22/04/2026
बगलामुखी देवी जयंती या वगलामुखी देवी प्राकट्य ओर इनके इसी नाम से प्रसिद्ध 36 अक्षरीय महामंत्र की साधना की सर्वत्र विफलता से सफलता?जाने रहस्य?
भक्तों मैने अपने साधनकाल के जीवन में क्वांर नवरात्रि 1992 से प्रारंभ करके लेकर 2004 तक अनेक बार बगलामुखी देवी की साधना की ओर बहुत विशेष फल नहीं पाया,तब मुझे लगा कि,हर प्रकार से शास्त्री विधि विधान करने के बाद भी विशेष प्रत्यक्ष दर्शन सफलता नहीं मिली तो,अनुभव किया,कही कुछ तो त्रुटि है,तब शास्त्रगत त्रुटि पता चली ओर तब थोड़ी साधना पर ही पूर्ण लाभ ओर कृपा दर्शन हुआ तो,वही गलती आज भी सभी तीर्थ स्थान ओर अनुष्ठानकर्ता ओर साधक करते विफल हो रहे है,अब चाहे वे अपने असफलता को किन्ही तर्कों से सिद्ध करते रहे,मेरे वगलामुखी देवी साधना ओर सफलता के इन्हीं सारे साक्ष्यों के साथ ओर इनके सही मंत्र का साथ नीचे संक्षिप्त लेख प्रस्तुत है,श्रीगुरुदेव स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिबजी...
भक्तों, 24 अप्रैल 2026 को माँ वगलामुखी का प्राकट्य उत्सव है।
1. 'बगलामुखी' या 'वगलामुखी' - कौन सा नाम शुद्ध है?
आध्यात्मिक और भाषाई दोनों दृष्टियों से इसके दो पक्ष हैं:-
शास्त्रीय नाम (वगलामुखी):- मूल संस्कृत ग्रंथों और तंत्र शास्त्रों (जैसे 'सांख्यायन तंत्र') के अनुसार इनका नाम 'वगलामुखी' है। 'वगला' शब्द संस्कृत के 'वल्गा' से आया है, जिसका अर्थ होता है—'लगाम' (Bridle)। जिस प्रकार लगाम घोड़े को नियंत्रित करती है, उसी प्रकार माँ वगलामुखी शत्रु की बुद्धि, वाणी और गति को 'स्तम्भित' (रोक) कर देती हैं।
लोकप्रिय नाम (बगलामुखी):- अपभ्रंश के कारण 'व' का उच्चारण 'ब' में बदल गया और यह 'बगलामुखी' के रूप में प्रसिद्ध हुआ। 'बक' (बगुला) पक्षी की तरह ध्यान लगाने और शत्रु पर अचानक प्रहार करने की शक्ति के कारण भी इन्हें यह नाम दिया जाता है।
निष्कर्ष: सिद्ध विधान में 'वगलामुखी' अधिक शुद्ध और प्रभावशाली माना जाता है, क्योंकि 'व' बीज वायु और गति का प्रतीक है जिसे माँ रोकती हैं।
2. मूल बीज मंत्र और मंत्र में प्रयुक्त नाम
माँ का सबसे शक्तिशाली और मूल बीज मंत्र 'ह्रीं' (Hreem) है। इसे 'माया बीज' या 'शक्ति बीज' कहा जाता है।
मंत्र में प्रयोग:-
साधना में इनके विस्तृत मंत्र (36 अक्षरों वाला ब्रह्मास्त्र मंत्र) का प्रयोग होता है, जिसमें इनका संबोधन इस प्रकार आता है:-
"ॐ ह्लीं वगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।" (ओर जो मुझे देवी से प्राप्त हुआ,वो यहां नहीं दिया जा रहा है,कभी मेरी इस संबंधित वीडियो में सुन लेना।।)
ओर तांत्रिक ग्रंथों क