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Spiritual cosmos सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरा?

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24/08/2023

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कलिका शक्तिपीठ: (कोलकाता,बंगाल)शक्ती: कलिकाभैरव: नकुलेश्वरभाग: मुखखण्ड यह शक्तिपीठ कोलकाता के कालीघाट मे स्तिथ है।इस मंद...
18/07/2021

कलिका शक्तिपीठ: (कोलकाता,बंगाल)
शक्ती: कलिका
भैरव: नकुलेश्वर
भाग: मुखखण्ड
यह शक्तिपीठ कोलकाता के कालीघाट मे स्तिथ है।
इस मंदिर में माता की काले रंग की विशालकाय प्रतिमा स्थापित है जिसमें जीभ और हाथ सोने के बने हुए हैं। वहीं मंदिर परिसर में ही बना एक चांदी का कमल फूल भी है, जिसमें हजार पंखुडियां हैं।यहीं माता काली भगवान् शंकर के ऊपर पैर रखे अवस्था में है।
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कामख्या शक्तिपीठ:( गुवाहटी, असम)शक्ती: कामख्याभैरव: उमानंदभाग: योनिखंड नीलांचल पर्वत पर स्थित हैकामाख्‍या मंदिर तंत्र वि...
18/07/2021

कामख्या शक्तिपीठ:( गुवाहटी, असम)
शक्ती: कामख्या
भैरव: उमानंद
भाग: योनिखंड
नीलांचल पर्वत पर स्थित हैकामाख्‍या मंदिर तंत्र विद्या का सबसे बढ़ा केंद्र माना जाता है और हर साल जून महीने में यहां पर अंबुवासी मेला लगता है।

तारातारिणी शक्तिपीठ:(ब्रह्मपुर, उड़ीसा)शक्ती: तारातारिनीभैरव:सोमेश्वर/उत्केश्वरभाग: स्तनखण्ड यह शक्तिपीठ ऋषिकुल्या नदी के...
16/07/2021

तारातारिणी शक्तिपीठ:(ब्रह्मपुर, उड़ीसा)
शक्ती: तारातारिनी
भैरव:सोमेश्वर/उत्केश्वर
भाग: स्तनखण्ड
यह शक्तिपीठ ऋषिकुल्या नदी के किनारे पुन्यगीरि पर्वत पर स्तिथ है।पुण्यगिरी पर्वत को इस क्षेत्र में रत्नागिरी, तारिणी पर्वत और कुमारी पहाड़ के नाम से भी जाना जाता है। गर्भगृह में विराजित तारा तारिणी को दो बहनों तारा और तारिणी का संयुक्त रूप माना जाता है। इसमें देवी तारा को विद्या की देवी सरस्वती माना गया है। जबकि तारिणी को देवी काली का रूप माना जाता है।यह 4 अदिशक्तिपीठो मे से एक है।

1. विमला शक्तिपीठ (जगन्नाथ मन्दिर,पुरी,उड़ीसा )शक्ती: विमला देवीभैरव: जगन्नाथ भाग: पदखण्ड(चरण)यह शक्तिपीठ जगन्नाथ मन्दिर ...
16/07/2021

1. विमला शक्तिपीठ (जगन्नाथ मन्दिर,पुरी,उड़ीसा )
शक्ती: विमला देवी
भैरव: जगन्नाथ
भाग: पदखण्ड(चरण)
यह शक्तिपीठ जगन्नाथ मन्दिर प्रांगण में स्तिथ है।
समर्पित महाभोग भगवान जगन्नाथ खुद भी पहले नहीं खा सकते हैं. यह भोग सबसे पहले विमला देवी ग्रहण करती हैं।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवी विमला जगन्नाथ पुरी की अधिष्ठात्री देवी हैं। यह शक्तिपीठ 4 अदिशक्तिपीठ मे से एक है।

Artwork credit:

