स्वप्न देखें सब जगे परंद अनेक है।।

इनसे परे महाकारण अति सूक्ष्म है विशाल
जो है समष्टि आधार तुरीयानंद एक है।।

तुरीयातीत अवस्था है जो व्यक्त कैसे हो,
अव्यक्त अद्वितीय ब्रह्मरूप अखंड एक है।।

प्रकाशानंद

ब्रह्म  राम  सत  नाम  विचारी।शिव आतम  अव्यक्त अकारी।।ईश उमा  मय  जगत  प्रकाशु।राम  रमत  क़न क़न में  वासु।।जगत जीव  जगदम्ब...
03/04/2021

ब्रह्म राम सत नाम विचारी।
शिव आतम अव्यक्त अकारी।।

ईश उमा मय जगत प्रकाशु।
राम रमत क़न क़न में वासु।।

जगत जीव जगदम्ब प्रभावी।
राम आधार जग जीव भवानी।।

शक्ति शक्तिधर अकल अकालू।
काल कलामय परम कृपालु।।

बोध बोधमय ब्रह्म विशेषा।
पूर्ण परम आनन्द अशेषा।।

प्रकाशानंद

जैसे लहर जलधि में समावे।जैसे कंगन कंचन बनि जावे।।ज्यूं घड़ा फूट मिट्टी हो जावे।तैसें ही जग ईश्वर में समावे।।गुरु कृपा तें...
30/11/2020

जैसे लहर जलधि में समावे।
जैसे कंगन कंचन बनि जावे।।

ज्यूं घड़ा फूट मिट्टी हो जावे।
तैसें ही जग ईश्वर में समावे।।

गुरु कृपा तें प्रज्ञा जगि जावे।
अज्ञान हटहिं ज्ञान कूं पावे।।

ऐसे ही आत्म परम कूं पावे।
परम मिलहिं परम हुई जावे।।

जा छन आत्म ज्ञान हो जावे।
जीवन मुक्त परम पद पावे।।

परम-आत्मा एक हुई जावे।
खुद कूं ही कन कन में पावे।।

जन्म मरण बंध छुटि जावे।
जीव जबहिं मोक्ष पद पावे।।

~ प्रकाशानंद

ये ब्रह्मांड चराचर शिवशक्तिमय है।दौनों के योग से ये बना है इसीलिए शिव पिता और उनकी शक्ति हम सबकी माता हैं।शक्ति के बिना ...
17/10/2020

ये ब्रह्मांड चराचर शिवशक्तिमय है।दौनों के योग से ये बना है इसीलिए शिव पिता और उनकी शक्ति हम सबकी माता हैं।
शक्ति के बिना स्वरूप नहीं और इस संसार में कुछ भी होना असंभव है।
अतः हमें उस महामाया शक्ति की हॄदय से उपासना करनी चाहिए जिसके बिना कुछ करने के लिए सोच पाने में भी समर्थ नहीं हैं।
ये शक्ति पर्व नवरात्रि उनकी ही आराधना के निमित्त हैं।

नमस्तेस्तु महामाये सर्वशक्ति स्वरूपिणी,
नवदुर्गे जगनमाते प्रणमामि सदा सदा।
आप सबको शक्ति पर्व नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं और शान्ति तथा उन्नति के लिए आशीर्वाद।
प्रकाशानंद

#2020

समस्त परिवर्तन संसार में या शरीर में इन्द्रयों के माध्यम से मन द्वारा भासित होते हैं जिनके जीवात्मा यानी हम द्रष्टा हैं।...
02/09/2020

समस्त परिवर्तन संसार में या शरीर में इन्द्रयों के माध्यम से मन द्वारा भासित होते हैं जिनके जीवात्मा यानी हम द्रष्टा हैं।जो परिवर्तनशील या बदलने वाला है वह सत्य नहीं है।जो किसी भी काल में नहीं बदलता वो सत्य है।द्रष्टा यानी स्वात्मा बचपन,जवानी,बुढ़ापा या शरीर की किसी भी अवस्था में एक जैसा यानी अपरिवर्तनशील है।अतः स्वात्मा पर ध्यान दो,स्वयं को ढूंढो,सत्य को खोजो,स्वयं को जानो।खुद को जान जाओगे तो खुद में खुदा को पाओगे।खुद ही खुदा हो जाओगे।

प्रकाशानंद

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