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शूज के पैसे भी नहीं थे उसैन बोल्ट के पासउसैन बोल्ट Real Life Inspirational Story in Hindiउसैन बोल्टवर्ष 2009 में बर्लिन ...
02/12/2020

शूज के पैसे भी नहीं थे उसैन बोल्ट के पास
उसैन बोल्ट Real Life Inspirational Story in Hindi
उसैन बोल्ट

वर्ष 2009 में बर्लिन में हुई विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में उसैन बोल्ट (Usain Bolt) ने 100 M एवं 200 M की रेस में स्वयं का ही विश्व रिकॉर्ड तोड़कर तथा 9.50 एवं 19.19 सेकण्ड्स का नया रिकॉर्ड बनाकर, विश्व को चौंका दिया।

दुनिया के सबसे तेज धावक के बचपन की कहानी, उसी की माँ की जुबानी- यह कहानी उस व्यक्ति की है, जो फर्श से अर्श तक पहुँचा है। कहानी उस व्यक्ति की, जो बचपन में खेलता था क्रिकेट, लेकिन आज धूम मचा रहा है एथलेटिक्स में और बन गया है दुनिया का सबसे तेज दौड़ने वाला। आप उसे उसैन बोल्ट (Usain Bolt) के नाम से जानते हैं, लेकिन मेरे लिए वह मेरा प्रिय बेटा ही है। मेरे पति वेलेस्ले गाँव में छोटी-सी दुकान चलाते हैं, इसलिए बचपन में उसैन को स्पोट्र्स शूज नहीं दिला पाए थे। स्कूल प्रबन्धन ने उसे ये जूते दिलाए, जिससे उसकी ट्रेनिंग ने रफ्तार पकड़ी। उसैन का जन्म जमैका के छोटे से गाँव ट्रेलॉनी पेरिश (शेरवुड कन्टेंट) में हुआ, जहाँ स्ट्रीट लाइट्स नहीं थी और पीने का पानी भी नहीं के बराबर था। जहाँ बजुर्ग आज भी गधे पर बैठकर इधर-उधर जाते हैं और लोगों को पीने के पानी के लिए सार्वजनिक नल के सामने घण्टों लाइन लगानी पड़ती है।

उसैन बचपन में हाइपर एक्टिव था। वो जब तीन सप्ताह का था, तो मैं उसे बिस्तर पर लिटाकर कमरे से बाहर चली गई। जब मैं कमरे में आई, तो देखा वो बिस्तर से गिर गया था, लेकिन उस पर चढ़ने की कोशिश में जुटा हुआ था। उसी समय मुझे लग गया था कि यह साधारण बच्चा नहीं है। उसका जन्म तय समय से डेढ़ सप्ताह बाद हुआ था। मुझे लगता है। उसकी रफ्तार सिर्फ उसी समय धीमी रही होगी। मेरे पिता ने सबसे पहले यह नोट किया कि इस बच्चे में कुछ खास बात है। उसके बाद से मैंने उसैन के खान-पान पर ध्यान देना शुरू किया। हमने उसैन का एडमिशन विलियम निब स्कूल में कराया था। वहाँ की प्रिन्सिपल लोन थोप ने कुछ दिन बाद हमें बताया कि हमारा बेटा खेलों में बहुत अच्छा है, इसलिए उसकी ट्रेनिंग का ध्यान भी स्कूल ही रखेगा। बीजिंग में जब उसैन चैम्पियन बना, तो थोपें की खुशी देखने लायक थी। बीजिंग ओलम्पिक में रिकॉर्ड बनने के बाद, उस सफलता के बाद गाँव पर खूब पैसा बरसा। – माँ (जेनिफर बोल्ट)

02/12/2020

गोल्फ कैडी: Real Life Inspirational Stories in Hindi
बंगलुरु के गोल्फ क्लब में कैडी (अर्थात् खिलाड़ियों के पीछे बैग उठाकर चलने वाले लड़के) का कार्य करने वाले, चिन्ना स्वामी मनियप्पा ने 11 अक्टूबर, 2009 को 12.5 लाख डॉलर की हीरो होण्डा इण्डियन ओपन चैम्पियनशिप जीतकर सभी को अचम्भे में डाल दिया। जब डीएलएफ गुडगाँव गोल्फ क्लब के मैदान पर चिन्ना स्वामी ने दक्षिण कोरिया के प्रतिष्ठित खिलाड़ी ली सुंग को हराया, तो लोग विश्वास न कर सके।

कर्नाटक के चिन्ना स्वामी मनिअप्पा ने बिना किसी कोच के स्वयं की मेहनत एवं लगन के बल पर यह प्रतियोगिता जीतकर यह साबित कर दिया कि लगन निष्ठा एवं आत्मविश्वास से कोई भी लक्ष्य हासिल करना सम्भव है।

चिन्ना स्वामी आज तक कर्नाटक गोल्फ क्लब के सदस्य नहीं हैं। चिन्ना स्वामी के माता-पिता कर्नाटक के उसी गोल्फ मैदान पर दैनिक मजदूर थे, जहाँ आज उनका बेटा गोल्फ की प्रैक्टिस करता है।

चिन्ना स्वामी ने गोल्फ की बारीकियाँ कैडी का कार्य करते-करते सीखीं एवं प्रोफेशनल गोल्फर बने। हमें गर्व है ऐसे भारतीय पर। चिन्ना स्वामी आज हर उस युवक के लिए प्रेरणास्रोत हैं, जो आर्थिक मजबरी को अपनी सफलता के मार्ग की रुकावट समझते हैं।

डॉ.ग्लेन कनिंघम: दृढ़ संकल्प-शक्ति के महानायकएक बार एक छोटा-सा (8 वर्ष का) बच्चा स्कूल में आग से बुरी तरह जल गया उसकी टा...
02/12/2020

डॉ.ग्लेन कनिंघम: दृढ़ संकल्प-शक्ति के महानायक
एक बार एक छोटा-सा (8 वर्ष का) बच्चा स्कूल में आग से बुरी तरह जल गया उसकी टाँगें बहुत बुरी तरह से जल गईं थीं। डॉक्टरों ने कहा कि वह कभी चल नहीं पाएगा। उसके पैरों का सारा माँस जल चुका था। अस्पताल से जब वह घर आया, तो उसकी माँ उसके पैरों की रोजाना मालिश करती और उसे हील चेयर पर घुमाने पास के मैदान में ले जाती। उस बच्चे में बड़ा दृढ़ विश्वास था, उसकी संकल्पशक्ति काबिले तारीफ़ थी। उसे विश्वास था कि चाहे कुछ भी हो, वह चलेगा।

एक दिन जब उसकी माँ उसे ह्वील चेयर पर बैठाकर कहीं चली गई, तो उसने स्वयं को उस चेयर पर से गिरा लिया एवं स्वयं को घसीटना शुरू कर दिया। वह रोजाना ही ऐसा करता रहा और धीरे-धीरे उसके पैरों में कुछ जान आने लगी। वह खड़ा होने लगा, फिर बहुत धीरे-धीरे चलने लगा। फिर सामान्य तरह से चलने लगा। फिर वह दौड़ने लगा।

एक दिन वह अमेरिका का एक मील दौड़ने वाला सबसे तेज धावक बन गया। उसने 1500 मी की दौड़ में विश्व रिकॉर्ड बनाया। वह कोई और नहीं डॉ. ग्लेन कनिंघम थे। कनिंघम की संकल्प-शक्ति को बार-बार नमन है।

Plz watch it...
18/01/2018

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