New Testament Church

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New Testament Church Being built with living stones, a spiritual house for the Lord. We are a house church that seeks to be and do what the Lord has intended.

18/02/2026

माझी आशा येशूच्या रक्तावर आणि नीतिमत्तेवर आधारित आहे.

18/09/2025
28/08/2025

ईश्वरीय संस्कृति के शाश्वत सिद्धांत
ईश्वरीय संस्कृति का मूल उन शाश्वत, दैवीय सिद्धांतों में है जो अपरिवर्तनीय रहते हैं। भारतीय दर्शन के आत्मा के सिद्धांत में शाश्वत और अपरिवर्तनीय सार की अवधारणा समाहित है ।

भगवद् गीता भी धर्म को शाश्वत धर्म के रूप में पुष्टि करती है। यहाँ तक कि जब मानव समाज अपने मार्ग से भटक जाता है, तब भी धर्मसंस्थापनार्थाय के लिए ईश्वर का अवतरण होता है, जिससे यह सिद्ध होता है कि ये सिद्धांत अपनी प्रकृति में अपरिवर्तनीय हैं । अन्य शोध सामग्री भी ईश्वर को समस्त सृष्टि का आधार है, शाश्वत है, सनातन सत्ता है के रूप में वर्णित करके इस अवधारणा को दोहराती है ।

28/08/2025

किंगडम का सही अर्थ एक राजनीतिक राज्य नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक क्षेत्र है। परमेश्वर का राज्य (The Kingdom of God) को परमेश्वर का सर्वोच्च और सम्प्रभु शासन और प्रभुता के रूप में परिभाषित किया गया है । यह परिभाषा एक भौगोलिक स्थान के बजाय शासन के एक आध्यात्मिक क्षेत्र को पूरी तरह से दर्शाती है।

इस आधार पर, किंगडम कल्चर के लिए सबसे उपयुक्त हिंदी समकक्ष ईश्वरीय संस्कृति है। ईश्वरीय शब्द एक उपयुक्त विशेषण है जो संस्कृति के दैवीय उद्गम को दर्शाता है और राज्य के राजनीतिक भार से मुक्त है। एक वैकल्पिक विकल्प परमेश्वर की व्यवस्था भी है, जहाँ व्यवस्था इस संदर्भ में कल्चर के लिए एक सटीक अनुवाद है, क्योंकि यह दैवीय सिद्धांतों द्वारा शासित एक व्यवस्थित जीवन शैली का संकेत देता है।

28/08/2025

मानव-केंद्रित संस्कृति (मानवीय संस्कृति) एक गतिशील, विकसित होती हुई रचना है। यह कोई स्थिर इकाई नहीं है, बल्कि एक शैक्षिक प्रक्रिया है जिसे मानव प्रवृत्तियाँ और व्यवहार आकार देते हैं। मानवीय संस्कृति का मूल उसके अनुकूलन और परिवर्तन में निहित है, जो उसके मानव-केंद्रित उद्गम का एक सीधा परिणाम है । मानवीय संस्कृति परिवर्तन के अधीन (subject to change) है, जो उसके सामाजिक शिक्षा पर आधारित होने का एक तार्किक परिणाम है। चूँकि यह मानव द्वारा निर्मित है और मानव की प्रवृत्तियों पर आधारित है, इसलिए इसे स्वाभाविक रूप से अस्थिर और परिवर्तनशील होना ही है।

28/08/2025

मानवीय संस्कृति एक सामाजिक रचना है जो अपनी उत्पत्ति और अंतर्निहित परिवर्तनशीलता से परिभाषित होती है। यह अवधारणा इस मूलभूत आधार पर टिकी है कि मानव एक सामाजिक प्राणी है और समाज स्वयं एक मानवीय संस्था (human institution) है, जिसका निर्माण व्यक्ति अपने हितों की पूर्ति के लिए करता है । इसलिए, मानवीय संस्कृति सामाजिक शिक्षा का सीधा प्रतिफल है।
यह अवधारणा शिक्षा के समाजशास्त्र के माध्यम से और अधिक स्पष्ट होती है। यह अनुशासन शैक्षिक प्रक्रिया का उपयोग करके सामाजिक शक्तियों को समझने और नियंत्रित करने का प्रयास करता है । इस प्रक्रिया के माध्यम से, व्यक्ति का व्यक्तित्व विकसित होता है और वह सामाजिक जीवन के लिए तैयार होता है, जिससे यह सिद्ध होता है कि संस्कृति मानव निर्मित है और सामाजिक व्यवहार पर आधारित है।

28/08/2025

"ईश्वरीय संस्कृति" और "मानवीय संस्कृति" दोनों ही सामूहिक जीवन शैली का वर्णन करती हैं, किंतु वे मौलिक रूप से भिन्न स्रोतों से उत्पन्न होती हैं और विपरीत सिद्धांतों पर कार्य करती हैं। जहाँ "मानवीय संस्कृति" सामाजिक शिक्षा का प्रतिफल है और परिवर्तन के अधीन है, वहीं "ईश्वरीय संस्कृति" उन शाश्वत, दैवीय सिद्धांतों में निहित है जो अपरिवर्तनीय रहते हैं।

26/07/2025

शास्त्र इन उद्देश्यों के लिए दिए गए हैं: सत्य की शिक्षा देना, पाप का बोध कराना, गलतियों को सुधारना और सही जीवन जीने का प्रशिक्षण देना। आप कह रहे हैं कि बाइबल पढ़ने से किसी का धर्म नहीं बदल जाता। जब कोई मूर्तिपूजक मूर्तियाँ न बनाने और न ही उन्हें प्रणाम करने का आदेश पढ़ता है और ऐसा करना बंद कर देता है, तो क्या यह धर्म परिवर्तन नहीं है? क्या धर्म एक विश्वास नहीं है? अगर यह सच है, तो जब कोई व्यक्ति अपना विश्वास बदलता है, तो क्या उसका धर्म नहीं बदल जाता?

04/07/2025

हर इंसान के अंदर की बुराई समाज में फैलती है और फिर पूरी दुनिया में फैलती है। क्या आप बुराई की ओर बढ़ रहे हैं या अच्छाई की ओर?

28/06/2025

There are evil things and there are good things. First let's learn about evil.

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