4 आद्य शक्तिपीठ:-1.विमला शक्तिपीठ (पुरी जगन्नाथ मन्दिर, उड़ीसा)2.तारा तरिनी शक्तिपीठ(बेरहमपुर, उड़ीसा)3.कामख्या शक्तिपीठ(ग...
15/07/2021

4 आद्य शक्तिपीठ:-
1.विमला शक्तिपीठ (पुरी जगन्नाथ मन्दिर, उड़ीसा)
2.तारा तरिनी शक्तिपीठ(बेरहमपुर, उड़ीसा)
3.कामख्या शक्तिपीठ(गुवाहटी,असम)
4.कालिका शक्तिपीठ(कालीघाट, कोलकाता)

12/07/2021

Jagannath rath yatra🙏

अग्निदेव (अष्टदीक़्पाल): दक्षिण-पूर्व (south-east)दक्षिण-पूर्व दिशा यानी आग्नेय कोण इसका तत्व अग्नि और देवता अग्निदेव है।...
08/07/2021

अग्निदेव (अष्टदीक़्पाल): दक्षिण-पूर्व (south-east)
दक्षिण-पूर्व दिशा यानी आग्नेय कोण इसका तत्व अग्नि और देवता अग्निदेव है। इस दिशा में रसोईघर बहुत शुभ रहता है।

वायुदेव(अष्टदीक़्पाल):उत्तर-पश्चिम(north-west)उत्तर-पश्चिम दिशा यानी वायव्य कोण - ये वायु तत्व का कोण है। इसके देवता पवनद...
05/07/2021

वायुदेव(अष्टदीक़्पाल):उत्तर-पश्चिम(north-west)
उत्तर-पश्चिम दिशा यानी वायव्य कोण - ये वायु तत्व का कोण है। इसके देवता पवनदेव हैं। वास्तु शास्त्रियों के मुताबिक इस दिशा के शुद्ध और वास्तुदोषमुक्त रहने से घर के सदस्यों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। 

दक्षिण-पश्चिम(south-west):दक्षिण और पश्चिम दिशा के मध्य के स्थान को नैऋत्य कहा गया है। यह दिशा नैऋत देव के आधिपत्य में ह...
04/07/2021

दक्षिण-पश्चिम(south-west):
दक्षिण और पश्चिम दिशा के मध्य के स्थान को नैऋत्य कहा गया है। यह दिशा नैऋत देव के आधिपत्य में है। इस दिशा के स्वामी राहु और केतु हैं।इस दिशा की स्वामी देवी निरृति(विनाश की देवी) को भी मना जाता है |

रुद्र(अश्तदिक़्पाल): उत्तर-पूर्व(north-east)भगवान शिव का एक नाम ईशान भी है. चूंकि भगवान शिव का आधिपत्य उत्तर-पूर्व दिशा म...
03/07/2021

रुद्र(अश्तदिक़्पाल): उत्तर-पूर्व(north-east)
भगवान शिव का एक नाम ईशान भी है. चूंकि भगवान शिव का आधिपत्य उत्तर-पूर्व दिशा में होता है इसीलिए इस दिशा को ईशान कोण कहा जाता है

वरुणदेव(अश्तदिक़्पाल): पश्चिम दिशा(west direction)पश्चिम दिशा के स्वामी वरुण देव है. इस दिशा पर शनि ग्रह का प्रभाव रहता ह...
02/07/2021

वरुणदेव(अश्तदिक़्पाल): पश्चिम दिशा(west direction)
पश्चिम दिशा के स्वामी वरुण देव है. इस दिशा पर शनि ग्रह का प्रभाव रहता है. यह सूर्यास्त की दिशा है, इसलिए पश्चिम की ओर मुंह करके बैठना या कोई कार्य करना मन में तनाव पैदा करता है. वास्तु के मुताबिक सीढ़ियां, बगीचा आदि भी इस दिशा में बनाए जा सकते हैं, लेकिन पश्चिम की ओर सोना अनेक प्रकार की परेशानियों का कारण बनता है|

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